शनिवार, 24 नवंबर 2012

संघर्ष करना ,जूझना छोड़िये नींद से .


Rather than rely on music and pills ,the trick lies in thinking differently about sleep

भगवान ने हमें सोने की जन्मजात क्षमता बख्शी है .सोने के लिए सायास प्रयत्न नहीं करना पड़ता है .फिर

 भी हम में से कितने ही ठीक से सो नहीं पाते .हरेक बीस में  से एक भारतीय किसी न किसी किस्म की नींद

खलल से ग्रस्त है .औरतें न सो पाने के मामले में मर्दों से बाज़ी मार रहीं हैं कुलमिलाकर 4.3%मर्दों के बरक्स

6.5%औरतें ठीक से सो नहीं पाती हैं .ये निष्कर्ष हाल ही में वारविक मेडिकल स्कूल ने निकाले हैं .

जो लोग दीर्घावधि तक नींद में होने वाली खलल से ग्रस्त रहतें हैं उनके लिए न सिर्फ दिल की बीमारियों के

खतरे का वजन बढ़ जाता है ,दोगुना ज्यादा इनके परस्पर संबंधों में भी खलल रहती आती  है .



क्या कहतें हैं निद्रा शरीर क्रिया विज्ञानी (Sleep physiologists)?

एक मर्तबा यदि आपने यह चर्वण करना शुरू कर दिया -"मैं ठीक से सो

नहीं पाता /पाती  हूँ आप समस्या के प्रति और भी ज्यादा सचेत होकर

सोचने लगते हैं ऊपर से नींद में खलल से पैदा दुष्प्रभाव आपको एक

दुश्चक्र में फंसाते चले जाते हैं .न सो पाना भी एक ओबसेशन ,बन जाता है

.आप समस्या की जुगाली करने लगे .उग्र रूप दे दिया उसे आपकी इसी

सोच ने .दिमाग भी इसका अभ्यस्त हो चला .मर्ज़ बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों

दवा की और होता भी यही है सारी  चोचले बाज़ी ,सारे रिचुअल्स ये करो

सोने से पहले वह न करो .आपकी बे -कलि बे -चैनी को कम नहीं कर पाते

और बढाते ही हैं .

समस्या का हल नींद की गोलियां नहीं हैं न ही हलकी रोशनियों में सोने से

पहले संगीत सुनना है हल आपके दिमाग में है सोच में है .

कुछ नया सोचिये Out Of Box  ,लीक से हटिये 

 निस्पृह भाव से नींद के न आने को भी देखिये , जूझिये मत तटस्थ हो देखिये हाँ नींद नहीं आरही है

.बिस्तर छोडके कुछ और मत करने लग जाइए .ऊर्जा की रिसन को ,क्षय को बचाइये लेटे  रहिये . देखते

रहिये विचारों के रेले को साक्षी भाव से .

पूछ देखिये किसी घोड़े बचके सो जाने वाले से भाई क्या करते हो बड़े खुशनसीब हो बे -फिकरी की नींद सोते

हो आखिर करते क्या हो इसे हासिल करने के लिए ."कुछ नहीं बस सो जाता हूँ "-ज़वाब मिलेगा .

दूसरी तरफ किसी अनिद्रा के मारे इन -सोम -नियेक से पूछ देखिये क्या करते हो ?

"क्या नहीं करता हूँ "-ज़वाब मिलेगा .नींद है की फिर भी दामन बचाके निकल जाती है .रात को सोने से

पहले  भूल के भी केफीन युक्त पेय नहीं लेता हूँ .गुनगुने पानी में lavender की बूंदे टपकाके नहाता हूँ सोने

से पहले .अरे साहब ख़ास relaxation CDs भी सुनता हूँ वगैरा वगैरा .

कुलमिलाकर यही सब क्रियाकर्म ,चिलत्तर आपको गहरा एहसास क्या यकीन दिलाते चले जातें हैं -"मैं सो

नहीं पाता  हूँ "दिमाग तो अनुकरण का अभ्यस्त है ही .हमारी अपनी ही सोच का गुलाम भी .कुलमिलाके

स्थिति बद से बदतर हो जाती है .

फिर दोहरा दें मर्ज़ बढ़ता गया ,ज्यों ज्यों दवा की .

मियाँ ग़ालिब कहते थे -मौत का एक दिन मुऐयन है ,नींद क्यों रात भर नहीं आती .

कैसे जड़ जमाता है अनिद्रा रोग (Insomnia)?

दिन आज अच्छा नहीं बीता तनाव में गया रात को वैसे ही नींद नहीं 

आयेगी .करूँ तो क्या करूँ ?शाम तो शाम है , नियम श : रोज़ चली आती है आपका खौफ बढ़ता जाता है -

"मैं तो सो नहीं पाऊंगा "मंत्र जाप चलता रहता है .नींद आपके लिए एक मुद्दा बन जाता है .आप ज्यादा ही

इस बाबत

सोचने लगते हैं .सोचते चले जाते हैं .दिमाग भी रात के समय का सम्बन्ध जागने से जोड़ बैठता है .बस इसे

ही माहिर नींद के, कह देते हैं Hyperarousal.

अच्छा निद्रालु (नींदिया )बनिए

LEARNING TO BE A GOOD SLEEPER

सहज स्वाभाविक प्रक्रिया है निद्रा देवी की गोद में ढुलक  जाना .हमारे शरीर को बचपन से इसका रियाज़ है

.आदत है .हमारी सोच ही बीच में व्यवधान पैदा करने लगती है .

संघर्ष  करना ,जूझना छोड़िये  नींद से .

Acceptance and Commitment Therapy is used at some sleep schools.

यह चिकित्सा व्यवस्था हमें ठीक उसका उलटा करने को कहती है जो हम तब करते हैं जब सो नहीं पातें हैं

.कभी भी बिस्तर छोडके नींद की सेज छोड़के  नींद न आने पर अपने लिए ड्रिंक मत तैयार कीजिये .उठकर

संगीत  मत सुनिए सोने के लिए .

क्या हुआ गर नींद नहीं आ रही है नींद न आने की असुविधा को भोगिये अनुभव कीजिये इसका भी। भागिए

मत इससे अगर आपका दिमाग इधर उधर भागता है उसे इधर ही मोड़िये ,नींद न आने की ओर .एक

सम्बन्ध रागात्मक बनाइये इस स्थिति से ताकि दिमाग को खबर हो जाए ,अब और जागते रहने की ज़रुरत

नहीं है .सम्बन्ध बन चुका है .कोई भगदड़ नहीं है .

शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

CAN'T SLEEP?

Rather than rely on music and pills ,the trick lies in thinking differently about sleep

भगवान ने हमें सोने की जन्मजात क्षमता बख्शी है .सोने के लिए सायास प्रयत्न नहीं करना पड़ता है .फिर

 भी हम में से कितने ही ठीक से सो नहीं पाते .हरेक बीस में  से एक भारतीय किसी न किसी किस्म की नींद

खलल से ग्रस्त है .औरतें न सो पाने के मामले में मर्दों से बाज़ी मार रहीं हैं कुलमिलाकर 4.3%मर्दों के बरक्स

6.5%औरतें ठीक से सो नहीं पाती हैं .ये निष्कर्ष हाल ही में वारविक मेडिकल स्कूल ने निकाले हैं .

जो लोग दीर्घावधि तक नींद में होने वाली खलल से ग्रस्त रहतें हैं उनके लिए न सिर्फ दिल की बीमारियों के

खतरे का वजन बढ़ जाता है ,दोगुना ज्यादा इनके परस्पर संबंधों में भी खलल रहती आती  है .



क्या कहतें हैं निद्रा शरीर क्रिया विज्ञानी (Sleep physiologists)?

एक मर्तबा यदि आपने यह चर्वण करना शुरू कर दिया -"मैं ठीक से सो

नहीं पाता /पाती  हूँ आप समस्या के प्रति और भी ज्यादा सचेत होकर

सोचने लगते हैं ऊपर से नींद में खलल से पैदा दुष्प्रभाव आपको एक

दुश्चक्र में फंसाते चले जाते हैं .न सो पाना भी एक ओबसेशन ,बन जाता है

.आप समस्या की जुगाली करने लगे .उग्र रूप दे दिया उसे आपकी इसी

सोच ने .दिमाग भी इसका अभ्यस्त हो चला .मर्ज़ बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों

दवा की और होता भी यही है सारी  चोचले बाज़ी ,सारे रिचुअल्स ये करो

सोने से पहले वह न करो .आपकी बे -कलि बे -चैनी को कम नहीं कर पाते

और बढाते ही हैं .

समस्या का हल नींद की गोलियां नहीं हैं न ही हलकी रोशनियों में सोने से

पहले संगीत सुनना है हल आपके दिमाग में है सोच में है .

कुछ नया सोचिये Out Of Box  ,लीक से हटिये 

 निस्पृह भाव से नींद के न आने को भी देखिये , जूझिये मत तटस्थ हो देखिये हाँ नींद नहीं आरही है

.बिस्तर छोडके कुछ और मत करने लग जाइए .ऊर्जा की रिसन को ,क्षय को बचाइये लेटे  रहिये . देखते

रहिये विचारों के रेले को साक्षी भाव से .

पूछ देखिये किसी घोड़े बचके सो जाने वाले से भाई क्या करते हो बड़े खुशनसीब हो बे -फिकरी की नींद सोते

हो आखिर करते क्या हो इसे हासिल करने के लिए ."कुछ नहीं बस सो जाता हूँ "-ज़वाब मिलेगा .

दूसरी तरफ किसी अनिद्रा के मारे इन -सोम -नियेक से पूछ देखिये क्या करते हो ?

"क्या नहीं करता हूँ "-ज़वाब मिलेगा .नींद है की फिर भी दामन बचाके निकल जाती है .रात को सोने से

पहले  भूल के भी केफीन युक्त पेय नहीं लेता हूँ .गुनगुने पानी में lavender की बूंदे टपकाके नहाता हूँ सोने

से पहले .अरे साहब ख़ास relaxation CDs भी सुनता हूँ वगैरा वगैरा .

कुलमिलाकर यही सब क्रियाकर्म ,चिलत्तर आपको गहरा एहसास क्या यकीन दिलाते चले जातें हैं -"मैं सो

नहीं पाता  हूँ "दिमाग तो अनुकरण का अभ्यस्त है ही .हमारी अपनी ही सोच का गुलाम भी .कुलमिलाके

स्थिति बद से बदतर हो जाती है .

फिर दोहरा दें मर्ज़ बढ़ता गया ,ज्यों ज्यों दवा की .

मियाँ ग़ालिब कहते थे -मौत का एक दिन मुऐयन है ,नींद क्यों रात भर नहीं आती .

कैसे जड़ जमाता है अनिद्रा रोग (Insomnia)?

दिन आज अच्छा नहीं बीता तनाव में गया रात को वैसे ही नींद नहीं 

आयेगी .करूँ तो क्या करूँ ?शाम तो शाम है , नियम श : रोज़ चली आती है आपका खौफ बढ़ता जाता है -

"मैं तो सो नहीं पाऊंगा "मंत्र जाप चलता रहता है .नींद आपके लिए एक मुद्दा बन जाता है .आप ज्यादा ही

इस बाबत

सोचने लगते हैं .सोचते चले जाते हैं .दिमाग भी रात के समय का सम्बन्ध जागने से जोड़ बैठता है .बस इसे

ही माहिर नींद के, कह देते हैं Hyperarousal.

अच्छा निद्रालु (नींदिया )बनिए

LEARNING TO BE A GOOD SLEEPER

सहज स्वाभाविक प्रक्रिया है निद्रा देवी की गोद में ढुलक  जाना .हमारे शरीर को बचपन से इसका रियाज़ है

.आदत है .हमारी सोच ही बीच में व्यवधान पैदा करने लगती है .

संघर्ष  करना ,जूझना छोड़िये  नींद से .

Acceptance and Commitment Therapy is used at some sleep schools.

यह चिकित्सा व्यवस्था हमें ठीक उसका उलटा करने को कहती है जो हम तब करते हैं जब सो नहीं पातें हैं

.कभी भी बिस्तर छोडके नींद की सेज छोड़के  नींद न आने पर अपने लिए ड्रिंक मत तैयार कीजिये .उठकर

संगीत  मत सुनिए सोने के लिए .

क्या हुआ गर नींद नहीं आ रही है नींद न आने की असुविधा को भोगिये अनुभव कीजिये इसका भी। भागिए

मत इससे अगर आपका दिमाग इधर उधर भागता है उसे इधर ही मोड़िये ,नींद न आने की ओर .एक

सम्बन्ध रागात्मक बनाइये इस स्थिति से ताकि दिमाग को खबर हो जाए ,अब और जागते रहने की ज़रुरत

नहीं है .सम्बन्ध बन चुका है .कोई भगदड़ नहीं है .

बंद कार में धूम्रपान करने का मतलब

बंद कार में धूम्रपान करने का मतलब

Just 10 mins in a car with a smoker can be harmful

बच्चे बहुत दुर्बल और नाज़ुक होते हैं इन्हें जल्दी ही शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचता है .बंद कमरों

कारों में बच्चों की मौजूदगी में धूम्रपान करना क़ानूनन धूम्रपान जन स्थानों पर न करने  के दायरे से बाहर

रह जाता है लेकिन यही सेकिंड हैण्ड स्मोक धूम्रपानी द्वारा उगला हुआ धुआं उनके लिए घातक बन जाता है

.बस दस मिनिट आप कार की अगली सीट पे बैठके धूम्र पान कर लीजिए जितना प्रदूषक बालक दिन भर में

झेलता है उसमें 30%इजाफा हो जाता है उसके कार की पिछली सीट पे बैठे बैठे .

रेस्तरा ,बार(शराब घर ),जूआ घरों में भी इतना प्रदूषण स्तर नहीं रहता जितना दस मिनिट के वक्फे में कार

में हो जाता है .एक अभिनव अध्ययन के यही नतीजे निकलें हैं .

अपने अध्ययन में रिसर्चरों ने तकरीबन 22 मर्तबा प्रदूषकों से गंधाती उस हवा का जायजा लिया था जो बंद

कार में कैद थी जिसमें घंटे भर में तीन सिगरेट फूंकी गईं  थीं ..

हर दफा उस प्रदूषक की मात्रा का भी हिसाब किताब रखा गया जो कार उत्सर्जित करती है हमारी हवा में

.सिगरेट से पैदा प्रदूषकों का भी आकलन किया गया हर बार .एक बार सामने की खिड़कियाँ बंद रखी  गईं

दूसरी मर्तबा 10 सेंटीमीटर इन्हें खुला रखा गया .जिस ऊंचाई पर पिछली सीट पे बैठा हुआ बच्चा सांस लेता

है उसी ऊंचाई पर प्रदूषकों का मानीटरन  (आकलन ,मापन ) किया गया .

वाहन के बाहर भी इन प्रदूषकों के स्तर को मापा गया .इनमें शामिल थे कणीय प्रदूषक (particulate matter

),polycyclic aromatic hydrocarbons (PAH),तथा कारबनमोनोऑक्साइड और निकोटिन .

PAH से असर ग्रस्त होने ,पीएएच प्रभावन का सम्बन्ध हमारे रोग रोधी प्रतिरक्षण तंत्र में पैदा होने वाली

खलल (और विक्षोभों )से जोड़ा गया है .

घर घर करते हुए सांस लेना बोले तो व्हीज़ ,बुद्धि कोशांक में बदलाव(IQ changes) तथा ALLERGIC

SENSITISATION

इस प्रभावन के आम दुष्प्रभाव बतलाये गए हैं .

सभी प्रेक्षणों में कार के अन्दर की हवा में प्रदूषकों का स्तर बाहर की हवा में मौजूद प्रदूषकों से तीन गुना

ज्यादा दर्ज़ किया गया था .

सन्दर्भ -सामिग्री :SCI-TECH  /MumbaiMirror ,NOVEMBER 23,2012/P19/Just 10 mints in a car

with a smoker can be harmful



सेहतनामा

सेहतनामा

(1)कब्जियत से राहत के लिए खूबानी

यदि मल त्याग में काफी जोर मशक्कत करनी पड़ती है ,कब्ज़ रहती है ,रेशा बहुल खूबानी (Apricots) का

सेवन

कीजिये .

(2)माहवारी में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए थोड़ी देर कमल आसन की मुद्रा में बैठिएगा .ऐसा

करने से नितम्ब (Hips)खुलते है श्रोणिक्षेत्र (Pelvis)को उत्तेजन प्राप्त होता है .

Suffering from mental discomfort ?Sit in the lotus position -it opens the hips and stimulates the

pelvis.

(3)ECTASY HELPS FIGHT OFF POST -TRAUMATIC STRESS

Ecstasy -the dance drug helps people suffering from post -traumatic stress  disorder benefit more from psychotherapy .Experts asserted that ecstasy reduces fear and defensiveness and increases trust between patient and the therapist, thus enhancing the effects of the psychotherapy

Ecstasy is the street name for methylenedioxymethamphetamine (MDMA), a mildly hallucinogenic drug that generates feelings of euphoria in those who take it .Its most common side -effect is hyperthermia ; drinking large quantities of water to combat the intense thirst produced by taking the drug may result in fatal damage to the body's fluid balance .Its manufacture ,sale ,use ,and possession are illegal ,

Ecstasy is  a sense of extreme wellbeing and bliss .The word applies particularly to trance states dominated by religious thinking .While not necessarily patholgical , it can be used by epilepsy (especially of the temporal lobe ) or by Schizophrenia or mania.

एक्सटेसी का मतलब है बिला वजह आह्लाद और आनंदातिरेक .यहाँ तक के खुद पर से व्यक्ति का नियंत्रण

हट जाता है .अंतर बाधा और अवरोध अन्दर से गिर जाते हैं फिर खेलो खुला खेल

फरुक्काबादी(फरुख्खाबादी ) यौन का ,यौन क्रीडा करो खुलके .

,संयम ,नैतिक पहरा तो हटा दिया इस मौज मस्ती की दवा ने जो एक प्रतिबंधित नशीला पदार्थ है अलबत्ता

इसके चिकित्सीय इस्तेमाल की माहिरों को इजाज़त है जैसे कैंसर के मरीजों को मार्फीन आधारित तेज़ दर्द

नाशी देने की छूट  है ताकि बीमारी की अंतिम अवस्था में वह मर तो चैन से सकें .  ऐसे ही जिन लोगों ने

अपनी आँखों के आगे अपनों  का कत्ल देखा है (चौरासी के दंगा पीड़ित ,कोंग्रेस पीड़ित लोग ) और जो

सदमे का शिकार हो गए हैं उनके लिए सलाह मशविरा के साथ साथ एक्सटेसी दी जाती है .

जैसा आपने पढ़ा दृष्टिभ्रम ,श्रुति भ्रम पैदा कर सकती है यह प्रतिबंधित दवा मौज मस्ती के लिए लेते रहने

से , हैलूसिन -जनिक है यह दवा .आम इस्तेमाल के लिए नहीं है यह .


गुरुवार, 22 नवंबर 2012

शौर्य बल के सामने यह कैसा आदर्श ?

शौर्य बल के सामने यह कैसा आदर्श ?

ओसामा बिन लादेन को अमरीका ने उसके घर पाकिस्तान में जाके मारा .पाकिस्तान का तमाम सैन्य  तंत्र , खुफिया तंत्र 

,आई एस आई सभी इस दरमियान निस्पंद बने रहे किसी को कानों कान खबर नहीं हुई लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति ने उस सारी 

कारवाई का आँखों देखा हाल देखा .

अब ज़रा भारत की ओर  देखिये -अपने ही घर में अपराधी को मारने में हम डर रहे थे .

होना यह चाहिए था घोषित करके कसाब को फांसी दी जाती बतलाया जाता देर से सही लेकिन हम कसाब को फांसी दे रहें हैं 

,जो 

भी भारत की ओर  आँख उठाएगा उसका यही हश्र होगा .एक हौसला बढ़ता देश का .लेकिन हुआ क्या ?

हमारे गृह मंत्री अपनी पीठ ठोक रहें हैं यह कहकर मैं खुद पुलिस महकमे में रहा हूँ .प्रधानमन्त्री तक को इस फांसी का इल्म 

नहीं था न सोनिया जी को कुछ मालूम था .

गृह मंत्री जी इसका निहितार्थ क्या है जानना नहीं चाहेगें .हम बतला ते हैं आपको .

हम अपने ही घर में कसाब जैसे दुर्दांत घृणित आतंकी को फांसी भी डर डरके छिप छिप के दे रहें हैं जैसे हम खुद कोई अपराध 

कर रहें हों .ये कैसा सन्देश प्रसारित कर रहें हैं आप हमारे शौर्य बल के लिए ? 

क्या वह भी शत्रु का प्रतिकार यूं ही डर डरके करें .ये कैसी और किस काम की गोपनीयता है .लशकरे तैयबा की धमकी तब भी 

मिलनी थी अब भी मिल रही है .तब कुछ मान तो रहता एक सन्देश तो जाता -देखो 26/11 के आतंकी को वहीँ गेट वे आफ 

इंडिया पर हम लटका रहें हैं इसकी मूक नहीं लाइव ड्रिल होनी चाहिए थे गृह मंत्री जी .आइन्दा ध्यान रखें अब अफज़ल की बारी 

है .

सेहतनामा

मोटापे का सकारात्मक पहलू

मोटे ताज़े लोग अपने हम उम्र छरहरे हमजोलियों के बरक्स ज्यादा प्रसन्न बदन ,ज्यादा खुश रहते  है इनकी

जीनी बुनावट जीवन इकाइयां इनके अवसाद की ज़द में आने की संभावना को भी कम रखती है .कनाडा की

McMaster University के साइंसदानों ने अपने एक अभिनव अध्ययन से ऐसे ही निष्कर्ष निकाले हैं .

साइंसदानों के मुताबिक़ कथित 'Fat Gene 'FTO खुशमिजाजी ,प्रसन्नचित्त रहने होने का भी जीवनखंड

(जीवन इकाई ,जीन )है .

FTO एक Fat mass (चर्बी की तौल )और मोटापे से सम्बद्ध प्रोटीन है .मोटापे की ओर  ले जाने में इसका बड़ा

हाथ रहता है लेकिन अवसाद के जोखिम के वजन को भी यह प्रोटीन 8 %कम कर देता है .

लेकिन भाई जान मोटापा न तो खुश रहने का नुसखा है न अवसाद कम करने की तरकीब .


बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है नृत्य अभ्यास 

Dancing can boost your child's mental health

नियमित नृत्य का अभ्यास नौनिहालों खासकर किशोरियों के मानसिक

स्वास्थ्य में निरंतर सुधा ला सकता है ,स्ट्रेस (किसी भी किस्म का दवाब

),थकान और सर दर्द को दूर भगा सकता है Orebro University Hospital

की फिजिकल थिरेपिस्ट Anna  Duberg के नेत्रित्व में संपन्न इस

अध्ययन के मुताबिक़ नृत्य का प्रशिक्षण एक रणनीति के रूप में अवसाद

और क्षीण ऊर्जस्विता (Depression और Low spirits) से बचे रहने का  एक

कारगर

नुस्खा साबित हो सकता है .

अलावा इसके नृत्य का अभ्यास आत्म विश्वास में वृद्धि करता है रोज़ मर्रा

की समस्याओं से बेहतर ढंग से निपटने में सहायक सिद्ध होता है .


रूक्ष चमड़ी के लिए ज्यादा पके हुए केले का फेस मास्क 

अतिरिक्त रूप से ज्यादा पका हुआ केला अतिरिक्त तैलीय भी हो जाता है

.रूक्ष  चमड़ी वालों के लिए बेहतरीन साबित होता है इसका फेस्मास्क

बनाके इस्तेमाल करना .आप भी आजमाइए .

Bananas that are slightly overripe are best used in face masks or dry 

skin because they contain excess oil.

Grapes contain flavonoids that can reduce damage caused by 

cardiovascular disease.


ब्लड वेसिल्स (रक्त वाहिकाओं )और हृद रोगों से होने वाली नुकसानी की भरपाई flavonoids से भरपूर पके

हुए अंगूर बेहतरीन तरीके से करने में सहायक  सिद्ध होतें हैं .

Flavonoids:These are naturally occuring phenolic compounds belonging to a group that include

many plant pigments.

सेहतनामा


flavonoids

What can high-flavonoid foods do for you?

  • Help protect blood vessels from rupture or leakage
  • Enhance the power of your vitamin C
  • Protect cells from oxygen damage
  • Prevent excessive inflammation throughout your body
What events can indicate a need for more high-flavonoid foods?
  • Easy bruising
  • Frequent nose bleeds
  • Excessive swelling after injury
  • Frequent colds or infections


Sources of flavonoids include: apples, apricots, blueberries, pears, raspberries, strawberries, black beans, cabbage, onions, parsley, pinto beans, and tomatoes.

डरे हुए क़ानून की फांसी


डरे हुए क़ानून की फांसी

मर्सी पिटीशन किसके लिए होता है ?

यह प्रावधान उसके लिए रखा गया था जो आवेश में आके कोई गुनाह ज़रूर कर गया लेकिन अपराधी

मनोवृत्ति का व्यक्ति नहीं है और अब पछता रहा है अन्दर से . यह प्रावधान केवल देश के  नागरिकों के

लिए है . राष्ट्रपति    देश के नागरिकों का होता है .आतंकवादियों या षड्यंत्रकारियों का नहीं .

अफज़ल गुरु एक नियोजित षड्यंत्रकारी रहा है जिसने नियोजित तरीके से संसद पर हमला करने का षड्यंत्र

रचा था .उसे राष्ट्रपति की दयायाचिका पे गत छ :सालों से क्यों रखा गया है ?

जिस देश में क़ानून वोट बैंक देखके बनाया और लागू किया जाता है उसकी सरकार की भी कोई इज्ज़त नहीं

करता है .आपको याद होगा शाहबानो का हक़ भी इसी वोट बैंक को देख के छीना गया था .कितनी भद्द पिटी

थी तब तत्कालीन सरकार की .तब यही लोग थे ,आज भी यही हैं .



आज लश्करे तैयबा के आदमखोर इसी लिए सरकार को धमका रहे हैं .

पूछा जा सकता है इतना डर  डर के छिपछिपाकर कसाब को फांसी क्यों दी गई ?

क़ानून का पालन करना धर्म निष्ठ होता है आध्यात्मिक उत्कर्ष है न कि छिपके किया जाने वाला अपराध

.आज केंद्र की सरकार की कोई इसीलिए इज्ज़त ही नहीं करता सरकार क़ानून का पालन करना और

करवाना भूल गई है .जो क़ानून का फंदा डालके विकलांगों का फंड खा रहा था उसे सरकार ने विदेश मंत्री

बना दिया पहले यही कोयले से मुंह वाला आदमी क़ानून मंत्री था .



जैसा चेहरा वैसा क़ानून 

इस देश में बाला केशव ठाकरे साहब के लिए और कानून था .अब वो चले गएँ हैं ,उनकी संततियों के लिए

कुछ और रहेगा ,गडकरी के लिए कानून कुछ और वाड्रा क़ानून और तथा शाहीन जैसी आम खातून के लिए

कुछ और है .अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया  ने अपने एक सम्पादकीय में लिखा -भारत में  सीमित   अर्थों में

ही प्रजातंत्र है ?


राजनेताओं को संसद में एक दूसरे  को  अप वचन  बोलने की खुली  छूट है ,लेकिन  अभिव्यक्ति की  

    आज़ादी के मायने आम आदमी के लिए कुछ और हैं .वह सिर्फ गैर -विवादास्पद ब्यान ही दे सकता है जो 

चित्त को सभी के शांत प्रशांत करता हो बस और      कुछ    कहने  की छूट उसे   हासिल  नहीं    है .

अखबार आगे लिखता    है :पाकिस्तान  


 के कुछ  तालिबान नियंत्रित हिस्सों   में लड़कियों  को कुछ बोलने पर   गोली मार दी जाती है हिन्दुस्तान में 

जेल में डा ल दिया जाता है . 

 अखबार की इस  राय   से हम सहमत  नहीं है कमसे कम पाक अपनी विचार धारा में स्पस्ट है 14 वीं शती 

का क़ानून उसे 

चलाना है तो चलाना है खुलकर उसकी कमसे कम नीति तो स्पस्ट है .यहाँ तो कोई नीति ही नहीं है मुंह 

देखके क़ानून लागू किया जाता है . 

 मुंबई की शाहीन और उसकी सखी रीना के मुद्दे पे अब चंद पुलिस वालों को निलंबित कर दिया जाएगा   

  उन्हें मोहरा बना दिया जाएगा लेकिन       उन्हें कोई कुछ नहीं  कहेगा जिन्होनें उनपे यह धत कर्म करने 

का दवाब बनाया .कहेगा तो वोट मारे जायेंगे .  

भाई साहब यह तो एक फिलर था देखा गया ठाकरे के बाद अब शिव सेना क्या बची है ?

ये सब उस कठपुतली सरकार की वजह से ही हो रहा है जो दिल्ली में बैठी है .वहां की पुलिस को रात के अँधेरे



में   संत रामदेव को धर लेने  का हक़ हासिल है लेकिन यह सब कुछ करवाने वाली शीला दीक्षित जी

आदरणीय चोगा पहने घूम रहीं हैं .

अंधेर नगरी चौपट राजा ,टके सेर भाजी ,टके सेर खाजा .

भाई साहब हमारे पास एक अखबार नहीं है अगर हो तो हम इन नेताओं की कुर्सी के नीचे आग लगा दें ताकि

ये उसपे बैठ ही न सकें .अखबारों के पास सूक्ष्म विश्लेषण आ जाए तो वह विचारक न    बन जाएँ .मोटी

स्थूल बात ही करते हैं अखबार

नेताओं का सारा  चिलत्तर इस मुहावरे में  मुखर हो जाता है :

"भुस में आग लगाए , ज़मालो  दूर खड़ी "