गुरुवार, 25 जून 2015

वफादार दामाद

सर्वस्वीकृत मान्य सिद्धांत है बेटा पत्नी के पक्ष में डटके  खड़ा होता रहा है। वो स्साला कमांडर भी खड़ा हो गया तो इसमें कोई नै बात नहीं। पूत सबके एक से ही सपूत होते हैं। बड़ी बात ये है जो धीरूभाईजी के साथ पहली मर्तबा घटी है। पहली बार की चुभन ज्यादा होती है। धीरे धीरे ही कम होगी।

धीरू अभी सुबहो सुबहो सो कर ही उठा है।सुबहो न अभी ठीक से आँखें भी कहाँ खोली हैं।  उठते ही गुनगुने सेलाइन वाटर से गरारे करने की  आदत है सो पानी के गरारे खंगालता ड्राइंग से किचिन की ओर बढ़ रहा है। बेटा हमेशा की तरह पत्नी का बगल बच्चा बना बैठा था।एक ऑब्सेशन के तहत  बापधीरू को देखते ही कमांडर -बेटा  बोला पापा आपने मेरी सासु माँ को क्या कह दिया वो रात भर सो नहीं पाईं ,आप उनके परमेश्वर पति की जुबान  अपने मुंह में लेके क्या बोल गए ?

लो कर लो बात अब समधन -समधी की हंसी मज़ाक भी सेंसर होगी इस घर में धीरू मन में सोचता रहा । बेटे ने सास के प्रति अपनी वफादारी निभाने के साथ साथ पत्नी को भी जता दिया -देखा पौ  फटते ही बाप की पेशी लगा दी।स्साला अब तक पत्नी की ही हिमायत लेता था। अब सास की भी लेगा।पत्नी के चेहरे पर एक परम संतोष का भाव था। कप्तान पत्नी मन ही मन मुस्कुरा रही थी। ये कप्तान की डिग्री उसने एक परम्परा के तहत पति के ओहदे से अपना ओहदा स्वयं एक दर्ज़ा बढ़ाके हासिल की है। 

शीर्षक :वफादार दामाद 

1 टिप्पणी:

Digamber Naswa ने कहा…

निशाने कहाँ कहाँ लगाते हैं आप ... सटीक ...