सोमवार, 25 सितंबर 2017

भौतिक -विज्ञानों के झरोखे से

भौतिक -विज्ञानों के झरोखे से :क्या है उष्णकटिबंधी चक्रवातीय तूफानों की एक भयावह किस्म- "हरिकैन" (Hurricane )?कैसे होता है इनका नामकरण संस्कार ?

आम फेहम साधरण -जन की भाषा में कहें तो हरिकेन एक भयावह अंधड़ -तूफ़ान ही है  जिसे भूगोल -विज्ञान के माहिर उष्णकटिबंधी चक्रवात ही कहते हैं। हरिकेन अक्सर उष्णकटिबंधी और उप -उष्णकटि -बंधी जलराशि के ऊपर ही समुन्द्र के ऊपर उठते- बनते- पैदा होते हैं। इनकी फ़िज़िक्स के बारे में बात फिर कभी करेंगे।पूरा भौतिकी शास्त्र है इनका।

माहिरों के अनुसार जब किसी तूफ़ान की घूर्णन -गति  (Storm's Maximum Sustained Wind )प्रतिघंटा चौहत्तर मील को न सिर्फ छूले बल्कि लगातार उस अवधि में कायम भी रहे तब उसे हरिकेन का दर्ज़ा मिल जाता है। चीते से  ज्यादा तेज़ है ये बवंडर सी बलखाती नर्तनशील चाल जो इमारतों और वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है।

सागरों के उष्ण जल के ऊपर बनते - पैदा होते ये तूफ़ान। उष्ण कटिबंधी इलाके इनके प्राकृत आवास कहे जा सकते हैं। कभी कभार तटीय इलाके का भू -क्षेत्र भी इनकी चपेट में आता है। बस देखते ही देखते जैसे समुन्दर विशाल जलराशि की एक दीवार बन भूक्षेत्र की ओर  दौड़ पड़ता है। इसे स्टॉर्म सर्ज (Storm Surge )कहा जाता है। वर्तमान में प्युटो- रीको (उत्तरी अमरीका के नियंत्रण में एक द्वीप )ये तबाही झेल रहा है। बस जैसे एक जल प्रलय होने को है तटबंध टूटने को हैं , ऐसी प्रतीति कराती है यह कुदरत की विनाश  लीला।

जैसे रिख्टर -पैमाने पे भूकंप की शक्ति का आकलन प्रसूत ऊर्जा के आधार और उससे होने वाली तबाही ,उस स्थान की भू -स्थल आकृति जिसका ज़ायज़ा दिलवाती चलती है , आकलन करती है  इस तबाही का , वैसे ही यहां इन भयावह समुदी तूफानों की शक्ति और विनाश लीला का आकलन (Saffir Simpson Wind Scale )सफ़ीर सिम्प्सन पवन पैमाने पर किया जाता है। जैसे जलजले से निसृत ऊर्जा से होने वाली तबाही का आकलन (१-१० )अंकों तक रिख्टर पैमाने तथा १ से लेकर १२ तक मरकेली पैमाने पर किया जाता है वैसे ही यहां इन भयावह चक्रवातों के मामले में १ से लेकर पांच अंक   रखे गए हैं जिसे अंकीय रेटिंग कह सकते हैं।इनका शक्तिमान कह सकते हैं।

कम -दाब वाला एक  मौसमी घूर्णनतंत्र होता  है उष्ण कटिबंधी चक्रवात। इसके तहत संघठित गर्जनमेघ (organised thunderstorms )आते हैं। लेकिन अलग -अलग पवनराशियों को अलग अलग रखने वाला कोई क्षेत्र या सीमा (Fronts )यहां नहीं होती है।

सन्दर्भ के लिए देखें सेतु :(https://oceanservice.noaa.gov/facts/hurricane.html)

राष्ट्रीय समुद्री (सागरीय )एवं वायुमंडलीय प्रशासन तथा संबद्ध राष्ट्रीय हरिकेन केंद्र के अनुसार इन विनाशकारी तूफानों का प्रसव एक जून से लेकर ३० नवंबर तक आधिकारिक तौर पर आकलित ,अनुमित ,किया गया है दीगर है कि इस अवधि के  बाहर -भीतर भी ये तूफ़ान उठ सकते हैं। कुदरत के खेल का केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।निश्चय  कुछ नहीं।

हरिकेन का नामकरण और पुरोहिताई  :विश्व मौसम संगठन करता यह काम। इस पर नेशनल हरिकेन सेंटर का कोई नियंत्रण नहीं रहता है। पूर्व में प्रशांत और अब अंधमहासागरीय क्षेत्र में भी पैदा होने वाले भयावह तूफानों के लिए कुछ नर और मादा ,स्त्रियों और मर्दों के नाम छः साल के एक आवधिक चक्र के बाद बारी -बारी  से रखे जाते हैं।

किसी कहतें हैं चक्रवात ?

यह एक लार्ज स्केल बड़े पैमाने का आंधी -तूफ़ान तंत्र(स्टाम ) होता है जहां पवनें एक केंद्र के गिर्द उत्तरी गोलार्द्ध में वामावर्त दिशा में यानी घड़ी  की सुइयों के विपरीत दिशा में   घूर्णन करती हैं तथा दक्षिणी गोल में दक्षिणावर्त। 
आम भाषा में इसे ही चक्रवात या बवंडर (गोल -गोल वृताकार घूमती तेज़ हवा वाली आंधी हवा का बिगूला कह दिया जाता है। यह बहुत खराब मौसम का संकेत करता है जिसमें बेहद की  वर्षा या तेज़ आंधी का भी इशारा रहता है।  

बहुत तेज़ बर्फीला तूफ़ान "Blizzard "कहा जाता है। टाइफून (Typhoon )उष्ण - कटिबंधी प्रचंड विध्वंसकारी  अंधड़ तूफ़ान (Violent Tropical Storm )को कहा जाता है ये आमतौर पर बेहद की शक्ति और ऊर्जा लिए अपनी विनाश लीला का क्षेत्र पश्चिमी प्रशांत तथा भारतीय समुन्द्रों (Indian Oceans)को बनाते हैं। 

हरिकेन एक ऐसा उग्र -अंधड़ तूफ़ान है जो अपने साथ मूसलाधार बारिश तथा अतिवेगवान पवनों से मार करता है। इसमें पवनों की चाल ११९ किलोमीटर प्रतिघंटे के पार चली जाती है। Beaufort Scale पर इसका ताकत और परिमान १२ या इससे और भी अधिक आंका जाता था। 

वर्तमान में जिस हरिकेन ने प्युर्तो-रीको (उत्तरी अमरीकी द्वीप )को अपना निशाना बनाया है उसे "सफ़ीर सिम्प्सन स्केल" पर विनाशलीला के तहत ३. ० आंका गया है। 

टारनेडो :यह भी एक प्रकार का घूर्णनशील उग्र बवंडर होता है। इसकी आकृति फनेल आकृति के बादल जैसी, हाथी की सूंड सी रहती है जिसमे भयंकर घूर्णन करती हवाएं चक्कर काटती हुई आगे बढ़ती है। गनीमत है इनका मार्ग स्थल के ओर बढ़ते हुए संकरा ही रहता है एक सीमित क्षेत्र ही इस column of swirling wind से पैदा  तबाही  का  साक्षी बनता है। एक प्रचंड तूफानी तंत्र इसकी कोख में रहता है जिसके साये में जिसके तले (नीचे )यह आगे बढ़ता रहता है। 

यह हवा या पानी का ऐसा बवंडर (भंवर )होता है ,वातावर्त या जलावर्न होता है जो चपेट में आई चीज़ों को अपने केंद्र की और खींच -घसीट के ले आता है। और मज़े से उसे लिए आगे बढ़ जाता है। चंद मिनिटों की अवधि में केहर ढ़ा देता है. इसका वाटेक्स (Vortex )घूर्णन वायु या जल राशि रहती है यही वायु या जल की  घूर्णन शील भंवर - राशि तबाही मचाती है। तरह मिनिट से पहले इनकी चेतावनी प्रसारित नहीं की जा सकती। तबाही मचाके ये चलते बनते हैं चंद सेकिंड  से लेकर कई घंटा तक हो सकती है इनकी आक्रामक मुद्रा  इनकी यथा समय भविष्य वाणी का समय केवल तरह  मिनिट रहता है। इससे पहले कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। 
देखें सेतु :
https://www.youtube.com/watch?v=wlwyA-5iafg

टाइडल वेव या सुनामी (बंदरगाह पर पहुँचने विनाशकारी बेहद लम्बी दीर्घ लम्बाई वेव -लेंथ समुद्री तरंग ,यहां Tsu-सु का अर्थ बंदरगाह आउट Nami का अर्थ तरंग है ):यह ऐसी लम्बी समुद्री तरंग  है जो समुद्री तल में जल के नीचे Sub-duction Earth Quake से पैदा होती है जब एक प्लेट दूसरी पर चढ़के सरकती है तब पैदा होती है यह तरंग जो जल के नीचे तो शान्त भाव आगे बढ़ती है लेकिन तट की और पहुँचते -पहुँचते इसकी लम्बाई बेहद बढ़ जाती है और इसके ध्वंसात्मक प्रभाव भुगतने पड़ते हैं। 

इस सभी प्राकृत आपदाओं की फ़िज़िक्स की  चर्चा हम आगामी विज्ञानों के झरोखे के तहत "क्या और कैसे ?"में आगामी आलेखों में करेंगें। 

https://www.youtube.com/watch?v=W0LskBe_QfA

सन्दर्भ के लिए  
ये सेतु  भी देखें : (१ )(https://www.google.com/search?q=how+names+are+given+to+hurricanes&rlz=1CAACAP_enUS646US647&oq=how+names+are+given+to+hurricanes)

(२ )https://oceanservice.noaa.gov/facts/storm-names.html

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-09-2017) को रजाई ओढ़कर सोता, मगर ए सी चलाता है; चर्चामंच 2739 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'