शुक्रवार, 10 मई 2013

कर्नाटक का आनंद

कुछ आनंद के क्षण ऐसे होते हैं जिनके पीछे विषाद का सागर लहरा रहा होता है .मूर्ख लोग इसे देख नहीं पाते .कर्नाटक का आनंद कांग्रेस के केन्द्रीय शासन का समर्थन नहीं है .केंद्र सरकार तो आकंठ भ्रष्टाचार और स्कैम में डूबी हुई है .कभी सी डब्लू जी ,कभी टू जी ,कभी जीजा जी और कभी मामा जी ,कभी कोलगेट कभी रेल गेट ....कोई अंत नहीं इस धारावाहिक सिलसिले का .

जीवन रक्षा के लिए कई मर्तबा लोग हलाहल पी जाते हैं .जीने के लिए आत्मह्त्या तक कर लेता है आदमी .कर्नाटक में वही हुआ है .

चैनलों पर चलने वाला नाटक आप देखिये .आने वाले कल की तस्वीर साफ़ हो जायेगी  .सोनिया जी को पाक साफ़ प्रोजेक्ट किया जा रहा है .बतलाया जा रहा है वह तो दोनों दगैल मंत्रियों अश्वनी कुमार और पवन बंसल के इस्तीफे लेना चाहतीं हैं .

मनमोहन सिंह नहीं मान रहें हैं .हो सकता है पवन बंसल का इस्तीफा ले भी लिया जाए .लेकिन क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार ने तो प्रधान मंत्री का बचाव करने का काम किया है .मनमोहन कह रहें हैं और ठीक कह रहे हैं तुम इस्तीफा मत दो .तुम गए तो ये आगकोयले की  मुझ तक आयेगी .

मनमोहन सिंह यह नहीं समझ पा रहें हैं वह मधु मख्खी के छत्ते में फंस गए हैं .वह तो वहां बैठे बैठे शहद चाट रहे हैं .कांग्रेसी मख्खियाँ उन्हें अब चारों तरफ से काट रहीं हैं .लेकिन मख्खियों का दंश उन्हें पता नहीं चल पा रहा है यह उन्हें छात्ते से
बाहर फैंकने की फाइनल तैयारी है .

पंजाब से कोसों मील दूर वह असम जा रहें हैं राज्य सभा का टिकट मांगने .वहां का प्रबंध उन्हें कह रहा है गो गो .

गोगोई शरणं गच्छामि .जिनको परमात्मा ने गूंगा बनाया है जो बोल नहीं सकते वह मनमोहन से बेहतर हैं .वह सोनिया की चैनलिया छवि मार्जन के निहितार्थ बूझ नहीं पा रहे हैं .यह मंदबुद्धि की ताज पोशी की तैयारी है .

आजकल में ही नै दिल्ली में कुछ होगा .२ ० १ ४ नवम्बर २ ० १ ३ में ही हो जाएगा .देख लेना जी .

ॐ शान्ति .

कर्नाटक का आनंद



6 टिप्‍पणियां:

Vikesh Badola ने कहा…

वाकई जो गूंग बहरे हैं, मनमोहन सिंह से बेहतर हैं। घोटाले खुल रहे हैं यह कोई नै बात नहीं है। इनके होने की नींव तो नेहरु ने सैंतालीस में ही ठोक दी थी। अब तो इन्‍हें व्‍यवस्‍थागत बनाया जा रहा है। लोगों को पिलाया जा रहा है कि यह इकोनोमी है। ऐसे ही देश चलेगा। अपनी जड़ें कुरेद कर आधुनिकता का फंुफकार मारता झण्‍डा थामे रहो। आगे बढ़ते रहो। घोटालों के देश में स्‍वागत है सब का। कर्नाटक के जींस टी-शर्टधारियों को क्‍या कहेंगे। जितवा गए कांग्रेस को कलिकाल का विध्‍वसं नर्तन करनवाने के लिए। वाह मेरे देश। कितना कांग्रेसी हो कर चल रहा है तू।

Aziz Jaunpuri ने कहा…

सर जी ,अक अंतहीन सिलसिला ,
सारी हदे टूट गईं ,लगता है इन सब कुछ
भी अनर्गल नहीं है,शर्म बिलकुल भी नहीं
(बिना सियाही के कलम से लिखल जिंदगी )

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सही कहा आपने, मक्खी शहद के छत्ते में बैठी क्या ब्लकि कहना चाहिये कि फ़ंसी हुई है, आखिर कब तक चाटेगी? बुरी गत है पर राजनेताओं की बेशरमी है कि इन्हें कोई फ़र्क भी नही पडता.

रामराम.

कालीपद प्रसाद ने कहा…

सटीक प्रस्तुति .!

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arvind mishra ने कहा…

मुझे लगा वीरुभाई कर्नाटक का आनंद लेने गए हैं

Rajendra Kumar ने कहा…

ये सब राजनेताओं की बेशरमी है कि इन्हें कोई फ़र्क भी नही पडता.घोटाले खुल रहे हैं यह कोई नयी बात नहीं है।