सोमवार, 14 मई 2012

होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?

होती क्या है टीके की दवा वैक्सीन ?कैसे काम करती है और क्या कुछ खतरे भी हो सकतें हैं इसके इस्तेमाल से ?

वैक्सीन या टीके की दवा एक जैविक नुस्खा है एक 'Biological preparation ' है .ख़ास बीमारियों से बचाव के लिए ख़ास टीके तैयार किये जाते हैं . यह व्यक्ति की रोग -प्रतिरोधन क्षमता इम्युनिटी को बढातें हैं .

इनमे मौजूद रहता है एक सक्रिय क्रियाशील अभिकर्मक ,एक एक्टिव एजेंट यह बीमारी पैदा करने वाली सूक्ष्म जैविक आवयविक संगठन  (सूक्ष्म जीव ,रोगकारक ) Microorganism का ही प्रति रूप होता है .अकसर यह रोग पैदा करने वाले माइक्रोब्स के कमज़ोर रूप(weakened form) या मृत रूप(killed form ) से ही तैयार किया जाता है .

जोखिम

कभी कभार ही  ऐसा होता है कि माइक्रोब की यह कम्ज़ोरिकृत(बोदी ) किस्म  virulent  form  यानी        एक दम से खतरनाक किस्म में तबदील हो जाती है .ऐसा टीके के व्यक्ति  के शरीर में पहुँचने के बाद भी हो सकता है पहले भी .

अब यदि माइक्रोब्स सक्रिय हो उठे तो वही रोग व्यक्क्ति को उग्र रूप हो अपनी चपेट में भी ले सकता है .उसी बीमारी के लक्षण व्यक्ति में प्रगट हो सकते हैं जिससे बचाव के लिए दवा का टीका दिया गया है .अकसर ऐसा होने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग ही जाता है .अलावा इसके वैक्सीन एक अनियत्रित प्र्त्युर्जात्मक प्रतिक्रया (uncontrolled chain reaction)भी करवा सकती है .
तीन महीने की मेघा देवकरी की अभी हाल ही मैं मुंबई   में ओरल  पोलियो  वेक्सीन  (poliyo drops )और Hepatitis -B तथा DTP के  टीके     लगने के केवल दस घंटे के बाद ही हो    गई . .

बिलकुल भी ज़रूरी नहीं है कि   उसकी   मौत  की वजह ये टीके ही बने हों .हो   सकता  है पहले  से  ही कोई  पेचीला  पन  कोई  जटिलता किसी  मेडिकल कंडीशन की चली आ रही  हो  टीके लगने के बाद आये बुखार ने उसे और खराब कर दिया हो .

जांच के लिए टीके के तमाम साम्पिल्स कसौली भेजे गएँ हैं .मेघा के साथ आठ और बच्चों  को यही टीके लगे थे .सभी बाकी बच्चे ठीक ठाक हैं .अलबत्ता उस बैच नंबर के सभी टीके इस्तेमाल से बाहर कर दिए गए हैं .

९५,००० लोगों को DPT वेक्सीन  तथा ओरल पोलियो वेक्सीन की १६९ खुराकें दी गई थीं .कहीं से कोई अप्रिय समाचार नहीं है बकौल डॉ  अरुण बामने ,BMC JOINT EXECUTIVE HEALTH OFFICER.

कैसे  काम  करती  हैं  वेक्सीनें ?

टीके शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को उद्दीपन प्रदान कर घुपैठिये रोग कारक को पहचान कर नष्ट कर डालने की कूव्वत  प्रदान करते हैं .ताकत देते हैं .फोरिन बॉडी को शिनाख्त कर मार डालने की .

आइन्दा के लिए याद रखने की भी उसकी भेषभूषा आदि .
बस एक बार टीका लग जाए फिर शरीर प्रोटीन कोट पहचानने लगता है आतताई विषाणु का और बस अपने अश्त्र शश्त्र ,तमाम  किस्म की  मारक कोशाओं के साथ प्रतिरक्षा तंत्र आत् ताई  रोगकारकों पर धावा बोलके उन्हें ठिकाने लगा देता है .और इस प्रकार इन्हें कोशाओं में प्रवेश लेने से रोक देता है .प्रतिरक्षा तंत्र अब  संक्रमित  कोशाओं को  भी  पहचानके   नष्ट  कर  डालता  है .

किन चीज़ों से तैयार किया जाता है टीका क्या क्या घटक हो सकतें हैं वैक्सीन के ?

इनमे शामिल हो सकतें हैं चिकिन एम्ब्रियो ,भेड़ कोशायें ,मंकी ब्लड कल्चर आदि .

Hepatitis -B  वैक्सीन  में ह्यूमेन री -कोम्बिनेंट ड़ी. एन. ए. घटक शामिल रहता है . यही वह अकेला घटक है जिसकी कभी रिएक्शन नहीं होती आजकल ह्यूमेन इंसुलिन री -कोम्बिनेनेट ड़ी एन ए टेक्नोलोजी  से ही तैयार की जाती है .

रविवार, 13 मई 2012

जैव घडी को धता बताके सांस लेते चले जाने का नतीजा है सोशल जेट लेग

मोटापे की एक और वजह बन  रहा  है  सोशल    जेट लेग 

क्या  आपने लोगों को काम के वक्त अपनी सीट पर थका मांदा     देखा     है  ? 

और  क्या ये लोग मुटियाने  भी लगें  हैं? 

जर्मनी के रिसर्चरों के मुताबिक़ हो सकता है ऐसे लोग सोशल जेट लेग की चपेट में आ रहें हों .
सोशल जेट लेग जीवन  की आपा धापी कटु यथार्थ दैनिकी का टाइम टेबिल और हमारी  बायो -रिदम  का .परस्पर  असंगत हो जाना है .दोनों का तालमेल टूट जाना है .

म्यूनिख  यूनिवर्सिटी   में  माहिरों  की  एक  टीम  के  मुताबिक़  यह  असंगति   लोगों को  उनींदा  ही  नहीं   ओबीस  भी  बना  रही  है .बढ़ रहा है इनका वजन .

यह आधुनिक समाज का एक ऐसा संलक्षण बनके उभरता  एक ऐसा सिंड्रोम धीरे धीरे बन रहा है जिसका किसी को कोई इल्म ही नहीं था .

हमारी दैनिक जैव घडी फिजियोलोजिकल क्लोक के समय और हमारे काम करने के समय ,कामकाजी  टाइम टेबिल का परस्पर ताल मेल टूट गया है .दफतरी घडी जैविक घडी से मेल नहीं खाती  .बे -मेल बनी हुई है .बौस की अपनी सनक है .शरीर की अपने लय ताल है जो सूरज के उगने और डूबने से ताल्लुक रखती है .

हमारी शरीर क्रिया वैज्ञानिक जैव घड़ियाँ और सोशल क्लोक अलग अलग समय बतलाने लगीं हैं .रोज़- बा- रोज़ ऐसा हो रहा है .

इसी सोशल जेट लेग का नतीजा है कामकाजी लोग ठीक से नींद नहीं ले पा रहें हैं .नींद  आने की शिकायत ला -इलाज़  होती जा रही है .पुरानी या क्रोनिक  कह कर इसको बर  तरफ नहीं किया जा सकता है

इसीलिए  लोगों की सिगरेट और शराब  नोशी की आदत और संभावना दोनों ही बढती जा रहीं हैं .केफीन  की बहुविध खपत भी ..यह विचार जोर पकड़ने    लगा  है की  सोशल जेट लेग या सोशल ड़ी -सिंक्रो -नाइ -जेशन    हमारी  सेहत की नवज से जुड़ने     लगा है लोग मोटापे   की जद   में आने लगें हैं .

हम अपनी जैविक घडी को जो एक प्राकृत चक्र के तहत  चलती है कामकाजी चक्र से यूं नहीं मिला सकते मनमाफिक जैसे हाथ घडी को मिला लेतें हैं .

हमारी प्रकृति प्रदत्त घडी हमें ही नहीं जीव जगत को भी दिन और रात का एहसास करा देती है .मुर्गे  की बांग और प्रात :कालीन पक्षियों का कलरव कौवों की कांव कांव (यदि आपके शहर में हैं तो ) इसी से संचालित हैं .

और इसीलिए भरपूर सोना और जागना एक स्वयं चालित क्रियाएं बनती आईं हैं .पौ फटने पर हम उठ जाते हैं .अन्धेरा होने पर पक्षी सो जाते हैं .हमें जागना पड़ता है .काम के वक्त के मुताबिक़ .बोस के मूढ़ के मुताबिक़ .कम्पनी की ज़रूरीयात के अनुरूप .

आधुनिक जीवन में हम जैव घडी की टिक टिक सुनना भूल गएँ हैं .इसीलिए वैसा ही मति भ्रम रहता है जैसा हवाई जहाज के लम्बे सफ़र में खासकर जब सफ़र लंबा हो आपको कई टाइम जोंस से गुज़रना हो .आपकी घडी जहां से    आप चले थे वहां के स्थानीय समय के मुताबिक़ चले जा रही है और यात्रा में आये पडावों पर वक्त कुछ और .जहां आपकी जैव घडी के मुताबिक़ दिन होना चाहिए था वहां रात है और रात की जगह दिन .

असंगत हो गए दोनों समय .ऐसे ही आपकी फिजियोलोजिकल क्लोक और ऑफिस शेड्यूल के बीच हो रहा है .होता आ रहा है .आपको खबर  ही नहीं है .,

इस सोशल जेट लेग समस्या की गंभीरता का आकलन करनें के  लिए साइंसदान रूनेबर्ग की टीम ने हमारे सोने और जागने की क्रियाओं ,सोने जागने की आदतों के बाबत एक आंकडा बैंक तैयार किया है .इसके आधार पर एक वर्ल्ड स्लीप मैप तैया किया जा रहा है .

साइंस डेली ने इसकी रिपोर्ट छापी है .गत दस सालों से ये काम ज़ारी है .खासी सूचना इस बाबत जुटा ली गई है .


भागीदारों की तौल ,लम्बाई और स्लीप पैटर्न का पूरा  हिसाब जुटाया गया है .


पता चला जो जितना ज्यादा सोशल जेट लेग की चपेट में है उसके मुटियाने की संभावना उतनी ही प्रबल बनी हुई है .ओवर वेट ज्यादा हैं ये लोग .

बात साफ़ है -यह सब जैव घडी को धता बताके सांस लेते चले जाने का नतीजा है .सोशल जेट लेग का तौहफा है .









 


 

शनिवार, 12 मई 2012

क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?

क्यों और कैसे हो जाता है कोई ट्रांस -जेंडर ?
Jenna Talackova Jenna Talackova : Transgender beauty queen



Dr Kalpesh Gajiwala , caught in the middle of the controversy surrounding Bidhan Barua's sex-change operation ,writes exclusively for Mumbai Mirror


Bidhan doc's plea: Don't demonise boy or his parents


A true success story is not when a transformed transgender is paraded as a trophy ,but when social integration is seamless/Mumbai Mirror ,Lead story ,Cover Page/MAY12,2012


भारतीय  विद्या  भवन   के संस्थापक एवं सविधान सभा के सम्मानीय सदस्य KM Munshi साहब  ने अपनी मशहूर कृति 'कृष्णावतार 'में एक पाठ का शीषक रखा था 'The boy who was a girl' (लड़का जो लडकी था ).इस पाठ में आप ने उस कौशल और  बड़े हुनर का ज़िक्र किया है जिसका इस्तेमाल करके कृष्ण राजकुमारी शिखंडी के मनो -भौतिक शरीर को पुरुष  काया स्वीकार करवाते हैं .

बेशक बाद में कृष्ण अपनी इसी सृष्टि का रणनीतिक इस्तेमाल महाभारत युद्ध में अर्जुन  का सारथी  बन कूटनीतिक  तौर  पर  करतें  हैं .शिखंडी एक ट्रांस -जेंडर था और तत्कालीन युद्ध के अनुसार केवल पुरुष ही युद्ध में शरीक हो सकते थे ,शिखंडी नहीं .न ही उस पर कोई अश्त्र शश्त्र चला सकता था .लक्ष्य भेदी मिसाइल (तीर )दाग सकता था . 


यहाँ  इस उद्धरण को देने का मतलब सिर्फ इतना ही है कि हमारे कायिक शरीर में विपरीत लैंगिक एक मनो -शरीर का होना कोई नै बात नहीं है .और न ही बिधान बरुआ वर्तमान दशक का पहला ट्रांस -सेक्सुअल है .प्रकृति की लीला कह लो या कोशा विभाजन में होने वाली चूक वह भी शुक्र और अंडाणु के मिलन मनाने के बाद यानी निषेचन के बाद यह चूक अनेक रूपों में प्रगटित ,रूपायित होती रही है .कभी  किसी महिला को कोई छंगा (छ : उँगलियों वाला ) नवजात पैदा होता है .कभी कुछ और विकृति स्वरूपा बालक .
 एकल निषेचित ह्यूमेन एग निषेचित अंडाणु से ही यह सृष्टि खड़ी हुई है .जो अभी नहीं जन्मा है वह बीज रूप पड़ा हुआ है .सारा कमाल और कौशल और अपवाद उस सिंगिल फ़र्तिलाइज़्द एग का है जिससे पहले भ्रूण (पश्चिमी सोच के तहत पहले पखवाड़े तक एम्ब्रियो बाद के कोशिका विभाजन के बाद निषेचित अंडाणु फीटस कहलाता है ) हमारे यहाँ पौर्बत्य दर्शन में एक ही शब्द प्रयोग भ्रूण प्रचलित है .

विभेदीकरण (Differentiation ) से  पहले  जब  कोशिका  विभाजन  निषेचन  के  बाद  चंद  कदम  ही  आगे  रख  पाता सभी कोशाये एक समान, यकसां होती हैं .विभेदन के बाद सबका रोल अलग अलग हो जाता है .सब के पास एक सोफ्ट वेयर होता है कौन आगे चलके क्या करेगा . .कौन सिर बनाएगा भ्रूण का कौन धड ,हाथ पैर कौन बनाएगा ,नाखून और चरम कौन ?विभेदन से पहले की कोशिकाएं ही जादुई स्टेम सेल्स कहलातीं हैं .जिन्हें सोफ्ट वेयर देकर आप कोई भी अंग शरीर का चुनिन्दा तौर पर तैयार करवा सकते हो .

भ्रूण का विकसित होना एक जटिल प्रक्रिया  है यहाँ अनेक पेचीला श्रृंखला बद्ध क्रियाएं संपन्न होती हैं .कितनी ही एक ही समय पर संपन्न होतीं हैं कितनी ही क्रमवार .बस ज़रा सी चूक होने की देर है .नतीजा होता है Blue Baby (ऐसा बच्चा  जिसके  दिल  में जन्मना  सूराख   होता है ) ,या  फिर   Cleft lip लिए चला आता है नवजात तो कभी आत्मविमोही  बना  (Autistic,Autism से  ग्रस्त  ).तो कभी ऐसा जन्मना रोग लिए चला आता है जिसमे न पढ़ पाता हैं न लिख पाता (Dyslexia).


व्यक्ति  का  ट्रांस  -जेनडर  होना भी इसी कोशिका विभाजन के तेहत चलने वाली प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर हुई चूक की ही परिणिति  है .

जहां नवजात का अतिरिक्त अंग लिए चले आना स्वीकृत है चाहें वह मामला छ :उँगलियों का हो या दो अगूंठों का या cleft lip का  .माँ बाप इन मामलों में सहर्ष इलाज़ भी जल्दी से जल्दी  करवातें हैं .और अब तो प्लास्टिक सर्जरी मयस्सर है विकृत  अंग  सुधार  के  लिए  चाहे  वह  क्लेफ्ट लिप का मामला हो या कोई और विकृति .
Cleft lip is a condition in which one is born with  his/her upper lip split.

Cleft lip is a congenital deformity of a cleft in the upper lip , on one or both sides of the midline.It occurs when the three blocks of embryonic tissue that go to form the upper lip fail to fuse and it is often associated with a cleft palate .
Cleft palate is a congenital fissure along the midline of the roof of the mouth.


लेकिन न तो जन्म के समय और बाद इसके कॉफ़ी समय तक आत्मविमोही बालक के कोई प्रगट :लक्षण होतें हैं न डिस्लेक्सिक बालक और न ही ट्रांस -जेंडर के .


बेशक प्रजनन अंगों को देखते ही हम लोग  तो   लिंग निर्धारण  तुरत फुरत कर डालते हैं नवजात का लेकिन स्वयं उसको इसका इल्म तब होता है जब वह २-३ वर्ष आयु का हो जाता है .ज्यादातर लोगों में मतेक्य और तालमेल रहता है भौत्तिक काया और मनो -भौतिक शरीर में ,Perceived gender और  assigned sex में  .


लेकिन ट्रांस -जेंडर में यह तालमेल टूट जाता है साथ ही टूट जाती है जीवन की लय .मनो -भौतिक शरीर अपने असली वजूद के लिए छटपटाने लगता है .एक नै काया ढूंढता है अपने में ही .

माँ बाप भाई बहिन अन्य नाते रिश्ते बौखलाहट छिपा नहीं पाते अपनी .माँ बाप पर तो जैसे वज्र पात ही हो जाता है .एक ठेस लगती है हतप्रभ हो कह उठते हैं -यह कुदरत की कैसी माया है ?ज्यादातर माँ बाप इस स्थिति को स्वीकार नहीं पाते .मौन या फिर मुखर अ  - स्वीकृति लिए जैसे तैसे दिन गुजारते हैं .इसे एक अपवाद मान आगे नहीं आ पाते इलाज़ के लिए .क्रोध और उन्माद विवेक हीनता अपना खेल खेलने लगती है .एक भ्रम की स्थिति बनी रहती है .


क्या करे निकटतर समाज वृहत्तर समाज ऐसे मामलों में ?

तदानुभूति दिखलाए या मज़ाक उडाये हास्य व्यंग्य विनोद और उपहास का विषय बनाए असर ग्रस्त  व्यक्ति को जो खुद एक दुविधा झेल रहा है अपने असल व्यक्तित्व की तलाश में भटक रहा  है अपने ही अन्दर अपने आप को तलाश रहा है .?

यहाँ माँ बाप और उनकी ट्रांस -जेंडर संतान दोनों सहानुभूति से आगे निकलके तदानुभूति के हकदार होने चाहिए समाज के लिए .यह कोई सामाजिक अभिशाप  नहीं बनना चाहिए .सोचना होगा हमें -दोनों ही असाधारण परिस्थितियों के मारे हैं .


ये मामला पाप पुण्य का नहीं है जन्म पूर्व  कोशिका के स्तर पर पैदा हुई चूक का है गडबडी का है .कल को जन्म पूर्व इसका समाधान भी निकल सकता है शिनाख्त भी हो सकती है गर्भ में ही गर्भस्थ ट्रांस -जेंडर की .

यहाँ पर मनो -वैज्ञानिक सलाह मशिवरा कोंसेलिंग की बराबर दोनों पक्षों को माँ बाप और ट्रांस जेंडर संतानों को निरंतर और दीर्घावधि ज़रुरत है .बच्चों  को अपनी संपत्ति मानकर इन मामलों में ज़बरजस्ती नहीं की जा सकती .आनर किलिंग वाले हमारे समाज को ज्यादा खबरदार और जानकारी की ज़रुरत है जहां ब्याह शादी ही नहीं केरीयर भी माँ बाप ही  अरेंज करतें हैं .जेंडर भी .जबकि  ये मामला है जेंडर बेन -डर
(GENDER BENDER)का .


सभी   पक्षों   को   विवेक   से   काम    लेने    की   ज़रुरत   है समाज परिवार ट्रांस -जेंडर व्यति और चिकित्सा समाज . सभी को संवेदन शील भी होना पडेगा परस्पर ..

परीक्षा और सावधानी की घडी है यह

एक छोर पर बिधान के घरवाले डॉ कल्पेश गाजीवाला पर दवाब बनाए हुएँ हैं कि वह बिधान की सर्जरी से बाज़ आयें दूसरे छोर पर मुंबई का सैफी अस्पताल इस सामाजिक सरोकारों वाले मुद्दे पर मनमोहन सिंह जी की तरह मौन धारे हुए है .संतोष का विषय यही है इस  समय मुंबई के प्लास्टिक सर्जनों का परिवार बिधान और उसके प्लास्टिक सर्जन डॉ गिरजेश के साथ है जो  कोर्ट   कचहरी    की बहु -मूल्य राय को अमली जामा पहनाने को तैयार खड़ें हैं .

बहुत दूर का सफ़र है

कई चरणों में सर्जरी होनी है फिर दीर्घावधि मनो -वैज्ञानिक  सलाह मशविरा सावधानी न बरतने पर किसी भी पक्ष से चूक हो सकती है जबकि इस मोड़ पर सबका समस्वर होना रहना ज़रूरी है .ताकी बिधान को उत्तर सर्जरी जन समुन्दर में वैसे ही दोबारा छोड़ा जा सके जैसे समुन्दर से छिटकी  किसी मछली को समुन्दर में .

ब्लॉग जगत की शुभकामनाएं सभी पक्षों को .
कृपया   देखें    -

बुधवार, 9 मई 2012


शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर

http://veerubhai1947.blogspot.in/

शुक्रवार, 11 मई 2012

जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .

जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .

जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .


Virendra Kumar Sharma




लाखों लाख लोगों को बचाएगा दिल के दौरे से कोलेस्ट्रोल का टीका

Cholesterol jab may save millions from heart attck/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 10,2012/P15

स्वयं  सेवियों  पर  एक  कोलेस्ट्रोल  टीके  की  आज़माइश  से  चिकित्सा  जगत  आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता से सराबोर है .रिसर्चरों के मुताबिक़ जिन लोगों को यह टीका लगाया गया आश्चर्य तौर पर हैरानी की हद तक उनकी धमनियों को अवरुद्ध करने वाला खतरनाक   नुकसानदायक कोलेस्ट्रोल (बेद कोलेस्ट्रोल ) तीन चौथाई अंशों में गायब हो गया .७०% से कम धमनी अवरोध होने पर व्यक्ति का काम चलता रहता है .उम्मीद बंध चली है आने वाले समय में लाखों लाख लोगों को यह टीका दिल और दिमाग  के दौरों से बचा सकेगा .आज़माइश अभी और होनी हैं .

जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .



जीवन   में कुछ   करने का इरादा   होना   और योजना   बनाके    उसपे   काम करना   दृढ    संकल्पित   रहना    ,एक ध्येय   लेकर   आगे   बढना   अल्जाइ  - मार्स    को उम्र   दराज़   होने पर भी   आपसे   दूर   रख    सकता   है .बचाए  रह  सकता   है आपको  इस  आम  डिमेंशिया से . अब्दुल कलाम साहब कहते हैं आदमी को बड़े खाब देखने चाहिए साइंसदान कह रहे हैं बड़ा ध्येय रखना चाहिए जीवन के लिए .इससे आगे चलके अल्जाइमर्स रोग के खतरे का वजन आगे चलके बुढापे के लिए बहुत कम हो जाता है .

साइंसदान कहतें हैं जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .

Rush University Medical Centre के साइंसदानों की   एक   टीम    ने अपना नवीनतम अध्ययन इस आशय का Archives Of General Psychiatry में   प्रकाशित किया है .लब्बोलुआब  यही  है  इरादा  बनाके  आगे  बढ़ो  जीवन  में  जो  करो  इरादतन  करो  सौदेश्य  करो  .

बकौल टीम लीडर पेट्रीशिया ए  बोयल  अध्ययन से पता चला  है जो लोग  बड़ा  ध्येय  लेके  चलते  हैं  उनकी  बोध  सम्बन्धी  संज्ञानात्मक  समझ बूझ  बेहतर रहती है बरक्स उनके जो ऐसा बड़ा कोई लक्ष्य लेके नहीं चलते हैं .और ऐसा तब भी देखने को मिलता है जब इनके दिमाग में प्लाक भी और इसके  गुच्छे भी बनने ज़मा होने लगतें हैं . यानी इन बड़े लक्ष्य केन्द्रित लोगों का एम्लोइड प्रोटीन गुच्छ भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं .जो अल्जाइमर्स के लिए उत्तरदाई बनते हैं .

इनमे स्मृति ह्रास भी नहीं होता है इसका मतलब हुआ ध्येय लेके चलना  प्लाक और टेंगल से पैदा होने वाले स्मृति ह्रास से भी बचाए रहता है .यह एक बड़ी खबर है .

सोचने समझने की बूझने की क्षमता भी असर ग्रस्त नहीं होती है .इसका मतलब यह हुआ कि सौदेश्य बने रहना सार्थक गतिविधियों में संलिप्त और लीन रहना दिमाग की सेहत को बुढापे में भी दुरुस्त बनाए रहता है .

साइंसदानों ने इन नतीजों पर पहुँचने का आधार २४६ ऐसे लोगों के अध्ययन विश्लेषण को बनाया है जो डिमेंशिया ग्रस्त नहीं रहें हैं .जिनकी कालान्तर में मृत्यु हुई और उनके दिमाग की बादे मर्ग  (मौत के बाद )
  बारीक जांच (Brain autopsy ) भी की गई थी.  मृत्यु का कारण जानने के लिए की गई शव परीक्षा ऑटोप्सी कहलाती है .

अध्ययन में शामिल भागीदारों का दस सालों तक सालाना  रोगनैदानिक(उपचारात्मक ) मूल्यांकन किया गया .इसमें व्यापक संज्ञानात्मक परीक्षण और स्नायुविक जांच (न्युरोलोजिकल एग्जाम्स )भी शामिल थे .

जीवन में ध्येय सम्बन्धी सवाल भी पूछे गए .कौन किस सीमा तक जीवन अनुभवों का सार निकालता है यह भी बूझा जाना गया .कौन कितना संकल्पित संकेंद्रित रहा है ध्येय प्राप्ति में यह भी बूझा समझा गया .

गौर तलब है जिन लोगों में अल्जाइमर्स के लक्षणों का प्रगटीकरण होने लगता है उनमे प्लाक्स और टेंग्ल्स का बनना आम है .ये ही स्मृति और संज्ञानात्मक बोध सम्बन्धी दूसरे कामों के क्षय की वजह बनते हैं ये एम्लोइड प्रोटीन के गुच्छ ही कुसूरवार हैं अल्जाइमर्स के लिए .

सारी शोध इन्हीं की रोकथाम के  लिए इनके बनने की वजह जानने के लिए इनका बनना कम करने के उपायों को समझने के लिए वर्तमान में की जा रही है .

यह समझना ज़रूरी है इनके बनते भी संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को कैसे बनाए रखा जाए .यह शोध उस दिशा में उठा एक सही कदम है .

सन्दर्भ -सामिग्री :-Purpose in life may help stave off Alzheimer' s /TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 9,P19

बुधवार, 9 मई 2012

शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर




शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर

वैसे तो पुरुष में नारीत्व (नारी की कोमलता आदि ) और नारी में पुरुषत्व (पुरुष की दृढ़ता कठोरता आदि ,पेशीय शक्ति ) कुछ न कुछ अंशों में रहती है दोनों एक दूसरे के परस्पर पूरक हैं .अर्द्धनारीश्वर को सम्पूर्ण  माना गया है भारतीय दर्शन में .इसीलिए नर और नारी परस्पर संपूरक कहलाते हैं . लेकिन जब पलड़ा साफ़ साफ़ एक तरफ झुक जाता है तब लिंग का शख्शियत का  फैसला  सहज हो जाता है .संकट तब खडा होता है जब स्थूल शरीर नर का हो और मनो -भौतिक शरीर नारी का .या स्थिति ठीक इसके विपरीत हो यानी स्थूल शरीर नारी का हो और मनो -भौतिक शरीर नर का हो .

असम के बहुचर्चित छात्र बिधान बरुआ के साथ पहली स्थिति है .कोर्ट कचेरी (मुंबई उच्च न्यायालय )में पहुँचने के कारण चैनलों पर इसकी खासी चर्चा भी हो चुकी है .लेकिन मामला न तो शुद्ध कानूनी है न जैविक .मनो जगत व्यक्ति के मनो -भौतिक जगत से ताल्लुक रखता है .एक जैविक अपवाद है और अपवाद होना भी एक नियम है वह नियम ही क्या जिसका अपवाद न हो .हर नियम का अपवाद भी होता ही है .

ऐसे शख्श  को 'Gender Dysforia' से  ग्रस्त  बतलाया  जाता  है  .इसे Gender Identity disorder' भी  कह  दिया जाता है .'Gender incongruence' या  फिर 'Transgenderism '  भी कहा जाता है .
 

ऐसा व्यक्ति अपने आप को विपरीत लिंगी काया में कैद पाता है .इससे मुक्ति के लिए छटपटाता है .


जब यह  विकार व्यक्ति में दीर्घावधि तक और अतिउग्र रूप में बना रहता है तब ऐसे व्यक्ति को ट्रांस -सेक्स्युअल  भी कह दिया जाता है .

समाधान है लिंग परिवर्तन

क्या है शल्य प्राविधि (PROCEDURE)?

इसमें  हारमोन  चिकित्सा  का भी सहारा लेना पड़ सकता है .शल्य से पहले भी बाद में भी .कोई एक दिन का काम नहीं है यह बेशक शल्य कर्म दो सत्रों में संपन्न कर लिया जाता है लेकिन मनो -चिकित्सा और परामर्श दीर्घावधि तक चलता है .सलाह मशविरा ऐसे व्यक्ति के माँ बाप को भी कई बार दिया जाता है . शल्य भी मनो -रोगों के माहिर की क्लिनिक में किया जाता है , मनो -विज्ञानियों की भी मौजूदगी रहती है .कुल मिलाके  यह एक टीम वर्क है शुद्ध शल्य नहीं है .

हारमोन थिरेपी नारी देह में कैद पुरुष के मामलों  में अंडकोष और शिश्न का आकार घटाने के लिए ,छाती को लम्पी यानी स्तनों का आकर बढाने के लिए की जाती है इस एवज इस्ट्रोजन हारमोन दिया जाता है .इससे नितम्ब के गिर्द भी चर्बी चढ़ जाती है भरावदार होजातें हैं नितम्ब .

पुरुष कंठ को नारी कंठ बनाने के लिए Wind pipe  surgery  की  जाती  है  .

कई चरणों में संपन्न होती है लिंग बदल सर्जरी

ORCHIDECTOMY

इस  शल्य   के  तहत  अन्डकोशों को हटा दिया जाता है .इससे नर हारमोन एक दम से कम होजाता है .और कई बार हारमोन चिकित्सा की ज़रुरत भी नहीं पड़ती है .

PENECTOMY

इस  शल्य  के  तेहत  शिश्न  का  सफाया  कर  दिया  जाता  है  .

VAGINOPLASTY

शिश्न  के  बकाया  ऊतकों से 
योनि की रचना की जाती है .शिश्न के चर्म से इसका अस्तर गढ़ा जाता है .अन्डकोशों की थैली से LABIA तैयार  की  जाती  है  .

मूत्रनली         (URETHRA) को छोटा कर दिया जाता है .इसे   पुनर  अवस्थित   किया   जाता   है   .इस प्रकार यौन संवेद्य एक प्रकार्यात्मक फंक्शनल योनि (वास्तव में VULVA) तैयार हो जाती है .

BREAST AUGMENTATION

इस  एवज  छाती में सिलिकोन प्रत्यारोप लगाया जाता है .



शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर 




रफ्ता रफ्ता आता है बदलाव नारीपन का



रफ्ता रफ्ता आता है बदलाव नारीपन का

सर्जरी तो बस बिस्मिल्लाह है .सौन्दर्य बोध से ताल्लुक रखने वाले तमाम पेचीदा मुद्दों से निपटना होता है .मसलन नारी सुलभ लुनाई लिए देह ,त्वचा  की बुनावट चिकनाहट ,सुरीला  महीन उच्च  आवृत्ति नारी कंठ .और सबसे बढ़के मनो -भौतिक शरीर का नव पुनर -रचित  शरीर में पुनर्वास .मनोवाज्ञानिक स्वास्थ्य .और सबसे ज्यादा एहम घर के सभी सदस्यों का सहयोग और स्नेह नै होती काया में पुनर्वास के लिए .

बेशक जिस दिन प्लास्टिक सर्जन पहले से चले आये प्रजनन अंगों को हटा देता है उसी दिन उसे(TRANSSEXUAL ) मेडिकल सर्टिफिकेट मिल जाता है  सेक्स चेंज का यही कहना है हिंदुजा अस्पताल के माहिर प्लास्टिक सर्जन अनिल तिब्रेवाला साहब का .लेकिन संक्रमण पुरुषत्व से नारीत्व की और रफ्ता रफ्ता ही हो पाता है ,स्रावी  तंत्र से जुड़े तमाम मुद्दे सुलटने सीधे करने होतें हैं मसलन स्त्री हारमोन ,नारी सुलभ केश राशि .यहाँ तो रोम रोम में बदलाव आना है .रोमकूप में भी ..

बकौल Masina Hospital ,Byculla में  प्लास्टिक  सर्जरी  के मुखिया डॉ .अरविन्द वर्तक सेक्स चेंज एक कामयाब सर्जरी है .ट्रांस -सेक्सुअल्स सर्जरी से पहले अपने शरीर में सहज नहीं रह पातें हैं कैदखाना लगता है उन्हें अपना ही आपा .देह यष्टि .जा तन लागे वो ही जाने .परपीड़ा कोऊ न जाने
.

अब चिकित्सा जगत के माहिर भी यह मानने बूझने लगें हैं कि GENDER BENDER ,अपनी  ही  काया  में   अजनबी  बने  अपनी  पहचान  के  लिए  कराहना   एक आनुवंशिक समस्या है .इसे यूं ही नहीं रफा दफा किया जा सकता .

SEX -CHANGE OPERATION , OR GENDER REASSIGNMENT SURGERY


इस  शल्य  की  शुरुआत  मनो -रोग क्लिनिक से ही हो जाती है .बेशक प्लास्टिक सर्जन अपना काम दो सत्रों में ही संपन्न कर लेता है  लेकिन सलाहमशविरा क्लिनिकल कोंसेलिंग      शल्य से पहले और बाद में भी सालों साल चलती है यही कहना है मनोरोगों के माहिर ज़नाब हरीश शेट्टी साहब का .'हमें एक साथ दो काम करने होतें हैं ट्रांस -सेक्सुअल की मदद और वृहत्तर समाज को इसके लिए राजी करना .'

बाकायदा एक पूरी टीम मनोरोगों के माहिरों और मनोविज्ञानियों की पहले यह देखती है कि GENDER BENDER  की गिरिफ्त में     आया व्यक्ति मानसिक रूप से दृढ भी है या नहीं
.

वह ट्रांस जेंडर  है भी या नहीं ?


उसे सर्जरी से लाभ भी होगा या नहीं इसका भी पूर्व आकलन किया जाता है देखा यह भी जाता है कि उसे सर्जरी की इजाज़त न मिलने पर कितना नुक्सान उठाना पड़ सकता है .

परिवार का सहयोग समर्थन हर चरण पर एक दम से एहम रहता है .माहिरों को माँ बाप के साथ सलाह मशविरा सत्र बारहा रखने पडतें हैं .अकसर इन मामलों में माताएं रोना धोना करतीं हैं और पिता बेहद की नाराजी का इज़हार .कई मर्तबा उग्र भी हो जाता है इनका व्यवहार अपनी ही असर ग्रस्त संतान के प्रति .दीर्घावधि माँ बाप का सहयोग ही पुनर्वास  में विधाई भूमिका निभाता है सर्जरी के बाद .यही कहना है डॉ .केशवानी साहब का .आप 'NATIONAL BURNS CENTRE ,AIROLI के  संचालक  हैं  .

ऐसा नहीं है कि सेक्स चेंज की पेशकश लेके लोग आगे नहीं आते हैं पांच छ :मामले सलाह मशविरे के लिए आगे  आ ही जातें हैं लेकिन सर्जरी के लिए इनमे से आधे से भी कम ही लोग पहल करते हैं .विरल नहीं है बिधान बरुआ का मामला .और न ही यहाँ कोई 'माइकल जेकशन ' फेक्टर काम कर रहा होता है ,न फेशन स्टेटमेंट है जेंडर डिस -फोरिया .शुद्ध अपवाद है .

मंगलवार, 8 मई 2012

गोली को मार गोली पियो अनार का रोजाना जूस

गोली को   मार गोली  पियो अनार  का रोजाना जूस 

भूल जाओ व्याग्रा या यौन ताकत बढाने वाली कोई और गोली पियो रोजाना एक ग्लास अनार का ताज़ा जूस अपेक्षित शक्ति मिलेगी यौन शक्ति के लिए ,एक प्रबल प्राकिर्तिक आवश्यकता की पूर्ती के लिए .

क्वींस मारग्रेट यूनिवर्सिटी एडिनबरा के रिसर्चरों के अनुसार जो पुरुष और महिलायें रोजाना पन्द्रह दिन तक एक ग्लास अनार का ताज़ा जूस पीते हैं उनके अन्दर टेस्तोस्तेरोंन  का स्तर एक दम से बढ़ जाता है .यह हारमोन पुरुषों और महिलाओं  में यौन इच्छा और उसकी आपूर्ति के लिए यौन शक्ति दोनों में इजाफा करता है .

भूख खोलने के लिए एक चमच्च अदरक के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर रोजाना सेवन करें .


बालों का  गिरना कम करने के लिए नारियल के तेल में मीठा नीम्बू मिलाके खोपड़ी में  के पोरों से धीरे धीरे रोजाना मलिए .शैम्पू  यथावत करें .


नुस्खे सेहत के /शोध की खिड़की से आरोग्य समाचार 


अल्सर से  राहत  के लिए

रोजाना  सुबह सबेरे दूध के साथ केला लेवें .पेट के अल्सर में आराम   आयेगा .

पेट खाली रहते मैथी दाना रोजाना दोनों बार लेने से रक्त चाप का मान कम होता है .आर 

दस्त रोग  अतिसार में राहत के लिए कच्चा पपीता पानी में उबाल के खाएं .


 अम्लता खट्टापन में राहत के लिए दोपहर और रात के भोजन के बाद एक कलि कच्चे लहसुन की खाएं .


आरोग्य समाचार 


हिचकियों का समाधान :अदरक के छोटे छोटे टुकड़े जीभ के नीचे रखके चूसिये .हिचकियाँ बंद हो जायेंगी .

कमर के निचले हिस्सा में दर्द होने पर :

जायफल (nutmeg)को पानी में उबाल लीजिये तिल  के  तेल  के  साथ  इसका  मिश्र  कमर  के  असर  ग्रस्त  हिस्से  पर  मलिए  .जायफल  एक  कठोर  दाना  होता  है  जिसका  इस्तेमाल कूट पीसकर  मसालों  के  तौर  पर  किया  जाता  है  .

BEEHIVE EXTRACT   MAY ARREST PROSTATE CANCER

Caffeic acid phenethyl ester , or CAPE , is a compound isolated from honeybee  hive propolis , the resin used by bees to patch up holes in hives .Propolis has been identified as a natuaral remedy for conditions ranging from throats and allergies to burns and cancer


चोली जो लगातार बतलायेगी आपके दिल की सेहत का हाल

चोली  जो लगातार बतलायेगी आपके दिल की सेहत का हाल

और इंतना ही नहीं ख़तरा भांप कर वांछित जगह पर एम्बुलेंस भी बुला देगी .इसे बीमार महिलायें और खिलाड़ी  पहन सकेंगी .इसमें पूरा एक नेटवर्क होगा समेकित संसूचकों का (टोही ,संवेदकों का संजाल ) Integrated sensors का .ये संवेदक  स्वास्थ्य सम्बन्धी संकेतों का मापन करके उन्हें एक वायरलेस नेट वर्क जैसे ब्ल्यू टूथ ,या फिर Wi-Fi को  भेज  देंगें  .इस प्रकार इन हेल्थ सिग्नलों को मरीज़ और उसका माहिर चिकित्सक    देख बूझ सकेगा .

यह चोली  एक प्लेटफोर्म की शक्ल लिए है इसी के फेब्रिक  में अनेकानेक संवेदक समायोजित किये गए हैं .ये दिल की सेहत का लगातार मानितरण करेंगे 24x7 ECG  मोनिटर  की तरह .


इसके प्रणेता एक भारतीय मूल के साइंसदान हैं .उनकी टीम ने ही इसे रचा है .आपका नाम है विजय वर्दन.आप फिलवक्त University of Arkansas से  जुड़े हैं .बकौल आपके यह चोली रीयल टाइम मोनिटरिंग हासिल करवाती है ताकि कैसे भी Pathophysiological (रोग  शरीर क्रियात्मक  बदलावों ) को बूझा समझा पहचाना जा सके .यह एक ऐसा अंत :वस्त्र है जो एक दम से एहम स्वास्थ्य संकेतों को एकत्र कर उनका फौरी (तात्कालिक )प्रसारण कर देता है .

यह अंत :वस्त्र प्रणाली ब्लड प्रेशर की टोह लेती है (यहाँ किसी कफ की भी ज़रुरत  नहीं पड़ती है ब्लड प्रेशर नापने में ),शरीर का तापमान मापती है ,श्वसन की दर का मानितरण करती चलती है ,ऑक्सीजन की खपत का भी ,कितनी ऑक्सीजन दिल को मुहैया हो रही है यह भी सटीक जान लेती है .कुछ न्यूरल एक्टिविटी(स्नायु ,नर्व सेल्स ,न्यूरोन सम्बन्धी सक्रीयता ) को भी  ताड़ लेती है .


दिल का विद्युत् आरेख (विद्युत् सक्रीयता )उतारती चलती है यह अंत :वस्त्र प्रणाली .दिल का दौरा भांप लेती है .ज़ाहिर है यदि दिल का दौरा पड़ रहा है तो इसकी खबर आपके चिकित्सक तक पहुंचा देगी यह प्रणाली .आपातकालीन सेवाओं तक भी .


जहां तक सेन्सर्स का सवाल है वह अमरीकी कोइन डाइम जो दस सेंट कीमत का होता है  से भी आकार  में छोटे हैं .ये गोल्ड नेनो इलेक्ट्रोडों से तैयार किये गएँ हैं .लोचदार वस्त्राधार में ये जड़े हुएँ हैं .चोली  के फेब्रिक्स का ही रेशों का ही ये हिस्सा हैं .

सन्दर्भ -सामिग्री :-A bra that warns of heart attack
Monitors Health Signals And Uploads Info That Can Be Seen By Doc /TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,MAY 7 ,2012.P17


भारत में ऐसा क्यों होता है ?

भारत में ऐसा क्यों होता है ?
HIV + prisoner seeks  mercy killing
Ostracized  HIV + couple struggles for power 

इन दिनों सलेम की केन्द्रीय कारावास कथित सुधार गृह (जेल) में एक ३८ साला ऐसा मरीज़ कैद में है जो HIV + है  .बेशक इस पर क़त्ल का अभियोग  चल रहा है लेकिन इसकी मेडिकल कंडीशन मांग करती है इसे अच्छी खुराक और एंटी -रेट्रो -वायरल दवाएं दी जाएँ .इसे दोनों से ही महरूम (वंचित )रखा जा रहा है जो अपने आप में एक अपराध है .
अपनी दिनानुदिन बिगडती हालत  से आजिज़ आकर पेरियासामी नामी इस व्यक्ति ने राष्ट्र पति ,तमिलनाडु के राज्यपाल महोदय और केन्द्रीय गृह मंत्री महोदय  से इच्छा  मृत्यु की इजाज़त माँगी है मर्सी किलिंग आत्म -मरण स्वीकृति युथ्नेज़िया (EUTHANASIA) माँगी है .

HIV+ लोगों के साथ यह अन्याय सामाजिक स्तर पर भी हो रहा है .जबकि  इन्हें गले लगाना समाज के ही हित में है ताकि आइन्दा लोग अपना HIV+ स्टेटस  न  छिपाए
.लेकिन हो ठीक इसके उलट रहा है इन्हें सामाजिक बहिष्करण से जूझना पड़ रहा है .अनिवार्य सुविधाओं सिविक एम्नीतीज़ से भी इन्हें वंचित रखा जा रहा है .कोई इन्हें किराए पे अपना मकान नहीं देता और लेदेके ये अपना मकान बना भी लें तो इन्हें बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं  के लिए भी धक्के खाने पड़ते हैं .

Ostracized  HIV +  couple struggles for power /TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 6, २०१२ ,P9


गत  कई  बरसों  से  एक  दम्पति ३६ साला आर कंथा एवं राधाकृष्णन इसी सामाजिक उपेक्षा का दंश झेल रहें हैं .चेंगल पेट,कांचीपुरम  (तमिलनाडु )की पेरियार स्ट्रीट पर लेदे के  इन्होने अपना एक घर ज़रूर बना लिया है 
लेकिन बिजली का कनेक्शन आज तक नहीं मिला है एडी चोटी का जोर लगाने के बाद भी टरकाऊ आश्वाशन ही हाथ आयें हैं .

जनवरी २०१२ से कंथा रोजाना एरिया ऑफिस तमिलनाडु इलेक्त्रिसिती  बोर्ड, चेंगल पेट के चक्कर काटती   रही   है .इस आश्वाशन के साथ उसे वापस भेज दिया जाता है आप चिंता न करें आपको कनेक्शन जल्दी ही मिल जाएगा .यह दम्पति अपनी दो बेटियों के साथ गत तीन माह से अपनी शाम अंधेरों में काट रहा है .

जनवरी २५ ,२०१२ को इस दम्पति ने बिजली कनेक्शन देने के लिए आवेदन किया था .सारे कागजों का पेट भर दिया था .३००० रूपये का भुगतान भी किया था .ग्राम पंचायत से' नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट'एन. ओ.  सी.'  भी दम्पति हासिल कर चुका  है जनवरी माह में ही .

बाद इसके अधिशाषी अभियंता की शिकायत बैठक  में भी कंथा को वरीयता के स्तर पर ४ अप्रैल को आश्वश्त किया गया कि उसे बिजली जल्दी दे दी जायेगी .लेकिन हुआ कुछ नहीं .

राधाकृष्णन की समस्याओं की शुरू आत उसी दिन हो गई थी जिस दिन इसने चेंगल पेट में कुछ बरस पहले HIV + लोगों  के  लिए  एक  दफ़तर  खोला  था  .
एक बरस में ही फिर तो इस दम्पति को पांच मकान बदलने पड़े .मकान मालिकों  ने इनसे मकान खाली करवाए डाट डपट के हर बार .बस इनका HIV + स्टेटस  पता चलते ही मकान मालिक  यह कदम उठा लेते थे .

जब इन्होनें सरकार द्वारा अलाट की गई ज़मीन पर मकान बनाना शुरू किया तब आधे अधूरे बने मकान को पड़ोसियों ने खुंदक में  आग लगा दी
.यह जनवरी २०११ की घटना है .इन्होनें फिर भी हौंसला नहीं खोया मकान पूरा किया .लेकिन अब अन्धेरा इन्हें घूर रहा है .अंधे समाज  के अंधे क़ानून .ऐसा भारत में सरे आम होता है तो क्यों होता है ?

एक बानगी और देखिये  -

माँ की कोख ,
बेटी का कब्रिस्तान ,
ये है हिन्दुस्तान .

चाहे तो इसे 'हाइकु' कहिये .



चोली जो लगातार बतलायेगी आपके दिल की सेहत का हाल

चोली  जो लगातार बतलायेगी आपके दिल की सेहत का हाल

और इंतना ही नहीं ख़तरा भांप कर वांछित जगह पर एम्बुलेंस भी बुला देगी .इसे बीमार महिलायें और खिलाड़ी  पहन सकेंगी .इसमें पूरा एक नेटवर्क होगा समेकित संसूचकों का (टोही ,संवेदकों का संजाल ) Integrated sensors का .ये संवेदक  स्वास्थ्य सम्बन्धी संकेतों का मापन करके उन्हें एक वायरलेस नेट वर्क जैसे ब्ल्यू टूथ ,या फिर Wi-Fi को  भेज  देंगें  .इस प्रकार इन हेल्थ सिग्नलों को मरीज़ और उसका माहिर चिकित्सक    देख बूझ सकेगा .

यह चोली  एक प्लेटफोर्म की शक्ल लिए है इसी के फेब्रिक  में अनेकानेक संवेदक समायोजित किये गए हैं .ये दिल की सेहत का लगातार मानितरण करेंगे 24x7 ECG  मोनिटर  की तरह .


इसके प्रणेता एक भारतीय मूल के साइंसदान हैं .उनकी टीम ने ही इसे रचा है .आपका नाम है विजय वर्दन.आप फिलवक्त University of Arkansas से  जुड़े हैं .बकौल आपके यह चोली रीयल टाइम मोनिटरिंग हासिल करवाती है ताकि कैसे भी Pathophysiological (रोग  शरीर क्रियात्मक  बदलावों ) को बूझा समझा पहचाना जा सके .यह एक ऐसा अंत :वस्त्र है जो एक दम से एहम स्वास्थ्य संकेतों को एकत्र कर उनका फौरी (तात्कालिक )प्रसारण कर देता है .

यह अंत :वस्त्र प्रणाली ब्लड प्रेशर की टोह लेती है (यहाँ किसी कफ की भी ज़रुरत  नहीं पड़ती है ब्लड प्रेशर नापने में ),शरीर का तापमान मापती है ,श्वसन की दर का मानितरण करती चलती है ,ऑक्सीजन की खपत का भी ,कितनी ऑक्सीजन दिल को मुहैया हो रही है यह भी सटीक जान लेती है .कुछ न्यूरल एक्टिविटी(स्नायु ,नर्व सेल्स ,न्यूरोन सम्बन्धी सक्रीयता ) को भी  ताड़ लेती है .


दिल का विद्युत् आरेख (विद्युत् सक्रीयता )उतारती चलती है यह अंत :वस्त्र प्रणाली .दिल का दौरा भांप लेती है .ज़ाहिर है यदि दिल का दौरा पड़ रहा है तो इसकी खबर आपके चिकित्सक तक पहुंचा देगी यह प्रणाली .आपातकालीन सेवाओं तक भी .


जहां तक सेन्सर्स का सवाल है वह अमरीकी कोइन डाइम जो दस सेंट कीमत का होता है  से भी आकार  में छोटे हैं .ये गोल्ड नेनो इलेक्ट्रोडों से तैयार किये गएँ हैं .लोचदार वस्त्राधार में ये जड़े हुएँ हैं .चोली  के फेब्रिक्स का ही रेशों का ही ये हिस्सा हैं .

सन्दर्भ -सामिग्री :-A bra that warns of heart attack
Monitors Health Signals And Uploads Info That Can Be Seen By Doc /TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA,MUMBAI ,MAY 7 ,2012.P17