गुरुवार, 29 सितंबर 2016

मैं दोनों के लिए लड़ती हूँ ,और दावे से कहती हूँ , मेरी हिंदी भी उत्तम है मेरी उर्दू भी आला है।

मैं हिंदी की वो बेटी हूँ ,जिसे उर्दू ने पाला है ,

अगर हिंदी की रोटी है, तो उर्दू का निवाला है ।

मुझे है प्यार है दोनों से ,मगर ये भी  हक़ीक़त  है,

लता जब लड़खड़ाती है ,हया ने ही सम्भाला है।

मैं जब हिंदी  से मिलती हूँ ,तो उर्दू साथ आती है ,

और जब उर्दू से मिलती हूँ ,तो हिंदी  घर बुलाती है।

मुझे दोनों ही प्यारी हैं  ,मैं दोनों की दुलारी हूँ ,

इधर हिंदी  सी माई  है  ,उधर उर्दू सी  खाला है।

यहीं की बेटियां दोनों ,यहीं पे जन्म पाया है ,

सियासत ने इन्हें हिन्दू ,औ मुस्लिम क्यों बनाया है ,

मुझे दोनों की हालत ,एक सी, मालूम होती है।

कभी हिंदी पे बंदिश है ,कभी उर्दू पे ताला है।

भले अपमान  हिंदी का ,हो या तौहीन उर्दू की ,

खुदा की है क़सम हरगिज़ ,हया ये सह नहीं सकती।

मैं दोनों के लिए लड़ती हूँ ,और दावे से कहती हूँ ,

मेरी हिंदी भी उत्तम है मेरी उर्दू भी आला है।

Virendra Sharma and Purushottam Pandey shared Pakistani's video.
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1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (30-09-2016) के चर्चा मंच "उत्तराखण्ड की महिमा" (चर्चा अंक-2481) पर भी होगी!
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'