रविवार, 13 दिसंबर 2015

चार उचक्के चालीस चोर ,अम्मा इनकी सीना ज़ोर

 चार   उचक्के चालीस चोर ,अम्मा  इनकी सीना  ज़ोर

हुआँ हुआँ का मचा है शोर ,गीदड़ ,श्यार,लोमड़िया मोर।

लोमड़िया को माँ कहते वो कहने दो ,

झूठ नहीं वो कहते उनको कहने दो।

 धन के  हाथों गिरवीं हैं अपने सब क़ानून ,

निर्बल को  कांटे मिलें ,सबल कू मिलें प्रसून।



   

1 टिप्पणी:

kuldeep thakur ने कहा…

जय मां हाटेशवरी....
आप ने लिखा...
कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
दिनांक 14/12/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर... लिंक की जा रही है...
इस चर्चा में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
कुलदीप ठाकुर...