बुधवार, 10 जुलाई 2013

भक्ति- मार्गीय धुंध

भक्ति- मार्गीय धुंध 

(१)शिवोहम 

बोले तो मैं ही शिव हूँ .ईश्वर तो अकर्ता है .अजन्मा है कालों का भी काल 

महाकाल (अकाल तख़्त )है .वह तो सदैव ही कल्याण - कारी है।सुखकर्ता 

दुःख हरता है .सतनाम है .

 पूछा जा सकता है :क्या आप भी हैं ?यदि नहीं 

तो फिर काहे को कहते हो शिवोहम .अपने गिरेबान में झाँक देखा है कितनी 


खोट (alloy )चढ़ी है आत्मा पर .कहाँ अपने निज धर्म मूल स्वभाव में 

आत्मा सोने सी पावन थी .२ ४ कैरट गोल्ड थी .

आप तो कर्मबंधन से बंधे आवाजाही के चक्र में फंसे रहते हैं .इस आवाजाही 

से मुक्ति मांगते रहते हैं .दुखी होकर कहते हैं ईश्वर अब उठाले .अब और 

नहीं  देखा सहा जाता .

आप मंगते हैं ,बेगर हैं ,मांगते ही रहते हैं -मैं मूरख खलकामी कृपा करो 

भरता .

क्या कभी ईश्वर को मांगते किसी के आगे हाथ फैलाते  देखा है ?

फिर आप शिव कैसे हो गए ?

(२) अहमब्रह्मास्मि यानी मैं ही ब्रह्म हूँ 

क्या सचमुच आप ब्रह्म हैं और जानते हैं ब्रह्म क्या चीज़ है ?किस तत्व का 

नाम ब्रह्म है ?

नोट करो :

ब्रह्मलोक ,परलोक ,मुक्ति धाम ,परमधाम ,शान्तिधाम तो आत्मा का मूल वतन हैं .इस सृष्टि रुपी मंच पर निर्धारित समय पर ही आत्माएं अपना घर (ब्रह्म लोक )छोड़ के  आती हैं .बने बनाए अनादि ड्रामा के अनुसार .

आप ब्रह्म कैसे हो सकते हैं .जब की यह महत तत्व (ब्रह्म )पञ्च तत्व से न्यारा है अलग है .छटा तत्व है .व्यापक है आकाश की तरह जहां सिर्फ स्वर्णिम रक्ताभ प्रकाश है आवाज़ की दुनिया से परे .दूरबीनों द्वारा प्रेक्षनीय सृष्टि की सीमा से भी परे .

क्या आप चाँद सितारों से भी परे रहते हुए इस कर्म भूमि सृष्टि मंच ,इस लोक में ,साकारी स्थूल दुनिया में कर्म कर रहे हैं ?आपके पाँव तो ज़मीन पर हैं .शरीर भी स्थूल है पञ्च भूतों का बना .वह ब्रह्म लोक तो पञ्च भूतों से न्यारा और प्यारा है .

आप तो कर्म करते हुए अपना भाग्य लिख रहें हैं .

Your action (Karma )writes your destiny ,leaves an imprint on your soul which you carry to the next birth when you leave the custume(body).You travel to another body not the Soul world(soul tree,ब्रह्म लोक ).

(३ )आत्मा सो परमात्मा 

परमात्मा तो अजन्मा है पूरे कल्प में एक मर्तबा ही आता है साधारण मनुष्य तन में तब, जब पञ्च भूत प्रदूषित होकर गंधाने लगते हैं .तब ,जब माया -रावण पृथ्वी को बींध देता है .इसीलिए कहा गया :

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ........

यही पूरे सृष्टि चक्र में टाइम -साइकिल में परमात्मा का परम कर्तव्य है अपने बच्चों को सर्वात्माओं को पाप मुक्त कर पावन बनाना श्रीमत पर चलाकर .

क्या आप भी सृष्टि को पञ्च तत्वों को प्रदूषण मुक्त कर फिर से पावन बनाने आते हैं ?यदि हाँ तो सात अरब आत्माओं में से किसके हिस्से आयेगा यह कर्म ?

आप तो प्रदूषित हो चुकी गंगा में डुबकी  लगाते घूमते  हैं .उसे ही पतित पावनी गंगा कहते हैं .पञ्च भूतों वायु ,अग्नि ,जल को भी पूजते देखे जाते हैं .

(४)परमात्मा कण कण में है 

इससे बड़ी अवमानना आप परमात्मा की कर नहीं सकते .क्या आपका लौकिक पिता (देह सम्बन्धी ,आपकी देह का पिता )भी कण कण में है ?

ईश्वर को आप कच्छ(कच्छप ,कछुआ ) और मच्छ(मछली )में भी ठोंक देते हैं .

कच्छप अवतार ,मत्स्य अवतार और न जाने कितने अवतार भक्ति मार्ग में गढ़ लिए गए हैं .कृष्ण को कहते हैं कालिया नाग ने फूंक मारी तो कृष्ण काले हो गए .

अरे भाई जब आत्मा पर खाद (विकर्मों की वजह से चढ़ने वाली खोट )चढ़ती है ,सोने सी पावन आत्मा पर विकारों की पर्त (सोने में मिश्र धातु की मिलावट आने लगती है )चढ़ती  है तब आत्मा काली होती है .खोटू खोटू कर्म  करने से .

कृष्ण तो विकारहीन अतिपावन सतयुगी प्रिंस है .जहां कृष्ण होगा वहां 

कंस हो नहीं सकता .यह इस कलयुग का गायन है गपोड़ा है .कृष्ण और 

कंस को एक साथ दिखाना भक्ति  मार्ग का गपोड़ा पन  है .कृष्ण को कह देते हैं इनकी सोलह हज़ार रानियाँ  थीं .  क्या किसी व्यक्ति की इतनी रानियाँ और बच्चे हो सकतें हैं . अलबत्ता सभी बच्चे शिव के ही बच्चे हैं वह ही सर्व आत्माओं का पिता है .परमात्मा को सर्वव्यापी कह देते हैं और कृष्ण को  भगवान कह देते हैं भक्ति मार्ग में . जबकि वह तो देव स्वरूप है .उसका तो जन्म     होता है .  सतयुग में कृष्ण की ही  ८ पीढियां चलती हैं इसीलिए कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं . 

राम और रावण को एक साथ दिखाना भी बहुत बड़ी गप्प है .रामचन्द्र तो चन्द्र वंशी राजा हैं .त्रेता के मालिक हैं .

एक तरफ कहते हैं :राम का नाम लो .राम नाम सत्य है दूसरी तरफ यह भी कह देते हैं -रघुपति राघव राजाराम .......बेशक भगवान(निराकार शिव ही राम हैं क्योंकि भगवान को राम भी कहा जाता है लेकिन राजाराम भगवान नहीं है पुरुषोत्तम है .देव स्वरूप है .

रावण और कंस सब कलयुग में ही हैं इसीलिए इनसे मुक्ति के प्रयास चलते रहतें हैं उसका पुतला फूंक फूंक कर .








6 टिप्‍पणियां:

Vikesh Badola ने कहा…

आकाश की तरह जहां सिर्फ स्वर्णिम रक्ताभ प्रकाश है आवाज़ की दुनिया से परे.......सुरअसुर के सम्‍बन्‍ध में नई व्‍याख्‍या,अनुकरणीय और विचारणीय।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रहना नहीं देश बिराणा है..

Aziz Jaunpuri ने कहा…

सर जी ,जीवन के गंभीरतम और गूढ़तम विषय पर सुन्दरतम प्रस्तुति

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

अनुकरणीय और विचारणीय सुंदर व्‍याख्‍या,,,,

Shalini Kaushik ने कहा…

सार्थक प्रेरणादायक प्रस्तुति आभार आगाज़-ए-जिंदगी की तकमील मौत है .आप भी पूछें कैसे करेंगे अनुच्छेद 370 को रद्द ज़रा ये भी बता दें शाहनवाज़ हुसैन .नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN हर दौर पर उम्र में कैसर हैं मर्द सारे ,

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत खरी खरी और बोधात्मक आलेख.

रामराम.