गुरुवार, 14 जुलाई 2011

सहभावित कविता :वोट मिला भाई वोट मिला है .-डॉ .नन्द लाल मेहता वागीश ,सह- भाव :वीरेंद्र शर्मा .. वोट मिला भाई वोट मिला है ,

सहभावित कविता :वोट मिला भाई वोट मिला है .-डॉ .नन्द लाल मेहता वागीश ,सह- भाव :वीरेंद्र शर्मा ..
वोट मिला भाई वोट मिला है ,
पांच बरस का वोट मिला है .
फ़ोकट सदन नहीं पहुंचें हैं ,जनता ने चुनकर भेजा है ,
किसकी हिम्मत हमसे पूछे ,इतना किस्में कलेजा है .
उनके प्रश्न नहीं सुनने हैं ,हम विजयी वे हुए पराजित ,
मिडिया से नहीं बात करेंगे ,हाई कमान की नहीं इजाज़त ,
मन मानेगा वही करेंगे ,मोनी -सोनी संग रहेंगे ,
वोट नोट में फर्क है कितना ,जनता को तो नोट मिला है ,
वोट मिला भाई वोट मिला है .पांच बरस का वोट मिला है .

हम मंत्री हैं माननीय हैं ,ऐसा है सरकारी रूतबा ,
हमें लोक से अब क्या लेना ,तंत्र पे सीधे हमारा कब्ज़ा ,
अभी तो पांच साल हैं बाकी ,फिर क्यों शोर विरोधी करते ,
हिम्मत होती सदन पहुँचते ,तो शिकवे चर्चे कर सकते ,
पर्चा भरने की नहीं कूव्वत ,फिर क्यों व्यर्थ कहानी गढ़ते ,
वोटर ही तो लोकपाल है ,हममें क्या कोई खोट मिला है ,
वोट मिला भाई वोट मिला है ,पांच बरस का वोट मिला है .

भगवा भी क्या रंग है कोई ,वह तो पहले भगवा है ,
फीका पड़ा लाल रंग ऐसा ,उसका अब क्या रूतबा है .
मंहगाई या लूट भ्रष्टता ,यह तो सरकारी चारा है ,
खाना पड़ेगा हर हालत में ,इसमें क्या दोष हमारा ,
जनता ने जिसको ठुकराया ,वह विपक्ष बे -चारा है ,
हमको ज़िंदा रोबोट मिला है ,वोट मिला भाई वोट मिला है ,
पांच बरस का वोट मिला है .

बुधवार, १३ जुलाई २०११

सहभावित कविता :आखिर हम चुन कर आये हैं .-डॉ .नन्द लाल मेहता वागीश .

सहभावित कविता :आखिर हम चुन कर आये हैं .-डॉ .नन्द लाल मेहता वागीश ,वीरेंद्र शर्मा .
आओ अन्दर की बात कहें ,
कुछ तो दिल की बात सुनें .
माना एयर- पोर्ट पहुंचे थे ,हंस -हंस के पत्ते फेंटें थे ,
मंत्री ओहदे कितने ऊंचे ,ऐंठे साथ में कई अफसर थे ,
एक नहीं हम कई जने थे ,भीतर से सब चौकन्ने थे ,
बाबा को देना था झांसा ,झांसे में बाबा को फांसा ,
बाबा का कोई मान नहीं था ,हम को बस फरमान यही था .
एक हाथ समझौते का हो, दूजे हाथ में गुप्त छुरी,
रात में काँप उठी नगरी ,बाबा की सी सी निकली ,
तम्बू बम्बू सब उखड़े थे ,साड़ी पाजामे घायल थे ,
झटके में झटका कर डाला ,ऐसा शातिर दांव हमारा ,

क्या अब भी सरकार नहीं है ,क्या इसका इकबाल नहीं है ,
जाकर उस बाबा से पूछो ,क्या यही सलवार सही है ,
हमने परिधान बदल डाले ,नक़्शे तमाम बदल डाले ,
आखिर चुनकर आयें हैं ,नहीं -धूप में बाल पकाएं हैं ,
इसके पीछे अनुभव है ,खाकी का अपना बल है ,
सीमा पर अभ्यास करेंगें ,देश सुरक्षा ख़ास करंगें ,
सलवारें लेकर जायेंगें ,दुश्मन को पहना आयेंगें ,
तुम जनता हम मालिक हैं ,रिश्ता तो ये खालिस है ,
जय बोलो इंडिया माता की ,इंडिया के भाग्य विधाता की ,
जय कुर्ती और सलवार की ,इंडिया के पहरेदार की .

5 टिप्‍पणियां:

रेखा ने कहा…

वोटर ही तो लोकपाल है ,हममें क्या कोई खोट मिला है ,
वोट मिला भाई वोट मिला है ,पांच बरस का वोट मिला है .

यही सोच सोच के सरकार मस्त है और जनता त्रस्त.

Dr Varsha Singh ने कहा…

कमाल के भाव लिए है रचना की पंक्तियाँ .......

शिखा कौशिक ने कहा…

वोट मिला भाई वोट मिला है ,पांच बरस का वोट मिला है - isi karan ye loktantr ke pahri tanashah ban baithhe hain .sateek chot karti prastuti .aabhar

यादें ने कहा…

राम-राम वीरुभाई...
मोनी -सोनी संग रहेंगे,वोट मिला ,भाई वोट मिला है ...अब और ...???

रंजना ने कहा…

सटीक कटाक्ष....