गुरुवार, 1 जनवरी 2009

तलबगारों बराक ओबामा बनो :

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। where there is a will, there is a way. करत करत अभ्यास के jadmati होत सुजान। संकल्प में बड़ी शक्ति है, आप चाहें तो सिगरेट/बीड़ी की लत छोड़ सकते हे, भले विज्ञान यह कहता हो के सिगरेट के लतियों के रक्त में निकोटिन का स्तर जब एक न्यूनतम स्तर से नीचे गिरने लगता है tab उसे talab उठती है, यह भी की स्मोकर्स के दिमाग में एक न्यूरल सर्केट बन जाता है, जो एक memory trect की तरह काम करता है लेकिन बराक ओबामा की तरह संकल्प तो कर के देखो व्हाइट हाउस नो स्मोकिंग ज़ोन बन जायेगा, फिर न कैंसर का खतरा रहेगा, न दिल की बीमारी का, ना निकोटीन पैच की ज़रूरत पढेगी, न निकोटीन cheewing gum की।

बुधवार, 24 दिसंबर 2008

नंग बड़े परमेश्वर से

संरक्षणवादी राजनीति (patronage politics) के पक्षधरों से यदि वोट और देश में से किसी एक का चयन करने को कहा जाए तो यह जमूरे वोट को ही चुनेंगे। हिन्दुस्तान की अकेली विश्व नगरी मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए श्री हेमंत करकरे और पूर्व में जामिया नगर के बटला हाउस में शहीदे आज़म श्री मोहन चंद शर्मा पर अब्दुल रहमान अंतुले, दिग्विजय सिंह, अमर सिंह और उनके चेलों ने जिस प्रकार की बेशर्म सवालिया मिसाईलें दागी उस पर यही कहा जा सकता है : नंग बड़े परमेश्वर से। अल्पसंख्यक राजनीति के टुकड़ खोर जो करा दें सो कम फिर अंतुले तो अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री थे।

माननीय प्रधानमंत्रीजी यह आपके एक काबिना मंत्री की मानविय भूल नही थी, अगले लोक सभा चुनाव की अदबदा कर की गई पोसिशनिंग थी। इतनी बात तो कोई पप्पू भी समझ लेगा। एक अखबार ने अपने सम्पादकीय "एक जुटता ज़रूरी' में लिखा अंतुले साहब ने इससे आम जनता की नजर में कुछ खोया ही है। मान्यवर अल्पसंख्यक राजनीति को कौमी नुक्सान का इल्म ही कहाँ होता है / यदि यह मानविय भूल है तो ब्लंडर किसे कहते हैं, अब्सर्ड क्या होता है ? कृपया बतलायें।

दलित देवी की करतूतें

बहन मायावती के कारकुनों ने एक सरकारी engineer की हत्या कर के राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के सैनिकों को भी क्रूरता में पछाड़ दिया है। लगता है विधायक मनोज तिवारी मायावती फोबिया से ग्रस्त थे, बहनजी के जन्मदिन के लिए जबरी चंदा नही वसूलते तो ख़ुद मारे जाते। घड़ा एक दिन राज ठाकरे के पापों का भी भरेगा अभी तो उन्स्की चाची ही पहाड़ के नीचे से निकली है जो ख़ुद को बेदाग़, चैतन्य देव प्रतिमा बतलाती थी। हमारा मानना है राजनीतिक कार्यकर्ता भी अमर नही होता।

जाको राखे साईंयां

जाको राखे साईंयां मार सके ना कोय ... राजस्थान विधान सभा में एक सर्प विधायकों से तब तक छिपता छिपाता रहा जब तक सपेरों ने उसे भयमुक्त नही कर दिया, किसी विधायक को काट लेता तो बेचारा (सर्प) मारा जाता। खुदा का लाख लाख शुकराना। जाको राखे साईंयां ........

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

जूता फेक तमाशा देख


चैनल अल-बग्दारिया के एलेक्ट्रोनी पत्रकार मुन्तज़र अल ज़ैदी साहब बा-तमीज़ इंसान हैं जिनसे हमारे प्रतिनिधि बहुत कुछ सीख सकते हैं, जो सदन में जूता तो फेंकते हैं पर एक ही फेंकते हैं ताकि वह (जूता) किसी के काम ना आ सके। यूँ अल ज़ैदी साहब ने जो कुछ भी किया वह जन आक्रोश की अभ्व्यक्ति ही नही तदानुभूति भी थी। और इसी को पुख्ता करने के लिए ऑनलाइन जूता खेल भी चल पड़ा है जिसमें जो जितनी बार बुश को जूता मारने में सफल रहेगा उसे उतने ही पॉइंट्स मिलेंगे। भले ही अल ज़ैदी की हड्डी पसली तोड़ दी गई है लेकिन बुश का तो प्रतीक ही चल पड़ा है। जूतम पैजार मुहावरे से उठ कर बुश पर हावी है। खुदा खैर करे.......

शनिवार, 29 नवंबर 2008

चुनाव पूर्व खेल बिगड़ गया

इसे कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का महा दुर्भाग्य कहा जायेगा, कांग्रेस जो खेल चुनाव पूर्व बेला में खेल रही थी वह डेक्कन मुज्जाहिद्दीन ने मुंबई को थर्रा कर बिगाड़ दिया। मनमोहन की सरकार से आतंरिक सुरक्षा तो संभाले नही संभालती, देश को क्या सुरक्षा मुहैय्या कराएगी। सरकार का खेल दो चरणों में कामयाब हो चुका था पहले इसने देश की आतंरिक सुरक्ष और शील के ध्वज वाहक भारत्धर्मी समाज के साधू संतों को हड़काया, मकोका लगा कर उन्हें अपमानित किया फिर सेना के छठे पे कमीशन की सिफारिशों से असंतोष ज़ाहिर करने पर शहीद मोहन चंद शर्मा के प्रतिराख्षा सेनाओं में परियाय रहे लेफ्टिनेंट कर्नल प्रशाद श्रीकांत पुरोहित को निशाने पर लिया ताकि फौज कार्य पालिका के अगुवाओं के बराबर भत्तों की मांग आइन्दा न दोहराएं।

इन दिनों सरकार के निशाने पर न्याय पालिका थी। सुप्रीम कोर्ट कोलिजियम की सिफारिशों को विधाइयका द्बारा दो बार लोटाने के पीछे यही मंशा थी।

आतंकवादियों ने अब जब मुंबई में खुला खेल फर्रुखाबादी खेला तब सरकार को इल्म हुआ अपनी सीमाओं का। विलास राव देशमुख तो अभी भी इतरा रहे हैं, कहते हैं की १८६ ही मरे निशाने पर तो पाँच हज़ार थे, शर्म की बात है सरकार के लिए, जो सेना कल तक निशाने पर थी हमेशा वही काम आती है। अब तो चेतो मनमोहन और अगर अब भी कुछ पूछना है तो सोनिया से पूछ लो...........

सोमवार, 24 नवंबर 2008

कौन देगा सज़ा ?

सुप्रिया राहुल गांधी आप १९८४ के दंगों के दोषियों को सज़ा दिलवाना चाहते हैं। भैय्या सज़ा देगा कौन और सजायाफ्ता कौन होंगे ? कुछेक तो भगवान् को भी प्यारे हो चुके हैं, भारतीय परम्परा है, मृत लोगों पर कटाक्ष नही किया जाता है। आपको यह तो याद होगा, आपके पिताजी ने ही कहा था ; जब कोई बड़ा वृक्ष गिरता है तो धरती कांपती है, आपको भान नही रहता, कहाँ क्या कहना है। उस दिन आप कह रहे थे : कांग्रेस का बेडा गर्क हाई कमान संस्कृति ने किया है, हाई कमान तो आपकी माँ ही हैं और स्वयं आप। छत्तीसगढ़ और उत्तराँचल को क्या आप प्रयायावाची समझते हैं ? किसी दिन भारत को इटली मत बतला देना जहाँ तुम्हारे मामा रहते हैं। छत्तीसगढ़ की चुनाव सभा में आपने बारहा कहा था : मैं उत्तरांचलियों को बहुत प्यार करता हूँ जबकि मोटी लाल वोहरा ने आपको आगाह भी किया। बेहतर हो मातुश्री की तरह आप अपना भाषण लिक्वा लिया करें और पढ़ कर बोला करें। यूँ आप राजनीति में दुधमुंहे हैं इसलिए आपके सौ खून मांफ।