रविवार, 25 मार्च 2012

फिर जकड़ा मुंबई को एक नै किस्म की तपेदिक ने .

फिर जकड़ा मुंबई को एक नै किस्म की तपेदिक ने .
 New form of TB gives docs sleepless nights/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MARCH 24,2012,FRONT  PAGE NEWS ITEM.
15  वर्षीय वीणा की रोगनिदानिक रिपोर्ट निराशा पैदा करती है .हतोत्साहित हैं उसके चिकित्सक .

फेफड़ों के एक्स रे की रिपोर्ट बतलाती है उसके फेफड़ों पे बरपा तपेदिक का बहुत छोटा जीवाणु (ट्यूब -कुलोसिस -बसिलस)केवल दो दवाओं के प्रति संवेदी है (दो दवाओं का नोटिस लेता है )शेष आठ दवाओं के प्रति बे -असर बना रहता है उनका नोटिस ही नहीं लेता .
अब इसे चाहे एक्स्ट्रीमली /एक्स्तेंसिवली /टोटल ड्रग रेज़िस्तेंत ट्यूब -कुलोसिस कहो या कुछ और क्या फर्क पड़ता है .असल सवाल यह है केवल दो दवाओं से इस किशोरी का इलाज़ कैसे किया जाए ?
दवाओं के प्रति पूर्ण प्रति -रोध दर्शा रही है तपेदिक की यह स्ट्रेन.
भले अभी विश्व -स्वास्थ्य संगठन इसे टोटली  ड्रग रेज़िस्तेंत बतलाना जल्द बाज़ी माने (यही कहा है उसने अपनी हालिया जिनेवा बैठक में)लेकिन मुंबई इसकी प्रेत छाया से आजिज़ आ रहा है .विश्व तपेदिक  दिवस पर तपेदिक के माहिर इस बाबत आश्वश्त नहीं है .स्थिति गंभीर है ,चिंताजनक है .
राम राम भाई !  राम राम भाई !  राम राम भाई !
 
मरीजों का दुःख दर्द बद से बदतर बनाया  है तपेदिक की महंगी दवाओं ने.
TB patients' woes  worsen due to expensive drugs/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,MARCH 24 ,2012.P6.
Victim Can Infect 10 Others In A Year:Docs
मुंबई नगरी में एक दम से दवा रोधी तपेदिक की नै किस्म के मामलों में चौतरफा इजाफा हुआ है .सबसे ज्यादा अरक्षित ,सुभेद्य और नाज़ुक साबित हुए घाटकोपर और कुर्ला जैसे वह इलाके जहां प्रतिवर्ग किलोमीटर ज्यादा   लोग रह रहें हैं ,जनसंख्या बहुल इलाके हैं जो .भीड़ भाड़  वाले इलाकों में एक को रोग होने का मतलब है इस एयर बोर्न डिजीज का सांस कफ़ के ज़रिये दस और लोगों तक पहुंचना .

पिछली    रिपोर्ट में हमने  बदले  हुए  नाम  से  जिस  किशोरी  वीणा  का  ज़िक्र  किया  है  वह  घाटकोपर  की  रमाबाई   कोलोनी  में  ही  रहती  है  .इसके  अलावा  भी  यहाँ  गंभीर  रूप  से   दवा रुपी तपेदिक के दो मामले डॉ .अमोल मान्रेकर की पकड़ में रोग निदान के बाद इसी मार्च के महीने में आयें हैं .
इनमें से एक मरीज़ तो सिर्फ एक दवा के प्रति ही संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी )दर्शा रहा है .जबकि तपेदिक का इलाज़ दवाओं के मिश्र ड्रग कोम्बो से किया जाता है .एक साथ एक से ज्यादा दवाएं दी जाती हैं .बकौल डॉ .मान्रेकर -

अब यह एक अकेली दवा जो सेंसिटिविटी दिखला रही है पहले तो बहुत मंहगी है दूसरे इस बात की कोई गारंटी नहीं है कोई निश्चय नहीं है यह असर करे ही अकेले .
ऐसे कैसे एक गरीब मरीज़ से कहा जाए क़ि  तू यह मंहगी दवा खरीद के खा .
बेशक मुंबई नगरी के लिए यह प्रबंध किया गया है ,जो मरीज़ तपेदिक के निजी चिकित्सकों के पास पहुंचेंगे उन्हें भी सरकारी सहायता से सुलभ दवाएं मुहैया करवाई जायेंगी .लेकिन यह प्रबंध अभी ज़मीन पर नहीं उतरा है .
सरकारी प्रबंध है होते होते ही होगा .
लिहाजा डॉ .मान्रेकर ने ऐसे ही निम्न वर्ग के दो मरीजों को सरकारी अस्पताल भेज दिया है .दोनों ही सीवियर ड्रग रेज़िस्तेंत ट्यूब -कुलोसिस की चपेट में हैं .
बेशक इन्हें आदिनांक कोई दूसरी पंक्ति की (सेकिंड लाइन ड्रग )दवा अभी नहीं दी गई है .सरकार  इनकी इससे पहले  दोबारा जांच करना चाहती है . 

जनवरी में हिंदुजा अस्पताल ने ऐसे १२ मरीजों के बारे में बतलाया था जो वहां इलाज़ के लिए पहुंचे थे जो पूर्ण तय : दवा रोधी तपेदिक की चपेट में थे .(टोटली  ड्रग रेज़िस्तेंत बतलाया गया था इन्हें ).बाद इसके दिल्ली से चिकित्सकों और माहिरों की एक टीम मुंबई पहुंची थी इसकी पड़ताल के लिए जिसने इन मामलों को   टोटली ड्रग रेज़िस्तेंत बतलाना जल्द बाज़ी और ऐसी पेशकश को अपरिपक्व होना बतलाया.
अलबत्ता सभी २४ नागर तपेदिक वार्डों को एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक तपेदिक जिले के रूप में मान्य समझा गया . l .इन्हें स्पेशल स्टाफ और ज़रूरी इन्फ्रा -स्ट्रक्चर भी मुहैया करवाया गया .
BMC ने ६८३ ड्रग रेज़िस्तेंत मरीजों की शिनाख्त की है .इनमे से ३४७ मरीजों को विस्तृत जांच के बाद चिकित्सा संघ ने केटेगरी चार में रखा है .आठ अन्यों को केटेगरी पांच में रखा गया है .
यही कहना है डॉ .मिनी खेत्रपालसाहिबा  का .आपको मुंबई का प्रथम तपेदिक नियंत्रक अधिकारी (अफसर) बनाया गया है .
बकौल आपके चंद महीनों में ही कई अस्पतालों में तपेदिक के बेड की संख्या बढ़ा दी गई है .सभी अस्पतालों को दवाएं दे दी गईं हैं ताकि ड्रग रेज़िस्तेंत ट्यूब -कुलोसिस का समुचित इलाज़ हो सके .
सेवरी टी बी अस्पताल में इसके मरीजों के इलाज़ के लिए बेडों की संख्या ४४ से बढाकर ९० कर दी गई है .
दस वार्डों में घर घर जाकर निगरानी का काम भी किया जाएगा कौन दवा खा रहा है कौन नहीं .दवा नियमित खाना एक बड़ा मुद्दा है .लोग थोड़ा आराम आने पर दवा बीच में ही छोड़ देतें हैं .यहीं से दवा रोधी तपेदिक की नींव पड़ती है.
राम राम भाई ! राम राम भाई !  राम राम भाई !
 
गुज़िस्तान सालों में बदलता  रहा है तपेदिक का प्रकार. (मिजाज़ ,स्वरूप ,परस्पर एक दूसरे से भिन्न रोग  की किस्में  ) .
१९९० के दशक के मध्य के बरसों में यानी मिड -९० ईज़ में मल्टीड्रग रेज़ीस्तेंट स्ट्रेन के मामले पकड में आये .(MDR-TB)
२००६ में एक्स्ट्रीमली ड्रग रेज़ीस्तेंट टी बी का प्रगटीकरण हुआ .(XDR-TB).
2008 इटली  में  रोग  के  ऐसे दो मामले सामने आये जिनमें सभी पहली और दूसरी पंक्ति की दवाओं के प्रति प्रति -रोध मिला .
२००९ ईरान में तपेदिक के ऐसे १५ मरीज़ सामने आये जिन पर उपलब्ध सभी टी बी प्रति -रोधी दवाएं बे -असर रहीं .इन्हें एक्स्ट्रीमली ड्रग रेज़िस्तेंत (XXDR -TB )और टोटली   ड्रग  रेज़िस्तेंत  टी बी (TDR-TB )कहा बतलाया   गया  .                     जनवरी २०१२ में भारत में चार मरीजों को पूर्ण दवा प्रति -रोधी तपेदिक का मरीज़ बतलाया गया .जन संचार माध्यमों ने ऐसे ही चार और मामलों का भी इसी समय उल्लेख किया .
मार्च २०१२ में विश्व -स्वास्थ्य संगठन ने चर्चित मामलों को पर्याप्त और पुख्ता  प्रमाणों  के अभाव में इनके TDR-TB होने से अपनी असहमति जतलाई . 
विश्व -स्वास्थ्य संगठन के नामकरण के अनुसार MDR-TB STRAIN उसे माना समझा जाएगा जो प्रथम पंक्ति की दोनों ही मुख्य दवाओं 'ISONIAZID'और RIFAMPICIN के प्रति बे -असर बनी रहे प्रति रोध दिखलाए .
संगठन के अनुसार रोग की XDR-TB,एक्स्तेंसिवली    ड्रग रेज़िस्तेंत  किस्म उसे माना जाएगा जिसमें MDR -TB सुईं  से  दी जाने वाली निम्न में से  किसी एक ( एमिकसिंन .कैनामायसिन ,या फिर कैप्रियोमाय्सिंन )के अलावा भी किसी फ्ल्युओरो -क्विनो -लोन्स के प्रति भी प्रति -रोध दर्शाए .
तीन वजहों से विश्व -स्वास्थ्य संगठन को T DR-TB STARIN प्रयोग पर एतराज है :-
(1)  Drug susceptibility testing (DST) key to defining new levels of drug resistance ,lacks accuracy for several drugs used to treat multidrug -resistant (MDR )and extensively drug -resistant (XDR)-TB.
(2) Insufficient correlation of DST results with clinical response to treatment for several drugs used to treat XDR-TB.
(3)New drugs are undergoing clinical trials and could prove effective against drug resistant strains.
राम राम भाई !   राम राम भाई !  राम राम भाई !
 नुश्खे सेहत के :             भूख बढाता है नित्य प्रति आधा चमच्च अदरक का रस इतने ही शहद के साथ मिलाकर चाटना .
नुश्खे सेहत के :  यदि होंठ फट गए है क्रेक्द लिप्स से आप आजिज़ आ रहें हैं ,दही में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाकर लगाइए .अलावा इसके दही हल्दी का लेप चेहरे पे निखार (नूर )लाएगा ,सन बर्न्स से भी बचाएगा .चेहरे पे भी इसका उबटन स्तेमाल करिए परम्परा बद्ध  नुश्खा है .
राम राम भाई !  राम राम भाई !
चर्चा मंच के लिए विशेष :ज़रा सोचिये भाई साहब :
ज़रा सोचिये :क्यों थुक्कड़ बे -खबर हैं आसन्न खतरे से जबकि मुंबई नगरी तपेदिक रोग की एक बेहद संक्रामक भीष्म किस्म (स्ट्रेन) की चपेट में आती जा रही है जो आपके जन स्थलों पर लापरवाह होकर थूकने ,कफ उलीचने ,छींकने से फैलता है .थूक और कफ की छोटी छोटी   हवा में तैरती बुंदियों के ज़रिए.
पब्लिक प्लेस पर सरे आम थूकने  पर महानगर पालिका ने यूं २०० रुपया जुर्माना आयद किया है .लेकिन लोग फिर भी नजर बचाके कहीं भी थूक  देतें हैं .ज्यादा तर शातिर पकड में नहीं आते .

जनस्थलों  पार्कों ,सड़कों यहाँ तक की नजर बचाके चलती बसों से थूकना एक सामजिक जुर्म है बुराई भी है जो हमारे सौन्दर्य बोध के पर कुतरती है .

थूकना  एक गैर सामाजिक चीज़ है  फिर भी १.१ लाख मुंबई के थुक्कड़ लोगों को जुलाई से दिसंबर २०११ के दरमियान जुर्माना भरना पड़ा है अपनी इस आदत के चलते .क्लीन अप मार्शल्स को कितनो ने हेंकड़ी दिखाते हुए जुर्माना अदा भी नहीं किया है .
सोलिड वेस्ट मेनेजमेंट विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस वर्ग के ७० फीसद जुर्म थूकने से ही ताल्लुक रखते हैं .इस मद में एकत्रित कुल राशि ३.२१ करोड़ में से २.२४ करोड़ थुक्कड़  लोगों से वसूला गया है .  

14 टिप्‍पणियां:

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

पुरानी बीमारियाँ ही नई किस्म में सामने आ रही है...जो गंभीर रूप लिए हुए है!...बहुत बढ़िया और विस्तृत जानकारी दी है आपने!!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

लोग थोड़ा आराम आने पर दवा बीच में ही छोड़ देतें हैं .यहीं से दवा रोधी तपेदिक की नींव पड़ती है. ... सच कहा आपने सर...

प्रचुर प्रचार प्रसार और DOT स्कीम के बावजूद टोटल ड्रग रसिस्टेंट मरीजों की बढ़ती संख्या चौंकाने और चिंतित करने वाली है...
सार्थक विश्लेषण किया है आपने...
सादर.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी गंभीर स्थिति है।

यादें....ashok saluja . ने कहा…

अच्छी और सटीक जानकारी के लिए ....
आभार भाई जी!
राम-राम !

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

सटीक रिपोर्टिंग लग रही है लेकिन सर! अपन तो यही समझे की मामला गंभीर है। गरीबों पर फिर संकट घहरा गया है।

expression ने कहा…

बहुत काम का लेख है सर...
बीमारियों के बारे में पढ़ना अच्छा तो नहीं लगता मगर आँखें मूंदने से मुसीबत टलती भी तो नहीं....

आपका बहुत आभार.

सादर.

रविकर ने कहा…

दमदार प्रस्तुति ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 26-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

मनोज कुमार ने कहा…

गंभीर बीमारी है। आपका आलेख विस्तार से जानकारी प्रदान करता है।

सदा ने कहा…

विस्‍तृत जानकारी लिए हुए ...सटीक लेखन ...आभार ।

कुमार राधारमण ने कहा…

हमारी तो जानकारी यही थी कि टीबी का इलाज़ मुफ्त होता है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तपेदिक की बिमारी वो भी ड्रग का असर नहीं हो सहा जिसपे ... ये तो गंभीर बात है ... बिचारे गरीब लोगों का क्या होगा ......
थूकने वालों पे जुर्माना लगना ही चाहिए ...
राम राम जी ...

veerubhai ने कहा…

DRUGS FOR TDR-TB /EXTENSIVELY DRUD RESISTANT TB ARE STIL TO BE DISPERSED IN WANT OF CONFIRMED DIAGNOSIS.

Arvind Mishra ने कहा…

दवाओं के प्रति पूर्ण प्रति -रोध दर्शा रही है तपेदिक की यह स्ट्रेन-भयावह!