रविवार, 19 फ़रवरी 2012

नुश्खे सेहत के :

नुश्खे सेहत के :
गुणकारी मूंगफली :एकल असंत्रिप्त वसा (Mono-unsaturated  fatty acids)  से  युक्त मूंगफली बेड   कोलेस्ट्रोल(अमित्र कोलेस्ट्रोल ,(LDL CHOLESTROL)  को कम करने में सहायक सिद्ध होती है .
हरी मटर के दाने (ग्रीन पीज़):
लौह तत्व से भरपूर है हरी मटर .सर्दियों में इसका सेवन हमारे रोग प्रति -रोधी तंत्र को मजबूती प्रदान करता है .
राजमा (Kidney -beans ):
खून में घुली चर्बी (कोलेस्ट्रोल की मात्रा) को कम करतें हैं राजमा में मौजूद रेशे .अलावा इसके ये ब्लड सूगर के स्तर को भी विनियमित करतें हैं  बढ़ने से थामतें हैं .
करी पत्ता :(Curry leaves):
गुनगुने पानी में भिगोये रखिये करी पत्ता  तकरीबन दो घंटा  सुबह सवेरे  इस पानी को एक चम्मच शहद मिलाकर पी  जाइए .कब्ज़ से राहत मिलेगी .पेट साफ़ हो जाएगा .
जाती हुई ठंड (सर्दी )से बचाव के लिए :
हमारे शरीर को सुचारू रूप काम करते रहने के लिए एक ख़ास टेम्प्रेचर रेंज (तापमान परास ,अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अंतर )की दरकार रहती है .२४ घंटों के तापमानों में १५ सेल्सियस से ज्यादा की घट बढ़  शरीर को रास  नहीं आती .वक्त लगता है अनुकूलन में .इसीलिए जाती हुई ठंड आती हुई गर्मी अनेक संक्रमण दे जाती है जूझने को .शरीर का अंदरूनी तरीका  काम करने की मिकेनिज्म मौसम के बदलते मिजाज़ से असर ग्रस्त होता है .ऐसे में पुष्टिकर तत्वों के सेवन से रोग प्रति -रोधक क्षमता को बनाए रखना ज़रूरी रहता है .पोषण विज्ञानी कुछ कुदरती खाद्यों को इस दरमियान खाने खाते रहने की सिफारिश करतें हैं .आइये देखें क्या कहतीं हैं मुंबई की मशहूर पोषण विज्ञानी Sukhada Bhatte इस मुद्दे पर :
Flaxseeds:
फ्लेक्स सीड्स (अलसी के बीज ) ओमेगा थ्री फेटि एसिड्स संजोये रहतें हैं .खून में से यह ट्राईग्लीस्राइड्स की मात्रा को जहां घटाने में मददगार साबित होतें हैं वहीँ अच्छे कोलेस्ट्रोल (HDL CHOLESTROL) की मात्रा को बढाने में भी सहायक सिद्ध होतें हैं .
इन्हें आटे  के साथ पिसवाया जा सकता है ,सलाद पर छिडका जा सकता है भूनकर तवे पर सौंफ की तरह एक चम्मच खाने के बाद खाया जा सकता है .स्वाद के लिए गुड या इसकी बहन शक्कर (ब्राउन )का स्तेमाल भी कर सकतें हैं इन रोस्टिद सीड्स के संग .
GRAPEFRUIT OR ORANGES:
संतरा और चकोतरा कोल्ड और फ्ल्यू से बचाए रहतें हैं क्योंकि इनमें विटामिन सी के रूप में एक ऐसा एंटीओक्सिडेंट मौजूद रहता है जो कोशिकाओं की टूट फूट की मुरम्मत करता रहता है संक्रमण से हिफाज़त .
BROCCOLI :
विटामिन ए  तथा विटामिन सी के अलावा यह ग्रीन वेजिटेबिल (गोभी का ख़ास किस्म का छोटा सा फूल )ग्लूटाथियोंन (Glutathione)  का अच्छा स्रोत है .श्लेष्मल झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन )में मौजूद कोशाओं (सेल्स )को जहां विटामिन ए नम रखता है  वहीँ यह आद्रता कोशिका की टूट फूट सेल डेमेज को थाम लेती है .बस  नुक्सान दायक घटिया बेक्टीरिया (YUCKY BACTERIA)से इस प्रकार शरीर  की खुद -बा-खुद हिफाज़त हो रहती है . 
बादाम गुणों की खान :
इनमे मौजूद विटामिन ई जहां  इंटरल्युकिन -२ (एक प्रकार की उपयोगी प्रोटीन )के संस्लेषण को प्रेरित करता है वहीँ यह ख़ास प्रोटीन जीवाणुओं का सफाया करने में कारगर रहती है .विषाणुओं तथा कैंसर युक्त कोशिकाओं का भी सफाया कर देती है यह प्रोटीन .
अलावा इसके बादाम राइबोफ्लेविन तथा नियासिन और बी विटामिन का भी अच्छा स्रोत हैं .ये पुष्टिकर तत्व स्ट्रेस बस्टर  सिद्ध होतें हैं स्ट्रेस के स्तर को घटातें हैं .सलाद टोपिंग  या फिर खाने के बीच में ४-५ बादाम रोज़ खाइए .
GARLIC:
लहसुन में गुण बहुत है .कितने ही एंटीओक्सिडेंट मौजूद हैं .ये अल्सर और आमाशय का कैंसर पैदा करने वाले एक जीवाणु H-PYLORY का  सफाया  करदेता  है  .
SPINACH:
पालक भी किसी से कम नहीं :
विटामिन ए और लौह तत्व से भरपूर है पालक .इम्म्यूंन रेस्पोंस(रोग प्रति रोधी अनुक्रिया )को चुस्त दुरुस्त बनाए रहता है पालक .
IRON DEFICIENCY CAN PARALYSE THE IMMUNE RESPONSE BY IMPAIRING THE T -CELLS WHICH ARE RESPONSIBLE FOR ACTIVATING THE BODY;S IMMUNE RESPONSE .
पालक का पराठा खाइए पालक डोसा  खाइए ,सलाद में खाइए पालक ,पालक मैथी का साग खाइए .ग्रीन ही ग्रीन .
CABBAGE :
बंद गोभी :इसमें मौजूद है रोग -प्रति -रोध को बढाने वाला ग्लूटाथिओंन .एंटीओक्सिडेंट एक से ज्यादा .येबंद गोभी  न सिर्फ कोशाओं का पोषक है उनकी हिफाज़त भी करता है . यही तत्व  (एंटीओक्सिडेंट ) बीमारी को भगातें हैं .
बहु विध इसका सेवन कीजिये सलाद में पराठे में ,सूप्स में ,स्ट्युज़(STEWS)में .चावल के साथ .
CURD:
दही :इसमें मौजूद लाभकारी जीवाणु स्वेत रुधिर कोशाओं को उद्दीपन प्रदान करतें हैं .चुस्त दुरुस्त बनी रहतीं हैं वाईट ब्लड सेल्स दही के सेवन से .
'LIVE AND ACTIVE CULTURES ' से    युक्त  दही भी इन दिनों बाज़ार में  उपलब्ध है .दही मिश्ठी हो या सादा,शीत या छाछ (बटर मिल्क )के रूप में हो बहु बिध उपयोगी है .
सन्दर्भ -सामिग्री :THE FOOD SOLDIERS .Avoid falling prey to changing weather by consuming resistance building natural warriors/MUMBAI MIRROR ,FE17 ,2012/P24
   

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

उबली मूँगफली अधिक लाभकारी है कि सूखी..दक्षिण नें उबली खायी जाती है।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

आप के बताए हुए सभी खाद्य-पदार्थ शरीर के लिए गुणकारी है...इनका सेवन अवश्य किया जाना चाहिए...बहुत उपयुक्त जानकारी!

veerubhai ने कहा…

उबली हुई मूंफाली हमने चेन्नई में खाई है खूब .ज्यादा पौष्टिक होता है नमक भी कम लेती है .रोस्टिद(भुनी हुई ,तली हुई नहीं )का अपना स्वाद है .मध्य प्रदेश में कच्ची गीली मूंगफली आधा रेट में सिंक कर नमक हरीमिर्चा के साथ खाई जाती है . बस तली हुई बेसन चढ़ी (हल्दी राम) की मूंगफली से बचिए .

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

सुन सुन सुन
तरह तरह के गुन

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी देती पोस्ट...... ये सभी चीज़ें खाते हैं पर अब और ध्यान दिया जायेगा

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इस मेल में तो बहुत कुछ है ... बहुत सा मसाला एक साथ ही है सेहत का ...