बुधवार, 28 मार्च 2012

कैंसर रोग निदान की नै इमेजिंग टेकनीक.

कैंसर रोग निदान की नै इमेजिंग टेकनीक.
New imaging teck that can help detect cancer early /TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,BANGALORE,MARCH 28,2012,P17.
  अभिनव  प्रोद्योगिकी  की परवाज़ का भी ज़वाब नहीं साइंसदानों ने एक ऐसी प्राविधि ईजाद की है , इमेजिंग प्रोद्योगिकी विकसित कर ली है जो कैंसर रोग समूह के कैंसरों की शिनाख्त उस चरण में भी कर लेगी जो दिमाग में प्रसार तो पा चुके हैं लेकिन कैंसर गांठें अभी आकार में छोटी ही बनी हुईं  हैं .
चूहों पर संपन्न किया गया है यह अध्ययन जिसके तहत एक ऐसी अभिनव डाई(चिकित्सीय अभिरंजक) की पड़ताल की गई है जो एम् आर आई  स्केन्स में मुखरित होती है .ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की विज्ञप्ति के अनुसार यह डाई या कंट्रास्ट एजेंट एक ख़ास अणु(VCAM-1) की निशान -देही(शिनाख्त ,पहचान ) कर उससे चस्पां ही हो जाती है .
रिसर्चरों के मुताबिक़ यही वह अणु है जो उन ब्लड वेसिल्स (रक्त वाहिकाओं ) से सम्बद्ध रहता है ताल्लुक रखता है जिनका सम्बन्ध कैंसर से जोड़ा जा चुका है तथा यह अणु भारी तादाद में वहां मौजूद रहता है .
कैंसर को शरीर के अन्य हिस्सों से उठाकर(उड़ाकर ,स्थानांतरित कर ) दिमाग तक यही अणु अपने साथ ले जाता है .
दिमाग तक  शरीर के अन्य हिस्सों तक कैंसर इसी अणु के अंतरण की वजह से ही फैलता है .
एम् आर आई स्केन  दिमाग में इस अभिनव डाई  का रेखांकन करता है .खुलकर दिखलाता है कैंसर ग्रस्त हिस्सों को .इसी की  बदौलत कैंसर की बहुत छोटी छोटी गठाने (स्माल ट्यूमर्स)  भी पकड़ में आ जातीं हैं .
यही वजह है  की  स्माल ट्यूमर्स का इलाज़ होल ब्रेन रेडियो -थिरेपी से आरम्भिक चरण में शुरू हो पाता है अब .सर्जरी से भी इसी चरण में अब इलाज़ किया जा सकेगा .
दूसरी तरफ अभिनव रसायन चिकित्सा (न्युअर  कीमोथिरेपी ) विकसित की जा रहीं हैं .लेकिन फिल वक्त लार्जर ब्रेन ट्यूमर की शिनाख्त ही परम्परा गत इमेजिंग तरीकों से हो पा रही है .जबकि इन्हीं का इलाज़ करना दुष्कर सिद्ध होता है .इन अर्थों में यह अन्वेषण एक बड़ी उपलब्धि कही जायेगी .
नै रोग्निदानिक टेक्नीक से कितनों को ही अकाल काल कवलित होने से बचाया जा सकेगा .
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !
 
एंटार्कटिका के गिर्द दक्षिणी सागर में आश्चर्यजनक तौर जो गहराई पर बेहद ठंडा पानी बहता है गत चंद दशकों में उसके गायब  होने  की रफ़्तार कुछ ज्यादा ही रही है .इस जल राशि  को 'एंटार्कटिक बोटम वाटर 'कहा जाता है .इसके यूं बेतहाशा रफ़्तार विलुप्त होते चले जाने  से साइंसदान हतप्रभ हैं .एंटार्कटिका के गिर्द खुछ ख़ास क्षेत्रों में ही यह राशि बनती है .दरअसल सतह के ऊपर बहती  ठंडी    हवा इस जल का शीतलीकरण करती रहती है .जब यह हिम राशी में तब्दील हो जाता है इसकी नमकीनियत   बढ़ जाती है .यह सतह से नीचे चला आता है भारी होकर .खारा नमकीन जल अपेक्षाकृत भारी होने की वजह से नीचे चला आता रहा है .जब पानी में से हवा ठंडक निकाल देती है तब हिम राशि बनती है तथा आसपास के बिना ज़मे जल के हवाले यह साल्ट       हो जाती है .एक     कुदरती      चक्र      के तहत     यह सिलसिला     चलता   रहता   है अपनी  रफ़्तार .
समुन्दर में गहरे पैठा यह अपेक्षाकृत भारी जल  उत्तर की  तरफ प्रसार करता रहता है ,इस प्रकार दुनिया भर के गहरे समुन्दरों को लबालब    रखता   चलता है और   धीरे   धीरे  अपने   ऊपर की अपेक्षाकृत गुनगुनी  परतों वाली जल राशि से संयुक्त   होता   रहता है .उसमे    रिलमिल  जाता    रहा  है .आहिस्ता आहिस्ता .
गौर   तलब  है दुनिया भर के सागरों  में मौजूद  डीप  ओशन  करेंट्स  अन्दर  अन्दर  प्रवाहमान  गहरी जल धाराएं  आलमी ताप (तापमानों ) और कार्बन  के परिवहन  में एहम  भूमिका  निभाती  आईं  हैं .बत्लादें आपको हमारे समुन्दर कार्बन के सबसे बड़े सिंक हैं .पृथ्वी  की जलवायु  इन्हीं  के हाथों  विनियमित  होती  आई  है .
पूर्व    के अध्ययनों     से विदित   हुआ  था  यह गहरे बहती जल धाराएं    इनमे  मौजूद  विशाल  जल राशि गरमाने  लगी  है ,अपनी नमकीनियत   भी  खोती  रही है . लेकिन  हालिया  अध्ययन  इसके तेज़ी से मात्रात्नक   रूप   से कम  होने की इत्तला  दे   रहा है .भूमंडलीय जलवायु के लिए यह अच्छी खबर नहीं है .
लेबल :सिमट रहा है एंटार्कटिक  बोटम      वाटर  .समुन्दर डीप ओशन करेंट्स ,जलवायु ,कार्बन सिंक .


4 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विषयों को आपके समझाने का तरीक़ा बड़ा निराला है। इस नए शोध से लोगों को भविष्य में काफ़ी लाभ मिलने की संभावना है।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यदि पहले से ही पता चल जाये तो आनन्द ही आनन्द है।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अच्छी जानकारी ...समय रहते सचेत
होना ही चाहिए हमें ....

रविकर ने कहा…

बायोप्सी रिपोर्ट आज आ गई है ।

रिपोर्ट नार्मल है ।

ईश्वर का धन्यवाद ।।