क्रीम ईज़िज़ आर्थ -राय -टिस पैन इन मिनिट्स ."जोइंट मड "वर्क्स फास्टर देन हेडेक पिल ,कट्स "एक" बाई ओवर ७०%इन १८ मिनिट्स .(डी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर २ ,२०१० ,पृष्ठ १९ )।
सिर दर्द की बिना डॉक्टरी नुश्खे के मिलने वाली गोली से ज्यादा तेज़ी के साथ जोड़ों के दर्द में राहत दिलवा सकती है यह जादुई क्रीम /मरहम "जोइंट मड "जिसे एक ग्रीक आइलैंड लेब्स कम्पनी ने तैयार किया है .१८ मिनिट में जोड़ों के दर्द में ७४%राहत दिलवाने का दावा करती है यह क्रीम .यह अवधि फास्ट एक्सन हेडेक पिल से भी १२ मिनिट कम है .जहां तक जोड़ों की फ्लेक्ज़ेबिलिती (मुड़ने मोड़ने लचकने )का सवाल है दीर्घावधि स्तेमाल करने वालों को इस नुश्खे ने २३९%फायदा पहुंचाया है .यानी जोड़ों की गति शीलता तथा रेंज ऑफ़ एक्सन में भी इजाफा हुआ है ।
घुटनों का दर्द हो या कमर दर्द ,या फिर हिप पैन ,कंधों ,हाथों यहाँ तक की ऊंगलियों के जोड़ों के दर्द में भी हैअरतअंगेज़ फायदा पहुंचाया है इस मरहम ने जिसके २५ घटकों में चेरी आयल ,कलारी सगे आयल ,पोमिग्रेनेट आयल (अनार का तेल )भी शामिल है .शुद्ध कार्बनिक घटकों से तैयार की गई है यह क्रीम जो यकृत ,गुर्दों की नुकसानी ,स्टमक अल्सर्स तथा हार्ट फेलियोर आदि की दर को जोतमाम तरह के सहज सुलभ दर्द -नाशी बढाते रहें हैं कम कर सकती है .कार्टिलेज सेल्स (उपास्थियों की कोशिकाओं )के लिए भी अच्छी सिद्ध हुई है यह क्रीम जिसकी आज़माइश कई अमरीकी विश्विद्यालय कर चुके हैं जिनमे ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी ओहायोज़ केस वेस्त्रण रिज़र्व यूनिवर्सिटी भी शामिल रहें हैं जिन्होंने ने इसके कई घटकों को परखा आजमाया है ।
यु के में तकरीबन एक करोड़ लोग आर्थ -राय -टिस के दर्द से परेशान रहतें हैं .हर पांचवा बालिग़ ,१२,००० बच्चे ,२५ से नीचे के २७,००० औरत मर्द गरज ये हर इम्र के लोग इस से आजिज़ आते रहें हैं .जनरल प्रेक्टिशनर के पास पहुँचने वाला हर पांचवां मरीज़ ब्रिटेन में जोड़ों के दर्द की ,सूजन और अकड़ाव ,इम्पे -यार्ड मोबिलिटी की शिकायत लिए पहुँच रहा है .
गुरुवार, 2 दिसंबर 2010
गुस्सा ठंडा करने के लिए एक चम्मच्च चीनी की फंकी मार जाइए ...
जी हाँ यदि किसी क्षण आप किसी के प्रति गुस्से से उबल रहें हैं तो एक ग्लास नींबू की मीठी शिकंज्बी या फिर लेमोनेड एक चम्मच्च चीनी मिलाकर पी जाइए .गुस्सा थोड़ी देर के लिए ही सही शांत ज़रूर हो जाएगा .आपकी उस वक्त की मनोदशा ,मिजाज़ की गर्मी कम ज़रूर होगी .यह पता लगाया है अमरीकी रिसर्चरों ने ।
व्यवहार की आक्रामकता अस्थाई तौर पर ही सही एक चम्मच्च चीनी की फंकी मारने के साथ ही काफूर हो जाती है .अपने प्रयोगों में रिसर्चरों ने देखा जिन लोगों को लेमोनेड चीनी के साथ दिया गया उनके स्वभाव की गर्मी थोड़ी कम हुई बरक्स उनके जिन्हें लेमोनेड दिया तो गया लेकिन सुगर नहीं सुगर सबस्टे -टयूट (आर्टिफीशियल स्वीटनर )के साथ ।
सन्दर्भ -सामिग्री :-स्पून फुल ऑफ़ सुगर कैन हेव कूल डाउन टेम्पर्स/शोर्ट कट्स /टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर २ ,२०१० ,पृष्ठ १९ .
व्यवहार की आक्रामकता अस्थाई तौर पर ही सही एक चम्मच्च चीनी की फंकी मारने के साथ ही काफूर हो जाती है .अपने प्रयोगों में रिसर्चरों ने देखा जिन लोगों को लेमोनेड चीनी के साथ दिया गया उनके स्वभाव की गर्मी थोड़ी कम हुई बरक्स उनके जिन्हें लेमोनेड दिया तो गया लेकिन सुगर नहीं सुगर सबस्टे -टयूट (आर्टिफीशियल स्वीटनर )के साथ ।
सन्दर्भ -सामिग्री :-स्पून फुल ऑफ़ सुगर कैन हेव कूल डाउन टेम्पर्स/शोर्ट कट्स /टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर २ ,२०१० ,पृष्ठ १९ .
भ्रूण के दिमाग को नुक्सान पहुंचा सकता है ऐसा टूथ -पेस्ट ...
टूथ -पैस्ट्स हार्मफुल फॉर फीटल ब्रेन (हेल्थ हेजार्ड )/दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर २ ,२०१० ,पृष्ठ १९ ।
साइंसदानों के मुताबिक़ टूथ -पेस्टों और साबुनों में एक ऐसा रसायन मौजूद रहता है जो भ्रूण के दिमाग को क्षति ग्रस्त कर सकता है .वो महिलायें जो इस रसायन 'ट्राई -क्लोसन 'से सने उत्पादों का गर्भावस्था में ज्यादा स्तेमाल करतीं हैं वह अपने अनजाने ही अपने अजन्मे शिशु को खतरे में डाल सकतीं हैं ।
अब से कोई पचास बरस पहले यह रसायन ट्राई -क्लोसन तैयार किया गया था एक असरकारी एंटी -बेक -टीरियलएजेंट के बतौर .अब पता चला है यह रसायन गर्भाशय को होने वाली रक्तापूर्ति को विच्छिन्न (विघटित ,डिस -राप्त ) कर शिशु के दिमाग को मिलने वाली ज़रूरी ऑक्सीजन से महरूम रख इसके समुचित विकास को अवरुद्ध कर सकता है ।
फ्लोरिडा विश्व विद्यालय के साइंसदान मार्गरेट जमेस कहतें हैं इस समस्या का सही परिमाण अभी हम नहीं जान पा रहें हैं लेकिन समस्या है ज़रूर ।
ट्राई -क्लोसन आम स्तेमाल में है चाहें फिर वह हेन्द्वाशिज़ हों या वाशिंग अप लिक्विड्स ,दिओद्रेन्त्स हो या टूथपैस्ट्स.यहाँ तक कि एंटी -बेक्तीरियल चोपिंग बोर्ड्स ,कुछ खिलोनों तक में ट्राई -क्लोसन है .इसके स्तेमाल को लेकर लगातार चिंता ज़ाहिर कि गई है ।
अमरीकी खाद्य एवं दवा संस्था इसकी निरापदता को लेकर आशंकित है .सुरक्षा सम्बन्धी मानदंडों का दोबारा जायज़ा लिया जा रहा है ।
भेड़ों पर की गई आज़माइश में पता चला है ट्राई -क्लोसन एक एंजाइम के निर्माण में खलल पैदा करता है .यही वह किण्वक (एंजाइम )है जो हारमोन इस्ट्रोजन के गर्भाशय में सर्कुलेसन को नियमित बनाए रहता है ।
यही इस्ट्रोजन प्रधान आर्टरी को खुला रखने में सहायक होता है ताकि भ्रूण (फीटस )को ऑक्सीजन -बहुल रक्त भरपूर मिलता रहे .इफ देयर इज टू लिटिल डिस आर्टरी नेरोज़ एंड ऑक्सीजन सप्लाईज आर दिप्लीतिद .
साइंसदानों के मुताबिक़ टूथ -पेस्टों और साबुनों में एक ऐसा रसायन मौजूद रहता है जो भ्रूण के दिमाग को क्षति ग्रस्त कर सकता है .वो महिलायें जो इस रसायन 'ट्राई -क्लोसन 'से सने उत्पादों का गर्भावस्था में ज्यादा स्तेमाल करतीं हैं वह अपने अनजाने ही अपने अजन्मे शिशु को खतरे में डाल सकतीं हैं ।
अब से कोई पचास बरस पहले यह रसायन ट्राई -क्लोसन तैयार किया गया था एक असरकारी एंटी -बेक -टीरियलएजेंट के बतौर .अब पता चला है यह रसायन गर्भाशय को होने वाली रक्तापूर्ति को विच्छिन्न (विघटित ,डिस -राप्त ) कर शिशु के दिमाग को मिलने वाली ज़रूरी ऑक्सीजन से महरूम रख इसके समुचित विकास को अवरुद्ध कर सकता है ।
फ्लोरिडा विश्व विद्यालय के साइंसदान मार्गरेट जमेस कहतें हैं इस समस्या का सही परिमाण अभी हम नहीं जान पा रहें हैं लेकिन समस्या है ज़रूर ।
ट्राई -क्लोसन आम स्तेमाल में है चाहें फिर वह हेन्द्वाशिज़ हों या वाशिंग अप लिक्विड्स ,दिओद्रेन्त्स हो या टूथपैस्ट्स.यहाँ तक कि एंटी -बेक्तीरियल चोपिंग बोर्ड्स ,कुछ खिलोनों तक में ट्राई -क्लोसन है .इसके स्तेमाल को लेकर लगातार चिंता ज़ाहिर कि गई है ।
अमरीकी खाद्य एवं दवा संस्था इसकी निरापदता को लेकर आशंकित है .सुरक्षा सम्बन्धी मानदंडों का दोबारा जायज़ा लिया जा रहा है ।
भेड़ों पर की गई आज़माइश में पता चला है ट्राई -क्लोसन एक एंजाइम के निर्माण में खलल पैदा करता है .यही वह किण्वक (एंजाइम )है जो हारमोन इस्ट्रोजन के गर्भाशय में सर्कुलेसन को नियमित बनाए रहता है ।
यही इस्ट्रोजन प्रधान आर्टरी को खुला रखने में सहायक होता है ताकि भ्रूण (फीटस )को ऑक्सीजन -बहुल रक्त भरपूर मिलता रहे .इफ देयर इज टू लिटिल डिस आर्टरी नेरोज़ एंड ऑक्सीजन सप्लाईज आर दिप्लीतिद .
बुधवार, 1 दिसंबर 2010
रीढ़ की चोट की दुरुस्ती के लिए स्टेम सेल्स ...
बेड बेक ?ग्रो ए न्यू -स्पाइन एक्स्पर्स्ट .Use स्टेम cell therapy to make discs self heel .(The Times of India ,Mumbai ,december १ ,२०१० ,prishthh २१ )।
Areas on the edge of the discs have similar properties to स्टेम cells and can help regenerate themselves .
sveedan के saainsdaanon ne ab leb me kshatigrst ho chuki रीढ़ के sthaan par nai स्पाइन gdh lene की tarkeeb eezaad kar li hai ।
umr के saath रीढ़ की haddi की gurri (स्पाइन )की discs damage hone lagti hain, ghis pit jaatin hain .sarjery yaani shalay के alaavaa ab tak iske vaikalpik ilaaz ginti के hi rahen hain surgery की bhi apni mushkilaaten rahin hain ,naakaamyaabi की dar bhi kam nahi rhin hain .taa -umr dard -naashiyon के sahaare rahnaa pdtaa hai ।
kalam koshikaayen yaani स्टेम सेल्स in kshati grst discs की fir se murammat kar sakti hain .shrir की in buniyaadi koshikaaon me khaas kshmtaa hoti hai kshtigrst ootakon (tissue and bone )aur asthiyon की दुरुस्ती की ।
vaastav me discs के siron par aise ilaake mauzood rahten hain jinke gun स्टेम सेल्स se kaafi milte julten hain .enimals par की gai aazmaaishon me demejd discs ko durust kar le jaane me kaamyaabi haasil hui hai .dekhnaa yah hai kyaa yahi tarikaa manushayon par bhi aazmaayaa jaa saktaa hai ?
samjhaa yahi jaataa rhaa hai कि kaartileziz me khud ko durust karne कि zraa bhi kshmtaa nahin hoti hai .lekin enimals me prtyaaropit स्टेम सेल्स (transplanted स्टेम सेल्स ) के achchhe natize niklen hain ।
Studies in rats and Dogs have already demonstrated that the olfactory ensheathing cells (OECs) which insulate bundles of nerve cells ,can help repair damage to the spinal chord and nerves leading to the animal paws ।
But OECs are only available in the lining of nose and olfactory bulb in the brain ।
But experts have now found ways to grow )OECs from the patients own cells in the lab .
Areas on the edge of the discs have similar properties to स्टेम cells and can help regenerate themselves .
sveedan के saainsdaanon ne ab leb me kshatigrst ho chuki रीढ़ के sthaan par nai स्पाइन gdh lene की tarkeeb eezaad kar li hai ।
umr के saath रीढ़ की haddi की gurri (स्पाइन )की discs damage hone lagti hain, ghis pit jaatin hain .sarjery yaani shalay के alaavaa ab tak iske vaikalpik ilaaz ginti के hi rahen hain surgery की bhi apni mushkilaaten rahin hain ,naakaamyaabi की dar bhi kam nahi rhin hain .taa -umr dard -naashiyon के sahaare rahnaa pdtaa hai ।
kalam koshikaayen yaani स्टेम सेल्स in kshati grst discs की fir se murammat kar sakti hain .shrir की in buniyaadi koshikaaon me khaas kshmtaa hoti hai kshtigrst ootakon (tissue and bone )aur asthiyon की दुरुस्ती की ।
vaastav me discs के siron par aise ilaake mauzood rahten hain jinke gun स्टेम सेल्स se kaafi milte julten hain .enimals par की gai aazmaaishon me demejd discs ko durust kar le jaane me kaamyaabi haasil hui hai .dekhnaa yah hai kyaa yahi tarikaa manushayon par bhi aazmaayaa jaa saktaa hai ?
samjhaa yahi jaataa rhaa hai कि kaartileziz me khud ko durust karne कि zraa bhi kshmtaa nahin hoti hai .lekin enimals me prtyaaropit स्टेम सेल्स (transplanted स्टेम सेल्स ) के achchhe natize niklen hain ।
Studies in rats and Dogs have already demonstrated that the olfactory ensheathing cells (OECs) which insulate bundles of nerve cells ,can help repair damage to the spinal chord and nerves leading to the animal paws ।
But OECs are only available in the lining of nose and olfactory bulb in the brain ।
But experts have now found ways to grow )OECs from the patients own cells in the lab .
सेक्स बना वैसो -कोंसत्रिक्टर.
डिपार्टमेंट ऑफ़ आव्थेल्मोलोजी ,ग्लोस्त्रूप हॉस्पिटल ,कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी ,ने एक ब्रितानी पुरुष के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसे अखबार डेली मेल ने भी बाद में प्रकाशित किया था .यह शख्श हर सेक्स्युअल एपिसोड सम्पान होते ही स्खलित होने के बाद (आफ्टर इजेक्युलेसन ) मोनो -ओक्युलर विज़न लोस का अस्थाई तौर पर शिकार होता है .हर सेक्स्युअल एपिसोड (अपनी साथी के साथ सम्भोग के बाद )इसके साथ यह बारहा होता रहा है .आखिर कार इसे चिकित्सकीय सहायता के लिए नेत्र -रोग के माहिरों के पास आना पड़ा है .क्यों इसे एक नेत्र से अस्थाई तौर पर दिखलाई देना बंद हो जाता है इस बारे में कयास लगाया गया है यह व्यक्ति यौन -क्रीडा में दिस -चार्ज होने के बाद "वैसो -कोंस्त्रिक्सन का शिकार हो जाता है .यौन -क्रिया /मैथुन ही इसके लिए वैसो -कोंसत्रिक्टर बन जाती है ।
यही वैसो -कोंस्त्रिक्सन इरेक्टाइल दिस -फंक्शन की भी वजह बन जाता है जिसमे ब्लड वेसिल्स के संकरे पड़ जाने सेब्लड प्रेशर बढ़ जाता है ।
इसी वैसो -कोंस्त्रिक्सन की वजह से नेत्र को आर्तीरियल ब्लड सप्लाई ठप्प पड़ जाती है अस्थाई तौर पर .पहले इसकी वजह एम्बोलिज्म (एम्बोलास )का ब्लड वेसिल्स में आकर फंस जाना समझ लिया गया था ।
एक चिठ्ठे ने इस रोचक लेकिन अजीबो -गरीब वृत्तांत के बारे में लिखा था ।
क्या है वैसो -कोंस्त्रिक्सन ?
ए दिक्रीज़ इन दी डाय -मीटर ऑफ़ ब्लड वेसिल्स ,स्पेशियली आर्ट -रीज इस काल्ड वैसो -कोंस्त्रिक्सन ।
एम्बोलसक्या है ?
ए मेटीरियल सच एज ए ब्लड क्लोट ,फैट ,एयर ऑर एम्नियोटिक फ्ल्युइड ऑर ए फोरिन बॉडी देट इज केरीड बाई दी ब्लड फ्रॉम वन पॉइंट इन दी सर्क्युलेसन टू लोज एट एनादर पॉइंट इज काल्ड एम्बोलस .यानी खून का थक्का एक जगह से चलकर दूसरी जगह रक्त प्रवाह के जारी पहुँच जाए .प्रवाह के अवरुद्ध होने की क्रिया एम्बोलिज्म कहलाती है ।
सन्दर्भ -सामिग्री :-ब्लाइन -डिड बाई लव :मेन लूज़िज़ साईट व्हेन ही हेज़ सेक्स (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर १ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )
यही वैसो -कोंस्त्रिक्सन इरेक्टाइल दिस -फंक्शन की भी वजह बन जाता है जिसमे ब्लड वेसिल्स के संकरे पड़ जाने सेब्लड प्रेशर बढ़ जाता है ।
इसी वैसो -कोंस्त्रिक्सन की वजह से नेत्र को आर्तीरियल ब्लड सप्लाई ठप्प पड़ जाती है अस्थाई तौर पर .पहले इसकी वजह एम्बोलिज्म (एम्बोलास )का ब्लड वेसिल्स में आकर फंस जाना समझ लिया गया था ।
एक चिठ्ठे ने इस रोचक लेकिन अजीबो -गरीब वृत्तांत के बारे में लिखा था ।
क्या है वैसो -कोंस्त्रिक्सन ?
ए दिक्रीज़ इन दी डाय -मीटर ऑफ़ ब्लड वेसिल्स ,स्पेशियली आर्ट -रीज इस काल्ड वैसो -कोंस्त्रिक्सन ।
एम्बोलसक्या है ?
ए मेटीरियल सच एज ए ब्लड क्लोट ,फैट ,एयर ऑर एम्नियोटिक फ्ल्युइड ऑर ए फोरिन बॉडी देट इज केरीड बाई दी ब्लड फ्रॉम वन पॉइंट इन दी सर्क्युलेसन टू लोज एट एनादर पॉइंट इज काल्ड एम्बोलस .यानी खून का थक्का एक जगह से चलकर दूसरी जगह रक्त प्रवाह के जारी पहुँच जाए .प्रवाह के अवरुद्ध होने की क्रिया एम्बोलिज्म कहलाती है ।
सन्दर्भ -सामिग्री :-ब्लाइन -डिड बाई लव :मेन लूज़िज़ साईट व्हेन ही हेज़ सेक्स (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर १ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )
अब रुक सकती है विटामिन- डी की क्रेज़ .
मोर विटामिन डी गुड ,बट नोट टू मच(डी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर १ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )।
अति सर्वत्र वर्जय्ते .इधर अमरीका में एक क्रेज़ पैदा होने लगा था विटामिन डी का .यकीन था ,हैप था इस बात का,मेगादोज़िज़ इस सन - शाइन विटामिन की कैंसर और कई अन्य रोगों से बचाए रहतीं हैं ।
इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिसन के अनुसार यह यकीन कायम रह सकने लायक यकीन नहीं था ।
बेशक विटामिन -डी अस्थियों की मजबूती ,हृष्ट -पुष्ट बने रहने के लिए अच्छा है .लेकिन उतना अच्छा भी नहीं है ,अत कर दी जाए .फ़ूड लेवेल्स अपनी बात कहतें हैं विज्ञापन अपनी -अपनी धांक -तें हैं .
अति सर्वत्र वर्जय्ते .इधर अमरीका में एक क्रेज़ पैदा होने लगा था विटामिन डी का .यकीन था ,हैप था इस बात का,मेगादोज़िज़ इस सन - शाइन विटामिन की कैंसर और कई अन्य रोगों से बचाए रहतीं हैं ।
इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिसन के अनुसार यह यकीन कायम रह सकने लायक यकीन नहीं था ।
बेशक विटामिन -डी अस्थियों की मजबूती ,हृष्ट -पुष्ट बने रहने के लिए अच्छा है .लेकिन उतना अच्छा भी नहीं है ,अत कर दी जाए .फ़ूड लेवेल्स अपनी बात कहतें हैं विज्ञापन अपनी -अपनी धांक -तें हैं .
कथित और बहु -चर्चित महा -विस्फोट से बहुत पहले ही बन गया था ब्रहमांड ?
यूनिवर्स बोर्न लॉन्ग बिफोर बिग बैंग ?(दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,मुंबई ,दिसंबर १ ,२०१० ,पृष्ठ २१ )।
क्या यह सृष्टि अबसे १३.७ अरब वर्ष पूर्व एक महाविस्फोट से बनी थी या इस से भी बहुत पहले सृष्टि के बनने बिगड़ने (विनष्ट होने )का सिलसिला युगों युगों से चला आ रहा था .और चर्चित बिग बैंग उस आवधिक दौड़ का हिस्सा भर है जो बिग बैंग के रूप में इस से पहले भी होता रहा है .यानी बिग बैंग से पहले भी बिग बैग हुआ था .होते रहतें हैं बिग बैंग .सृजन और विध्वंश सृष्टि का क्रम है ,नियम है ,अपवाद नहीं ।
यह निष्कर्ष उस सार्वत्रिक सर्व -व्यापी कोस्मिक बेकग्राउंड रेडियेशन (ब्रह्मांडीय विकिरण )के एक नवीनतम विश्लेसन ने प्रस्तुत किये है इस विकिरण में "सर्क्युलर पैट्रन "की मौजूदगी की पुष्टि कर लेने के बाद ।
कोस्मिक बेकग्राउंड रेडियेशन उस महाविस्फोट का बचा खुचा अंश है जो दिग्दीगान्त्रों में व्याप्त है और जो गोचर सृष्टि (ओब्ज़र्वेबिल यूनिवर्स )के निर्माण के बाद अवशेषी बना रहा है .यह महा विस्फोट आखिरी नहीं था .प्रथम भी नहीं ,विस्फोटों की ऐसी श्रृंखला में से बस एक था .जो उस महा -अणुमें हुआ माना जाता है जो एक हॉट सूप के रूप में सारा पदार्थ -ऊर्जा समाये हुए था .एक साथ सब जगह मौजूद था यह आदि -अणु .अति उत्तप्त और सघन अवस्था (डेंस स्टेट )में था .जगह तो घेरता ही नहीं था .क्यों ?काल और अन्तरिक्ष ,टाइम एंड स्पेस का अस्तित्व ही कहाँ था तब .जगह घेरता भी तो कैसे ?एक साथ सब जगह भी तो यही परम -अणु था तब .कृष्ण के विराट स्वरूप सा एक साथ सब जगह ।
क्या यह सृष्टि अबसे १३.७ अरब वर्ष पूर्व एक महाविस्फोट से बनी थी या इस से भी बहुत पहले सृष्टि के बनने बिगड़ने (विनष्ट होने )का सिलसिला युगों युगों से चला आ रहा था .और चर्चित बिग बैंग उस आवधिक दौड़ का हिस्सा भर है जो बिग बैंग के रूप में इस से पहले भी होता रहा है .यानी बिग बैंग से पहले भी बिग बैग हुआ था .होते रहतें हैं बिग बैंग .सृजन और विध्वंश सृष्टि का क्रम है ,नियम है ,अपवाद नहीं ।
यह निष्कर्ष उस सार्वत्रिक सर्व -व्यापी कोस्मिक बेकग्राउंड रेडियेशन (ब्रह्मांडीय विकिरण )के एक नवीनतम विश्लेसन ने प्रस्तुत किये है इस विकिरण में "सर्क्युलर पैट्रन "की मौजूदगी की पुष्टि कर लेने के बाद ।
कोस्मिक बेकग्राउंड रेडियेशन उस महाविस्फोट का बचा खुचा अंश है जो दिग्दीगान्त्रों में व्याप्त है और जो गोचर सृष्टि (ओब्ज़र्वेबिल यूनिवर्स )के निर्माण के बाद अवशेषी बना रहा है .यह महा विस्फोट आखिरी नहीं था .प्रथम भी नहीं ,विस्फोटों की ऐसी श्रृंखला में से बस एक था .जो उस महा -अणुमें हुआ माना जाता है जो एक हॉट सूप के रूप में सारा पदार्थ -ऊर्जा समाये हुए था .एक साथ सब जगह मौजूद था यह आदि -अणु .अति उत्तप्त और सघन अवस्था (डेंस स्टेट )में था .जगह तो घेरता ही नहीं था .क्यों ?काल और अन्तरिक्ष ,टाइम एंड स्पेस का अस्तित्व ही कहाँ था तब .जगह घेरता भी तो कैसे ?एक साथ सब जगह भी तो यही परम -अणु था तब .कृष्ण के विराट स्वरूप सा एक साथ सब जगह ।
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