सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

इस्लामिक कट्टरपंथ की गोद में खेलने वाले मार्क्सवाद के टुकड़खोर बौद्धिक गुलाम इन्हीं के हाथों एक दिन मारे जाएंगे

इस्लामिक कट्टरपंथ की गोद में खेलने वाले मार्क्सवाद के टुकड़खोर बौद्धिक गुलाम इन्हीं के हाथों एक दिन मारे जाएंगे। इन्हें तब या तो जबरिया इस्लाम क़ुबूल करना पड़ेगा वगरना गैर -इस्लामियों के खून का सिलसिला इन्हीं से शुरूहोगा। क़ानून की नज़र में रोहित वेमुला का मामला भले आत्महत्या का  रहा हो लेकिन उस  मासूम को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की तरफ ठेलने वाले ये ही बौद्धिक भकुए थे। जेएनयू (जनेऊ )की दामाद अब ये बौद्धिक गुलाम नहीं रहे है  वह स्थान कट्टरपंथी इस्लाम के हाथों आ गया। 

ऐसी क्या मजबूरी है मायनो खिलौना बने रहने की ?

नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज़ को चली  

भूपेंद्र सिंह हुड्डा  पहले तो हरयाणा में आग लगवाके जमालो बने तमाशा देखते रहे। वाड्रा से नजदीकी और हमदर्दी के लिए जाने जाने वाले शातिर हुड्डा पहले तो एंटोनियो मायनो उर्फ़ सोनिया गांधी और उनके मंदमति शहजादे की शह पर हरयाणा को सुलगवाते रहे अब अनशन पर बैठने का ढोंग रच रहे हैं।

क्या बरखा जब कृषि सुखाने 

जां बाज जाट कौम को पहले तो चूढ़ों चमारो के साथ मिलकर प्रदेश में गैर -जाटों की संपत्ति को लूटने और आग के हवाले करने के लिए ये प्रदेश के दिखाऊ रहनुमा उकसाते रहे अब अभिनय कर रहें हैं अजिटेशन वापस लेने और आरक्षण के दावानल को रोकने का। जबकि प्रदेश को बेहद की आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। कौम के राष्ट्रवादी ज़ज़्बे को आंच लगी है।

एक स्वतंत्रता सैनानी के परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस शख्श ने जिसे हरयाणा ने सिर आँखों पर बिठाए रखा अपने प्रांत और कौम की साख पे ही बट्टा लगा दिया।ऐसी क्या मजबूरी है मायनो खिलौना बने रहने की ? 

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

अफज़लों से ज्यादा खतरनाक दिख रहें हैं ये लोग।इनके लिए खुलाखेल फरुख्खाबादी है। गैर -जाटों के स्कूल,निजी आवास,संपत्ति इनके निशाने पर आ चुकी है। देशी -विदेशी ब्रांड के स्टोरों को ये चुन चुनकर लूट रहे हैं। गैरजात तबके के तमाम लोग आतंकित हैं इनकी लूटपाट और दहशतगर्दी से। लोग अपने को सुरक्षित नहीं देख रहे हैं

ये है आरक्षण के नाम पर हरियाणा में चमार चूढ़ों के साथ मिलकर लूट पाट करने वालों की सच्चाई। चंद जाटों में वही तबका आ घुसा है जिसने १९८४ के सिख दंगों में मारकाट लूटपाट की थी। इनके उत्प्रेरक बने हुए हैं चार उचक्के चालीस चोर कांग्रेसी जो सारी तबाही के प्रायोजक हैं। इनके आका है रक्तरंगी लेफ्टिए। ये ही लोग ट्रक ट्रेक्टर भरभरकर लोगों को हज़ार रुपया प्रतिव्यक्ति दिहाड़ी पर लूटपाट करने के लिए रोहतक और हरियाण के दीगर शहरोंकी ओर भेज रहे हैं। कल को यही दंगा जीवीकहेंगें -मोदी ने पहले गुजरात कराया अब हरियाण।


देखिये हरियाणा के जाटों की एक आर्थिक  झांकी ,पदप्रतिष्ठा और सामाजिक हैसियत जो हरियाणा की कुल आबादी का मात्र २७ फीसद हैं और तमाम वह पद हथियाए हुए हैं जो मायने रखते हैं पद प्रतिष्ठा और रुतबे में।

हरियाणा में :

(१) मंत्रिमंडल में कुल ६३ फीसद जाट मंत्री हैं।

(२)७१ %जाट हरियाणा सिविल सर्विस में हैं।

(३) इंडियन पुलिस सर्विस में इनकी कुल हिस्सेदारी ६९%हैं।

(४ )  अलाइड आईएएस सेवाओं में इनकी हिस्सेदारी है ५८ % .

(५ )अन्य सरकारी सेवाओं में जाटों की हिस्सेदारी कुल ७१% है।

(६) ४३%पेट्रोल पम्प जाटों के पास हैं।

(७)४१ %गैस एजेंसियां जाटों के पास हैं।

(८)रीअल एस्टेट में इनकी भागेदारी ३९% है।

(९)६९%हथियारों के लाइसेंस जाटों के नाम हैं।

(१० )इसके बाद भी ये हाथों में कटोरा लेकर नहीं लठ्ठ लेकर  आरक्षण की आड़ में निरीह गैर -जाट जनता को चुनचुनकर लूट रहे हैं। आतंकित किए हुए हैं।

 अफज़लों  से ज्यादा खतरनाक दिख रहें हैं ये लोग।इनके लिए खुलाखेल फरुख्खाबादी है। गैर -जाटों के  स्कूल,निजी आवास,संपत्ति इनके निशाने पर आ चुकी है। देशी -विदेशी ब्रांड के स्टोरों को ये चुन चुनकर लूट रहे हैं। गैरजात तबके के तमाम लोग आतंकित हैं इनकी लूटपाट और दहशतगर्दी से। लोग अपने को सुरक्षित नहीं देख रहे हैं।    

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

पहले पुरुष्कार फिर डीलिट की कथित डिग्री लौटाने वाले लौटंकों ,चार उचक्के चालीस चोर कांग्रेसियों और लेफ्टीयों ने आज देश को आग के जिस मुहाने पे लाकर खड़ा कर दिया है वह जनेऊ से लेकर हरयाणा जाटआरक्षण आंदोलन तक आ पहुंचा है। उसी की सामूहिक अभिव्यक्ति इस रचना में हुई है जो किसी व्यक्ति की अनुभूति न रहकर समष्टिगत तदानुभूति बन गई है। वाट्स ऐप पर घूम रही थी ये रचना। क्यों न इसका विस्तार दिग्दिगांतरों तक हो फेस बुक से लेकर वाया ट्यूटर ब्लॉग जगत तक हो इसी मंशा के साथ आप तक पहुंचाई गई है ये भारतधर्मी समाज के उदगार की धारा :

पहले पुरुष्कार फिर डीलिट की कथित डिग्री लौटाने वाले लौटंकों ,चार उचक्के चालीस चोर कांग्रेसियों और लेफ्टीयों ने आज देश को आग के जिस मुहाने पे लाकर खड़ा कर दिया है वह जनेऊ से लेकर हरयाणा जाटआरक्षण आंदोलन तक आ पहुंचा है। उसी की सामूहिक अभिव्यक्ति इस रचना में हुई है जो किसी व्यक्ति की अनुभूति न रहकर समष्टिगत तदानुभूति बन गई है। वाट्स ऐप पर घूम रही थी ये रचना। क्यों न इसका विस्तार दिग्दिगांतरों तक हो फेस बुक से लेकर वाया ट्यूटर ब्लॉग जगत तक हो इसी मंशा के साथ आप तक पहुंचाई गई है ये भारतधर्मी समाज के उदगार की धारा :



खतरे का उद्घोष बजा है ,रणभूमि तैयार करो ,

सही वक्त है चुनचुन करके ,गद्दारों पर वार करो। 

आतंकी दो चार मारकर ,हम खुशियों से फूल गए ,

सरहद की चिंताओं में हम ,घर के भेदी भूल गए। 

सरहद पर कांटें हैं लेकिन ,घर के भीतर नागफणी ,

जिनके हाथ मशालें सौंपी ,वो करते हैं आगजनी। 

ये भारत की बर्बादी के ,कसे कथानक लगते हैं ,

सच तो दहशतगर्दों से ,अधिक भयानक लगते हैं। 

संविधान ने सौंप दिए हैं ,अस्त्र  शस्त्र आज़ादी के ,

शिक्षा के परिसर में नारे ,भारत की बर्बादी के। 

अफज़ल पर तो छाती फटते देखी है बहुतेरों की ,

जिस अफज़ल को न्यायालय ने ,आतंकी का नाम दिया ,

उस अफज़ल की फांसी को बलिदान बताने निकले हैं, 

और हमारे ही घर में हमको धमकाने निकलें हैं। 

बड़ी विदेशी साजिश के ,हथियार हमारी छाती पर ,

भारत को घायल करते ,गद्दार हमारी छाती पर। 

नाम कन्हैयाँ रखने वाले ,कंस हमारी छाती पर ,

माल उड़ाते जयचंदों के वंश हमारी छाती पर। 

लोकतंत्र का चुल्लू भरकर ,डूबमरो तुम पानी में ,

भारत गाली सह जाता है ,खुद अपनी रजधानी में। 

आज वतन को खुद के पाले घड़ियालों से खतरा है ,

बाहर के दुश्मन से ज्यादा ,घरवालों से खतरा है। 

देशद्रोह के हमदर्दी हैं ,तुच्छ सियासत करते हैं ,

और वतन के गद्दारों की ,खुली वकालत करते हैं। 

वोटबैंक की नदी विषैली ,उसमें बहने वाले हैं ,

आतंकी इशरत को ,अपनी बेटी कहने वाले हैं। 

सावधान अब रहना होगा ,वामपंथ की चालों से ,

बचकर रहना टोपी पहने ,ढोंगी मफलर वालों से। 

राष्ट्रवाद के रखवालों मत ,सत्ता का उपभोग करो ,

दिया देश ने तुम्हें पूर्ण ,उस बहुमत का उपयोग करो। 

हम भारत के आकाओं की ,खामोशी से चौंके हैं ,

एक शेर के रहते कैसे ,कुत्ते खुलकर भौंके हैं। 

अगर नहीं कुछ किया ,समूचा भार उठाने वाले हैं ,

हम भारत के बेटे भी ,हथियार उठाने वाले हैं। 

पूरा भारत धर्मी समाज इसी पीड़ा से आज गुजर रहा है जिसकी तदानुभूति हर पढ़ने वाले को भी होगी। 

भुस में आग लगाय ,जमालो दूर खड़ी

भुस में आग लगाय ,जमालो दूर खड़ी (सब जानते हैं कौन हैं इस दिशाहीन हिंसक आंदोलन के पीछे ,हेराल्ड के दाग धौ रहें हैं ये लोग ,रक्तरंगी लेफ्टीयों के हाथों में खेल रहे हैं ,जनेऊ से हरयाणा तक ये सब जेहादी मानसिकता के कांग्रेसी और लेफ्टीयों का किया धरा है जिन्हें एक चायवाले की तरक्की रास नहीं आ रही क्योंकि इनका स्कैम-  दर -स्कैम   का बारहमासी धंधा चौपट हो गया ,इनकी इसी हताशा का फल है देश की वर्तमान स्थिति जो १९४७ की तरह विस्फोटक रूप ले रही है।   अराजकता की ओर ले जाने वालों की शिनाख्त कर लीजिए कहीं आइन्दा अपना वोट डालते समय चूक न हो जाए।  

जेहादी मानसिकता के आराजक तत्वों के खिलाफ खेलने वाला तत्त्व जाट नहीं हो सकता कुछ और होगा

हरियाणा जाट आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।  हमारा तर्क यह है नज़दीकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह आंदोलन क्यों नहीं है जो जाटों  की खासी बड़ी सु-शिक्षित पट्टी है। हर मायने में इस पट्टी का जाट हरयाणा के जाट से आगे है चाहे वह मेधा हो या शौर्य।सिर्फ इसलिए कि वहां मुलायम सिंह संचालित   सरकार है बीजेपी की नहीं है। निशाना मोदी नहीं देश बन रहा है हरयाणा के सुविधाएं और संस्कृति के बचे खुचखुचे अवशेष बन रहे हैं।

अपढ़ रहना चाहता है क्या ये जेहादी मानसिकता के हाथों में खेलने वाला तबका। या सरे आम राष्ट्र -विरोधी ताकतों के हाथों खेल कर गौरवानित होना चाहता है। 

जेहादी मानसिकता के रक्तरंगी लेफ्टिए ,कांग्रेस के चोर -उच्चक्के चालीस चोर इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं। एक तो कांग्रेसी  -कम्युनिस्ट ऊपर से जेहादी मानसिकता। करेला और नीम चढ़ा। नतीजा सामने है -ये लोग हरयाणा के  स्कूल मदरसों विश्व -विद्यालयों को भी निशाने पे ले रहे हैं। गर्ल्स हॉस्टिल में भी जबरिया घुस रहे हैं। किधर से आर्थिक -सामाजिक  राजनीतिक रुतबे  में  पिछड़े हैं ये जेहादिये ?कोई जाट समझाए ?

हमारा मानना है एक राष्ट्रीय आरक्षण आयोग गठित किया जाए। आर्थिक आधार पर आरक्षण के मानक तैयार किए जाए। देश की  संपत्ति को आग लगाने वालों को अन -बेलेबिल वारंट पर अंदर किया जाए।

बात साफ़ है ये बुरा न मानो होली  अंदाज़ में चुन चुन कर जाट -गैरजाट में से छंटनी करके चुनिंदा  लोगों और संस्थानों को ही निशाने पे ले रहे हैं। कैसा आंदोलन है ये ?

जिस बीबीएस  पठानिया ,फाउंडर पठानिया पब्लिक  स्कूल ,रोहतक ने अपना सारा जीवन हरियाणा को शिक्षित सुसंकृत करने में निकाल दिया अभी उसे शरीर छोड़े जुम्मा जुम्मा आठ रोज़ भी नहीं हुए - स्कूल की संपत्ति को आग लगाकर श्रृंद्धांजलि दी है हरयाणा के कथित जाटों ने ,जिन्हें  जाट कहने में अब संकोच हो रहा है।

ये कैसे पिछड़े हैं जो एक राष्ट्र को अराजकता की  ओर ले जाना चाहते हैं।ये पिछड़े है या सिरफिरे ? खुद अपने प्रदेश को आग लगा रहे हैं सिर्फ इसलिए कि वहां एक गैर -जाट मुख्यमंत्री है  जिसे कुछ सिरफिरों ने पाकिस्तानी कहने की भी हिमाकत की थी। ठीक वैसे ही जैसे एक अक्ल से पैदल बुद्धिलाल ललुवे ने लालकृष्ण आडवाणी को सिंधी पाकिस्तानी कहने की धृष्टता की थी। जबकि उस वक्त पाकिस्तान अस्तित्व में भी नहीं था जब आडवाणी जन्मे -भारत अखंड भारत था तब जिसे अब खंड खंड करने की साजिश अब नियोजित तरीके से चल रही है।

सिर्फ एक मोदी को हटाने के लिए।

 चंद सिरफिरे अगले चुनाव में मुंह की खाएंगे। इन्हें बेलट से मारा जाएगा। तब ही इस दौर में तामशबीन जाट नेताओं को अक्ल आएगी। जो पूरी शिद्दत से तमाशबीन बने हुए हैं जैसे हरियाणा से इनका कोई लेना देना ही न हो।बे -मुरव्वत ,बे -गैरत ,अ -राष्ट्रीय तमाशबीन हैं ये लोग। 

नोट :कृपया गौरवान्वित शुद्ध रूप पढ़ें गौरवानित के स्थान पर।

जेहादी मानसिकता के आराजक तत्वों के खिलाफ खेलने वाला तत्त्व जाट नहीं हो सकता कुछ और होगा


बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

Her message was simple: Put children first; give kids a chance

Ishita Katyal speaking at TED 2016Ishita Katyal speaking at TED 2016

हमारे देश भारत में विवाह ही नहीं कैरीयर्स भी बालकों के अनुबंधित (अरेंज्ड )होते हैं। मुझे याद है मैं जब नौवीं कक्षा  में पहुंचा बेहद सम्मोहन था मुझे संगीत में आगे बढ़ने का,साहित्य में कुछ कर गुज़रने का । वजह मुझे बचपन से ही न सिर्फ गाने  का शौक था मेरे सुख्खकन मामा (श्री सुख्खन लाल शर्मा ,शागिर्द उस्ताद एहमद जान थिरकवा साहब ,लखनऊ घराना )मुझे साथ बिठा लेते तबले का रियाज़ करते वक्त ,मुझसे फिल्म  सांग गवाते -गौरी बुलाए तेरा साँवरिया ,मनाये तेरा साँवरिया मान भी जा ... खुद बेहतरीन संगत करते। आज भी उनके तबले के बोल कानों में गूंजते हैं। लेकिन मैं संगीत में कुछ करूँ  इससे पहले मुझे विज्ञान विषय ही पढ़ने पड़े  -विज्ञान ,जीवविज्ञान ,इतिहास -नागरिक -शास्त्र -भूगोल ,हिंदी और अंग्रेजी। नतीजा दसवीं की परीक्षा में ग्रेस मार्क्स के साथ हम उत्तीर्ण तो हो गए लेकिन थर्ड क्लास का ठप्पा लग गया। 

ग्यारवीं में पहुंचे हम फिर मचले ,फिजिक्स केमिस्ट्री मेथ्स (प्रोफेशनल ग्रुप )के स्थान पर हम ,फिजिक्स ,केमिस्ट्री ,जीवविज्ञान पढ़ना चाहते थे।गणित से पिंड छुड़ाना चाहते थे , ऐसा हमें मौक़ा नहीं दिया गया घर के बड़ों के आगे हम खुलके कुछ भी तो नहीं कह पाते थे। वल्लाह हिंदी ,अंग्रेजी ,रसायन शाश्त्र ने हमारी लाज रखी ,हम ५७ %अंक लेकर आइएससी (इंटरमीडिएट साइंस )में उत्तीर्ण हुए।  गणित में मात्र ५२ % अंक ही थे ,दसवीं में तो ४२ % ही थे। 

बीएससी किया फिजिक्स केमिस्ट्री मेथ्स ,हिंदी कम्पलसरी के संग बेमन से। वही पुरानी कहानी -गणित में मात्र ५२ %अंक ,रसायन शाश्त्र में ६९ %. ,हिंदी में ६२ %अंक। 

रुझान साहित्य की तरफ हो चला था बारवीं तक आते आते।थेंक्स टू माई टीचर्स -जिन्होनें हमारी साहित्यिक अभिरुचि का परिमार्जन किया।  म्यूज़िक वाज़ माय फस्ट लव ,लिटरेचर इनफेचुेटिड मी आलवेज़। 

ज़नाब एमएससी करना पड़ा फिजिक्स में। ये सबकुछ उनके आदेश पर हुआ जिनकी चलती थी सुनी जाती थी। पास तो हो गए अंक भी ५९.२ % ले गए ,लेकिन एक कसक बनी रही। 

प्रवक्ता भी बन गए ,कामयाब भी रहे अध्यापन में ,लेकिन विज्ञान पत्रकारिता की ओर  हम कब मोहित हुए आगे बढे पता ही न चला। ढूंढ ही लिया जिसकी तलाश थी खुद में से। साधन बना निरंतर साहित्य और भौतक विज्ञानों का अनुशीलन। अखबार और रेडिओ से हमें खूब प्रोत्साहन मिला। विज्ञान पत्रिकाओं ने सर पे बिठाए रखा सालों साल। 

आज शिकायत किसी से कुछ भी नहीं है एक कसक है काश ऐसा होता। ये कसक एक हूक  में बदल गई नीचे दी हुई रिपोर्ट पढ़के। सोचा अपना व्यक्तिगत अनुभव आपसे शेयर करूँ। 

फूल से कोमल होते हैं बच्चे और उनकी सुकुमार भावनाएं ,,पसंदगी ,ना -पसंदगी ,कुण्डली मारके बैठ जाते हैं घर के बड़े उन भावनाओं पर। बच्चे का सहज रुझान न देखकर उसे के रोबोट नुमा बना देते हैं -अपनी अपेक्षाओं ,ना -कामयाबियों को ,दबी हुई वासनाओं को उन पर आरोपित कर देते हैं हम लोग। अपनी नाकामयाब महत्वकांक्षाओं को हम बच्चों में फलित होते देखना चाहते हैं। क्यों ?

अजीब बात है रूचि का भी निर्धारण हम लोग करने लगते हैं। और इसीलिए कितने ही बच्चे अभिव्यक्त नहीं हो पाते अपना सौ फीसद नहीं दे पाते।  

10-year-old Indian girl wows brainiacs' meet

VANCOUVER: There was jetlag from travelling 13 time zones, daddy's absence that was keenly felt, and the brilliance of the world's brainiacs arrayed before her.

None of this fazed Ishita Katyal, a 10-year-old Pune writer and middle-schooler who, quite extraordinarily, debuted as the opening speaker at the TED2016 (Technology, Entertainment, Design), a nerdy conference of some of the world's smartest people.

Alpha-geeks from Google and Tesla, Apple and Uber, not to speak of marquee names such as Al Gore and Bill Gates are attending the annual brainiacs gig, but it was the singsong voice of this pre-teen, with her pink-frame spectacles and burgundy velvet gown, that held centerstage on Monday when the conference opened.

Her message was simple: Put children first; give kids a chance. "Instead of asking children what they want to do when they grow up, you should ask them what they want to be right now," she told a packed audience, composed and self-assured under the klieg lights and before a brainbank that unnerves the best public speakers.

"We can do a lot in this moment, in the present. The problem is our world has many forces working against the dreams of children." Adults, she said, chronically underestimate kids, and in the process they pass on fear to children who are born without fear.

The nerdy audience, with an average age perhaps in the forties, absorbed the mild admonition, responding with frequent applause as she pressed on to issues such as hunger, education, and war.

"My dream for the future is that people think 10 times before raising school fees, a hundred times before going to war with another country, a thousand times before wasting food and water, and ten thousand times before letting their child's 

childhood go away," she said. "I hope you adults can look after the world long enough to give us our chance."

After she concluded to rousing cheers (AR Rahman, who performed a little later in the opening session, was in the anteroom), scientists and savants, poets and philosophers, mandarins and musicians ambushed her in the lobby, wanting selfies with her.

Her mother, Nancy Katyal, an image consultant in Pune, beamed with pride, recalling how Ishita, who wrote her first book "Simran's Diary," came into limelight after she organized a TEDx talk at her school Vibgyor High, Balewadi, last February.

http://timesofindia.indiatimes.com/world/us/10-year-old-Indian-girl-wows-brainiacs-meet/articleshow/51017537.cms