गुरुवार, 11 जुलाई 2013

सफ़ेद मोतिया (मोतियाबिंद) : कारण और इलाज।

क्‍या है सफेद मोतिया  (What is Cataract):
जब उम्र बढ़ने के साथ एक ख़ास उम्र में आपकी आँख का लेंस धुंधला पड़ जाता है और बीनाई (विजन आपका, नजर आपकी) कमज़ोर पड़ने लगती है तब इस स्थिति को कहा जाता है सफ़ेद मोतिया. कहीं कहीं पर इसे आंख का माडा भी कहा जाता है। दुनिया भर में व्याप्त पचास फीसद से भी ज्यादा मामलों में अंधत्व की वजह यही सफ़ेद मोतिया बनता रहा है जबकि इसका बाकायदा पुख्ता इलाज़ है. 

क्यों हो जाता है नेत्र लेंस गन्दला (क्लाउडी)? 
दरअसल लेंस में एक प्रोटीन बढ़ने लगता है जो इसे मेघाछन्न (क्लाउडी) बना देता है. नतीजे के तौर पर अब इससे निर्बाधरूप प्रकाश नहीं वर्तित (रिफ्रेक्ट) हो पाता है. नजर गिरने की वजह इस प्रोटीन का ज़माव ही बनती है. अलावा इसके बढती उम्र ही इसकी मुख्य वजह बनती है. उम्र दराज़ होते जाने की प्रक्रिया में ही लेंस प्रोटीन अपारदर्शी हो जाती है. दुर्बोध्य हो जाती है. शुरूआती दौर में लेंस अनियमित तौर पर प्रकाश को मोड़ने (अपवर्तित करने) लगता है नतीज़न बीनाई के चश्मों (रीडिंग ग्लास) का नम्बर बढ़ने लगता है. 

सफ़ेद मोतिया को अपचयन सम्बन्धी विकार (Metabolic disorders) यथा मधुमेह जैसे रोग भी हवा दे सकते हैं. बे-इन्तहा धूप में समय बिताने की मजबूरी, बेहद शराब का सेवन, साथ में धूम्रपान करना बे-हिसाब भी सफ़ेद मोतिया की वजह बनता है. अलबत्ता आँख में आई चोट भी इसकी वजह बन सकती है. 

सफेद मोतिया के लक्षण (Symptoms of Cataract): 
रोजमर्रा के जीवन को असर ग्रस्त कर सकता है सफ़ेद मोतिया. इसके लक्षणों में शामिल हैं: 
(1) बीनाई का धुंधला पड़ जाना, साफ़ दिखलाई न देना. 
(2) बुजुर्गों में निकट-दृष्टिता, दूर की चीज़ों को साफ़ साफ़ न देख पाना. 
(3) रंगों को देखने की क्षमता का असरग्रस्त हो जाना क्योंकि लेंस एक फ़िल्टर का काम कम करने लगता है सफ़ेद मोतिया होने पर. 
(4) रात को गाड़ी चलाते वक्त सामने से आते वाहन की रौशनी से आँखों का चुंधिया (चौन्धिया) जाना. इसी चुभने वाली तेज़ रौशनी की वजह से रात को गाड़ी चलाना जोखिम का काम हो जाता है. 
(5) दिन में भी चौंध से जब तब आजिज़ आना. ग्लेअर से परेशान हो जाना. 
(6) डबल विजन (Diplopia) बोले तो एक ही वस्तु की दो दिखलाई देना एक के ऊपर एक या फिर एक की बगल में दूसरी कभी कभार विकर्ण रेखी (डायागनली, Diagonally) भी. 
(7) चश्मे का नम्बर यकायक बदलना. 

सफेद मोतिया का इलाज (Treatment of Cataract):
शल्य चिकित्सा ही करवानी चाहिए सफ़ेद मोतिया होने पर. किसी भी और के झांसे में न आएं. नीम हकीम बहुत हैं आपके आसपास. शल्य के दौरान सर्जन (शल्यक, जर्राह) गंदले लेंस को हटाकर उसके स्थान पर आँख के भीतर ही अंत: नेत्रलेंस फिट (प्रत्यारोपित) कर देता है. बेशक आपको चंद रोज़ अभी भी चश्मे लगाने पड़ सकते हैं लेकिन जल्दी ही आपकी नजर (बीनाई) सफ़ेद मोतिया से पहले, जैसी थी, वैसी ही, हो जायेगी. सफ़ेद मोतिया के शल्य में आई तेज़ी ने अब चश्मों से निजात दिलवा ही दी है. तरह तरह की सर्जरी काम में ली जाती है सफ़ेद मोतिया के इलाज़ में. 

अति शूक्ष्म चीरे वाला शल्य (Micro Incision Cataract Surgery): 
(1) लगभग दो मिलीमीटर का चीरा ही अब लगाया जाता है. 
(2) गन्दला चुके लेंस को टुकड़ा टुकड़ा करके निकालने के लिए अब एक अल्ट्रासाउंड युक्ति काम में ली जाती है. इसे फोटो-इमलसीफिकेशन (Photo emulsification) कहा जाता है. अब एक सहज मोड़ने योग्य फोल्ड जो हो सके अपने ही ऊपर ऐसा एक लेंस आँख में अन्दर ही फिट कर दिया जाता है. इसे अंत: नेत्र लेंस (Intra Ocular Lens, IOL) कहा जाता है. 
(3) अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ता है. 
(4) न कोई सीवन, न रक्त स्राव न पीड़ा, ऐसे जाओ ऐसे वापस आओ. 
(5) तेज़ी से ठीक हो जाती है आपकी आँख सर्जरी के बाद. 

पांच मिलीमीटर चीरे वाली सर्जरी (Small Incision Cataract Surgery, SICS): 
(1 )इस शल्य में पांच मिलीमीटर का चीरा लगाना पड़ता है. 
(2) लेंस को हाथ से ही बाहर निकाल दिया जाता है. इसके स्थान पर तहाके मोड़ के एक अंत: नेत्र लेंस फिट कर दिया जाता है. 
(3) किसी सीवन की ज़रूरत नहीं पड़ती है यहाँ भी. 
(4) जल्दी आपकी आँख दुरुस्त हो जाती है सफ़ेद मोतिया की स्थिति से पहले जैसे ही. 

परम्परागत सफेद मोतिया शल्य चिकित्‍सा 
(Conventional Cataract Surgery or Extra Capsular Cataract Extraction, ECCE): 
(1) इसमें 10-12 मिलीमीटर का चीरा लगाना पड़ता है. 
(2) गन्दला चुका नेत्र लेंस साबुत का साबुत निकालना पड़ता है. 
(3) प्लास्टिक का एक सख्त (कठोर) लेंस आँख में फिट कर दिया जाता है. 
(4) कई सीवन-टांके लगाने पड़ते हैं. 
(5) 6-10 हफ्ते बाद ही नया नम्बर चश्मे का मिलता है. 

कब करवाई जाए सफ़ेद मोतिया की सर्जरी? 
जैसे ही सफ़ेद मोतिया आपकी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में व्यवधान डाले वैसे ही सर्जरी करवा लें. मोतिया के पकने का इंतज़ार न करें. जितना आप इंतज़ार करेंगें उसी अनुपात में शल्य भी पेचीला हो जाएगा. बीनाई भी ज्यादा असर ग्रस्त होती जायेगी. वक्त जाया न कीजिए.

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पूर्व में यह लेख साइंस ब्लोगर्स अशोशियेशन आफ इंडिया पर प्रकाशित हो चुका है .

वीरुभाई (वीरेंद्र शर्मा )

9 टिप्‍पणियां:

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सफ़ेद मोतिया के बारे में बहुत काम की जानकारी मिली, आभार.

रामराम.

Vikesh Badola ने कहा…

अच्‍छी और महत्‍वपूर्ण जानकारी।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

लक्षणों और निदान का ज्ञानपूर्ण विवरण..

arvind mishra ने कहा…

इस समय तो फेको सर्जरी ही श्रेष्ठ हैं

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

लोकोपयोगी जानकारी के लिए साधुवाद

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

उपयोगी... राम राम भाई!

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Anita ने कहा…

आभार इस जानकारी के लिए जो सबके काम की है

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत उम्दा,उपयोगी जानकारी देने के लिए आभार,,

RECENT POST ....: नीयत बदल गई.