यदि पेट में अफारा है या गैस बनती है ,सुबह सवेरे एक ग्लास ताज़ा पानी लीजिये .बस इसमें चंद बूँदें (लॉन्ग के तेल यानी क्लोव आयल ) कि मिलाइए और खाली पेट पी जाइए .रोजाना प्रात : ऐसा कीजिये ।
इफ यु हेव ए बोन स्पर (प्रोजेक्सन ऑफ़ ए बोन )?ए बोन स्पर इज ए शोर्ट बोनी आउट ग्रोथ ,युज्युअली ए नोर्मल पार्ट ऑफ़ दी बॉडी बट सम टाइम्स वन देट डिविलाप(डेवलप ) सच एज देट ऑन दी बोटम ऑफ़ ए हील आफ्टर एन इंजरी ।बोन स्पर के समाधान के लिए आधा या एक चम्मच हल्दी पाउडर रोजाना खाली पेट (दिन में तीन से चार मर्तबा ,जब पेट अपेक्षाकृत खाली हो ) ६ सप्ताह तक लीजिये ।
हेंग ओवर से बचाव के लिए ?
पिंक ग्रेप-फ्रूट यानी चकोतरा
फ्रूट का स्तेमाल कीजिये सुबह उठते ही .रात के हेंग ओवर से राहत मिलेगी .लिक्विड लोस (निर्जलीकरण ) की भरपाई होगी .विटामिनों से जो ग्रेप -फ्रूट में मौजूद हैं शरीर को नै ऊर्जा/स्फूर्ति मिलेगी ।
फॉर वाटर रिटेंशन :वाटर रिटेंसन से राहत के लिए आपकी खुराक में भरपूर पोटाशियम और मैग्नीशियम शामिल होना चाहिए .केला और खरबूज (मेलंस ) इनका प्रचुर भंडारण किये हुए हैं ।
कब्ज़ी(कोंस्तिपेशन )से राहत के लिए अमरुद का बीजों सहित सेवन कीजिये .पर्याप्त रफेज़ /खाद्य रेशे नसीब होंगे .यही अपच से राहत दिलवाएंगे ।
प्रो -बायोटिक्स से भरपूर होता है दही .यह पाचन और गट हाइजीन दोनों के लिए बेहतरीन है .
शनिवार, 4 दिसंबर 2010
हेल्थ टिप्स .
यदि पेट में गडबड है ,स्टमक अपसेट है ,थोड़ा जीरा तब तक भूनिए (रोस्ट कीजिये ),तब तक जब तक यह काला न होजाए .इसे चारकप पानी के साथ उबालिए जब तक कि यह दो कप न रह जाए .बस अब इसे छान निठार कर पी जाइए . आराम आयेगा .(टिप्स फॉर एन अपसेट स्टमक )।
रूसी से छुटकारे के लिए ,डैंड्रफ के सफाए के लिए ?
दही में मेहँदी मिलाकर सिर पर मलिए .बस थोड़ी देर बाद धौ डालिए .रूसी गायब .धीरे धीरे होगा ऐसा ।
ब्लोटिंग से छुटकारे के लिए ?
यदि पेट में अफारा है ,पेट फूल गया है ,गैस बन रही
है .थोड़े से पानीमें एक चम्मच्च दाल चीनी पाउडर (ग्राउंड सिन्नामन )उबालिए .शहद मिलाइए और मज़े से चुसकिया लीजिये चाय की तरह .बाय घूमेगी .गैस खारिज होगी .अफारे से राहत मिलेगी ।
रेमेडी फॉर बॉडी ओडर ?
परिष्कृत चीज़ें (शक्कर, आटा मैदा बहुल ,safed chaaval polish kiyaa huaa ),haai -ड्रो -जिनेतिदyaani aisaa vaanaspatik tel /ghee jiski self laaif badhaane ke liye use haadrojan se sanyukt kiyaa gyaa ho ),tathaa sanshaadhit khaaday saamigri se bachiye .
इफ यु सफ़र फ्रॉम बॉडी ओडर ?
बचिए तमाम सफ़ेद चीज़ों से मसलन ,चीनी यानी रिफाइंड सुगर ,पोलिश्ड राईस यानी पालिश किया हुआ परिष्कृत चावल जिसका हस्क(chhilkaa yaa shalk ) साफ़ कर दिया गया है ,हाई -ड्रो -जन से जिसकी सेल्फ लाइफ बढ़ाई गई हो ऐसा घी /तेल तथा संशाधित खाद्य से बचिए
तेज और तीक्ष्ण गंधी ,स्ट्रोंग स्मेलिंग गार्लिक (लहसुन ) अधिकतम औषधीय गुण लिए होता है .चीनी लहसुन में वह बात कहाँ ।देशी लहसुन ही भला है भारतीय रसोई के लिए ।
पोपकोर्न डा -इटरी फाइबर का बेहतरीन स्रोत है .कम केलोरीज़ लिए है .स्तार्चीस्टार्च युक्त कार्बो -हाई -ड्रेट्स ,प्रोटीन ,विटामिन -बी और खनिजों का अच्छा sourse है .
रूसी से छुटकारे के लिए ,डैंड्रफ के सफाए के लिए ?
दही में मेहँदी मिलाकर सिर पर मलिए .बस थोड़ी देर बाद धौ डालिए .रूसी गायब .धीरे धीरे होगा ऐसा ।
ब्लोटिंग से छुटकारे के लिए ?
यदि पेट में अफारा है ,पेट फूल गया है ,गैस बन रही
है .थोड़े से पानीमें एक चम्मच्च दाल चीनी पाउडर (ग्राउंड सिन्नामन )उबालिए .शहद मिलाइए और मज़े से चुसकिया लीजिये चाय की तरह .बाय घूमेगी .गैस खारिज होगी .अफारे से राहत मिलेगी ।
रेमेडी फॉर बॉडी ओडर ?
परिष्कृत चीज़ें (शक्कर, आटा मैदा बहुल ,safed chaaval polish kiyaa huaa ),haai -ड्रो -जिनेतिदyaani aisaa vaanaspatik tel /ghee jiski self laaif badhaane ke liye use haadrojan se sanyukt kiyaa gyaa ho ),tathaa sanshaadhit khaaday saamigri se bachiye .
इफ यु सफ़र फ्रॉम बॉडी ओडर ?
बचिए तमाम सफ़ेद चीज़ों से मसलन ,चीनी यानी रिफाइंड सुगर ,पोलिश्ड राईस यानी पालिश किया हुआ परिष्कृत चावल जिसका हस्क(chhilkaa yaa shalk ) साफ़ कर दिया गया है ,हाई -ड्रो -जन से जिसकी सेल्फ लाइफ बढ़ाई गई हो ऐसा घी /तेल तथा संशाधित खाद्य से बचिए
तेज और तीक्ष्ण गंधी ,स्ट्रोंग स्मेलिंग गार्लिक (लहसुन ) अधिकतम औषधीय गुण लिए होता है .चीनी लहसुन में वह बात कहाँ ।देशी लहसुन ही भला है भारतीय रसोई के लिए ।
पोपकोर्न डा -इटरी फाइबर का बेहतरीन स्रोत है .कम केलोरीज़ लिए है .स्तार्चीस्टार्च युक्त कार्बो -हाई -ड्रेट्स ,प्रोटीन ,विटामिन -बी और खनिजों का अच्छा sourse है .
ज़ारी है विश्व -व्यापी गर्मी ...
हीट इज ऑन :२०१० टू बी अमंग दी थ्री वार्मेस्ट ईयर्स (कोल्ड फेक्ट :२००१ -१० वाज़ दी वार्मेस्ट डिकेड ,सेज यु एन )/टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर४ ,२०१० ,पृष्ठ १९ )।
मानव रचित जलवायु परिवर्तन का सूचक माना जा रहा है ,साल २०१०. जबसे तापमानों का रिकार्ड रखा जा रहा यानी १८५० से लेकर आज तक का सबसे गर्म सालों में से एक साल सिद्ध हो रहा है २०१० ..इस से पूर्व १९९८ और २००५ में सबसे ज्यादा लैंड और सी तापमान दर्ज़ किये गए थे ,फिलवक्त यह साल इन रिकार्डों का अतिक्रमण करता प्रतीत होता है (हालाकि अभी दिसंबर का महीना बाकी है जो अपेक्षाकृत ठंडा भी रह सकता है )।
२०१० में अब तक दर्ज़ लैंड और सी तापमान ,१९६१ -१९९० में दर्ज़ औसत तापमान १४ सेल्सियस से आगे निकल कर १४ .५५ सेल्सियस दर्ज़ हो चुके हैं .विश्व -मौसम संगठन के मुताबिक़ इस शती का पहला दशक २००१ -२०१० अब तक का सबसे गर्म दशक सिद्ध हो चुका है .हो सकता है साल २०१० जिसकी रेंकिंग २०११ में प्रकाशनाधीन है भी अब तक का सबसे गरम साल सिद्ध हो ।
विश्व -मौसम संस्था के प्रमुख मिचेल जर्रौड़ का साफ़ कहना है ,जीवाश्म ईंधनों के दहन से पैदाग्रीन हाउस गैसें जलवायु को गरमा रहीं हैं ।
कानकुन में (केरेबियन रिजोर्ट )नवम्बर २९ -दिसंबर १० के बीच इसी मसले पर २०० मुल्कों की विमर्श बैठक चल रही है .जलवायु परिवर्तन का मुद्दा एहम है .यदि जीव-अवशेषी ईंधनों (फोसिल फ्युएल्स )का सफाया हम इसी रफ्तार से करते रहते हैं तब गर्मी और भी बढती रह सकती है.विश्व -व्यापी तापन उत्तरोत्तर बढ़ता रह सकता है .कुछ तो करना होगा .हाथ पर हाथ धरे रहकर बैठे रहने से क्या होगा ?
अफ्रिका ,एशिया के कुछ हिस्से तथा आर्कटिक बेहद तप रहें हैं .१९४२ के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा तापमान ५३.५ सेल्सियस इस बरस पाकिस्तान में दर्ज़ किया गया है जो अभी भी बाढ़ के उत्तर प्रभाव भुगत रहा है .
मानव रचित जलवायु परिवर्तन का सूचक माना जा रहा है ,साल २०१०. जबसे तापमानों का रिकार्ड रखा जा रहा यानी १८५० से लेकर आज तक का सबसे गर्म सालों में से एक साल सिद्ध हो रहा है २०१० ..इस से पूर्व १९९८ और २००५ में सबसे ज्यादा लैंड और सी तापमान दर्ज़ किये गए थे ,फिलवक्त यह साल इन रिकार्डों का अतिक्रमण करता प्रतीत होता है (हालाकि अभी दिसंबर का महीना बाकी है जो अपेक्षाकृत ठंडा भी रह सकता है )।
२०१० में अब तक दर्ज़ लैंड और सी तापमान ,१९६१ -१९९० में दर्ज़ औसत तापमान १४ सेल्सियस से आगे निकल कर १४ .५५ सेल्सियस दर्ज़ हो चुके हैं .विश्व -मौसम संगठन के मुताबिक़ इस शती का पहला दशक २००१ -२०१० अब तक का सबसे गर्म दशक सिद्ध हो चुका है .हो सकता है साल २०१० जिसकी रेंकिंग २०११ में प्रकाशनाधीन है भी अब तक का सबसे गरम साल सिद्ध हो ।
विश्व -मौसम संस्था के प्रमुख मिचेल जर्रौड़ का साफ़ कहना है ,जीवाश्म ईंधनों के दहन से पैदाग्रीन हाउस गैसें जलवायु को गरमा रहीं हैं ।
कानकुन में (केरेबियन रिजोर्ट )नवम्बर २९ -दिसंबर १० के बीच इसी मसले पर २०० मुल्कों की विमर्श बैठक चल रही है .जलवायु परिवर्तन का मुद्दा एहम है .यदि जीव-अवशेषी ईंधनों (फोसिल फ्युएल्स )का सफाया हम इसी रफ्तार से करते रहते हैं तब गर्मी और भी बढती रह सकती है.विश्व -व्यापी तापन उत्तरोत्तर बढ़ता रह सकता है .कुछ तो करना होगा .हाथ पर हाथ धरे रहकर बैठे रहने से क्या होगा ?
अफ्रिका ,एशिया के कुछ हिस्से तथा आर्कटिक बेहद तप रहें हैं .१९४२ के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा तापमान ५३.५ सेल्सियस इस बरस पाकिस्तान में दर्ज़ किया गया है जो अभी भी बाढ़ के उत्तर प्रभाव भुगत रहा है .
बच्चों की आक्रामकता के पीछे परवरिश का हाथ ज्यादा होता है ......
'एग्रेशन इन चिल्ड्रन टाइड टू पेरेंटिंग ,नोट जेनेटिक्स (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,दिसंबर ४ ,२०१० ,पृष्ठ १९ )।
बच्चों के व्यक्तित्व की आक्रामकता या अवसाद ग्रस्तता का सम्बन्ध उतना उनके जींस (बायलोजिकल पेरेंट्स की खानदानी -दाय जीवनइकाइयों या जीवन खण्डों )से नहीं जितना पेरेंटिंग या परवरिश और उस माहौल से होता है ,बच्चों के प्रति उस रवैये से होता है जिसमे उनका पल्लवन हो रहा है .यह बात फ़ॉस्टर पेरेंट्स तथा इन -वीट्रो -फर्टी -लाइजेशन से पैदा बच्चों पर भी लागू होती है यानी नेचर नहीं नर्चर का ज्यादा हाथ रहता है उनके व्यवहार की हेंकड़ी या अवसाद ग्रस्त होने के पीछे ।
ओटागो विश्व -विद्यालय के नेत्रित्व में एक अंतर -राष्ट्रीय टीम ने इस अध्ययन के नतीजे 'साइकोलोजिकल मेडिसन 'पत्रिका में प्रकाशित किये हैं .पता चला है पोजिटिव और निगेटिव पेरेंटिंग ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से सम्बन्धी समस्याओं की वजह बनती है .फिर चाहे वह उनका आक्रामक और उग्र व्यवहार हो या उनका खुद का अवसाद ग्रस्त रहना हो जाना .पेरेंटिंग एन्वायर्नमेंट बच्चों के विकास में एहम भूमिका निभाता है ।
आखिर सभी बच्चे इन समस्याओं से क्यों नहीं ग्रस्त हो जाते ?सोचना माँ -बाप को है आप कैसा माहौल ,परवरिश मुहैया करवा रहें हैं अपने नौनिहालों को .विश्लेसन कीजिये इस पूरे परिवेश का ।
कहीं आप खुद ही तो ज्यादा होस्टाइल नहीं है अपने बच्चों के प्रति .जांच कीजिये अपने प्रतिकूल भाव की ,अति उग्र भावनात्मक व्यवहार की ।
विशेष :कहीं अतिरिक्त अनुशाशन और अपनी झख और जिद ,आदतों का निशाना आप बच्चों को तो नहीं बना रहें हैं .मैं ऐसी कई मम्मियों से वाकिफ हूँ जिनको यह मुगालता है कि पृथ्वी उनकी वजह से घूम रही है .वह अपनी भावनाएं और आदतें बच्चों पर मनमानी ढंग से थोप रहीं हैं .जोर ज़बरिया खिलाना और सुलाना तो इसमें शरीक ही है और भी बहुत कुछ है .मसलन मैड के बच्चों के साथ नहीं खेलना है .होम वर्क की सख्ती ,फटकार ,बड़ा होकर मजदूर बन जाना या सड़क पर झाड़ू लगा ना वगेरा वगेरा कहना जब तब .जबकि बच्चों की उम्र अभी पांच के नीचे है ,एक की ढाई औरदूसरे की चार साल से भी कम.फासला आपने नहीं रखा संतानों के बीच और खीझ उन पर .आखिर क्यों ?
बच्चों के व्यक्तित्व की आक्रामकता या अवसाद ग्रस्तता का सम्बन्ध उतना उनके जींस (बायलोजिकल पेरेंट्स की खानदानी -दाय जीवनइकाइयों या जीवन खण्डों )से नहीं जितना पेरेंटिंग या परवरिश और उस माहौल से होता है ,बच्चों के प्रति उस रवैये से होता है जिसमे उनका पल्लवन हो रहा है .यह बात फ़ॉस्टर पेरेंट्स तथा इन -वीट्रो -फर्टी -लाइजेशन से पैदा बच्चों पर भी लागू होती है यानी नेचर नहीं नर्चर का ज्यादा हाथ रहता है उनके व्यवहार की हेंकड़ी या अवसाद ग्रस्त होने के पीछे ।
ओटागो विश्व -विद्यालय के नेत्रित्व में एक अंतर -राष्ट्रीय टीम ने इस अध्ययन के नतीजे 'साइकोलोजिकल मेडिसन 'पत्रिका में प्रकाशित किये हैं .पता चला है पोजिटिव और निगेटिव पेरेंटिंग ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से सम्बन्धी समस्याओं की वजह बनती है .फिर चाहे वह उनका आक्रामक और उग्र व्यवहार हो या उनका खुद का अवसाद ग्रस्त रहना हो जाना .पेरेंटिंग एन्वायर्नमेंट बच्चों के विकास में एहम भूमिका निभाता है ।
आखिर सभी बच्चे इन समस्याओं से क्यों नहीं ग्रस्त हो जाते ?सोचना माँ -बाप को है आप कैसा माहौल ,परवरिश मुहैया करवा रहें हैं अपने नौनिहालों को .विश्लेसन कीजिये इस पूरे परिवेश का ।
कहीं आप खुद ही तो ज्यादा होस्टाइल नहीं है अपने बच्चों के प्रति .जांच कीजिये अपने प्रतिकूल भाव की ,अति उग्र भावनात्मक व्यवहार की ।
विशेष :कहीं अतिरिक्त अनुशाशन और अपनी झख और जिद ,आदतों का निशाना आप बच्चों को तो नहीं बना रहें हैं .मैं ऐसी कई मम्मियों से वाकिफ हूँ जिनको यह मुगालता है कि पृथ्वी उनकी वजह से घूम रही है .वह अपनी भावनाएं और आदतें बच्चों पर मनमानी ढंग से थोप रहीं हैं .जोर ज़बरिया खिलाना और सुलाना तो इसमें शरीक ही है और भी बहुत कुछ है .मसलन मैड के बच्चों के साथ नहीं खेलना है .होम वर्क की सख्ती ,फटकार ,बड़ा होकर मजदूर बन जाना या सड़क पर झाड़ू लगा ना वगेरा वगेरा कहना जब तब .जबकि बच्चों की उम्र अभी पांच के नीचे है ,एक की ढाई औरदूसरे की चार साल से भी कम.फासला आपने नहीं रखा संतानों के बीच और खीझ उन पर .आखिर क्यों ?
शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010
ब्लेक -हेड्स होतें क्या है ?
ब्लेक -हेड्स ?
नाक कि छत के ऊपर रोम छिद्र (चमड़ी के सूराख पूरी तरह खुल जाने से ) इनमे डस्ट घुस आती है .धूल -धन -काड़ प्रवेश पा जाती है .इस से पहले वाईट हेड्स बनते हैं .यही बाद में काले होकर ब्लेक हेड्स बन जाते हैं ।
नहाने के बाद नाक को मुलायम तौलिये से अच्छी तरह पौछ डालिए .रगड़ रगड़ कर पौछ्ते रहना है कुछ देर .वाईट हेड्स नहीं बनेंगे .इससे पहली पोस्ट में आप ब्लेक हेड्स का समाधान देख पढ़ सकतें हैं .वहां गलती से रोम -छिद्र के लिए रोम -कूप लिखा गया है .गलती मुआफ हो ।
वीरुभाई ।
नाक कि छत के ऊपर रोम छिद्र (चमड़ी के सूराख पूरी तरह खुल जाने से ) इनमे डस्ट घुस आती है .धूल -धन -काड़ प्रवेश पा जाती है .इस से पहले वाईट हेड्स बनते हैं .यही बाद में काले होकर ब्लेक हेड्स बन जाते हैं ।
नहाने के बाद नाक को मुलायम तौलिये से अच्छी तरह पौछ डालिए .रगड़ रगड़ कर पौछ्ते रहना है कुछ देर .वाईट हेड्स नहीं बनेंगे .इससे पहली पोस्ट में आप ब्लेक हेड्स का समाधान देख पढ़ सकतें हैं .वहां गलती से रोम -छिद्र के लिए रोम -कूप लिखा गया है .गलती मुआफ हो ।
वीरुभाई ।
हेल्थ टिप्स :पेची स्किन का उपचार ..
पेची स्किन के उपचार के लिए ?पेची स्किन कहीं से काली कहीं से कम काली ,सफ़ेद या बैगी होती है .
चावल का आटा लीजिये उसमे थोड़ा सा खट्टा दही और बस थोड़ी सी हल्दी मिलाइए .बस उबटन तैयार है .इसे दस मिनिट पेची स्किन पर लगाकर रखिये .और फिर धो डालिए .थोड़ा सा गुण गुना हो पानी ।
किडनी स्टोंस (गुर्दे की पथरी )से राहत के लिए क्या कीजिएगा ?
पोदीने जैसे पत्ते वाला ही एक पौधा होता है जिसके पत्तों का स्तेमाल भोजन को सुस्वादय बनाने के लिए किया जाता है इसे पास्लि (पी ए आर एस एल ई वाई यानी पासलि) कहा जाता है .समझा जाता है इसका सत(पास्लि ज्यूस ) मूत्रल यानी डाई -युरेटिक होता है .इसे र्ह्युमेतिज्म (जोड़ों के अप्विकासी दर्द जिसमे छोटे बड़े जोड़ ही नाकारा और वेस्ट होने लगतें हैं ,जो आदिनांक लाइलाज ही बना रहा है ),मेन्स्त्र्युअल् -इन्सफिशियेंसी (मासिक स्राव सम्बन्धी अपर्याप्तता ,इन्सफिशियेंसी या क्षीण -ता ),किडनी के बेहतरीन इलाज़ के अलावा एक आम स्तिम्युलेंत ,स्फूर्ति दायक औषध ,उत्तेजक नशीला पदार्थ भी समझा जाता है .उद्दीपक भी ।
रनिंग नोज़ के सामाधान के लिए ?
आमले का ज्यूस लाइम और शहद के साथ लीजिये .दिव्य फार्मेसी ,डाबर ,झंडू आदि सभी इसे (इंडियन गुसे बेरी ज्यूस ,आमला रस )तैयार कर रहें हैं .उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इसका चलन है .चंडीगढ़ की एक फर्म भी इसे बना रही है .
एंटा -सिड्स लेने के बाद कैसी भी ड्रिंक्स न लें .यह दवा सेरोसल लेयर के ऊपर एक कोट कर देती है (एक परत और चढ़ा देती है ), गले की दुखन को सॉर थ्रोट को राहत दिलवाती है ।
काली मिर्च का सेवन चय -अपचयन (मेटाबोलिज्म ,राइट ऑफ़ बर्निंग केलोरीज़ )को बढाकर इन्तेस्ताइन्स में बनने वाली गैस को कम करता है .काली मिर्च का दाना बहु -गुनी है .इटइज ए ड्राई बेरी फ्रॉम ए ट्रोपिकल प्लांट देत इज प्रेस्द इनटू स्माल पीसिज़ .इसे अंग्रेजी भाषा में पेप्पर कोर्न कहा जाता है ।
पिम्पिल्स, ब्लेक हेड्स और ड्राई स्किन के समाधान के लिए ?
कील मुहासे हों या नाक की रोमकूप खुलने से नाक के ऊपर छोटे छोटे सूराख जिनमे मैल भरकर अपना जलवा दिखाने लगता है यानी ब्लेक -हेड्स बन जातें हों , तथा ड्राई स्किन के समाधान के लिए एक चमच्च हरे धनिये केपत्तों के सत में थोड़ी सी कुटी हुई हल्दी मिलाइए , और चेहरे पर मल लीजिये .बेशक पी भी सकतें हैं इसे .आराम आयेगा कील मुहांसे और ब्लेक हेड्स से छुटकारा मिलेगा .चमड़ी नम रहेगी .
चावल का आटा लीजिये उसमे थोड़ा सा खट्टा दही और बस थोड़ी सी हल्दी मिलाइए .बस उबटन तैयार है .इसे दस मिनिट पेची स्किन पर लगाकर रखिये .और फिर धो डालिए .थोड़ा सा गुण गुना हो पानी ।
किडनी स्टोंस (गुर्दे की पथरी )से राहत के लिए क्या कीजिएगा ?
पोदीने जैसे पत्ते वाला ही एक पौधा होता है जिसके पत्तों का स्तेमाल भोजन को सुस्वादय बनाने के लिए किया जाता है इसे पास्लि (पी ए आर एस एल ई वाई यानी पासलि) कहा जाता है .समझा जाता है इसका सत(पास्लि ज्यूस ) मूत्रल यानी डाई -युरेटिक होता है .इसे र्ह्युमेतिज्म (जोड़ों के अप्विकासी दर्द जिसमे छोटे बड़े जोड़ ही नाकारा और वेस्ट होने लगतें हैं ,जो आदिनांक लाइलाज ही बना रहा है ),मेन्स्त्र्युअल् -इन्सफिशियेंसी (मासिक स्राव सम्बन्धी अपर्याप्तता ,इन्सफिशियेंसी या क्षीण -ता ),किडनी के बेहतरीन इलाज़ के अलावा एक आम स्तिम्युलेंत ,स्फूर्ति दायक औषध ,उत्तेजक नशीला पदार्थ भी समझा जाता है .उद्दीपक भी ।
रनिंग नोज़ के सामाधान के लिए ?
आमले का ज्यूस लाइम और शहद के साथ लीजिये .दिव्य फार्मेसी ,डाबर ,झंडू आदि सभी इसे (इंडियन गुसे बेरी ज्यूस ,आमला रस )तैयार कर रहें हैं .उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इसका चलन है .चंडीगढ़ की एक फर्म भी इसे बना रही है .
एंटा -सिड्स लेने के बाद कैसी भी ड्रिंक्स न लें .यह दवा सेरोसल लेयर के ऊपर एक कोट कर देती है (एक परत और चढ़ा देती है ), गले की दुखन को सॉर थ्रोट को राहत दिलवाती है ।
काली मिर्च का सेवन चय -अपचयन (मेटाबोलिज्म ,राइट ऑफ़ बर्निंग केलोरीज़ )को बढाकर इन्तेस्ताइन्स में बनने वाली गैस को कम करता है .काली मिर्च का दाना बहु -गुनी है .इटइज ए ड्राई बेरी फ्रॉम ए ट्रोपिकल प्लांट देत इज प्रेस्द इनटू स्माल पीसिज़ .इसे अंग्रेजी भाषा में पेप्पर कोर्न कहा जाता है ।
पिम्पिल्स, ब्लेक हेड्स और ड्राई स्किन के समाधान के लिए ?
कील मुहासे हों या नाक की रोमकूप खुलने से नाक के ऊपर छोटे छोटे सूराख जिनमे मैल भरकर अपना जलवा दिखाने लगता है यानी ब्लेक -हेड्स बन जातें हों , तथा ड्राई स्किन के समाधान के लिए एक चमच्च हरे धनिये केपत्तों के सत में थोड़ी सी कुटी हुई हल्दी मिलाइए , और चेहरे पर मल लीजिये .बेशक पी भी सकतें हैं इसे .आराम आयेगा कील मुहांसे और ब्लेक हेड्स से छुटकारा मिलेगा .चमड़ी नम रहेगी .
क्याहै स्वस्थाय्कर बॉडी मॉस इंडेक्स ?
हेल्थियेस्ट बी एम् आई इज २२.५ -२४.९,नो रूम फॉर प्लंप (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर ३ ,२०१० ,पृष्ठ १९)। वेट एंड वाच .गोलमोल मोटा -ताज़ा होना ठीक नहीं है .कोई गुंजाइश नहीं है जिगिल रूम की जहां तक आपके वजन का सवाल है .गफलत छोडिये ऐसा बिलकुल नहीं है ,मोटे ताज़े गोल मटोल लोगों के लिए न कैंसर के खतरे का वजन कम हुआ है न अन्य रोगों का .बेशक कुछ हालिया अध्ययनों ने ऐसा इशारा किया था .आंकड़ों की पुनरीक्षा
karne par ptaa chaa hai 20 ke neeche BMI kaa chlaa jaanaa theek nahin hai .vishv -svaasthay sangathan ne bhale hi pahle 18.5 BMI ko normal batlaayaa thaa .lekin taazaa adhayayan vishlesan svaasthay sambandhi aankdon kaa batlaataahai , bahut patlaa bane rhanaa bhi theek nahin hai ,'Zeo size 'to bilkul bhi nahin.
maut kaa khatraa badh jaataa krish- kaaya yaani bahut patle logon ke liye bhi .aise dublaaye log pahle se hi beemaar hoten hain .
dedh laakh (1.5 million)baaligon kaa adhayayan karne par amriki kainsar sansthaan is natize par pahunchaa hai golmol motaa taazaa ,plump honaa bhi theek nahin .
Healthiest BMI 22.5 -24,9 tak hi maanaa gyaaq hai .'WHO' tathaa' centre for Disease control prevension ' ' ने भी इसकी पुष्टि की है ।
आसान सा तरीका है 'बॉडी मॉस इंडेक्स 'निकालने का .किलोग्रेम में अपना वजन पता लागाइये .अपनी हाईट को मीटर स्क्वायार्ड में तब्दील कर लीजिए .पहले अंक को दूसरे से भाग देने पर आपका 'बी एम् आई 'किलोग्रेम /(मीटर )२ में आ जाएगा ।
मान लीजिये वजन है ६४ किलोग्रेम और हाईट है १६० सेंटी -मीटर्स यानी (१.६) (१.६ )(मीटर )२ तब बी एम् आई हो जाएगा ६४ /(१.६)(१.६)यानी (६४ )(१० )(१० )/(१६)(१६ )=२५ ।
बी एम् आई का २५ -३० के बीच होना ओवरवेट होना है और ३० से ऊपर ओबेसी(मोटापा रोग से ग्रस्त होना है ,हेल्दी नहीं है )।
दोनों ही स्थितियों में हृद रोगों और शक्कर की बीमारी (मधुमेह यानी डायबिटीज़ )का जोखिम बढ़ जाता है,कुछ किस्म के कैंसरों और आर्थ -राय -टिस का भी .न्यू -इंग्लैण्ड जर्नल ऑफ़ मेडिसन में प्रकाशित इस अध्ययन में बतलाया गया है , ५ फीट ५ इंच हाईट वाला व्यक्ति ६८ किलोग्रेम वजन होने पर ओवरवेट तथा ८२ किलोग्रेम होने पर ओबेसी माना जाएगा .एक ५ फीट १० इंची ९५ किलोग्राम का होने पर बी एम् आई दिखाएगा ३० .यह भी ओबेसी की केटेगरी में आयेगा ।
२५ से ऊपर बी एम् आई होने पर मौत की संभावना बढ़ेगी पतले लोगों के बरक्स (लेकिन बी एम् आई २० से कम नहीं होना है इनका भी वरना ख़तरा इनके लिए भी बढेगा )।
नोर्मल बी एम् आई के बरक्स ओवर वेट होने पर तमाम वजहों से होने वाली मौत का ख़तरा १० %बढ़ जाता है .लेकिन ४० या इससे भी ऊपर बी एम् आई होने पर ओबेसी की मौत के खतरे का वजन भी २.५ गुना बढ़ जाएगा उसी उम्र के स्वस्थ व्यक्ति के बरक्स .
karne par ptaa chaa hai 20 ke neeche BMI kaa chlaa jaanaa theek nahin hai .vishv -svaasthay sangathan ne bhale hi pahle 18.5 BMI ko normal batlaayaa thaa .lekin taazaa adhayayan vishlesan svaasthay sambandhi aankdon kaa batlaataahai , bahut patlaa bane rhanaa bhi theek nahin hai ,'Zeo size 'to bilkul bhi nahin.
maut kaa khatraa badh jaataa krish- kaaya yaani bahut patle logon ke liye bhi .aise dublaaye log pahle se hi beemaar hoten hain .
dedh laakh (1.5 million)baaligon kaa adhayayan karne par amriki kainsar sansthaan is natize par pahunchaa hai golmol motaa taazaa ,plump honaa bhi theek nahin .
Healthiest BMI 22.5 -24,9 tak hi maanaa gyaaq hai .'WHO' tathaa' centre for Disease control prevension ' ' ने भी इसकी पुष्टि की है ।
आसान सा तरीका है 'बॉडी मॉस इंडेक्स 'निकालने का .किलोग्रेम में अपना वजन पता लागाइये .अपनी हाईट को मीटर स्क्वायार्ड में तब्दील कर लीजिए .पहले अंक को दूसरे से भाग देने पर आपका 'बी एम् आई 'किलोग्रेम /(मीटर )२ में आ जाएगा ।
मान लीजिये वजन है ६४ किलोग्रेम और हाईट है १६० सेंटी -मीटर्स यानी (१.६) (१.६ )(मीटर )२ तब बी एम् आई हो जाएगा ६४ /(१.६)(१.६)यानी (६४ )(१० )(१० )/(१६)(१६ )=२५ ।
बी एम् आई का २५ -३० के बीच होना ओवरवेट होना है और ३० से ऊपर ओबेसी(मोटापा रोग से ग्रस्त होना है ,हेल्दी नहीं है )।
दोनों ही स्थितियों में हृद रोगों और शक्कर की बीमारी (मधुमेह यानी डायबिटीज़ )का जोखिम बढ़ जाता है,कुछ किस्म के कैंसरों और आर्थ -राय -टिस का भी .न्यू -इंग्लैण्ड जर्नल ऑफ़ मेडिसन में प्रकाशित इस अध्ययन में बतलाया गया है , ५ फीट ५ इंच हाईट वाला व्यक्ति ६८ किलोग्रेम वजन होने पर ओवरवेट तथा ८२ किलोग्रेम होने पर ओबेसी माना जाएगा .एक ५ फीट १० इंची ९५ किलोग्राम का होने पर बी एम् आई दिखाएगा ३० .यह भी ओबेसी की केटेगरी में आयेगा ।
२५ से ऊपर बी एम् आई होने पर मौत की संभावना बढ़ेगी पतले लोगों के बरक्स (लेकिन बी एम् आई २० से कम नहीं होना है इनका भी वरना ख़तरा इनके लिए भी बढेगा )।
नोर्मल बी एम् आई के बरक्स ओवर वेट होने पर तमाम वजहों से होने वाली मौत का ख़तरा १० %बढ़ जाता है .लेकिन ४० या इससे भी ऊपर बी एम् आई होने पर ओबेसी की मौत के खतरे का वजन भी २.५ गुना बढ़ जाएगा उसी उम्र के स्वस्थ व्यक्ति के बरक्स .
सदस्यता लें
संदेश (Atom)