रविवार, 17 जुलाई 2016

मन रे तू काहे न धीर धरे ,वो निर्मोही मोह न जाने

मन रे तू काहे न धीर धरे ,वो निर्मोही मोह न जाने

जिनका मोह करे।

इस जीवन की चढ़ती -ढ़लती  धूप को किसने बांधा ,

रंग पे किसने पहरे डाले ,रूप को किसने बांधा ,

काहे ये जतन करे।

उतना ही उपकार समझ कोई ,जितना साथ निभा दे ,

जनम  मरण का मेल  है सपना ,ये सपना बिसरा दे ,

 कोई न संग मरे।

मन रे तू काहे न धीर धरे ,वो निर्मोही मोह न जाने जिनका मोह करे ,

मन रे तू काहे न धीर धरे।

Chitralekha - Mann Re Tu Kaahe Na Dheer Dhare - Mohd.Rafi

  • 5 years ago
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Film - Chitralekha 1964, MD - Roshan, Lyricist - Sahir Ludhianvi, Singer - Mohd.Rafi Mann Re Tu Kaahe Na Dheer Dhare Woh ...






1 टिप्पणी:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

चंचल मन से धीर की चाह ... पर उम्र से साथ सब कुछ सीख जाता है ...
ज्ञान की खान है आजकल आपका ब्लॉग ... राम राम जी ...