होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?
होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?कैसे काम करती है और क्या कुछ खतरे भी हो सकतें हैं इसके इस्तेमाल से ?
वैक्सीन या टीके की दवा एक जैविक नुस्खा है एक 'Biological preparation ' है .ख़ास बीमारियों से बचाव के लिए ख़ास टीके तैयार किये जाते हैं . यह व्यक्ति की रोग -प्रतिरोधन क्षमता इम्युनिटी को बढातें हैं .
इनमे मौजूद रहता है एक सक्रिय क्रियाशील अभिकर्मक ,एक एक्टिव एजेंट यह बीमारी पैदा करने वाली सूक्ष्म जैविक आवयविक संगठन (सूक्ष्म जीव ,रोगकारक ) Microorganism का ही प्रति रूप होता है .अकसर यह रोग पैदा करने वाले माइक्रोब्स के कमज़ोर रूप(weakened form) या मृत रूप(killed form ) से ही तैयार किया जाता है .
जोखिम
कभी कभार ही ऐसा होता है कि माइक्रोब की यह कम्ज़ोरिकृत(बोदी ) किस्म virulent form यानी एक दम से खतरनाक किस्म में तबदील हो जाती है .ऐसा टीके के व्यक्ति के शरीर में पहुँचने के बाद भी हो सकता है पहले भी .
अब यदि माइक्रोब्स सक्रिय हो उठे तो वही रोग व्यक्क्ति को उग्र रूप हो अपनी चपेट में भी ले सकता है .उसी बीमारी के लक्षण व्यक्ति में प्रगट हो सकते हैं जिससे बचाव के लिए दवा का टीका दिया गया है .अकसर ऐसा होने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग ही जाता है .अलावा इसके वैक्सीन एक अनियत्रित प्र्त्युर्जात्मक प्रतिक्रया (uncontrolled chain reaction)भी करवा सकती है .
तीन महीने की मेघा देवकरी की अभी हाल ही मैं मुंबई में ओरल पोलियो वेक्सीन (poliyo drops )और Hepatitis -B तथा DTP के टीके लगने के केवल दस घंटे के बाद ही हो गई . .
बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है कि उसकी मौत की वजह ये टीके ही बने हों .हो सकता है पहले से ही कोई पेचीला पन कोई जटिलता किसी मेडिकल कंडीशन की चली आ रही हो टीके लगने के बाद आये बुखार ने उसे और खराब कर दिया हो .
जांच के लिए टीके के तमाम साम्पिल्स कसौली भेजे गएँ हैं .मेघा के साथ आठ और बच्चों को यही टीके लगे थे .सभी बाकी बच्चे ठीक ठाक हैं .अलबत्ता उस बैच नंबर के सभी टीके इस्तेमाल से बाहर कर दिए गए हैं .
९५,००० लोगों को DPT वेक्सीन तथा ओरल पोलियो वेक्सीन की १६९ खुराकें दी गई थीं .कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं है बकौल डॉ अरुण बामने ,BMC JOINT EXECUTIVE HEALTH OFFICER.
कैसे काम करती हैं वेक्सीनें ?
टीके शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को उद्दीपन प्रदान कर घुपैठिये रोग कारक को पहचान कर नष्ट कर डालने की कूव्वत प्रदान करते हैं .ताकत देते हैं .फोरिन बॉडी को शिनाख्त कर मार डालने की .
आइन्दा के लिए याद रखने की भी उसकी भेषभूषा आदि .
बस एक बार
टीका लग जाए फिर शरीर प्रोटीन कोट पहचानने लगता है आतताई विषाणु का और बस
अपने अश्त्र शश्त्र ,तमाम किस्म की मारक कोशाओं के साथ प्रतिरक्षा तंत्र
आत् ताई रोगकारकों पर धावा बोलके उन्हें ठिकाने लगा देता है .और इस प्रकार
इन्हें कोशाओं में प्रवेश लेने से रोक देता है .प्रतिरक्षा तंत्र अब
संक्रमित कोशाओं को भी पहचानके नष्ट कर डालता है .वैक्सीन या टीके की दवा एक जैविक नुस्खा है एक 'Biological preparation ' है .ख़ास बीमारियों से बचाव के लिए ख़ास टीके तैयार किये जाते हैं . यह व्यक्ति की रोग -प्रतिरोधन क्षमता इम्युनिटी को बढातें हैं .
इनमे मौजूद रहता है एक सक्रिय क्रियाशील अभिकर्मक ,एक एक्टिव एजेंट यह बीमारी पैदा करने वाली सूक्ष्म जैविक आवयविक संगठन (सूक्ष्म जीव ,रोगकारक ) Microorganism का ही प्रति रूप होता है .अकसर यह रोग पैदा करने वाले माइक्रोब्स के कमज़ोर रूप(weakened form) या मृत रूप(killed form ) से ही तैयार किया जाता है .
जोखिम
कभी कभार ही ऐसा होता है कि माइक्रोब की यह कम्ज़ोरिकृत(बोदी ) किस्म virulent form यानी एक दम से खतरनाक किस्म में तबदील हो जाती है .ऐसा टीके के व्यक्ति के शरीर में पहुँचने के बाद भी हो सकता है पहले भी .
अब यदि माइक्रोब्स सक्रिय हो उठे तो वही रोग व्यक्क्ति को उग्र रूप हो अपनी चपेट में भी ले सकता है .उसी बीमारी के लक्षण व्यक्ति में प्रगट हो सकते हैं जिससे बचाव के लिए दवा का टीका दिया गया है .अकसर ऐसा होने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग ही जाता है .अलावा इसके वैक्सीन एक अनियत्रित प्र्त्युर्जात्मक प्रतिक्रया (uncontrolled chain reaction)भी करवा सकती है .
तीन महीने की मेघा देवकरी की अभी हाल ही मैं मुंबई में ओरल पोलियो वेक्सीन (poliyo drops )और Hepatitis -B तथा DTP के टीके लगने के केवल दस घंटे के बाद ही हो गई . .
बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है कि उसकी मौत की वजह ये टीके ही बने हों .हो सकता है पहले से ही कोई पेचीला पन कोई जटिलता किसी मेडिकल कंडीशन की चली आ रही हो टीके लगने के बाद आये बुखार ने उसे और खराब कर दिया हो .
जांच के लिए टीके के तमाम साम्पिल्स कसौली भेजे गएँ हैं .मेघा के साथ आठ और बच्चों को यही टीके लगे थे .सभी बाकी बच्चे ठीक ठाक हैं .अलबत्ता उस बैच नंबर के सभी टीके इस्तेमाल से बाहर कर दिए गए हैं .
९५,००० लोगों को DPT वेक्सीन तथा ओरल पोलियो वेक्सीन की १६९ खुराकें दी गई थीं .कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं है बकौल डॉ अरुण बामने ,BMC JOINT EXECUTIVE HEALTH OFFICER.
कैसे काम करती हैं वेक्सीनें ?
टीके शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को उद्दीपन प्रदान कर घुपैठिये रोग कारक को पहचान कर नष्ट कर डालने की कूव्वत प्रदान करते हैं .ताकत देते हैं .फोरिन बॉडी को शिनाख्त कर मार डालने की .
आइन्दा के लिए याद रखने की भी उसकी भेषभूषा आदि .
किन चीज़ों से तैयार किया जाता है टीका क्या क्या घटक हो सकतें हैं वैक्सीन के ?
इनमे शामिल हो सकतें हैं चिकिन एम्ब्रियो ,भेड़ कोशायें ,मंकी ब्लड कल्चर आदि .
Hepatitis -B वैक्सीन में ह्यूमेन री -कोम्बिनेंट ड़ी. एन. ए. घटक शामिल रहता है . यही वह अकेला घटक है जिसकी कभी रिएक्शन नहीं होती आजकल ह्यूमेन इंसुलिन री -कोम्बिनेनेट ड़ी एन ए टेक्नोलोजी से ही तैयार की जाती है .
Jenna Talackova : Transgender beauty queen