बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

भोली सूरत दिल के खोटे ,नाम बड़े और दर्शन छोटे

बहुत कम लोग है जिनमें अपने नाम के अनुरूप गुण हैं। ज्यादातर मामलों में तो यही देखने को मिलता है :

 'आँख के अंधे ,नाम नैन सुख ',अपने करुणानिधि को ही लो -न इनके पास निधि है ज्ञान की न करुणा है आप फरमाते हैं राम तो थे ही नहीं ,और जब राम ही नहीं थे एक कल्पित कथा नायक थे तो रामसेतु कैसा। आँखों  से ही नहीं ये ज्ञान से भी धृतराष्ट्र हैं।इसीलिए आँखें  काले चश्मों से ढके रहते हैं।   

एक है अपने सीताराम येचुरी -ये अपने भारत के  योगगुरुओं का मज़ाक उड़ाते हैं कहते हैं ये योगसाधक ऐसे लगते हैं जैसे कोई स्वान  (कुत्ता )जम्हाई ले रहा हो। इनका नाम होना चाहिए था -शीताराम या फिर खीसाराम। 

एक हैं वृंदा जी कारंत (करात )-माथे पे बड़ी लाल बिंदी सनातनधर्मी और काम संस्कृति को लजाने वाले ,विघटनकारी छद्म -सेकुलर , फाशिष्ट्वादी यही लोग हैं जो आजकल रोहितवेमुला का कार्ड खेल रहे हैं। याकूब मैमन का जैकारा यही लोग  बुलवाते हैं। हैदराबादी ओवेसी बंधुओं और रामपुरिया आजमखान से ज्यादा खतरनाक हैं ये लेफ्टिए। बिना जड़ मूल के लोग हैं ये -थाली के बैंगन से। नीतीश -लालू -ममता इसी गैंग के सदस्य है और इन सबके बाप हैं स्वामी असत्यानन्द उर्फ़ केजरबवाल। इन्हें दुर्योधन की तरह हिन्दुस्तान में आज तक कोई शरीफ और ईमानदार आदमी ही नहीं मिला। 

एक अपने साथ पढ़ाते थे टी.डी.गेरा साहब जिज्ञासावश हमने उनका पूरा नाम पूछ लिया -बोले तुलसीदास गैरा। हमने मन ही मन सोचा माँ बाप ने सोचा न होगा लड़का बड़े होकर टिड्डी हो जाएगा -तमाम कर्कशा ध्वनियों  का स्वामी बन जाएगा।कहाँ तुलसी की कोमलता और कहाँ 'ट ' अक्षर की टै टै। 

यही तो वृंदा  के साथ हुआ है वृंदा से ही वृन्दावन नाम पड़ा तुलसी बहुल वन थे जहां उस जगह का। वृंदा का एक  अर्थ होता है तुलसी। 

पूछा  जा सकता है इन तमाम संस्कृति विरोधी लोगों से सांस्कृतिक नाम धरे क्यों घूम रहे हैं ?कमसे काम अपने नाम को तो सार्थक करें। 

इस देश में सबसे ज्यादा टूटी फूटी सड़क  नाम होता है नै सड़क। जिसका चेहरा सदैव निर्भाव बना रहता है षड्यंत्रों से आच्छादित  रहता है जो हुश हुश करके संसद में सांसदों को लहकाती है उसका नाम मिलेगा सोनिया मायनो। 

भोली सूरत दिल के खोटे ,नाम बड़े और दर्शन छोटे -आनंद लीजिये इस गीत का नीचे दिए सेतु में 

http://www.hindigeetmala.net/song/bholi_surat_dil_ke_khote.htm

पढ़िए काका हाथरसी की रचना मुहावरों का तिलिस्म खोलती सी :

नाम रूप के भेद पे ,कभी किया है गौर ,

नाम मिला कुछ और है ,अक्ल शक्ल कुछ और। 

Reply with quote

naamroop ke bhed pe kabhi kiya hai gour,
naam mila kuch aur to akl-shakl kuch aur,
shakl-akl kuch aur,"nayansukh" dekhe kaane,
"babu sundarlal" banaye ainchaktaane,
kahe kaka kavi "dayaram ji" maren machchar,
"vidyadhar" ko bhains barabar kala akshar,

"munshi chandalal" ka tarkol sa roop,
"shyamlal" ka roop hai jaise khilti dhoop,
jaise khilti dhoop, saje bush-shart pent me,
"gyanchand" chah baarfail ho gaye tenth me,
kah kaka"jwalaprasad ji" bilkul thande,
"pndit shantiswaroop" chalate dekhe dande,

"chatursen" budhdhu mile, "budhsen" nirbudh,
"shree anandilal ji" rahen sarvda kroodh,
rahen sarvda kroodh, master chakkar khate,
insaano ko "munshi totaram" padhate,
kahe kaka "balveer singh ji" latte hue hain,
"thansingh" ke saare kapde fate hue hain,

aakul-vyaakul dikhte sharma "parmanand"
kaam adhoora chod kar bhage "puran chand"
bhage puran chand, "amar ji" marte dekhe,
"mishri babu" kadvi baaten karte dakhe,
kah kaka "bhandaar singh ji" reete thothe,
beet gaya jeevan "vinod" ka rote rote,

"sheela jiji" lad rahi, "sarala" karti shor
'kusum' 'kamal' 'pushpa' 'suman' nikli badi kathor,
nikli badi kathor 'nirmla' man ki maili,
'sudha' saheli 'amritabai' milin vishaili,
kah kaka kavi 'lajjavati' dahad rahi hai,
'darshan devi' lamba ghunghat kaad rahi hai,

poonch na aai inch bhi kahlaate 'hanumaan'
mile na "arjun lal" ke ghar me teer-kaman,
ghar me teer-kaman, badi karta hai "neka"
"teerth-raj" ne kabhi elahabaad na dekha,
'satya-pal' kaka ki rakam dakar dhuke hain,
'vijay singh' dus baar election haar chuke hain,

naam dham se kaam ka kya hai samnjasy,
kisi party ke nahi 'jhanda ram' sadasy,
'jhndaram' sadasy, bhagy ki mite na rekha,
"swarnsingh" ke haath kada lohe ka dekha,
kah kaka kavi 'kharelal ji' nikle khote,
is kalyug me naam bade aur darshan chote


KAKA HATHRASI


भोली सूरत दिल के खोटे ,नाम बड़े और दर्शन छोटे 

4 टिप्‍पणियां:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 04-02-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2242 में दिया जाएगा
धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

राम-राम भाई जी, बहुत बढ़िया

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मस्तिष्क में जो भरा है, वही तो निकलेगा।

Digamber Naswa ने कहा…

आपकी व्यंगात्मक शैली को पुनः नमन .... मजा आ गया जी राम राम ...