रविवार, 19 मई 2013

Art of Positive Thinking

आत्मा  अपने को राजा समझे .मन उसका निकटतम वफादार हो ,बुद्धि सेना पति (सलाहकार ),और संस्कार

सैनिक बन पीछे पीछे चल अनुगामी बनें .तू भले एक दिन के लिए जी ,शहंशाह बनके जी जिसका मन बुद्धि

संस्कार पर पूर्ण नियंत्रण हो .

जब मन पे कंटोल नहीं रहता ,वह मंगता (पुजारी )बन जाता है राजत्व छोड़ के .तू देवता बन पुजारी मत बन

पूज्य बन .अपने संस्कारों से .सकारात्मक सोच तेरे पीछे पीछे आयेगा .

मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत ,

मन जीते जगजीत .


मन बुद्धि संस्कार पे नियंत्रण होगा कैसे ?

उत्तर है :ज्ञान से .ज्ञान माने मैं कौन हूँ ,मेरा बाप कौन है ,क्या मैं शरीर हूँ 

.स्त्री -पुरुष 

 शरीर होता है आत्मा  नहीं .आत्मा तो देह से न्यारी है .परमात्मा के पास 

आत्मा के लिए एंटीवायरस है .

अपने को ज्योति (लाईट )समझ जब हम परमज्योति की याद में बैठते हैं 

.उठते बैठते सोते जागते याद की यात्रा करते हैं सभी कर्म साक्षी भाव से 

ट्रस्टी बन  करतें हैं तब हम कर्म  योगी बन जाते हैं .

मन का काम ही है सोचना .उसे रोक नहीं सकते .जैसे पलक आपसे आप 

झपकती रहती है ,दिल लुब-डुब करता रहता है वैसे ही मन निरंतर सोचता 

रहता है .आप बुद्धि बल से उसकी दिशा बदल सकते हैं .

दुःख मन की नकारात्मक सोच से उपजता है .सकारात्मक सोच से सुख 

पैदा होता है .

बुद्धि का काम है सही वक्त पर सही फैसला लेना .यही जीवन में सफलता 


और सुख की कुंजी है .

जब अटक जाते हैं पुरानी बात में तो दुःख मिलता है .हमारे जमाने में 

ग्रामोफोन होते थे तश्तरी नुमा जिनपे एक सुईं  घूमती थी .कभी कभार वह 

ट्रेक में फंस जाती  थी एक ही लाइन  को बार बार दोहराती थी जैसे हम 

बीती 

बात में अटक जाते हैं वैसे ही .

पुराना संस्कार बदलेगा तो सुख होगा .पुराने संस्कारों पे नियंत्रण से नया 

संस्कार बनेगा .यहाँ हम सृष्टि रुपी रंग मंच पे नया संस्कार बनाने आयें हैं

 .ये बना बनाया एक दम से परफेक्ट ड्रामा है .यहाँ जो पहले हुआ था वह भी 

अच्छा था .जो अब हो रहा है वह भी अच्छा है जो आगे होगा वह भी अच्छा 

ही होगा .यही गीता का सार भी है .

आधुनिक मानव ,हम सभी ,इच्छाओं के मकड़ जाल में फंसे हुए हैं 

.इसलिए 

हमारी आत्मा रुपी बेटरी डिसचार्ज हो चुकी है .इसीलिए गलत नकारात्मक 

 विचार मन को हमें घेरे रहतें हैं .बुद्धि गलत निर्णय ले लेती है .

सकारात्मक सोच आत्मा को इच्छाओं के भंवर से बाहर ले आती है .आत्मा 

अपने मूल स्वभाव संस्कार को प्राप्त करने लगती है .

Life is looking internally ,forwarding (marching)externally .

बेशक आगे बढ़ने  की इच्छा भी बहुत ज़रूरी है लेकिन याद रहे जब हम 

आगे बढ़ते हैं एक कदम पीछे पड़ता है दूसरा आगे .व्यतीत की गलती से 

सीखना है पिछ्ला कदम .सीख कर ही हम भूल सुधार कर  आगे बढ़ सकते 

हैं .अटक गये 

तो अटक गये .

आंतरिक पहलू भी बहुत ज़रूरी है .जीवन की दो टांगें हैं भौतिक और 

आध्यात्मिक पहलू  .जीवन का आध्यात्मिक पक्ष पीछे न छूटे .

नकारात्मक सोच की वजहें 

(१)भूत काल में जीना बीती घटनाओं का चिंतन करना :

ये हुआ नहीं होना चाहिए था।इसी से पैदा होती है चिंता .

(२) भविष्य की चिंता में पिसते रहना :

मेरा कल कैसा होगा .एक धनवान था .एक ज्योतिषी  के 

पास  गया .ज्योतिष ने बतलाया आपके पास इतना धन है आपकी बारह 

पुश्तें मौज करेंगी .धनवान चिंता में पड़ गया .सोचने लगा मेरी तेरहवीं 

पुस्त (पीढ़ी )का क्या होगा .

(३ )जब हम वर्तमान में जीते हैं जीवन की कोई भी 

परिश्तिथि हमें पीस नहीं सकती :

वरना -

चलती चाकी देख के दिया कबीरा रोय ,

दो पाटन के बीच में बाकी बचा न कोय .

सकारात्मक चिन्तन सकारात्मक वाणी :

आज की स्थिति ठीक इसके उलट है .सर्वशक्तिमान की 

उत्तर जीविता

 Survival of the fittest  बोले तो जो शक्ति शाली है उसे 

ही जीने का हक है .आज का सिद्धांत है -

शेर ही जंगल का राजा है .दुनिया का दरोगा साहब 


अमरीका है .

दूसरे  को अपने अनुसार जीने के लिए बाधित करना ही 

नकारात्मक सोच की जड़ है .धौंसा के दिखाइये उत्तरी 

कोरिया और ईरान को एटमी मुद्दे पे .

किसी दिन कोई पागल एटमी मिसायल का बटन भी 

दबा देगा .फिर बन जाना दुनिया का राजा .

मैं सही हूँ दूसरा गलत है यही है नकारात्मक सोच की 

उर्वरा भूमि .

बच्चा आपका ठुमक ठुमक चलते गिर जाता है या फिर 

ऊधम बाज़ी में आप उसे चुप कराने के लिए धरती को 

धप करते हैं .मारते हैं धौल ज़मीन पे जैसे बच्चा ज़मीन 

की गलती से गिरा हो .बस बच्चे की बुद्धि में बैठ जाता है 

मैं सही दूसरा गलत .दूसरे मुझे गिरा रहें हैं अपने गिरने 

की वजह मैं खुद नहीं हूँ .यहीं  से वह दूसरों में दोष 

देखना 

 सीख जाता है .अपनी कमजोरियों पे तवज्जो न देकर .

बुद्धि का विकास एकांत में और चरित्र का संगठन में 

होता है .परिवार में रहते हुए ही एकांत चिंतन करना है 

.एकांत में चिन्तन करने से आत्मा रुपी मोबाइल चार्ज 

हो जाता है .सिर्फ परमात्मा रुपी चार्जर के ध्यान में 

बैठना है .

हम संसार में  रहते हैं .संसार हमारे अन्दर नहीं होना 

चाहिए .एक दो से सहयोग लेके हम चलते रहें .जो शक्ति (टेलेंट )योग्यता हमारे पास है उससे दूसरे की मदद करें .जो कमजोरी हमारे अंदर है उसे दूर करने के लिए दूसरे  का निस्संकोच सहयोग लें .यही है कामयाब जीवन की कुंजी .सकारात्मक जीवन की उर्वरा शक्ति .

ॐ शान्ति 


Art of Positive Thinking (II)


मन में आते जाते विचार प्रवाह का आवेग विचारों के व्यर्थ ,सकारात्मक एवं साधारण होने का पैमाना होता है .

(१)व्यर्थ विचार (Waste thoughts )आवेग पूर्ण तेज़ रफ़्तार लिए होतें हैं

(२) सकारात्मक विचार (Positive thoughts )नियमित और क्रमश :होते हैं .Steady बोले तो अपरिवर्तित (स्थिर )और तदेव होते हैं .

(३ )साधारण विचार (Ordinary thoughts )आवेगहीन कम रफ़्तार होते हैं .

जीवन में कोई भी घटना न अच्छी होती है न बुरी .घटना के प्रति हमारा नजरिया उसे अच्छा बुरा बनाता है .जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि

एक आदमी को पानी से आधा भरा ग्लास -आधा खाली दूसरे को आधा भरा दिखलाई देता है .जीवन में हमारे

पास क्या है वही देखें जो है।वह न देखें जो नहीं है .

पाँचों तो हमारी ऊँगलियाँ भी बराबर नहीं हैं .

पहले सोचो फिर तौलो फिर बोलो 

चुप रहना सबसे अच्छा रहता है .इसीलिए कहा गया -Silence is golden.

speech is silver .


मछली मुंह खोलने पर ही कांटे में फंसती है .

एक पति पत्नी में बहस हो रही थी किसी छोटी सी बात को लेकर .पत्नी उग्र होकर कहने लगीं 'चुप क्यों हो ज़वाब दो '.पति बेचारा चुप रहा .पत्नी झल्ला गईं .बोलो ज़वाब क्यों नहीं देते .पति अभी भी चुप रहे .पत्नी ने मोबाइल फैंक के मारा 

पति ने मोबाइल लपक लिया .कहा- इन कमिंग इज फ्री .

पत्नी और भी बिफर गईं .

जुबां में हड्डी नहीं होती है लेकिन कड़वी जुबां कईयों की हड्डी तोड़ देती है .

कोई मुसीबत आये तूफ़ान आये ,उसे तोहफा समझो .जीवन में बहुत कुछ 

प्रतिकूल आता रहता है निकल जाता है ठहरता कुछ भी नहीं है .आंधी की 

तरह आता है तूफ़ान की तरह निकल जाता है ब -शर्ते हम दृष्टा भाव से जो 

घट रहा है , घटा है उसे देखें ।

Wind takes the kite high and high .

मन और विचार से ऊंचा सोचो .

Don't remember a small fault ,remember a small courtesy .

दूसरों में दोष ही दोष देखना छोडो .मत भूलो दोष देखते वक्त ,ऊंगली उठाते वक्त तीन ऊँगलिया हमारी और उठ जाती हैं .बूम्रांग करता है दोषारोपण .

ज़िन्दगी भर ग़ालिब एक ही गजल पढ़ते रहे ,

चेहरे पे धूल  थी ,आईना  साफ़ करते रहे . 

मजा तब है मानसिक स्थिति हमारी हर स्थिति में समान हो .

किसी ने कहा है -

फूल बनकर मुस्कुराना ज़िन्दगी है ,

मुस्कुराकर गम भुलाना ज़िन्दगी है ,

जीत कर ही खुश हुए तो क्या हुए ,

हारकर भी मुस्कुराना ,ज़िन्दगी है .

ज्ञान और योग के पंख लगाके उड़ते जाओ .एक सेकिंड में पहुँच जाओ परम 

धाम . 

तनाव के क्षणों में सिगरेट शराब का सहारा लेना आखिर में अवसाद को ही 

ओर  ले जाता है .

कोई बुरा बोले उसे ग्रहण न करो .एक साधू के पास तीन तरह के बन्दर नुमा खिलौने थे .  

(१ )एक प्रकार के बन्दर के एक कान में तार डालने पर वह मुंह से बाहर आजाता था .

(२) दूसरे  के दूसरे  कान से बाहर आता था .तथा 

( ३ )तीसरे के पेट में ही तार रह जाता था .

पहले किस्म के लोग ईंट का ज़वाब पत्थर से देने में तू सेर तो मैं सवा सेर में यकीन रखते हैं .

दूसरे किस्म के एक से सुन दूसरे कान से निकाल ज़रूर देते हैं लेकिन बात उनके दिमाग तक भी पहुँचती ज़रूर है अवचेतन में रह जाती है उनके .

तीसरे किस्म के बात को पचा जाते हैं .प्रतिक्रिया (अनुक्रिया )करते ही नहीं हैं .



ॐ शान्ति .





11 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आधुनिक प्रतीकों से सजाया प्राच्य ज्ञान।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आत्म ज्ञान की बातों से सज्जित है आज आपका ब्लॉग ... बहु-आयामी पोस्ट है आज तो ..
राम राम जी ...

Rajendra Kumar ने कहा…

बहु-उपयोगी जानकारी देने के लिए आभार.

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत गहरी और सार्थक बातें लिखी हैं ..!!इन्हें माने तो सहज और सरल है जीवन ...
आभार .

madhu singh ने कहा…

sir ji, aatm gyan avm swyam ke chintan vodh se saji-dhaji rachna jo jivan ke marg ko nirantar prakashit karne ke behatareen guno se acchadit hai

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

हमेशा की तरह जीने की सार्थक कला सिखाती पोस्ट, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (20-05-2013) के 'सरिता की गुज़ारिश':चर्चा मंच 1250 पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
सूचनार्थ |

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

BAHUT HI GAHRI BAATEN SAKARATMAK SOCH
KE LIYE JARURI HAI KI HAM ATIT MEN JEENA CHHOD DEN ......

RAHUL- DIL SE........ ने कहा…

आज आपका ब्लॉग संपूर्ण ज्ञान से सुसज्जित है... पहले भी था.....पर आज कुछ ज्यादा... कृपया एक लेटर साइज में लिखें तो ज्यादा बेहतर होगा....

Vikesh Badola ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Vikesh Badola ने कहा…

दुनिया का दरोगा साहब अमरीका है. दूसरे को अपने अनुसार जीने के लिए बाधित करना ही
नकारात्मक सोच की जड़ है. धौंसा के दिखाइये उत्तरी कोरिया और ईरान को एटमी मुद्दे पे.........विसंगतियों के इस एक प्रमुख कारण को आधार बना कर तैयार आपका, गीता का ज्ञान अनुकरणीय है, अवश्‍य होना चाहिए। तब ही वर्तमान को सुखी बनाया जा सकता है। राहुल दिल से जी की बात पर भी ध्‍यान करिएगा कि एक लैटर साइज में लिखें। अन्‍यथा आपके महत्‍वपूर्ण आलेख बिखरे-बिखरे से प्रतीत होते हैं विभिन्‍न पंक्तियों में। प्रत्‍युत्‍तरों हेतु धन्‍यवाद।