गुरुवार, 28 जनवरी 2016

भारत के दलित सावधान रहें रक्तरंगी लेफ्टीयों (फासिस्ट्स-वादी मार्क्स-वादी )और जेहादी मानसिकता के उन लोगों से जिन्होनें एक हिंदू दलित चेहरे को आगे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी

भारत के दलित सावधान रहें रक्तरंगी लेफ्टीयों (फासिस्ट्स-वादी  मार्क्स-वादी )और जेहादी मानसिकता के उन लोगों से जिन्होनें एक हिंदू दलित चेहरे को आगे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी और लगातार सेंक रहे हैं। गरमाए हुए हैं रोहिथ वेमुला की आत्मग्लानि जन्य आत्म हत्या को। आदमी के अंदर का विरोध ,द्व्न्द्व जब बे -साख्ता बढ़कर बे -काबू हो जाता है तब ही एक होनहार युवक आत्महत्या करता है। जब उसका अपने 'असली मैं 'रीयल सेल्फ से सामना होता है ,तब वह निहथ्था रह जाता है।

कौन लोग थे जिन्होनें उसे बीफ पार्टी देने और एक और युवक को शूकर पार्टी देने के लिए उकसाया। कौन जेहादी थे जिन्होनें याकूब मेमन के समर्थन  में देश को बदनाम करने के लिए एक मासूम दलित का चेहरा आगे किया ?

दिमाग पे ज्यादा जोर डालने की आज ज़रूरत नहीं रह गई है। ये वही लोग हैं जिन्होनें   निर्भया हत्या काण्ड के उस नाबालिग हत्यारे को तैयार किया था जिसका चेहरा और नाम आज तक   छिपाए रखा, और उसे साफ़ बचाकर ले गए। उसे भी  इन्हीं ताकताओं ने हिन्दू लड़कियों को भ्रष्ट  करने की नीयत से पाला था।उसी शातिर ने निर्भया को दीदी कहकर बुलाया था -उस हत्यारी बस में जो इसी काम के लिए नियुक्त थी। गोवा से प्रकाशित सनातन प्रभात  नामक पाक्षिक  पत्र ने अपने ताज़ा अंक में  इस पूरी साजिश का खुलासा किया है। 

ओवेसी सोच के इन शातिरों से आज भारत के दलितों को असली ख़तरा है। ये ताकतें किसी को भी अंदर से जेहादी बना सकती हैं।

कौन ताकतें हैं वे -पता लगाया जाए जिन्होनें एक दलित परिवार को पैसों से इतना लाद  दिया है कि  वह असली संवेदना और जेहादी उकसावे में फर्क करना भूल गए।

नरेंद्र मोदी ने जो कुछ रुंधे गले से कहा वह एक ईमानदार वक्तव्य था -'हमें इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए ' माँ ने अपना लाडला और भारत माँ ने एक होनहार युवक को खो दिया।

कोरी संवेदना नहीं थी यह । हम नहीं सोचते भारत के दलित आज असली संववेद्ना  और मोहित  करने वाली जेहादी ताकतों में फर्क करना भूले हैं और इसी लिए ये चंद लाइनें लिखीं हैं  ताकि और रोहिथ  वेमुला विज्ञान कथाकार बनने का अपना सपना बीच में ही छोड़कर हमारे बीच से न  चला जाए।

जय श्रीकृष्णा ! 

3 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (29.01.2016) को "धूप अब खिलने लगी है" (चर्चा अंक-2236)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच्ची संवेदना औऱ असहज हाहाकार में अन्तर समझे।

Digamber Naswa ने कहा…

खरीदा हुआ मीडिया इस शोर में सबसे आगे है ...
पर स्ययद समझ आते तक देर न हो जाए ....