मंगलवार, 18 जून 2013

राज योग द्वारा आंतरिक शक्तियों का विकास

राज योग द्वारा आंतरिक शक्तियों का विकास 

मन की ऊर्जा (चैतन्य शक्ति )आत्मा का परमात्मा से मिलन करवाती है बशर्ते मन हमारा मुरीद हो हम मन के मुरीद न हों .एक सेकिंड में हम अपने आप को अशरीरी समझ आत्म स्वरूप में स्थित हो ,अपने ज्योति बिंदु स्वरूप शांत स्वरूप के स्मृति में टिककर परम ज्योति परमात्मा को याद करें और परमात्मा से हमारा मिलन हो जाए .दो तारों को जोड़ने के लिए ऊपर का रबड़ (इन्सुलेटर )हटाना पड़ता है तभी करेंट बहता है तार में .आत्मा का परमात्मा से योग भी तभी लगेगा जब हम ऊपर  का रबड़ हटा अ -शरीरी बनेंगे बुद्धि से . हमारे तार जो सर्वश्रेष्ठ सर्वोपरि है सर्वमान्य है सर्वज्ञ है ,ऊंचे  ते भी ऊंचे भगवान के साथ जुड़ जाते हैं इसीलिए आत्मा परमात्मा के इस प्रेममिलन को राजयोग कहा गया है .बस हमारा संकल्प एक स्विच बन जाए इधर स्विच आन किया उधर संपर्क जुड़ा .बे -तार का प्रसारण है राज योग .

राजयोग के अभ्यास से हमारा व्यवहार संस्कार बदलता है :

आचरण शुद्ध होता है राजयोग के अभ्यास से .वृतांत है स्वामी रामतीर्थ के आश्रम में एक सन्यासी आये ,आते ही बोले महाराज मैं नदी को पानी की सतह  पे चलके पार कर सकता हूँ .स्वामीजी बोले कितने साल लग गए इस अभ्यास में ,इस प्राप्ति में? साधू बोला दस साल .भले आदमी जो काम नाव में बैठके नदी पार करने का दो पैसे में हो सकता था उसमें तुमने जीवन के दस साल व्यर्थ कर दिए .तुम्हारे अन्दर अहंकार और आगया करिश्मा दिखाने का .आत्मा तुम्हारी उतनी ही कमज़ोर हो गई .जानते हो भाई भाई के परस्पर द्वेष से ही महा -भारत हुआ था . योग के अभाव में शक्ति नहीं थी आत्मा में .

योग हमें सहन करने की शक्ति देता है 

आज आदमी सोचता है हम क्यों सहन करें सामने वाला करे .आत्म ह्त्या  का एक कारण सहन शक्ति का ही अभाव है .क्रोध में विवेक नष्ट हो जाता है .गुस्से के तात्कालिक लाभ ही मिलते हैं .क्रोध से आप किसी से काम तो करवा सकते हैं लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बुरे होते हैं .

माँ बाप सोचते हैं बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो गुस्सा तो करना ही पड़ेगा .आप उन्हें प्यार से समझाइये .गुस्से में हम बच्चों को कुछ भी कह देते हैं .नालायक ,पाजी ,कुछ नहीं सीखेगा तू .बड़े होने पर ऐसे बच्चे विद्रोही बन सकते हैं .

निंदा हमारी जो करे मित्र हमारा होय :

हमारी किसी ने निंदा की और हम उसे स्वीकार करते हैं तो दुःख होता है .हम न चाहे तो कोई हमें दुःख नहीं पहुंचा सकता .मेरा कमंडल है मेरे पास ही रहा .मैं ने कुछ लिया ही नहीं तो दुःख कहाँ से आयेगा ?हमने लिया ही नहीं जो बुरा भला किसी ने कहा .कोई प्रतिक्रिया ही नहीं की तो सामने वाला शांत हो जाएगा .   

जब कोई गुस्सा करे मुंह में पानी रख लो निगलो नहीं :

एक पति महोदय रोज़ पत्नी को घुड़कते थे .शाम को दफ्तर से लौटे तो उन्होंने ऐसा ही किया .पत्नी ने झट मुंह में पानी रख लिया .दूसरे  दिन भी पति के गुस्सा  होने पर पत्नी ने ऐसा ही किया .पति को लगा अब यह बदल गई है .पति भी खुद पे ध्यान देने लगे और वह भी शांत हो गए .

बतला दें आपको वह पानी कोई सिद्ध पानी नहीं था .साधारण पानी ही था जो महात्मा जी ने बोतल में भरके दिया था .यह सचमुच हमारे कंट्रोल में है हम कैसा व्यवहार करें .कई बार बिना सोचे समझे ही हम रिएक्ट करते हैं .असाधारण व्यक्तियों ने कभी भी साधारण व्यवहार नहीं किया है .साधारण आदमी की तरह ईंट का ज़वाब पत्थर से नहीं दिया है .ईसा मसीह को तो सूली पर ही चढ़ा दिया गया था ,तब भी उन्होंने रिएक्ट नहीं किया .यही कहा ईश्वर इन्हें माफ़ करदेना .ये नहीं जानते ये क्या कर रहें हैं .
महात्मा गांधी एक मर्तबा ट्रेन में यात्रा कर रहे थे .साथ वाला व्यक्ति पान खा रहा था .दो बार गांधी के पैर पर उस व्यक्ति की थूक पड़ी दोनों बार महात्मा ने उसे चुपचाप पौंछ  दिया .उस व्यक्ति को कुछ भी नहीं कहा .व्यक्ति शर्मिन्दा हो महात्मा के पैरों पर गिर गया .

एक  साधू था .उसे एक व्यक्ति नियम निष्ठ होकर रोज गाली देता था .एक रोज साधू नेउस व्यक्ति को फल भिजवाये .वह व्यक्ति बहुत चकराया कहने लगा मैं तो आपको गाली देता था फिर भी आपने मुझे फल भिजवाये हैं .क्यों ?साधू बोले -तुम रोज़ मेरे ऊपर अमृत वर्षं करते हो तुम्हारी शक्ति बनी रहे इसीलिए मैं ने ये फल भिजवाये .तुमने मुझे सहने की शक्ति दी .राजयोग भी यही काम करता है .

समाने की शक्ति :

सागर तमाम नदियों के कचरे को समाता है और खुद कभी किनारा नहीं छोड़ता .हानि, लाभ ,सुख ,दुःख में जो समान भाव बनाए रहता है वह सागर के समान बन जाता है .

योग से हम वही ग्रहण करते हैं जो हमारे लिए लाभदायक हो :

एक कारीगर के पास एक जैसी तीन मूर्तियाँ थीं फिर भी एक की कीमत एक हजार दूसरी की दो तथा तीसरी की दस हज़ार थी .

पहली मूर्ती की विशेषता यह थी जब उसके एक कान में तार डाला जाता था ,वह उसके मुंह से बाहर आ जाता था .

दूसरी  के कान में तार  डालने पर वह दूसरे   कान से बाहर आजाता था तथा तीसरी के पेट में ही रह जाता था .

तीन प्रकार के व्यक्ति होतें हैं इसी प्रकार एक जो सुनी हुई को फट आगे कह देते हैं प्रसारित करदेते हैं .दूसरे एक कान से सुनते है दूसरे  से निकाल देते थे .तीसरे पचा लेते हैं .बात बुद्धि तक ले ही नहीं जाते हैं .

योग हमें  परखने, निर्णय करने की शक्ति देता है :

औचित्य ,अनौचित्य पर हम विवेक से काम लेते हैं .असली और नकली हीरे की पहचान कर लेते हैं .असली हीरे धूप में रखने पे गर्म नहीं होते .बुद्धि का पात्र निर्मल बनाता है योग जितनी बुद्धि श्रेष्ठ होती है निर्णय करने की शक्ति भी उतनी ही अव्वल हो जाती है .

सामना करने की शक्ति देता है योग :

तूफ़ान तो आयेंगें जीवन भर .इस जीवन में जो कुछ भी हो रहा है हमारे कल्याण के लिए ही हो रहा है .परिणाम का कोई तो कारण होता है .आज जो भी हमारे साथ घटित हो रहा है वह हमारे ही पूर्व जन्मों  का फल है परिणाम है .अकारण कुछ भी नहीं होता है .हमारी छाया की तरह हमारे कर्म हमारे साथ चलते हैं .

सहयोग की  शक्ति :

योग हमें सिखाता है हम एक ही परमपिता की संतान हैं इसीलिए भाई भाई हैं .असंभव को भी संभव कर देता है सहयोग .

एक भोज का आयोजन देवाताओं और असुरों के लिए किया गया .शर्त यह थी खाते समय किसी की भी कोहनी नहीं मुड़नी चाहिए .असुर भूखे रह गए .देवताओं ने भर पेट खाया .जानते हैं कैसे ?एक देवता ने अपने सामने वाले दूसरेदेवता  को अपने  हाथ से खिलाया .भर पूर खाया खिलाया .

एक जंगल में आग लगी थी .आग बुझाने के संकल्प में एक छोटी सी चिड़िया भी लगी हुई थी .अपनी नन्नी चौंच में पानी भर के लाती आग पे छिड़कती .एक कौवा यह कृत्य देख रहा था कहने लगा तुम्हारे इस पुरुषार्थ से क्या होगा ?क्या आग बुझ जायेगी .चिड़िया बोली भले न बुझे लेकिन मेरा नाम इतिहास में आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा लगाने वालों में नहीं .

विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति :

कछुए की तरह हो जाएं  हम .ज़रुरत हो आसपास को जगत को देखे ज़रुरत हो अशरीरी बन जाए .योग से हम अपने मन को न्यारा कर  सकते हैं .मैं जब जो चाहूँ देखू जब न चाहूँ न देखूं .

समेटने की शक्ति :

न कुछ तेरा न कुछ मेरा चिड़िया रैन बसेरा .सब कुछ छोड़ने को तैयार रहो .नाम ,धन, शोहरत .कभी भी काल आ सकता है .


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रविवार, 16 जून 2013

क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी का निदान है ?

क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी का निदान है ?

डायबिटिक रेटिनोपैथी का रोगनिदान एक अच्छा नेत्र रोगविशेषज्ञ (ओफ्थल्मोलोजिस्ट )आँखों के गहन जांच द्वारा कर सकता है .जांच में दृष्टि तीक्ष्णता का टेस्ट ,आँखों के प्रेशर (ओक्युलर प्रेशर )की मापऔर नेत्र विशेषज्ञ द्वारा रेटिना का गहन निरीक्षण  भी किया जाना शामिल होता  है 

.कई बार नेत्र विशेषज्ञ आपसे एक विशेष प्रकार के जांच के लिए निवेदन कर सकता है ,जिसे फंडस फ्लोरोसिन एञ्जियोग्रेफ़ि (ऍफ़ऍफ़ए )कहते हैं .इसमें विशेष प्रकार की फ्लोरोसेंट डाई रक्त नलिकाओं में इंजेक्ट की जाती है ,जिससे रेटिना को बेहतर ढंग से देखा जा सकता है .डाई रेटिना की रक्त नलिकाओं में जैसे जैसे घूमता है ,इसकी तस्वीर ले ली जाती है .इन तस्वीरों के माध्यम से इसकी सम्पूर्ण जानकारी मिल जाती है कि कहाँ पर असामान्य नलिकाओं से रक्तस्राव हो रहा है .इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी की अवस्था की  पहचान एवं उसके इलाज़ में मदद मिलती है .

एञ्जियोग्रेफ़ि के अतिरिक्त ,डायबिटिक मेक्युलोपैथी की जांच एवं उसकी गंभीरता का पता लगाने के लिए ओप्टिकल कोहरेन्स टमोग्रेफ़ी (ओसीटी )की ज़रुरत पड़  सकती है .   

क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी की जांच है ?

मधुमेह से पीड़ित मरीज़ के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वह नेत्र विशेषज्ञ के साथ ही स्रावीविज्ञान के माहिर (इंडोक्राइनोलाजिस्ट )के संपर्क में रहे और नियमित जांच कराए .

यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी शुरूआती अवस्था में पकड़ में आ जाता है तो इसके दीर्घकालिक फायदे हैं .डायबिटिक रेटिनोपैथी से अधिकाँश मामलों में दृष्टि ह्रास की रोकथाम की जा सकती है बशर्ते इसका इलाज़ जल्द शुरू कर दिया जाए .लेकिन एक बार नुक्सान हो गया तो इसके दुष्प्रभाव को दूर नहीं किया जा सकता .इसलिए बेहद ज़रूरी है कि प्रत्येक मधुमेह रोगी  को नियमित तौर पर आँखों की जांच करानी चाहिए ,ताकि डायबिटिक रेटिनोपैथी की मौजूदगी और फैलाव का समय रहते पता लगाया जा सके .

डायबिटिक रेटिनोपैथी का उपचार क्या है ?

उपचार के तीन प्रचलित तरीके हैं :

लेज़र ट्रीटमेंट :लेज़र उपचार में नेत्र विशेषज्ञ लेज़र का प्रयोग कर रेटिना के क्षेत्र  में विकसित अवांछित रक्त नलिकाओं को नष्ट कर देते हैं जो रेटिना को पोषण और एवं ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा उत्पन्न करती हैं .यह रेटिना क्षेत्र में नै रक्त नलिकाओं की वृद्धि को भी रोकता है .इसका प्रयोग कई सत्रों में किया जाता है .

विट्रेकटमी :यह एक शल्य चिकित्सा विधि है .इस विधि में शल्य क्रिया की मदद से खून एवं क्षतिग्रस्त ऊतकों को आँख के मध्य भाग से हटा दिया जाता है .इस विधि का चुनाव तब किया जाता है जब आँखों में रक्त स्राव का विस्तार अधिक हो .

इंट्राआक्युलर इंजेक्शन :आँखों में लगाए जाने वाले एंटी वीईजीऍफ़ या स्टेराइड जैसे इंजेक्शन डायबिटिक रेटिनोपैथी के कुछ मरीजों पर बेहद कारगर तरीके से काम करते हैं .यह रक्त नलिकाओं की असामान्य वृद्धि (पीडीआर )एवं उनसे होने वाले रक्त स्राव को कम कर देता है .इसका प्रयोग सर्जरी से पहले रक्त स्राव को कम करने के लिए भी कर सकते हैं .

उपचार के तरीकों का चुनाव बीमारी की अवस्था ,मरीज़ की उम्र एवं नेत्र विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करता है .लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आँखों को नुक्सान पहुंचना शुरू हो इससे पहले इलाज़ शुरू कर दिया जाए .

उपचार से दृष्टि वापस पाई जा सकती है ?

वह मरीज़ जो इस बीमारी के कारण पूर्व में अपनी दृष्टि गँवा चुका है ,सामान्यतय उपचार से उसकी दृष्टि वापस नहीं लाई  जा सकती .यद्यपि आँखों में रक्त स्राव ,रेटिनल डिटेचमेंट या मोतियाबिंद  के कारण गई दृष्टि को वापस लाया जा सकता है .

लेज़र उपचार के बारे में कुछ तथ्य :

(१  )यह केवल एक ओपीडी में भी संभव है ,इसके लिए भर्ती होने की ज़रुरत नहीं पड़ती है .

(२ )इसमें चीरा लगाने की ज़रुरत नहीं पड़ती है .

(३ )यह रक्त स्राव को रोक देता है या रेटिना के अवांछनीय रक्त नलिकाओं को नष्ट कर देता है .

(४ )सामान्यतय यह कष्ट दायक नहीं होता ,हालाकि जब नै रक्त नलिकाओं को हटाते हैं तो थोड़ा असहज महसूस होता है .ज़रुरत के पड़ने पर लेज़र उपचार को दोहराते हैं .

( ५ ) यह दृष्टि ह्रास को रोक सकता है ,लेकिन जा चुकी दृष्टि को वापस नहीं ला सकता .

डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचा जा सकता है ?

इसके प्रमाण हैं कि मधुमेह से पीड़ित लोग  ब्लड शुगर (रक्त शर्करा )पर बेहतर नियंत्रण से डायबिटिक रेटिनोपैथी को टाल सकते हैं और उससे होने वाली समस्याओं को कम कर सकते हैं .

महत्वपूर्ण सुझाव :

मधुमेह हो गया हो तो .साल में एक बार नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास आँखों की जांच के लिए ज़रूर जाएं .

रेटिना विशेषज्ञ की सलाह व बातों को नियमित तौर पर मानें व अनुसरण करें .

ब्लड शुगर स्तर पर नजर बनाए रहें .

रक्त चाप को सामान्य बनाए रहें .

धूम्रपान न करें .

कोलेस्ट्राल स्तर पर नियंत्रण रखें .

नियमित कसरत करें और संतुलित आहार लें .

(समाप्त )

शनिवार, 15 जून 2013

डायबिटिक रेटिनोपैथी

डायबिटिक रेटिनोपैथी 

मधुमेह(डायबिटीज़ ) क्या है ?

मधुमेह एक सामान्य बीमारी  है ,जो शरीर में ग्लूकोज़ (शर्करा )के प्रयोग एवं संचय करने वाले अंगों को प्रभावित करती है .मधुमेह बचपन में भी हो सकता है ,लेकिन आम तौर पर यह बड़ी उम्र में होता है .इससे पीड़ित मरीज़ को ज्यादा प्यास लगती है ,जल्दी जल्दी पेशाब आता है और वजन कम होने के साथ दृष्टि (नजर ,बीनाई ,विजन )भी प्रभावित हो सकती है .

मधुमेह एवं आँखें 

मधुमेह आँखों को कई प्रकार से नुक्सान पहुंचा सकता है .इससे दृष्टि में अस्थिरता ,कम आयु में मोतियाबिंद ,आप्टिक नर्व के प्रभावित होने से दृष्टि का कम होना ,आँखों से सम्बंधित नसों एवं मांसपेशियों में पक्षाघात के चलते भैंगापन या डिपलोपिया हो सकता है .

लेकिन मधुमेह के कारण आँखों में होने वाली बीमारियों में डायबिटिक रेटिनोपैथी सबसे प्रमुख है .

डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या है ?
डायबिटिक रेटिनोपैथी एक बीमारी  है ,जो मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति की रेटिना (दृष्टि पटल ,आँख का पर्दा जहां तस्वीर बनती है )को प्रभावित करती है .यह रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली महीन नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है ,अगर इसका समय पर इलाज़ न कराया जाए तो पीड़ित अंधे पन  का शिकार हो सकता है .

डायबिटिक रेटिनोपैथी दुनिया में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण  है ,जिसके मामले हर साल बढ़ते जा रहें हैं .


रेटिना क्या है ?

रेटिना आँखों के अंदरूनी भाग  में स्थित एक नाजुक प्रकाश सम्बन्धी परत है ,जो किसी वस्तु से परावर्तित होकर आने वाले प्रकाश की मदद से वस्तु की छवि निर्माण के लिए जिम्मेवार होती है .रेटिना को होने वाला नुकसान रेटिनोपैथी का कारण बनता है .

मधुमेह रेटिना को कैसे प्रभावित करता है ?

मधुमेह के मामले में ,रक्त में शर्करा की बढ़ी हुई मात्रा रक्त नलिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकती है .फलस्वरूप नलिकाओं से रक्त स्राव हो सकता है ,जिससे रेटिना में सूजन पैदा हो जाती है .रक्त नलिकाओं में खराबी के कारण रेटिना को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी पोषक तत्व व ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है .

शुरूआती चरण में उपर्युक्त कारणों  से दृष्टि के धुंधले पन के लक्षण दिखते  हैं .जैसे जैसे बीमारी बढ़ती  है ,रेटिना क्षेत्र में नै  अ - वांछनीय रक्त नलिकाएं पनपने लगतीं हैं जो ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा पैदा करतीं हैं .

यह नै रक्त नलिकाएं मधुमेह के कारण कभी भी फट सकती हैं ,फलस्वरूप 
रेटिना के आसपास होने वाले रक्त स्राव से आँखों में अंध बिंदु (ब्लाइंड स्पॉट )बन सकता है या अचानक दृष्टि ह्रास हो सकता है .नजर (बीनाई )कमजोर हो सकती है .


डायबिटिक रेटिनोपैथी किसे हो सकता है ?

केवल मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को ही डायबिटिक रेटिनोपैथी हो सकता है .डायबिटीज़ होने की अवधि के बढ़ने के साथ ही डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का ख़तरा बढ़ता जाता है .

यह देखा गया है कि करीब अस्सी फीसद लोग जो १ ५ से अधिक वर्षों से मधुमेह के शिकार हैं उनके रेटिना क्षेत्र की कुछ रक्त नलिकाएं क्षति ग्रस्त हो जाती हैं .लेकिन डायबिटिक रेटिनोपैथी होने के लिए जो सबसे प्रमुख कारण हैं उनमें गंभीर और अनियंत्रित मधुमेह ,रक्त में शर्करा के स्तर में उतरा चढ़ाव ,उच्च रक्त स्राव ,उच्च रक्त कोलेस्ट्राल ,मधुमेह के कारण किडनी की बीमारी और गर्भावस्था है .

किशोरावस्था में मधुमेह से पीड़ित को डायबिटिक रेटिनोपैथी कम उम्र में हो सकता है .

डायबिटिक रेटिनोपैथी कैसे बढ़ता है ?

डायबिटिक रेटिनोपैथी के दो मुख्य चरण होते हैं .शुरूआती चरण को नान प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (एनपीडीआर )कहते हैं .इस चरण में रेटिना क्षेत्र की नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं .सामान्यत बीमारी  का यह शुरूआती चरण होता है ,जिसमें लक्षणों का पता नहीं चलता है .कुछ मामलों में क्षतिग्रस्त रक्त नलिकाओं के फटने से रेटिना के मध्य भाग में रक्त फ़ैल जाता है .इस स्थिति को डायबिटिक मैक्युलोपैथी कहते हैं ,इससे दृष्टि प्रभावित होती है और धुंधला दिखने लगता है .

इसके उन्नत और विकसित चरण को प्रोलीफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (पीडीआर )कहते हैं .यह डायबिटिक रेटिनोपैथी  की सबसे सबसे गंभीर चरण है .इस चरण में रेटिना क्षेत्र में नै कमज़ोर अवांछनीय रक्त नलिकाएं तेज़ी से पनपने लगती हैं जो रेटिना के ऑक्सीजन आपूर्ति  में बाधा पैदा कर उसे क्षतिग्रस्त करती  हैं।इस कारण रेटिनल डिटेचमेंट या ग्लूकोमा भी हो सकता है .करीब २ ० फीसद मधुमेह पीड़ितों में पीडीआर की वजह से गंभीर दृष्टि ह्रास हो सकता है जो अंधेपन का कारण बनाता है .

डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण क्या हैं ?

डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण  हो सकते हैं :

  (१ )घटती दृष्टि 

 (२ ) दृष्टि का धुंधला पड़ना 

 (३ )फ्लोटर 

शुरूआती चरण या कई बार गंभीर स्तर के डायबिटिक रेटिनोपैथी का कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है .

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(ज़ारी )





मुरली

मुरली आत्मा और परमात्मा के बीच का वह संवाद है रूह रूहान है बातचीत है जिसके लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं रहती है .यह वायरलेस प्रसारण तभी मुमकिन हो पाता है जब हम देहभान से मुक्त हो जाते हैं .अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित अशरीरी बन स्वयं को आत्मा समझ परमात्मा निराकार शिव को याद करते हैं .परे से भी परे नीहारिकाओं ,क्वासर्स ,पल्सार्स (स्पंदी सितारों )से भी परे परमधाम से होने वाला यह सीधा प्रसारण है .

मुरली वह संगीत  है जो विश्वशान्ति का आधार बन सकती है .क्योंकि इसे सुनने से दुनिया भर में शान्ति स्थापित हो सकती है .तमाम युद्ध और उनकी रणनीति पहले मानव मन ही रचता है .और मुरली सुनने से हम अपने स्वभाव ,स्वमान में स्थित हो जाते हैं .देहभान (अशुद्ध अहंकार )से मुक्त हो खुद को आत्मा समझने लगते हैं .क्योंकि मुरली वह महावाक्य है जो परमात्मा निराकार शिव पूरे कल्प में सिर्फ एक बार जब पञ्चभूतों से बनी यह दुनिया मैली हो जाती है प्रकृति के पाँचों  तत्व अपनी तात्विकता खोकर बेहद के प्रदूषित हो जाते हैं .,साधारण मनुष्य तन में प्रवेश कर सुनाते हैं जिसे वह नाम देते हैं ब्रह्मा .

मुरली वह रास है जो गोपेश्वर (निराकार शिव )गोप गोपिकाओं (पुरुषोतम संगम युग , कलयुग के आखिर तथा सत युग की पूर्व वेला में )हम आत्माओं के साथ रचाते हैं .यह इसी समय का यादगार है .

गोपेश्वर कहा जाता है उसे जो कृष्ण का भी ईश्वर है हम आत्माओं का सच्चा सच्चा पिता ,शिक्षक और सद्गुरु है ,शिव परमात्मा को .

हम मनुष्य आत्माओं का संपर्क परमात्मा से करवाती है मुरली की तान .यह बांसुरी हरित बांस (कच्चे बांस )की नहीं बनी है जिसे नटखट गोपिकाएं श्रीकृष्ण को छकाने के लिए छुपा लेती हैं ,सौगंध धरती हैं कि कृष्ण की मुरलिया उनके पास नहीं हैं फिर कनखियों से मुस्का के संशय पैदा कर देती हैं .कृष्ण कहते हैं है तो लौटा दो .सौगंध धरके कहती हैं उनके पास नहीं है तो फिर कहाँ से दें .

हरित बांस की बांसुरी मुरली लई लुकाय ,सौहं धरें ,भौहन हँसे ,दें करत  नट जायं .

यह बांसुरी तो निराकार शिव की ब्रह्मा कमल मुख से निसृत ज्ञान वाणी है .जिसे सुन हम बच्चों का स्वभाव संस्कार बदल जाता है .विकर्म विनाश  होने लगते हैं .जन्म जन्मान्तर की खोट उतरने लगती है आत्मा पर से .यह मुरली डायमंड की बनी है .जिसे सुन हमारी आत्मा भी डायमंड की हो जाती है विकर्मों ने आज इसी आत्मा को कोयला बना दिया है .डायमंड और कोयला हैं दोनों एक ही तत्व कार्बन के अपरूप allotrops ही .

कोयल ,काजल और डायमंड अपनी एटमी संरचना में अलग अलग हैं लेकिन हैं एक ही तत्व कार्बन केएटमी  संयोजन .

Allotropy or allotropism is the property of some chemical elements to exist in two or more different forms, known as allotropes of these elements. Allotropes are different structural modifications of an element[1]; the atoms of the element arebonded together in a different manner.
For example, carbon has 3 common allotropes: diamond, where the carbon atoms are bonded together in a tetrahedral lattice arrangement, graphite, where the carbon atoms are bonded together in sheets of a hexagonal lattice, and fullerenes, where the carbon atoms are bonded together in spherical, tubular, or ellipsoidal formations.

मन का मुरीद बनने  से हमारी आत्मा आज कोयले से भी ज्यादा काली हो गई है .जबकि मन को आत्मा का मुरीद होना चाहिए था .आत्मा के सोचने की शक्ति ही तो है हमारा मन .कर्म का आधार बनती है हमारी सोच .और कर्मम फिर परछाईं बन हमारे संग संग चलता है .

कृष्ण के हाथ  में मुरली इसीलिए भक्ति मार्ग में दिखलाई गई है क्योंकि कृष्ण दुनिया का पहला प्रिंस है जिसने ज्ञान मुरली ब्रह्मा कमल मुख निसृत   सबसे ज्यादा सुनी है जिसे स्वयं परमात्मा शिव सुनाते हैं .

मुरली श्री मत है शिव की .'श्री' का अर्थ ही है देवताओं का भी देवता .जो नित मुरली सुनेगा उसके विकारों की परतें उतरेगीं आत्मा से .जैसे  शरीर के पोषण के लिए स्वास्थ्य कर भोजन ज़रूरी है एंटीओक्सिडेंट ज़रूरी हैं वैसे ही आत्मा के पोषण के लिए मुरली की तान ज़रूरी है सुनना, नित सुनते रहना प्रात :ब्रह्म मूहर्त में ,स्वयं को आत्मा समझ निराकार शिव ज्योतिर्लिन्गम परमात्मा को याद करनाही मुरली सुनना है  .

मुरली योग है प्रेममिलन है आत्मा का परमात्मा के साथ .प्रेम पत्र है परमात्मा का आत्मा के नाम .मुरली वह 

एंटी -  वायरस है जिसे सुन आत्मा  से हर प्रकार की खोट ,विकर्मों का वायरस निकल भाग खड़ा  होता है . 

मुरली (परमात्मा की श्रीमत पर चलने से )का आधार लेने से हमारा जीवन सफल सुखमय जीवन बन जाएगा .आत्मा अलौकिक  आनंद रस में डूब जाती है मुरली की तान सुनके .

मुरली में छिपे हैं जीवन और जगत के सभी सौपान त्रिलोक का ज्ञान .ज्ञान गीता है मुरली जिसमे छिपें हैं जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान .मुरली सुनने से हम अपने स्वधर्म (आत्म स्वरूप ,शान्ति स्वरूप ,आनंद स्वरूप )में स्थिर हो जाते हैं .हर काम में सफलता मिलने लगती है .दक्षता बढ़ जाती है हर काम में .हरकाम हो जाता है आसान .

आप अनुसंधान करने लगते हैं सुनके मुरली की तान बनजाते हैं बड़े विज्ञानी ग्यानी ध्यानी आत्मा .मुरली वह सॉफ्ट वेयर है जो हमें सकारात्मक बनाती है .हमारी नकारात्मक वृत्ति का नाश करती है मुरली .

मन वाणी कर्म में समस्वरता हार्मनी पैदा करती है मुरली .आज हम सोचते कुछ हैं कहते  कुछ और हैं और करते कुछ और हैं .यही हमारे दुखों का कारण हैं .हम अपने मन के मुरीद हो गए हैं .मन मत पे ,परमत पे चलने लगते हैं .इसने ऐसा क्यों कहा उसने वैसा क्यों कहा इसी सोच को पकड़ के बैठ जाते हैं .यह पकड़ना ही दुखों का कारण बन जाता है .हमारी miseries की वजह बन जाता है .

आज सत्य को परखने की हमारी शक्ति कमज़ोर हो गई है क्योंकि हमारा मन अ -शांत रहता है .प्रात :सुनी गई मुरली दिन भर हमने तरोताजा ऊर्जा से भरे रहती हैं चार्जिंग करती है हमारी .दिन भर रहता है फिर यह चार्ज .

(ज़ारी )

वीरुभाई ,४ ३ ,३ ०९ ,सिलवरवुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशगन 

१ ४ .० ६ .२ ० १ ३


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मुरली

मुरली आत्मा और परमात्मा के बीच का वह संवाद है रूह रूहान है बातचीत है जिसके लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं रहती है .यह वायरलेस प्रसारण तभी मुमकिन हो पाता है जब हम देहभान से मुक्त हो जाते हैं .अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित अशरीरी बन स्वयं को आत्मा समझ परमात्मा निराकार शिव को याद करते हैं .परे से भी परे नीहारिकाओं ,क्वासर्स ,पल्सार्स (स्पंदी सितारों )से भी परे परमधाम से होने वाला यह सीधा प्रसारण है .

मुरली वह संगीत  है जो विश्वशान्ति का आधार बन सकती है .क्योंकि इसे सुनने से दुनिया भर में शान्ति स्थापित हो सकती है .तमाम युद्ध और उनकी रणनीति पहले मानव मन ही रचता है .और मुरली सुनने से हम अपने स्वभाव ,स्वमान में स्थित हो जाते हैं .देहभान (अशुद्ध अहंकार )से मुक्त हो खुद को आत्मा समझने लगते हैं .क्योंकि मुरली वह महावाक्य है जो परमात्मा निराकार शिव पूरे कल्प में सिर्फ एक बार जब पञ्चभूतों से बनी यह दुनिया मैली हो जाती है प्रकृति के पाँचों  तत्व अपनी तात्विकता खोकर बेहद के प्रदूषित हो जाते हैं .,साधारण मनुष्य तन में प्रवेश कर सुनाते हैं जिसे वह नाम देते हैं ब्रह्मा .

मुरली वह रास है जो गोपेश्वर (निराकार शिव )गोप गोपिकाओं (पुरुषोतम संगम युग , कलयुग के आखिर तथा सत युग की पूर्व वेला में )हम आत्माओं के साथ रचाते हैं .यह इसी समय का यादगार है .

गोपेश्वर कहा जाता है उसे जो कृष्ण का भी ईश्वर है हम आत्माओं का सच्चा सच्चा पिता ,शिक्षक और सद्गुरु है ,शिव परमात्मा को .

हम मनुष्य आत्माओं का संपर्क परमात्मा से करवाती है मुरली की तान .यह बांसुरी हरित बांस (कच्चे बांस )की नहीं बनी है जिसे नटखट गोपिकाएं श्रीकृष्ण को छकाने के लिए छुपा लेती हैं ,सौगंध धरती हैं कि कृष्ण की मुरलिया उनके पास नहीं हैं फिर कनखियों से मुस्का के संशय पैदा कर देती हैं .कृष्ण कहते हैं है तो लौटा दो .सौगंध धरके कहती हैं उनके पास नहीं है तो फिर कहाँ से दें .

हरित बांस की बांसुरी मुरली लई लुकाय ,सौहं धरें ,भौहन हँसे ,दें करत  नट जायं .

यह बांसुरी तो निराकार शिव की ब्रह्मा कमल मुख से निसृत ज्ञान वाणी है .जिसे सुन हम बच्चों का स्वभाव संस्कार बदल जाता है .विकर्म विनाश  होने लगते हैं .जन्म जन्मान्तर की खोट उतरने लगती है आत्मा पर से .यह मुरली डायमंड की बनी है .जिसे सुन हमारी आत्मा भी डायमंड की हो जाती है विकर्मों ने आज इसी आत्मा को कोयला बना दिया है .डायमंड और कोयला हैं दोनों एक ही तत्व कार्बन के अपरूप allotrops ही .

कोयल ,काजल और डायमंड अपनी एटमी संरचना में अलग अलग हैं लेकिन हैं एक ही तत्व कार्बन केएटमी  संयोजन .

Allotropy or allotropism is the property of some chemical elements to exist in two or more different forms, known as allotropes of these elements. Allotropes are different structural modifications of an element[1]; the atoms of the element arebonded together in a different manner.
For example, carbon has 3 common allotropes: diamond, where the carbon atoms are bonded together in a tetrahedral lattice arrangement, graphite, where the carbon atoms are bonded together in sheets of a hexagonal lattice, and fullerenes, where the carbon atoms are bonded together in spherical, tubular, or ellipsoidal formations.

मन का मुरीद बनने  से हमारी आत्मा आज कोयले से भी ज्यादा काली हो गई है .जबकि मन को आत्मा का मुरीद होना चाहिए था .आत्मा के सोचने की शक्ति ही तो है हमारा मन .कर्म का आधार बनती है हमारी सोच .और कर्मम फिर परछाईं बन हमारे संग संग चलता है .

कृष्ण के हाथ  में मुरली इसीलिए भक्ति मार्ग में दिखलाई गई है क्योंकि कृष्ण दुनिया का पहला प्रिंस है जिसने ज्ञान मुरली ब्रह्मा कमल मुख निसृत   सबसे ज्यादा सुनी है जिसे स्वयं परमात्मा शिव सुनाते हैं .

मुरली श्री मत है शिव की .'श्री' का अर्थ ही है देवताओं का भी देवता .जो नित मुरली सुनेगा उसके विकारों की परतें उतरेगीं आत्मा से .जैसे  शरीर के पोषण के लिए स्वास्थ्य कर भोजन ज़रूरी है एंटीओक्सिडेंट ज़रूरी हैं वैसे ही आत्मा के पोषण के लिए मुरली की तान ज़रूरी है सुनना, नित सुनते रहना प्रात :ब्रह्म मूहर्त में ,स्वयं को आत्मा समझ निराकार शिव ज्योतिर्लिन्गम परमात्मा को याद करनाही मुरली सुनना है  .

मुरली योग है प्रेममिलन है आत्मा का परमात्मा के साथ .प्रेम पत्र है परमात्मा का आत्मा के नाम .मुरली वह 

एंटी -  वायरस है जिसे सुन आत्मा  से हर प्रकार की खोट ,विकर्मों का वायरस निकल भाग खड़ा  होता है . 

मुरली (परमात्मा की श्रीमत पर चलने से )का आधार लेने से हमारा जीवन सफल सुखमय जीवन बन जाएगा .आत्मा अलौकिक  आनंद रस में डूब जाती है मुरली की तान सुनके .

मुरली में छिपे हैं जीवन और जगत के सभी सौपान त्रिलोक का ज्ञान .ज्ञान गीता है मुरली जिसमे छिपें हैं जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान .मुरली सुनने से हम अपने स्वधर्म (आत्म स्वरूप ,शान्ति स्वरूप ,आनंद स्वरूप )में स्थिर हो जाते हैं .हर काम में सफलता मिलने लगती है .दक्षता बढ़ जाती है हर काम में .हरकाम हो जाता है आसान .

आप अनुसंधान करने लगते हैं सुनके मुरली की तान बनजाते हैं बड़े विज्ञानी ग्यानी ध्यानी आत्मा .मुरली वह सॉफ्ट वेयर है जो हमें सकारात्मक बनाती है .हमारी नकारात्मक वृत्ति का नाश करती है मुरली .

मन वाणी कर्म में समस्वरता हार्मनी पैदा करती है मुरली .आज हम सोचते कुछ हैं कहते  कुछ और हैं और करते कुछ और हैं .यही हमारे दुखों का कारण हैं .हम अपने मन के मुरीद हो गए हैं .मन मत पे ,परमत पे चलने लगते हैं .इसने ऐसा क्यों कहा उसने वैसा क्यों कहा इसी सोच को पकड़ के बैठ जाते हैं .यह पकड़ना ही दुखों का कारण बन जाता है .हमारी miseries की वजह बन जाता है .

आज सत्य को परखने की हमारी शक्ति कमज़ोर हो गई है क्योंकि हमारा मन अ -शांत रहता है .प्रात :सुनी गई मुरली दिन भर हमने तरोताजा ऊर्जा से भरे रहती हैं चार्जिंग करती है हमारी .दिन भर रहता है फिर यह चार्ज .

(ज़ारी )

वीरुभाई ,४ ३ ,३ ०९ ,सिलवरवुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशगन 

१ ४ .० ६ .२ ० १ ३


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