बुधवार, 27 नवंबर 2013

पत्नी में ही प्रेमिका के दर्शन एक पत्नीत्व की ओर ले जाता है 'लव हारमोन 'oxytocin'

पतली कमर को लम्बी उम्र हो 


(१)फ़्लैट  बेली बनाये रखने के लिए कमर को कमनीय दर्शनीय कमर बनाये रखने के लिए दिन भर में आप कुल जितनी केलोरी खुराक के ज़रिये ले रहें हैं कमसे कम उसके एक चौथाई की आपूर्ति प्रोटीनों से होती रहे। 

(२)कई लोगों को हार्ट बर्न (अपच के कारण सीने में जलन ), अम्ल शूल की चपेट में आने के आसार बने  रहते हैं। ऐसे लोगों को abdominal crunches कसरतों से बचना चाहिए। वजह जानियेगा। ऐसी तमाम कसरतें आमाशय में बन्ने वाले तेज़ाब को फ़ूड पाइप (भोजन नाल )की और ले जा सकतीं हैं। 

(३)बेबी फॉर्मूला को निरापद बनाता है लहसुन 

साइंसदानों ने पहली मरतबा लहसुन में ऐसे दो यौगिकों का पता लगाया है जो बेबी फार्मूला को संदूषण से (विषाक्त पदार्थों ,टॉक्सिंस ,कांटामिनेन्टस )से बचाये रह सकतें हैं। 

ब्रिटिश कोलम्बिया विश्वविद्यालय के रिसर्चदानों ने ऐसे दो यौगिकों के नाम diallyl sulfide और ajoene बतलाये हैं। बेबी फॉर्मूला तैयार करते वक्त संदूषण के खतरे को ये मुल्तवी रख सकते हैं। 

(४)पत्नी में ही प्रेमिका के दर्शन 

एक पत्नीत्व की ओर ले जाता है 'लव हारमोन 'oxytocin' .यौनाकर्षण को बढ़ाता है यह प्रेम नाम हारमोन। एक अभिनव अध्ययन का यही हासिल है। ऐसे में एक ही खूंटे से बंधे रहने को आतुर रहता है मर्द। 

Scientists at the Bonn University Medical Center found that if oxytocin is administered to men and they are shown pictures 0f their partner ,the bonding hormone stimulates the reward center in the brain ,increasing attractiveness of the partner ,and strengthening monogamy .



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12 टिप्‍पणियां:

madhu singh ने कहा…

सर जी , बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,

खुदा करे ये हरमों दुनियां में महक जाए
प्यार की भाषा को वामा का नाम मिल जाए

अभिनन्दन करती हूँ इस प्रस्तुति की अज़ीज़ साहब के साथ ,सादर स्नेहाकंक्षी

madhu singh ने कहा…

मेरी ऊपर की टिप्पणी में कृपया हरमो के स्थान पर "हारमोन" पढ़े ,सादर

सतीश सक्सेना ने कहा…

नयी जानकारी वीरू भाई !
आभार !

Ashok Saluja ने कहा…

वीरू भाई राम-राम ..बस ऐसे ही काम के बातें जारी रखें ..ज़रूरी है आज की पीढ़ी के लिए !
शुभकामनायें!

Vikesh Badola ने कहा…

रोचक है जी एक ही खूंटे से बंधे रहना।

arvind mishra ने कहा…

आक्सीटोसिन तो दूध भी बढ़ाता है न ?

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही उपयोगी और शिक्षाप्रद आलेख, आभार.

रामराम.

Rahul... ने कहा…

वाह.. क्या दिलचस्प जानकारी है...
राम-राम सर..
बहुत दिनों के बाद आया हूँ ...प्रणाम स्वीकार करें

वसुंधरा पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर और सार्थक आलेख ,मनन करने लायेक !

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

My dear Deepin ,

RCT is done only to save a teeth .If it can not be saved it is extracted .It takes normally 2 -3 sittings to increase the comfort level of the patient and should be done atleast by an MDS and or a maxillofacial surgeon .

If the tooth is not going to survive long there is no use of performing RCT .

It depends upon the reputation and honesty of the surgeon .A good surgeon will never misguide you .I got this procedure done on a number of teeth Dr.KD Dubey ,now Dir,Dental college ,SIrsa ,EX Professor and maxillofacial surgeon Dental college ,Rohtak ,Under Bhagvat Dayal sharma Medical University Rohtak ,Haryana .

regards

veerubhai

veerubhai1947.blogspot.com.

Anita ने कहा…

स्वस्थ और सुखी रहने के कामयाब नुस्खे..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जब सात जनम का साथ लिखा है तो निबाह करना सीखना चाहिये सबको।