शनिवार, 31 अक्टूबर 2009

२०३० तक उत्तरी ध्रुव नगा (हिम -शून्य )हो जाएगा ?

उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र के माहिरों ने पता लगाया है -इस क्षेत्र से सेम्क्दों बरसों से जमा व्यापक हिम चादर का सफाया करीब करीब हो चुका है ।
तब क्या अब यह मान लियाजाये -इस क्षेत्र के जहाजरानी मार्ग (शिपिंग रूट्स )पर आवाजाही शुरू होने जा रही है ?
८० मीटर तक मोटी यह हिम चादर उस पौराणिक समुंदरी मार्ग को रोके हुई थी जो -अंध महा सागर से प्रशांत महासागर तक जाता है .,और उत्तर -पश्चिम मार्ग (नॉर्थ -वेस्ट पैसेज )के नाम से जिस की गौरव गाथा का गायन हुआ है ।
आर्कटिक सिस्टम्स साइंस ,यूनिवर्सिटी ऑफ़ मनितोबा ,कनाडा के डेविड बार्बर हाल ही में उस अभियान से लौटे हैं जिसे मल्तिलेयर आइस की तलाश थी .इसके एथान पर उनके आइस ब्रेकर को जगह जगह मीलों क्षेत्र में ५० सेंटीमीटर पतली "रोत्तें आइस "से ही दो चार होना पडा ।
गत तीस सालों में बार्बर को यह अप्रत्याशित नज़ारा देखने को नहीं मिला था ।
वह भी हाई -आर्कटिक में ।
बेहिसाब तरीके से हिम चादर का सफाया हो रहा है -तो इसकी साफ़ वजह ग्रीन हाउस गैसों से पैदा विश्व -व्यापी तापन ही है ।
यही आलम रहा था -२०३० तक उत्तरी ध्रुवीय शिखर गंजा हो जाएगा .,ग्रीष्म के आते आते जहाज रानी निगम इसका फायदा उठाने की आस में हैं .इस बरस ही दो समुंदरी जहाज (दोनों जर्मनी के हैं )दक्षिण कोरिया से चलकर रूस के उत्तरी साईं बेरिया तक पहुंचे हैं .वह भी बिना किसी आइस ब्रेकर के ।
सन्दर्भ सामिग्री :-आर्कटिक में हेव आलरेडी रन आउट ऑफ़ मुलती -ईयर आइस कवर (टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,अक्टूबर ३१ ,पृष्ठ २१ )
प्रस्तुति :-वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई )

वेस्ट बेल्ट के संग सेल फोन पहने रहने के खतरे ..(जारी)

(गतांक से आगे ॥)
अपने अध्धययन में शोध छात्रों ने १५० सेल धारकों के मामले में पेल्विस (वस्ति -प्रदेश )के बाहरी घेरे की बोन डेन्सिटी का जायजा लिया .ये तमाम लोग अपनी बेल्ट से सेल फोन बांधे रहते थे ।
इनमे से १२२ लोग राइट साइड में तथा बाकी २८ लेफ्ट साइड में फोन बांधे रहते थे .कुल अवधि रहती थी औसतन ६ घंटा रोज़ ।
अस्थि घनत्व नापने के लिए एक्स -रे -एब्सोर्प -शियों -मीटरी टेक्नीक का स्तेमाल किया गया ।
ओस्टियो-पोरोसिस (जिसमे एक उम्र के बाद अस्थियों से बोन मॉस लोस होने लगता है )तथा अस्थियों के इतर रोगों में भी एक्स -रे -अवशोषण -मिति का ही स्तेमाल अस्थि घनत्व मापन में किया जाता है ।
सन्दर्भ सामिग्री :-वियरिंग यूओर सेल फोन ओं न हिप वीक्न्स पेल्विक बोनस(टाईम्स ऑफ़ इंडिया ,अक्टूबर ३१ .,२००९ ,पृष्ठ २१ )
प्रस्तुति :-वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई )

वेस्ट बेल्ट में सेल फोन पहने रहने का मतलब ....

विज्ञानियों ने आशंका व्यक्त की है -वेस्ट बेल्ट में सेल फोन पहने रहने से वस्ति प्रदेश (पेल्विक रीज़न -लोवर अब्दोमिनल केविटी फोर्म्द बाई दी हौंच एंड अदर बोनस )से अस्थि घनत्व (बोन डेन्सिटी )ह्रास हो सकता है ।
तुर्की के सुलेमान देमिरेल विश्व -विद्यालय के विज्ञानी तोल्गा आते और उनके साथियों ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमे सेल फोन सेवस्ति अस्थि के कमजोर होते जाने के बारे में बतलाया गया है ।
जी एन ऐ के अनुसार प्राथमिक अध्धययन से यही नतीजे निकाले गए हैं जिन्हें अन्तिम या फ़िर निर्णायक नहीं माना जा सकता .बहरहाल विश्व -स्वास्थ्य संगठन के विज्ञानियों ने सेल फोन के इस तरीके से स्तेमाल के प्रति सावधानी बरतने को ज़रूर कहा है ।
इन्हें (सेल फोन्स )को शरीर से अधिकाधिक दूरी पर ही रखना भला ।
दीर्घावधि स्तेमाल के नतीजे अस्थियों को कमजोर बना सकतें हैं ।
सर्जिकल प्रोसीज़र्स खासकर बोन ग्रेफ्ट्स को तो सेल फोन्स असर ग्रस्त मना ही सकतें हैं .

सेहत को नुकसानी के मामले में शराब और सिगरेट्स एलेस्दी से आगे ...

चोरी छिपे बिकने वाली प्रतिबंधित नारकोटिक ड्रग्स ,नशीली दवाओं -गांजा (कैन्न्बिस ),एलेस्दी (एल एस दी )और एक्सटेसी से ज्यादा खतरनाक है सेहत के लिए शराब और सिगरेट की लत ।
इम्पीरिअल कॉलेज लन्दन के डेविड नत ने इसीलिए ब्रितानी सरकार से वैधानिक और गैर -वैधानिक रूप में बिकने वाली दवाओं के पुनर वर्गीकरण की सलाह दी है ताकि सेहत को होने वाली नुकसानी का सही जायजा लिया जा सके -लीगल और इल्लीगल सब्सटेंसिस के मामले में ।
सिगरेट और शराब से होने वाली सापेक्षिक नुकसानी (स्केल्सऔर चलन का जायजा लेने पर ज्यादा ठहरती है )।
डेविड ब्रितानी सरकार के ड्रग सलाहकार हैं .आपके अनुसार ज्यादा सेहत को नुकसानी पहुचाने वाले पदार्थों में हेरोइन (मार्फीन से तैयार एक सफ़ेद नशीला पाउडर )कोकेन (बेहोशी लाने वाली ,सुन्न करने वाली एक दवा ,ऐ ड्रग ,एनेस्थेटिक, फ्रॉम कोका प्रोद्युसिंग नाम्ब्नेस ,विच सम पीपुल टेक इल्लिगली फॉर प्लेज़र ,कोका एक बूटी की सूखी हुई पट्टियां होतीं हैं जिनसे कोकीन बनाई जाती है ,जिसे थकावट दूर करने के लिए भी चोरी छिपे खाया जाता है .)बार्बीचयुरेतस और मेथादों -न के बाद शराब पाँचवे स्थान पर बरकरार है ।
यह जानकारी आपने किंग्स कॉलेज लन्दन के "सेंटर फॉर क्राइम एंड जस्टिस स्टडीज़ के समक्ष पढ़े गए एक पर्चे में दी है ।
सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक पदार्थों में तम्बाखू नौवें जबकि कैन्न्बिस एल एस दी और एक्सटेसी ११ ,१४, १८ वें स्थान पर बनी हुई हैं ।
वर्गीकरण तालिका में रेंकिंग का आधार सेहत को होने वाली नुकसानी ,फिजिकल हार्म ,दिपेंदेंस (लत ),सोसल हार्म (सामाजिक नुकसानी )को बनाया गया है ।
इसका मतलब यह नहीं है ,प्रतिबंधित नारकोटिक दवाएं नुकसानदायक नहीं है ,डेविड के ही शब्दों में "दी क्रिटिकल क्वेश्चन इज वन ऑफ़ स्केल एंड डिग्री "कितने बड़े पैमाने और व्यापक तौर पर ये पदार्थ चलन में हैं .,असल बात यह है ।
डेविड ब्रितानी सरकार की दवाओं के दुरोपयोग के लिए नियुक्त सलाह कार परिषद् के भी मुखिया हैं ।
हमें तस्दीक़ करना ही होगा -युवा भीड़ में मौजूदहर चीज़ ,दवा -दारु को आजमाने की प्रवृत्ति को ,ताकि उन्हें संभावित नुकसानी से बचाया जा सके ।
सन्दर्भ सामिग्री :-एल्कोहल ,सिगरेट्स बीत एल एस दी इन लिस्ट ऑफ़ हार्मफुल सब्सटेंसिस (टाईम्स ऑफ़ इंडिया ,अक्टूबर ,३१ ,२००९ ,पृष्ठ २१ ।)
प्रस्तुति :-वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई )

डायरिया -अनुमान से ज्यादा मौतें .....

विश्व -स्वाश्थ्य संगठन द्वारा प्रस्तुत नवीनतर आंकडों के अनुसार पाँच साल से ऊपर आयु वर्ग के ११ लाख नौनिहाल अफ्रिका और एशिया में हर साल डायरिया का ग्रास बन रहें हैं .यह आंकडा २००२ में शुरू किए गए अध्धययन में प्रस्तुत ३००,००० मौतों से कहीं ज्यादा है ।
यह ६ साला अध्धय्यन २०१२ तक जारी रहेगा .ताजा अध्धय्यन फ़ूड बोर्न दीसीज़ के हर पहलु को विस्तार से खंगालता है .यह कितना दुर्भाग्य पूर्ण हैं ,चाँद पर एक तन मिटटी में एक लीटर पानी होने की तस्दीक़ करने वाला भारत आजादी के ६२ साल बाद भी अपने नौनिहालों को साफ़ पानी मुहैया नहीं करवा पा रहा है .साफ़ खान पानी से जुड़ी है -अतिसार (डायरिया ,पेचिस )की नवज ।
सन्दर्भ सामिग्री :-"डायरिया किल्स ३ टाइम्स मोर पीपुल देन थोट (टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,अक्टूबर ,३१ ,२००९ ,पृष्ठ २१ ।)
प्रस्तुति :-वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई )

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

खानदानी वजह भी हो सकती है-बेड ड्राइविंग की .

सड़क पर आपने अक्सर कुछ लोगों को ड्राइविंग के दौरान बिला वजह दिशा और लेन् कुछ ज्यादा ही बदलते देखा होगा ।
अब पता चला है -इनमे एक म्युतेतिद जीवन ईकाई होती है (वेरिएंट ऑफ़ ऐ नोर्मल जीन )यही जीन बेड ड्राइविंग के लिए कुसूरवार है ।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निआअ के स्टीवेन क्रेमर और उनकी टीम ने २९ लोगों पर एक परीक्षण किया .इनमे से २२ में इस जीन का नोर्मल वर्षं न जबकि ७ में उत्परिवर्तित जीन मौजूद थी ।
इन्हें एक सिम्युलेटर पर १५ लेप्स ड्राइव करने के लिए कहा गया .हफ्ते भर बाद यही काम दोबारा करके दिखलाने को कहा गया .जिनके अन्दर म्युतेंत जीन मौजूद थी वे सीखी हुई टास्क तकरीबन भूल चुके थे .टास्क सीखते वक्त इनके दिमाग का कमतर भाग ही उद्दीप्त हुआ था ।इसलिए भूल भी जल्दी गए .
दरअसल एक ख़ास जीनहै (जीवन ईकाई है )जो ब्रेन दिरैव्द न्युरोत्रोपिक फेक्टर (एक प्रोटीन होती है यह )को काबू में रखती है .यही प्रोटीन याददाश्त को असर ग्रस्त बनाती है .वेरिएंट जीन के मामले में इस प्रोटीन पर से नियंत्रण ख़त्म हो जाता है .नतीजा होता है -बेड ड्राइविंग -वीविंग इन एंड आउट ऑफ़ ऐ ट्रेफिक लें न फ़्रिक्युएन्त्ली ।
यही वजहहै ३० फीसद अमरीकी सड़क पर कसरत सी करते रहतें हैं -टिकिट भी इन्हीं को ज्यादा इश्यु होता है -निगेटिव पाइंट्स भी मिलतें हैं .

खानदानी वजह भी होती हैं बेड ड्राइविंग की .....

यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफोर्निया इर्विन के विज्ञानियों ने स्टेवेंक्रेमर के नेत्रित्व में पता लगा या है -एक वेरिंत जीन ख़राब ड्राइविंग के लिए कुसूरवार है .एक ड्राविंग टेस्ट के दरमियान ऐसे ही लोगों का परिक्षण २० फीसद से भी ज्यादा ख़राब देखा गया ,ज्यादा गलतियां की इन लोगों ने ।
एक अनुमान के अनुसार तकरीबन ३० फीसद अमरीकियों में यही जीन है .यही वह लोग हैं जो लें न बहुत ज्यादा बद्लतें हैं .दे वीव इन एंड आउट ऑफ़ दा ट्रेफिक लेन्मोर ओफ़्तेन।
सीखे गुर भी ये लोग जल्दी भूल भूल जातें हैं वजह होती है ,दिमाग के अपेक्षया कमतर हिस्से का कोई भी नै टास्क सीखतें वक्त उद्दीप्त होना .,बरक्स उन लोगों के जिनमे इसी जीन का आम रूप मौजूद होता है .