रविवार, 21 अगस्त 2016

चिंता ताकि कीजिये जो अनहोनी होय , ए मारग संसार को नानक थिर नहीं कोय।

चिंता ताकि कीजिये ,जो अनहोनी होय ,

ए मारग  संसार को ,नानक थिर नहीं कोय।

तुलसी भरोसे राम के ,रहो(रह्यो ) खाट पे सोय ,

अनहोनी होनी नहीं ,होनी होय सो होय।

अनहोनी कोई नहीं है। दुःख है। दुःख है तो इसका कारण भी है :अज्ञान। जिसे मैं वरत सकता हूँ खर्च कर सकता हूँ उसे छोड़कर उस वर्तमान को छोड़कर या तो मैं अतीत को जीता हूँ अतीत के दुःख को पकड़े बैठा रहता हूँ जो मैं अब बरत नहीं सकता जो अब है नहीं उसकी परछाइयाँ मेरा पीछा नहीं छोड़तीं।  या फिर मैं भविष्य की आशंका से ग्रस्त रहता हूँ कहीं ये न हो जाए कहीं वो न हो जाए ,ये होगा तो क्या होगा वो होगा तो क्या होगा।

दुःख है तो उससे छुटकारा भी है :निवृत्ति । वह है ज्ञान।निवृत्ति का साधन है ज्ञान ,ज्ञान में आनंद है रस है :ज्ञान ही तो निवृत्ति है। अज्ञान ही दुःख   है।

अज्ञान निरंजन को निरंकार को छुपा लेता है प्रकाश की कुछ किरण कुछ रौशनी ,ज्ञान ,परमात्मा को प्रकट कर देता है वही ज्ञान है उसी की रौशनी में भगवान प्रकट होता है।

मैं कृत हूँ करता नहीं हूँ करता चिंता करे मैं क्यों चिंता करूँ ?  

https://www.youtube.com/watch?v=31B5eBtWKi0

तुम मेरे पास होते हो ,जब कोई दूसरा नहीं होता !

नानक दुखिया सब संसार ,

सो सुखिया जिस नाम धार।

Nanak Dukhiya Sab Sansar- O Nanak the whole world is in pain. This Punjabi saying tells us that all humans, regardless of wealth, status, power ect are in some way or another unhappy. This is because the mind always craves for more than it has. Also Guru Ji is telling us that we all suffer from the pain of separation from God.All our pains stem from this. The only way to escape this pain is become one with God and attain liberation from the Samsara cylce (Mukti).Sat Sri Akal (God the eternal one is true).

1 टिप्पणी:

Digamber Naswa ने कहा…

अज्ञान का अन्धेरा रौशनी होने पे भी देखने कहाँ देता है ...
सुन्दर व्याख्या ... राम राम जी ...