मंगलवार, 26 जुलाई 2011

सूचना की सुनामी क्या दिमाग पर भारी पड़ रही है ?


सूचना की सुनामी क्या दिमाग पर भारी पड़ रही है ?

एक सेकिंड में २.३ और एक दिन में तकरीबन एक लाख अभिनव शब्दों से पाला पड़ता है हमारे दिमाग का .यूँ चौबीस घंटों के दिन में आदमी ले देकर १२ घंटा ही सक्रिय रहता है .इस दरमियान सूचना की बमबारी हर तरफ़ से होती
है फ़िर चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या इलेक्त्रोनी ,नेट सर्फिंग हो या कंप्यूटर गेम्स .हमारा दिमाग भले ही एक लाख शब्दों का संसाधन संग्रहण ना कर पाये आँख कान शब्द बाण से बच नही सकते ।
एक अनुमान के अनुसार ३४ गीगा बाइट्स के समतुल्य सूचना हमारे दिमाग को झेलनी पड़ती है .एक हफ्ते में इतनी इत्तला से एक लेपटोप का पेट भर जाएगा ।
केलिफोनिया यूनिवर्सिटी ,सान- डिएगो के साइंस दानों के अनुसार जहाँ १९८० में शब्दों की यह भरमार ४५०० ट्रिलियन थी वहीं २००८ में यह बढ़कर १०,८४५ ट्रिलियन हो गई ।
(ऐ थाउजंद बिलियन इज ऐ ट्रिलियन )।
सूचना संजाल (टेलिविज़न कंप्यूटर ,प्रिंट मीडिया आदि )से रिसती कुल सूचना का यह दायरा २००८ में ३.६ ज़ेता -बाइट्स (वन जेड इ टी टी ऐ -बाइट्स =वन बिलियन गीगा बाइट्स )।
साइंस दानो के मुताबिक़ इस सबका असर हमारे सोचने समझने के ढंग को असरग्रस्त कर सकता है .हो सकता है दिमाग की संरचना अन्दर खाने बदल रही हो ?
एक और विचार रोजर बोहन ने रखा है ,"जहाँ तक सोचने समझने का सवाल है ,ध्यान को टिकाये रखने का सवाल है ,हम शायद इस शब्द बमबारी के चलते गहराई से नहीं सोच पा रहें हैं ,विहंग - अवलोकन कर रहें हैं ,सिंह -अवलोकन नहीं कर पा रहें हैं .थोड़ी देर ही टिकता है कहीं हमारा दिमाग "।
एक मनोरोग विद ईद्वार्ड हल्लोवेल्ल के अनुसार इससे पहले दिमाग को इतनी सूचना संसाधन कभी नहीं करनी पड़ी थी .हमारे सामने एक पूरी पीढ़ी पल्लवित हो रही है ,जिसे कंप्यूटर- शकर कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा .सेल फोन और कंप्यूटर इनकी चर्या से चस्पां हैं ।और अपने ब्लोगिये ?
यह लोग सोचने समझने की ताकत खो रहें हैं ?ऊपरी सतही सूचना तक सिमट के रह गएँ हैं ये तमाम लोग ?
आदमी आदमी से कट गया है .एक और दुनिया उसने बना ली है ,वर्च्युअल -कायनात ?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शरीर किर्या -विज्यान (फिजियोलाजी )के प्रोफ़ेसर जॉन स्तें कहतें हैं "सूचना की यह बमबारी यदि यूँ ही ज़ारी रहती है तब दिमाग इवोल्व भी कर सकता है .मेमोर्री असर ग्रस्त हो सकती है .ऐसा तब भी सोचा गया था जब छपाई खाना (प्रिंटिंग प्रेस )अस्तित्व में आई थी .लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था .अब भी नहीं होगा .दिमाग की क्षमता अकूत है .हम कमतर समझ रहें हैं .इसलिए मैं ज़रा भी विचलित नहीं हूँ ।"
कन्तिन्युअस पार्शियल अटेंशन इस दौर की सौगात है क्योंकि लोग बाग़ एक साथ कई काम करतें हैं ,एक तरफ़ नेट सर्फिंग दूसरी तरफ़ बातचीत .आदमी गाड़ी भी चला रहा है तीन फोन काल भी ले रहा है ।
तो क्या दिमाग की ओवर लोडिंग हो रही है ?
"नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता इसमें से बहुत सी सूचना ऐसी भी है जिसका संसाधन दिमाग ने पहले भी किया था ."

16 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar ने कहा…

आह ! तो मुझ सरीखे लोग जो दिमाग़ की हार्ड-डिस्क खाली ही रखने में विश्वास रखते हैं उनकी तो बल्ले बल्ले :)

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सुनामी कोई भी हो, भारी तो पडती है, हां ये अलग बात है कि आप उसे नोटिस करें अथवा नहीं।

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चोंच में आकाश समा लेने की जिद..
इब्‍ने सफी के मायाजाल से कोई नहीं बच पाया।

Arvind Mishra ने कहा…

यह लोग सोचने समझने की ताकत खो रहें हैं ?ऊपरी सतही सूचना तक सिमट के रह गएँ हैं ये तमाम लोग ?
कई वैज्ञानिक तो यही अलाप रहे हैं !

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

विहंगावलोकन और सिंहावलोकन पर प्रकाश दाल कर आपने अच्छा किया


घनाक्षरी समापन पोस्ट - १० कवि, २३ भाषा-बोली, २५ छन्द

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

संतुलन श्रेयस्कर है, जितनी सूचना अन्दर जाये, परिष्कृत को ज्ञान व विवेक निकले।

ZEAL ने कहा…

निसंदेह यह सुनामी अक्सर भारी पड़ती है , लेकिन बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करते हुए दिमाग से कुछ कुछ डिलीट करते रहना चाहिए और और समय समय पर पूरा विश्राम भी देना चाहिए मस्तिष्क को .

Proper sleep is a better solution . otherwise just learn , unlearn and relearn ....

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Babli ने कहा…

ये बात सौ फीसदी सही है की सुनामी भारी पड़ती है इसलिए मेरा मानना ये है की दिमाग पर ज़्यादा ज़ोर न डालकर थोड़ा आराम देना आवश्यक है! ज्ञान अर्जन करना कभी न ख़त्म होने वाली बात है और सुबह से लेकर शाम तक हम तरह तरह के लोगों से मिलते हैं और बातें करते हुए ज्ञान प्राप्त होता है अलग अलग चीज़ों पर! बहुत बढ़िया पोस्ट!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये बात सच है की कुछ सोचने के लिए ... दिमाग से शब्दों और सूचनाओं के बम्ब को बाहर मिकालना पड़ता है ...

मनोज कुमार ने कहा…

आपके आलेख में कई बातें विचारणीय हैं।

(आपके पोस्ट का प्रभाव और बडः़अ जाएगा यदि आप इसे जस्टीफ़ाई कर दें और फ़ोन्ट थोड़ा और बड़ा।)

sm ने कहा…

तो क्या दिमाग की ओवर लोडिंग हो रही है ?
thoughtful question

Apanatva ने कहा…

aap koi bhee koshish karle mastishk swayam kanta chatee samay samay par karta rahta hai bina aapko soochit kiye delete ho jata hai aap sochate hee nazar aate hai....:)
interesting post.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 01/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 02/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
माफ कीजयेगा पिछले कमेन्ट मे तारीख गलत हो गयी थी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी पोस्ट पढ़ कर तो यही लग रहा है काफी भारी पड़ रही है ...

smshindi By Sonu ने कहा…

आपको और आपके परिवार को हरियाली तीज के शुभ अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनायें ......

पोस्ट पर आपका स्वागत है
दोस्ती - एक प्रतियोगिता हैं

वन्दना ने कहा…

हे भगवान बेचारे दिमाग को बचा………………