सोमवार, 7 मई 2012

भारत में ऐसा क्यों होता है ?

भारत में ऐसा क्यों होता है ?

HIV + prisoner seeks  mercy killing

Ostracized  HIV + couple struggles for power 

इन दिनों सलेम की केन्द्रीय कारावास कथित सुधार गृह (जेल) में एक ३८ साला ऐसा मरीज़ कैद में है जो HIV + है  .बेशक इस पर क़त्ल का अभियोग  चल रहा है लेकिन इसकी मेडिकल कंडीशन मांग करती है इसे अच्छी खुराक और एंटी -रेट्रो -वायरल दवाएं दी जाएँ .इसे दोनों से ही महरूम (वंचित )रखा जा रहा है जो अपने आप में एक अपराध है .
अपनी दिनानुदिन बिगडती हालत  से आजिज़ आकर पेरियासामी नामी इस व्यक्ति ने राष्ट्र पति ,तमिलनाडु के राज्यपाल महोदय और केन्द्रीय गृह मंत्री महोदय  से इच्छा  मृत्यु की इजाज़त माँगी है मर्सी किलिंग आत्म -मरण स्वीकृति युथ्नेज़िया (EUTHANASIA) माँगी है .

HIV+ लोगों के साथ यह अन्याय सामाजिक स्तर पर भी हो रहा है .जबकि  इन्हें गले लगाना समाज के ही हित में है ताकि आइन्दा लोग अपना HIV+ स्टेटस  न  छिपाए
.लेकिन हो ठीक इसके उलट रहा है इन्हें सामाजिक बहिष्करण से जूझना पड़ रहा है .अनिवार्य सुविधाओं सिविक एम्नीतीज़ से भी इन्हें वंचित रखा जा रहा है .कोई इन्हें किराए पे अपना मकान नहीं देता और लेदेके ये अपना मकान बना भी लें तो इन्हें बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं  के लिए भी धक्के खाने पड़ते हैं .

Ostracized  HIV +  couple struggles for power /TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 6, २०१२ ,P9


गत  कई  बरसों  से  एक  दम्पति ३६ साला आर कंथा एवं राधाकृष्णन इसी सामाजिक उपेक्षा का दंश झेल रहें हैं .चेंगल पेट,कांचीपुरम  (तमिलनाडु )की पेरियार स्ट्रीट पर लेदे के  इन्होने अपना एक घर ज़रूर बना लिया है 
लेकिन बिजली का कनेक्शन आज तक नहीं मिला है एडी चोटी का जोर लगाने के बाद भी टरकाऊ आश्वाशन ही हाथ आयें हैं .

जनवरी २०१२ से कंथा रोजाना एरिया ऑफिस तमिलनाडु इलेक्त्रिसिती  बोर्ड, चेंगल पेट के चक्कर काटती   रही   है .इस आश्वाशन के साथ उसे वापस भेज दिया जाता है आप चिंता न करें आपको कनेक्शन जल्दी ही मिल जाएगा .यह दम्पति अपनी दो बेटियों के साथ गत तीन माह से अपनी शाम अंधेरों में काट रहा है .

जनवरी २५ ,२०१२ को इस दम्पति ने बिजली कनेक्शन देने के लिए आवेदन किया था .सारे कागजों का पेट भर दिया था .३००० रूपये का भुगतान भी किया था .ग्राम पंचायत से' नो ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट'एन. ओ.  सी.'  भी दम्पति हासिल कर चुका  है जनवरी माह में ही .

बाद इसके अधिशाषी अभियंता की शिकायत बैठक  में भी कंथा को वरीयता के स्तर पर ४ अप्रैल को आश्वश्त किया गया कि उसे बिजली जल्दी दे दी जायेगी .लेकिन हुआ कुछ नहीं .

राधाकृष्णन की समस्याओं की शुरू आत उसी दिन हो गई थी जिस दिन इसने चेंगल पेट में कुछ बरस पहले HIV + लोगों  के  लिए  एक  दफ़तर  खोला  था  .
एक बरस में ही फिर तो इस दम्पति को पांच मकान बदलने पड़े .मकान मालिकों  ने इनसे मकान खाली करवाए डाट डपट के हर बार .बस इनका HIV + स्टेटस  पता चलते ही मकान मालिक  यह कदम उठा लेते थे .

जब इन्होनें सरकार द्वारा अलाट की गई ज़मीन पर मकान बनाना शुरू किया तब आधे अधूरे बने मकान को पड़ोसियों ने खुंदक में  आग लगा दी
.यह जनवरी २०११ की घटना है .इन्होनें फिर भी हौंसला नहीं खोया मकान पूरा किया .लेकिन अब अन्धेरा इन्हें घूर रहा है .अंधे समाज  के अंधे क़ानून .ऐसा भारत में सरे आम होता है तो क्यों होता है ?

एक बानगी और देखिये  -

माँ की कोख ,
बेटी का कब्रिस्तान ,
ये है हिन्दुस्तान .

चाहे तो इसे 'हाइकु' कहिये .


शनिवार, 5 मई 2012

ये है आम डोपिंग सब्सटेंस जिनका अब स्कूल खेल कूद प्रतियोगिताओं में भी दुरोपयोग किया जा रहा है

ये है आम डोपिंग सब्सटेंस जिनका अब स्कूल खेल कूद प्रतियोगिताओं में भी दुरोपयोग किया जा रहा है

(१)टेट्रा -हाइड्रो -केनाबिनोल  (TETRAHYDROCANNABINOL): यह तमाम शरीर को उत्तेजन प्रदान कर शरीर    अतिरिक्त काम करने के लिए प्रेरित करती है बेतरहा उकसाती है .

बेसल मेटाबोलिक रेट ,केलोरी खर्च करने की दर ,अपचयन(चपापचयी  दर,उपापचयी  दर ) को बढ़ा देती है .
स्नायु कोशिकाओं  नर्व सेल्स को डेमेज कर देता है यह पदार्थ तब जब न्यूरो -रिसेप्टर्स (स्नायुविक -अभिग्राही ) इसकी वजह से अतिरिक्त सक्रीय हो जाते हैं ,ओवर -एक्टिवेट  हो जाते हैं .

बॉडी सेल्स को बर्न किये रहता है यह पदार्थ और व्यक्ति को चौकन्ना बनाए रहता है .जगाये रखता है व्यक्ति चेतना को .

जब इसका असर समाप्त होता इसका लती बेहद की थकान का अनुभव करता है .


(२)इस्तेनोज़ोलोल (STANOZOLOL):यह  एक  एनाबोलिक  स्टेरोइड  है .पेशियों को बलशाली और विस्तृत आकारीय   करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है .

स्रावी तंत्र से जब विभिन्न रस ,हारमोन आदि स्रावित होतें हैं तब यही पदार्थ शरीर  को अतिरिक्त दम ख़म मुहैया करवाता है .

यह गोलियों के रूप में उपलध हो जाता है जबकि  शेष स्टेरोइड इंजेक्शन के रूप में ही उपलब्ध हैं .

लीन बॉडी मॉस को बनाए रखने को और शरीर पर चढ़ी चर्बी को उतारने के लिए इसका इस्तेमाल बॉडी बिल्डर्स और खिलाड़ी समान रूप से करते रहें हैं .

(३)नान -ड्रो -लोन(NANDROLONE):यह  भी  एक एनाबोलिक स्टेरोइड है .पेशियों की वृद्धि ,अतिरिक्त बढ़वार और भूख को खोलने बढाने ,लाल रुधिर कणिकाओं का उत्पादन बढाने तथा  अश्थियों  का घनत्व  बढाने में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है . A

अवांछित (पार्श्व )प्रभाव :पुरुषों में स्तन ग्रंथि अतिरिक्त रूप से बढ़ जाती है .फलत : उनके स्तन बढ़ जाते हैं .औरतों सी छातियाँ हो जातीं हैं .चिकित्सा शब्दावली में इसे ही GYNAECOMASTIA कहा  जाता  है  .इसके अतिरिक्त इस्तेमाल से पुरुष की यौन शक्ति छीजने लगती है .यौन अरुचि पैदा हो जाती है .लिबिडो कम हो जाता है .

अन्य पार्श्व प्रभावों में कार्डियोवैस्क्यूलर डेमेज भी शामिल है .(यानी हृदय एवं ब्लड वेसिल्स सम्बन्धी डेमेज  ).


लिगोथ्थान  अभाव (इरेक्टाइल डिसफंक्शन ) भी पार्श्व प्रभाव के रूप में सामने आता है .


ERECTILE DYSFUNCTION:  Erectile dysfunction can occur  because of weaker action of dihydronandrolone in the penis ,which is known as a sexual modulator.

बात  साफ़  है  खेलों   में  इन  अवैध  पदार्थों  का  इस्तेमाल न  सिर्फ गैर -कानूनी है ,साफ़ साफ़ बे -ईमानी है ,खेल प्रदूषण है खेलों की शुचिता को चौपट करना है खेल कूद का मतलब होता है अच्छा स्वास्थ्य और डोपिंग उस स्वास्थ्य को ही लील जाती है .दुर्व्यसन बनके .लाचारी बनके लत बनके . केन्द्रीय  शिक्षा  बोर्डों  को इस  ओर ध्यान  देना  चाहिए  .

डोपिंग के  दुष्प्रभाव  पाठ   पाठ्य क्रम का हिस्सा बनने चाहिए .  


सब्सटेंस एब्यूज के संकेत साफ़ दिखलाई देतें हैं

Signs of substance abuse to watch out for

(1)जब आपको निरंतर ये एहसास हो आपका बच्चा आपसे कुछ छिपा रहा है ज्यादा गोपन प्रिय हो रहा है .किसी दोस्त की कोई चर्चा नहीं हर सवाल का टालू ज़वाब क्या करता है क्या नहीं करता इस बात का कोई ज़िक्र नहीं करना चाहे जब कि आप सिर्फ ये पूछ रहे हैं -आज स्कूल में क्या हुआ .क्या हलचल है आजकल .

(२)भूख उसकी बिना किसी साफ़ कारण के गायब हो जाए ,अचानक तौल कम (वेट )होती लगे किशोर किशोरियों  की .किसी से भी मिलने जुलने में दिलचस्पी ज़ाहिर न करे .गुमसुम दिखलाई दें  अपने में किसी आत्म विमोही से  अपने ही खड्ड में गिरे  हुए  दिखाई दें , .एक दम से अंतर्मुखी .सबसे  अलग  थलग रहना चाहे मिलनसारिता भूल जाए .

(३)नियमित सब्सटेंस एब्यूज करने वाले किशोर वृन्द  में कैसी भी भौतिक गति -विधि शेष नहीं रह जायेगी .एक दम से एदी ,आलसी सा दिखे .हाइपर टेंशन से ग्रस्त हो जाए .जांच करवाइए उसके रक्त चाप की ज्यादा मिलेगा क्योंकि इन अवैध पदार्थों के सेवन से नर्वस सिस्टम असर ग्रस्त होता है .

शुक्रवार, 4 मई 2012

स्कूल में चरस और गांजा ,भुगतोगे भाई, खामियाजा

स्कूल में चरस और गांजा ,भुगतोगे  भाई, खामियाजा
मौज में आने और बे  -चैनी भगाने के लिए आज पहले से कहीं ज्यादा किशोर किशोरियां भांग एवं चरस जैसे नशीले (एवं प्रतिबंधित ) पदार्थों का धड़ल्ले से सेवन कर रहें हैं .क्या अजीब इत्तेफाक है भारतीय पादप सन से रस्सी भी बनती है और भांग और चरस जैसे नशीले व्युत्पाद भी जिनका चोरी छिपे खूब गलत इस्तेमाल होता है .

मनोरोगविदों की माने तो स्वप्न नगरी मुंबई के किशोर किशोरियों  में गत दो बरसों में इन नशीले पदार्थों का व्यसन पहले की तुलना में ५०-७५% तक बढ़ गया है .रईस ही नहीं मध्यमवर्गीय परिवारों के किशोर वृन्द भी अब इन नशीले पदार्थों की गिरिफ्त में आरहें हैं .आगे जाके ये शौक जो लत के करीब पहुँच रहा है क्या गुल खिलाएगा इस  अबोध भीड़ को नहीं मालूम .इस खुराफाती उन्मादी छवि सचेत उम्र में  समझाना भी बहुत मुश्किल है .जहां हमजोलियों का भी निरंतर दवाब बना रहता है .आन बान और शान के लिए महाजन फेक्टर ज़रूरी है .कूल समझा जा रहा है इस शौक को .

प्रतियोगिताओं से पहले इस लत में वृद्धि देखी जा रही है .

मजेदार बात यह है ये प्रतिबंधित पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं स्कूल के आसपास पान की दूकानों पर .होम डिलीवरी भी की जा रही है .भांग की प्रजाति के एक पौधे से प्राप्त पदार्थ कैनाबिस को तो बजट ड्रग कहा जा रहा है क्योंकि इसका अवैध  सौदा सस्ते में पट जाता है.

खिलाड़ियों में भी इसका चलन दिनानुदिन स्कूल परिसर में बढ़ रहा है .एड्रीनेलिन दौड़ने लगता है नसों में इन पदार्थों के सेवन के बाद .शरीर पर जैसे चाबुक सा पड़ता रहता है इन पदार्थों का और जैसे वह आराम करना भूल जाता है .प्रदर्शन प्रदर्शन और बस प्रदर्शन की होड़ जो करादे सो कम .इन पीढियो को नहीं कोई गम .चिंता  का  विषय   होना  चाहिए  गत  जनवरी  में  संपन्न  नेशनल स्कूल गेम्स में ११ प्रतिभागी डोप टेस्ट में पोजिटिव पाए गए थे .

शरीर को बेहद की उत्तेजना और ऊर्जा से भर देते हैं ये पदार्थ इतनी ऊर्जा को शरीर की पेशियाँ संभाल नहीं पातीं हैं .दिमाग कोई सोफ्ट वेयर नहीं दे पाता है  पेशियों को .नतीजा होता है स्नायुविक तथा यौन सम्बन्धी जटिलताएं .लड़कों की छातियाँ लड़कियों की तरह बढ़ने लगतीं हैं लड़कियों का मासिक चक्र अव्यवस्थित हो जाता है .

कौन- कौन से पदार्थों का सेवन किया जा रहा है और क्या हैं इनके पार्श्व प्रभाव इसकी चर्चा अगली पोस्ट में .अभी के लिए इतना ही .खुदा हाफ़िज़ .

सन्दर्भ -सामिग्री :-More teens use marijuana to feel good ,kill anxiety

75% Rise In Cases Over Past 2 Years : Psychiatrists /TIMES CITY /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 4 ,2012 ,P4


कुछ भी से सबकुछ तक...  पठन से सूचना तक...  सूचना से मनन तक...  मनन से तर्क ( कार्य-कारण निष्पादन ) तक...  तर्क से विज्ञान तक... और ( यदि संभव हो तो ) –  विज्ञान से ज्ञान, सम्पूर्ण ज्ञान तक...

शुक्रवार, 4 मई 2012


उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

बहुत तेज़ नहीं आराम आराम से ही  आनंद पूर्वक व्यायाम स्वरूप दौड़ो .कोई ज्यादा नहीं बा -मुश्किल १-३  घंटा सप्ताह भर में .

फायदे :
(१)धीमे धीमे दौड़ने से ऑक्सीजन की खपत बढती है .

(२)इंसुलिन संवेद्यता (Insulin sensitivity )में  इजाफा   होता   है  .

(3)लिपिड  प्रोफाइल  (SERUM CHOLESTEROL, HDL CHOLESTEROL, VLDL  CHOLESTEROL , LDL CHOLESTEROL , LDL /HDL RATIO , TOTAL CHOLESTROL/HDL)में मान्य अर्थों में सुधार आता है .
(४)रक्त चाप कम होता है .

(५)प्लेटलेट का परस्पर झुण्ड बनाना कम होता है .

(६)अश्थी घनत्व (हड्डियों के घनत्व )में सुधार आता है .

(७)दिल अच्छी तरह से अपना काम अन्जान्म देता है .

(८)इम्यून फंक्शन सुधरता है .

(९)Fibrinolytic  activity बढ़ जाती है .

(१०)  मोटापा कम होता है .

(११)Inflammation markers की  संख्या  कम  हो  जाती  है  .

(१२)मनोविज्ञान
 बेहतर हो जाता है .

(१३) उम्र दराज़ होता है जोगर .

योरोपीय हृदय संघ के मुताबिक़ नियमित जोगिंग करने वाले मर्दों की उम्र में औसतन ६.२ और महिलाओं के मामले में ५.६ साल का इजाफा हो जाता है .दौड़ना  भी आनंद के लिए बस एक से लेकर ढाई घंटा पूरा हफ्ता मिलाकर .

कोपेनहेगन हार्ट स्टडी के प्रणेता Peter Schnohr कहतें     हैं नियमित   जोगिंग   उम्र   दराज़  बनाती  है  व्यक्ति  को  ,कम  मेहनत  और  फल  ज्यादा  मिलता  है  .कम खर्च (केलोरी )बाला नशीं  .वाला फलसफा हैं यहाँ .
मोडरेट ब्जोगिंग करने वालों में मृत्यु दर कमतर रहती है बरक्स उनके जो जोगिंग नहीं करते और उनकी तुलना में भी जो जिम में घंटों खपाते हैं .हाड तोड़ कसरत करते रहतें हैं .

जो लोग  मेरी  तरह  हलके  से भी  दौड़  नहीं सकते  उनके लिए भी एक अच्छी खबर डॉ अशोक सेठ लेकर आयें हैं -बकौल आपके तेज़ कदमी करना भी उतना ही मुफीद है सेहत के लिए जितना कि जोगिंग .आप  भारतीय हृदय सोशायती के मुखिया हैं .

डॉ अशोक के शब्दों में सप्ताह में पांच दिन ४० मिनिट का मझौले दर्जे का व्यायाम प्रयाप्त रहता है .इससे  मधुमेह ,मोटापे ,उच्च रक्त चाप की ओर ले जाने वाला जोखिक कम होता है .

इस ४० मिनिट में पांच पांच मिनिट का वार्म अप ओर कूल डाउन समय भी शामिल है .है न वही बात हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा ही चोखा .

सन्दर्भ सामिग्री :-'Jog every morning to add 5 more yrs to life'
 1-3 Hrs Per Week Delivers Optimum Benefits: Study/  TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA  ,MUMBAI ,MAY 4 ,2012 P 11 Column 6,7,८

FIBRINOLYTIC /FIBRINOLYSIS:
      It is the destruction of fibrin and blood clots.

Marker:It is a device or substance used to indicate or mark something .

Inflammation : A Swelling , redness ,heat and pain produced in an area of the body as a reaction to injury or infection .


स्पर्म (शुक्र )को ओवम (अंडाणु ,डिम्ब )से मिलवाने वाली दोस्त है यह जीन

Gene find to boost fertility treatments

vital For Sperm -Egg Binding/THE TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 2,2012,P15

साइंसदानों  ने  एक  ऐसी  दोस्त  जीन  का  पता  लगाया  है  जो  स्पर्म को ओवम (फिमेल एग )से मिलवाएगी .यही वह जीन है जो एक प्रोटीन PDILT तैयार करवाती है .समझा जाता है यह जीवन इकाई परखनली गर्भाधान की कामयाबी की दर एक दम से बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगी .इससे निस्संतान दम्पतियों के जीवन  में आशा की किरण फूट सकती है .. 

अपनी इस अभिनव शोध के तहत Durham University के  साइंसदानों ने पता लगाया है कि जब इस जीवन इकाई को नर चूहों में अभिव्यक्त होने से रोक दिया जाता है ,इसे स्विच ऑफ़ कर दिया जाता है तब इनके  स्पर्म  .के  ओवम से मिलन मनाने के मौके ,निषेचन करवाने की दर गिर के ३% ही रह जाती है जब कि इसे अभिव्यक्ति की पूरी छूट मिलने पर यह दर बढ़के ८०% से भी ज्यादा  हो जाती है .

यह पहला मौक़ा जब इस प्रकार की  किसी जीवन इकाई को गर्भाधान से जोड़    के देखा जा रहा     है .

शोध के अगुवा साइंसदान Adam Benham के  अनुसार  यह  जीवन  इकाई वाया Oviduct शुक्र  को अपने   लक्ष्य डिम्ब  तक ले  जाके  दोनों  का  परस्पर  बंध  बनवाने  में विधाई  भूमिका  निभाती  है .

यही क्रिया तो निषेचन के लिए ज़रूरी होती  है .ये प्रोटीन लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक सोफ्ट वेयर मुहैया करवाती है ,पथ प्रदर्शक बनके आती है शुक्र के लिए .सारथी बन जाती है यह पार्थ का .हालाकि यह रिसर्च अभी अपने आरंभिक चरण में ही है लेकिन उम्मीद का एक नया सवेरा संतान हीन दम्पतियों के लिए इसके आगोश में छिपा दिखाई देता है . 

उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

उम्र बढाने का नायाब नुस्खा :जोगिंग

बहुत तेज़ नहीं आराम आराम से ही  आनंद पूर्वक व्यायाम स्वरूप दौड़ो .कोई ज्यादा नहीं बा -मुश्किल १-३  घंटा सप्ताह भर में .

फायदे :
(१)धीमे धीमे दौड़ने से ऑक्सीजन की खपत बढती है .

(२)इंसुलिन संवेद्यता (Insulin sensitivity )में  इजाफा   होता   है  .

(3)लिपिड  प्रोफाइल  (SERUM CHOLESTEROL, HDL CHOLESTEROL, VLDL  CHOLESTEROL , LDL CHOLESTEROL , LDL /HDL RATIO , TOTAL CHOLESTROL/HDL)में मान्य अर्थों में सुधार आता है .
(४)रक्त चाप कम होता है .

(५)प्लेटलेट का परस्पर झुण्ड बनाना कम होता है .

(६)अश्थी घनत्व (हड्डियों के घनत्व )में सुधार आता है .

(७)दिल अच्छी तरह से अपना काम अन्जान्म देता है .

(८)इम्यून फंक्शन सुधरता है .

(९)Fibrinolytic  activity बढ़ जाती है .

(१०)  मोटापा कम होता है .

(११)Inflammation markers की  संख्या  कम  हो  जाती  है  .

(१२)मनोविज्ञान
 बेहतर हो जाता है .

(१३) उम्र दराज़ होता है जोगर .

योरोपीय हृदय संघ के मुताबिक़ नियमित जोगिंग करने वाले मर्दों की उम्र में औसतन ६.२ और महिलाओं के मामले में ५.६ साल का इजाफा हो जाता है .दौड़ना  भी आनंद के लिए बस एक से लेकर ढाई घंटा पूरा हफ्ता मिलाकर .

कोपेनहेगन हार्ट स्टडी के प्रणेता Peter Schnohr कहतें     हैं नियमित   जोगिंग   उम्र   दराज़  बनाती  है  व्यक्ति  को  ,कम  मेहनत  और  फल  ज्यादा  मिलता  है  .कम खर्च (केलोरी )बाला नशीं  .वाला फलसफा हैं यहाँ .
मोडरेट ब्जोगिंग करने वालों में मृत्यु दर कमतर रहती है बरक्स उनके जो जोगिंग नहीं करते और उनकी तुलना में भी जो जिम में घंटों खपाते हैं .हाड तोड़ कसरत करते रहतें हैं .

जो लोग  मेरी  तरह  हलके  से भी  दौड़  नहीं सकते  उनके लिए भी एक अच्छी खबर डॉ अशोक सेठ लेकर आयें हैं -बकौल आपके तेज़ कदमी करना भी उतना ही मुफीद है सेहत के लिए जितना कि जोगिंग .आप  भारतीय हृदय सोशायती के मुखिया हैं .

डॉ अशोक के शब्दों में सप्ताह में पांच दिन ४० मिनिट का मझौले दर्जे का व्यायाम प्रयाप्त रहता है .इससे  मधुमेह ,मोटापे ,उच्च रक्त चाप की ओर ले जाने वाला जोखिक कम होता है .

इस ४० मिनिट में पांच पांच मिनिट का वार्म अप ओर कूल डाउन समय भी शामिल है .है न वही बात हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा ही चोखा .

सन्दर्भ सामिग्री :-'Jog every morning to add 5 more yrs to life'
 1-3 Hrs Per Week Delivers Optimum Benefits: Study/  TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA  ,MUMBAI ,MAY 4 ,2012 P 11 Column 6,7,८

FIBRINOLYTIC /FIBRINOLYSIS:
      It is the destruction of fibrin and blood clots.

Marker:It is a device or substance used to indicate or mark something .

Inflammation : A Swelling , redness ,heat and pain produced in an area of the body as a reaction to injury or infection .


स्पर्म (शुक्र )को ओवम (अंडाणु ,डिम्ब )से मिलवाने वाली दोस्त है यह जीन

Gene find to boost fertility treatments

vital For Sperm -Egg Binding/THE TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 2,2012,P15

साइंसदानों  ने  एक  ऐसी  दोस्त  जीन  का  पता  लगाया  है  जो  स्पर्म को ओवम (फिमेल एग )से मिलवाएगी .यही वह जीन है जो एक प्रोटीन PDILT तैयार करवाती है .समझा जाता है यह जीवन इकाई परखनली गर्भाधान की कामयाबी की दर एक दम से बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगी .इससे निस्संतान दम्पतियों के जीवन  में आशा की किरण फूट सकती है .. 

अपनी इस अभिनव शोध के तहत Durham University के  साइंसदानों ने पता लगाया है कि जब इस जीवन इकाई को नर चूहों में अभिव्यक्त होने से रोक दिया जाता है ,इसे स्विच ऑफ़ कर दिया जाता है तब इनके  स्पर्म  .के  ओवम से मिलन मनाने के मौके ,निषेचन करवाने की दर गिर के ३% ही रह जाती है जब कि इसे अभिव्यक्ति की पूरी छूट मिलने पर यह दर बढ़के ८०% से भी ज्यादा  हो जाती है .

यह पहला मौक़ा जब इस प्रकार की  किसी जीवन इकाई को गर्भाधान से जोड़    के देखा जा रहा     है .

शोध के अगुवा साइंसदान Adam Benham के  अनुसार  यह  जीवन  इकाई वाया Oviduct शुक्र  को अपने   लक्ष्य डिम्ब  तक ले  जाके  दोनों  का  परस्पर  बंध  बनवाने  में विधाई  भूमिका  निभाती  है .

यही क्रिया तो निषेचन के लिए ज़रूरी होती  है .ये प्रोटीन लक्ष्य तक पहुँचने के लिए एक सोफ्ट वेयर मुहैया करवाती है ,पथ प्रदर्शक बनके आती है शुक्र के लिए .सारथी बन जाती है यह पार्थ का .हालाकि यह रिसर्च अभी अपने आरंभिक चरण में ही है लेकिन उम्मीद का एक नया सवेरा संतान हीन दम्पतियों के लिए इसके आगोश में छिपा दिखाई देता है . 
 

Add a comment

गुरुवार, 3 मई 2012

रोग जो अधेड़ों को ले आता है बचपन की गलियों में

 इन दिनों ब्रिटेन में दो अधेड़ उम्र के सगे भाई एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त हैं जिसने इन्हें बच्चा बनाके छोड़ दिया है .इनमे से एक Matthew  जिसकी उम्र ३९ साल है अब एक छोटे से बच्चे की तरह हरकत करता रहता है .जबकी बड़ा भाई  Michael Clark जिसकी उम्र ४२ वर्ष है अब सारे दिन अधीर बना बिना बात बिला वजह सारे दिन ख़ुशी ज़ाहिर करता हुआ ही ही हें हें करता रहता है .गत वर्ष रोग निदान के बाद इन्हें
 Terminal leukodystropgy से ग्रस्त बतलाया गया .

अब ये  दोनों अधेड़ बालक सारे दिन या तो टेलिविज़न देखते रहतें हैं या फिर खेलते हैं सांप सीढ़ी का खेल खाते रहतें हैं कुरकुरे.इस अप्रत्याशित मुसीबत के मारे माँ बाप ने अब सेवा निवृत्त होने पर स्पेन में बसने के मंसूबे छोड़ दियें हैं .इनकी देख भाल करने चले आयें हैं .

इनमे से छोटा एक कारखाने में काम करता था और बड़ा ब्रिटेन की फौज में काम करता था .अब दोनों बालसुलभ खिलौने ही अपने लिए खरीदतें हैं एक रेल सेट खरीद रहा है तो दूसरा Mr Potato Head.

दोनों  की  इस  सबके   चलते  काम  से  छुट्टी   हो  गई  है  . 

है क्या Leukodystrophy?

यह  एक  स्नायु संबंधी  रोग है जो हमारे मष्तिष्क ,स्नायुविक संस्थान (नर्वस सिस्टम ),रीढ़ रज्जू (स्पाइनल कोर्ड ) को निशाना बनाता है .यह  नसों के तंतुओं का एक अपविकासी रोग है . इसमें वाईट मेटर का भी क्षय होता चला जाता है .ज़ाहिर है यह दिमाग के प्रकार्य को बाधित करता है .इसकी वजह एक ख़ास जैवरासायनिक प्रभाव हो सकता है  .केन्द्रीय स्नायुविक संस्थान से ताल्लुक रखने वाली इस असाधारण बीमारी में न्युरानों,नसों को घेरके रखने वाला संकेन्द्रीय परतों वाला एक बाहरी अस्तर(खोल ) ठीक   से नहीं बन पाता है .प्रोटीनों और वसा से बना होता है यह खोल जो कुछ नर्व सेल्स को घेरे रहता है . 

Leukodystrophy  is an incurable disease of the central nervous system in which the formation of the myelin is abnormal .This may be due to a specific biochemical effect.

It is a degenerative disease of nerve fibres or white matter that impairs brain function ,sight and motion .
Mylein :It is a whitish material made  up protein and fats that surrounds some nerve cells in concentric sheaths ,insulating adjacent nerve fibres and enabling transmission of nerve impulses.
रोग जो अधेड़ों को ले   आता  है बचपन की गलियों     में 
sandarbh saamigri :-Rare illness turns 2 brothers into kids

Like 'Benjamin Button', Middle aged Duo Go Back To Child -Like State/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MAY 3, 2012,P21

आरोग्य   समाचार   
नीम्बू पानी ज्वर ग्रस्त व्यक्ति ,फ्ल्यू ग्रस्त  व्यक्ति के इलाज़ में प्रयुक्त हो सकता है ..यह बुखार को तोड़ने में यक्ति को ज्वर मुक्त करने में मदद करता है क्योंकि इसके सेवन से पसीना ज्यादा आता है .और जब पसीना उड़ता है काया से तब पसीने के अणु अपने संग शरीर से ताप भी ले उड़ते है .पसीने के वाष्पीकृत होने से शरीर से गरमी बाहर निकल जाती है ठंडक पैदा होती है ज्वर उतर जाता है सामान्य परास (नोर्मल रेंज )में आ जाता है .

Lemon water can treat a person suffering from flu as it helps to break fever by increasing persipiration.
तरबूज  में  होता  है  विटामिन  बी - 6 .यह दिमाग की बे -चैनी के साथ तालमेल बिठाने की, एन्ग्जायती का मुकाबला करने की क्षमता को बढाता है .बे -चैनी कम करता है तरबूज का सेवन .चित्त को शांत करता है .tranquillizer (चित्त प्रशामक )का काम करता है तरबूज .



साधारण सा रक्त परीक्षण कर सकता है स्तन कैंसर की प्रागुक्ति

भविष्य में क्या आपको स्तन कैंसर की लपेट में आ जाने का जोखिम है ?साइंसदानों के अनुसार हमारी स्वेत रुधिर कणिकाओं की एक जीवन इकाई (जीन )के अणुओं में आने वाले बदलाव और स्तन कैंसर के बीच परस्पर एक अंतर सम्बन्ध है .यही लब्बोलुआब है इम्पीरियल कोलिज लन्दन के साइंसदानों की एक अभिनव शोध का .
यह एक ऐसा आणविक बदलाव है जो एक जीवन इकाई  को अभिव्यक्त होने तथा शमित करने का मौक़ा मुहैया करवा देता है .

इन्हीं आणविक बदलावों के चलते जींस बारहा ऑन ऑर ऑफ़ होते  हैं और स्तन कैंसर रोग समूह का मार्ग प्रशस्त हो जाता है .इस प्रकार स्तन कैंसर के रोग निदान से पहले ही उसके होने की भविष्य वाणी की जा सकती है उसके होने के खतरे के वजन को तौला जा सकता है  .

संभव हो सकेगा अब न्युत्रिनो का मापन 

 Neutrinos  may  soon be measured:/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA /MAY 2,2012,P 15

ग्रह विज्ञान के माहिरों के अनुसार जल्दी ही भौतिकी (Physics) की holy grail सोन चिरैया हाथ न आने वाली मुर्गी (अव -परमाणुविक कण )बने लिटिल मास्टर, नन्ने द्रव्यमान शून्य निरंतर प्रकाश के निर्वातीय वेग से गतिमान बने रहने वाले कण न्यूट्रिनो का मापन संभव हो सकेगा .जाना जा सकेगा शुद्धता के साथ कि इसका द्रव्यमान कितना है ?है भी या नहीं इसमें पदार्थ की कोई मात्रा या अंश ?

हम जानते हैं यह कण पदार्थ के साथ कैसा भी INTERACTION  क्रिया -अनुक्रिया नहीं करता .पृथ्वी के एक ध्रुव से प्रवेश लेकर दूसरे से सहज भाव निकल भी जाता है दिन में हज़ारों हज़ार बार और किसी को कोई खबर भी नहीं होती .

शीत अंध पदार्थ ,डार्क एनर्जी ,डार्क मीटर की चाबी भी इसी के पास है .शक यही है इस अंध पदार्थ में बहुलांश न्यूट्रिनो का ही है .जो भी हो २०० रातों के नीहारिका अवलोकन के बाद दूरबीनों ,रेडिओ -दूरबीनों से इन दूर दराज़ की दूध गंगाओं की टोह लेने के बाद तथा सैंकड़ों गणनाएं करने के बाद ही अब  साइंसदानों की एक अंतर -राष्ट्रीय टीम इसके मापन की दिशा में एक सिनिश्चित कदम आगे बढ़ा चुकने ,आगे की और धर लेने की बात कर रही है .

शोध की  खिड़की से 

लम्बी तान के  ,सोना चर्बी खोना 
   वाशिंगटन    यूनिवर्सिटी  के रिसर्चरों के एक  नए अध्ययन   के अनुसार रोजाना नौ घंटा से   ज्यादा सोना शरीर पे चढ़ी चर्बी को उतारने में सहायक  सिद्ध होता है .यह मोटा होने की आनुवंशिक पूर्व वृत्ति को निष्प्रभावी .करता है.
जुडवा शिशुओं पर संपन्न अपने अध्ययन में रिसर्चरों  ने  पता लगाया है, रोजाना सात घंटे से कम सोना    बढ़ी हुई तौल से ताल्लुक रखता है .
  

नौ घंटा   या   इससे और भी    ज्यादा  सोने का मतलब तौल को कम करना है .एक पूरा जीन समूह है जिसका मोटापे से सम्बन्ध है .
रिसर्चरों ने 1088 जुड़वा जोड़ों के स्लीप पैट्रन का विश्लेषण किया है .पता चला इनमे से जो जुड़वां जोड़े सात घंटा या और भी कम अवधि के लिए   रोजाना सोते थे उनके  Body mass index पर  दो गुने       से भी ज्यादा आनुवंशिक असर दिखलाई दिया .
कम सोने वालों में ओबेसिटी जीन समूह को खुलकर खेलने अपने को एक्सप्रेस  करने  का  मौक़ा मिला ज्यादा सोने वालों में इसका शमन  हुआ .

नुस्खे सेहत के 

पैरों की बिवाई से बचाव और राहत के लिए घी में चुटकी भर नमक मिलाकर साफ़ सुथरे धुले पौंछे  तलुवों पर बिवाई वाले हिस्सों पर रात को मलके सोइए .

यदि होंठ फट  रहें हैं तो रात को सोते  वक्त मलाई में  सी थोड़ी सी हल्दी मिलाकर फटन पर लगाके सो  जाइए .





 
 

बुधवार, 2 मई 2012

नुस्खे सेहत के

नुस्खे सेहत के  

गुणकारी है मस्क् -मेलन : कठोर छिलके (RIND) वाला यह फल विटामिन सी का अच्छा स्रोत है .एक ऐसा एंटी -ओक्सिडेंट है यह जो दिल के लिए बेहतरीन समझा जाता है .

Muskmelon is a fruit with a ribbed or rough rind and white yellow ,or green flesh with a sweet full flavour ,and a pleasant musky smell.

जेक  फ्रूट (कटहल )  मैग्नीशियम का भंडार  है . यह एक ऐसा  पोषक तत्व  है जो हमारी अस्थियों  को मजबूती प्रदान  करता है..

JACKFRUIT : Jackfruit is a tree that bears jaks and produces fine -grained yellowish wood.   

कटहल का पेड़ जिस पर कटहल .लगते हैं .

  


डिमैन्शा : राष्ट्रीय परिदृश्य ,एक विहंगावलोकन

डिमैंशा ओरगेनिक दिमागी रोग या आघात से उत्पन्न एक गंभ्भीर मानसिक विकार है जो हमारी सोचने ,याद रखने और रोजमर्रा के सामान्य व्यवहार की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है .प्रभाव भी ऐसा जो समय के साथ बढ़ता ही जाता है .और धीरे धीरे सोचने समझने याद रखने की क्षमता को ले उड़ता है और इसीलिए इसे लाइलाज या क्रोनिक कहा जाता है जिसमें  व्यवहार के साथ- साथ बोध सम्बन्धी प्रकार्य दिमाग का छीजता चला जाता है .यह इसीलिए एक न्यूरो-दिजेंरेतिव डिसऑर्डर भी कहाता है .याद रहे   महज़  सठियाना  नहीं है डिमेंशा .दिमाग  का  एक  अप  -विकासी  रोग  है  .
क्या है भारत की स्थिति इस लाइलाज रोग की बाबत एल्ज़ाइमर्स जिसका सहज उदाहरण है ? 
विश्वस्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट 'Dementia - a public health priority ' के  अनुसार     भारत में     तकरीबन     37 लाख    लोग   इस मर्ज़   के   साथ रह  रहें हैं .आगामी  बीस  बरसों  में ही यह संख्या दोगुनी  हो सकती  है . 
टूटते बिखरते न्यूक्लीयर परिवार  इसके मरीजों के प्रबंधन में एक बड़ी बाधा बनने जा रहें हैं .इसी के चलते जहां गाँवों  में इसके मरीजों की देखभाल करने वालों में फिलवक्त 70%बच्चे  और जीवन साथी हैं वहीँ शहरों में केवल ४०%ही ऐसा कर पा रहें हैं .
शहरों  में इनकी  देखभाल करने  वालों  में जहां  27 %जीवन   साथी  लगे  हें   वहीँ ग्रामीड़ क्षेत्रो में 23% ही ऐसा कर  पा रहें  है.
बुढापे का अकेलापन  उसी अनुपात में बढ़ता जा  रहा है जिस  अनुपात में न्यूक्लीयर परिवारों  की संख्या फ़ैल रही है .जबकि  इससे  ग्रस्त  उम्र  दराज़  लोगों  को चौबीसों  घंटा  देखभाल की ज़रुरत  रहती  है इसके बिना  गुज़ारा  ही नहीं  है .कालान्तर में न तो ये शौच आदि से खुद अपने आप निवृत्त हो सकतें हैं और न ही इन्हें अपनी स्थिति का बोध रहता है इन्हें नहीं पता रहता ये कब कहाँ हैं आस पास कौन है इनके .ये हैं रोग की बढ़ी हुई अवस्था के चंद लक्षणों की एक झलक .
योरोप में डिमेंशा की देखभाल  के लिए अनेक   सुविधाएं  सामने  आ गई  हैं .प्रोद्योगिकी का इसके प्रबंधन में बड़ा सहारा मिल रहा है .
सबके  पास  मोबाइल्स  हैं .इन्हें  सोफ्ट  वेयर  दे दिया जाता है मरीज़ को याद दिलाते  रहने  के वास्ते  .भारत में भी ऐसा आसानी से हो सकता है .
प्रेशर स्विचिज़ भी इन रोगियों की मदद के लिए हाज़िर हैं जब ये मरीज़ बैठतें हैं ,लाईट खुद बा खुद अपने से ही जल जाती है .   
pill dispensars खाने की मेज़ पर इन मरीजों को खाना खाने के बाद की दवा लेने को कहतें हैं उन्हें यह पूर्व रिकार्ड किया मेसेज दे दिया जाता है :भाई साहब दवाई खालो .
लाईट एमिटिंग डायोड आधारित लाइटें हैं जब आप दरवाज़े पर ताला  जड़तें हैं यही   LED  BASED LIGHTS आपको  याद दिलातीं हैं -भाई साहब चाबी निकाल लो . 
क्या है रोग का आलमी परिदृश्य ?
दुनिया भर में इस वक्त इसके तीन करोड़ छप्पन लाख मरीज़ हैं .२०३० तक इसके दोगुना हो जाने का अनुमान है ,२०५० तक तीन गुना .
हर बरस इसके सतत्तर 
 लाख नए मरीज़ सामने आरहें  हैं . 
एक सेकिंड में चार  नए मामले रोग के सामने आरहें हैं . 
भारत और चीन जैसे देशों के लिए जहां जीवन शैली (डायबिटीज़ और हाइपर -टेंशन ) रोग उफान पर हैं शकुन  अच्छा नहीं है .मधुमेह की तो भारत आलमी राजधानी ही बना हुआ है .
यहाँ सर्क्युलेशन सम्बन्धी रोगों के चलते डिमेंशा के रोगी और भी ज्यादा तेज़ी से बढ़ सकतें हैं .
एल्जाई -मार्स  के प्रबंधन के लिए फौरी तौर पर गाइड लाइंस की मांग माहिर कर रहें हैं करते रहें हैं .
माहिरों के अनुसार सहज सरल रोग नैदानिक उपकरणों की उपलब्धता वक्त की मांग है .रोग निदान जल्दी हो जाए तो प्रबंधन  भी आसान हो जाए .
भारत में गिनती के ही प्रोफेशनल सेंटर्स हैं .जरा मुल्क का साइज़ देखो और उपलब्ध सेंटर्स देखो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा .
रुरल एम्प्लोय्मेंट गारंटी स्कीमों (नरेगा ,मरेगा )के मार्फ़त ग्रामीड़ों को प्रशिक्षण इस बाबत दिया जाना चाहिए . 
अभी कुछ ख़ास नहीं बिगड़ा है बेटी बाप के घर में ही है .टालू रवैया   घातक सिद्ध होगा . 
सन्दर्भ -सामिग्री :-TECH HELP TO DEAL WITH
DEMENTIA        PRESSURE SWITCHES , PILL DISPENSERS TO ASSIST ELDERLY /TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY1,2012 ,P12  

कैंसर     रोगसमूह     से    हिफाज़त करता है स्तन पान . 

स्तन पान  एक फायदे अनेक . शिशुओं को बचाए रहता है यह कई किस्म के कैंसर रोग समूह से .रिसर्चरों को माँ के स्तन से प्राप्त   दूध में एक कैंसर  का मुकाबला करने  वाले एजेंट का पता चला है इसे TRAIL (TNF-related  apoptosis inducing ligand ) कहा    जा   रहा है .   

यही वह तत्व है जो स्तन दुग्ध में कैंसर रोधी सक्रियता बनाए रहता है .इस अध्ययन  को जर्नल ऑफ़ ह्यूमेन लेक्तेशन में SAGE ने   प्रकाशित किया है .
अध्ययन में रिसर्चरों ने बच्चों (नवजातों )को दी जाने वाली  पहली फीड COLOSTRUM के   साम्पिल्स   के   साथ -साथ  नव प्रसुताओं से परिपक्व स्तन  के नमूने जुटाए .

पता चला रक्त की तुलना में कोलोस्ट्रम और मेच्युओर ब्रेस्ट मिल्क में क्रमश :400 और 100 गुना उच्चतर स्तर  TRAIL का  मौजूद है .
फोर्मुला मिल्क में TRAIL का   नामोनिशान तक नहीं होता . 

सन्दर्भ -सामिग्री :-'Mum's milk protects baby against cancer'/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 1, 2012  P17.

मंगलवार, 1 मई 2012

डिमैन्शा : राष्ट्रीय परिदृश्य ,एक विहंगावलोकन

डिमैंशा ओरगेनिक दिमागी रोग या आघात से उत्पन्न एक गंभ्भीर मानसिक विकार है जो हमारी सोचने ,याद रखने और रोजमर्रा के सामान्य व्यवहार की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है .प्रभाव भी ऐसा जो समय के साथ बढ़ता ही जाता है .और धीरे धीरे सोचने समझने याद रखने की क्षमता को ले उड़ता है और इसीलिए इसे लाइलाज या क्रोनिक कहा जाता है जिसमें  व्यवहार के साथ- साथ बोध सम्बन्धी प्रकार्य दिमाग का छीजता चला जाता है .यह इसीलिए एक न्यूरो-दिजेंरेतिव डिसऑर्डर भी कहाता है .याद रहे   महज़  सठियाना  नहीं है डिमेंशा .दिमाग  का  एक  अप  -विकासी  रोग  है  .
क्या है भारत की स्थिति इस लाइलाज रोग की बाबत एल्ज़ाइमर्स जिसका सहज उदाहरण है ? 
विश्वस्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट 'Dementia - a public health priority ' के  अनुसार     भारत में     तकरीबन     37 लाख    लोग   इस मर्ज़   के   साथ रह  रहें हैं .आगामी  बीस  बरसों  में ही यह संख्या दोगुनी  हो सकती  है . 
टूटते बिखरते न्यूक्लीयर परिवार  इसके मरीजों के प्रबंधन में एक बड़ी बाधा बनने जा रहें हैं .इसी के चलते जहां गाँवों  में इसके मरीजों की देखभाल करने वालों में फिलवक्त 70%बच्चे  और जीवन साथी हैं वहीँ शहरों में केवल ४०%ही ऐसा कर पा रहें हैं .
शहरों  में इनकी  देखभाल करने  वालों  में जहां  27 %जीवन   साथी  लगे  हें   वहीँ ग्रामीड़ क्षेत्रो में 23% ही ऐसा कर  पा रहें  है.
बुढापे का अकेलापन  उसी अनुपात में बढ़ता जा  रहा है जिस  अनुपात में न्यूक्लीयर परिवारों  की संख्या फ़ैल रही है .जबकि  इससे  ग्रस्त  उम्र  दराज़  लोगों  को चौबीसों  घंटा  देखभाल की ज़रुरत  रहती  है इसके बिना  गुज़ारा  ही नहीं  है .कालान्तर में न तो ये शौच आदि से खुद अपने आप निवृत्त हो सकतें हैं और न ही इन्हें अपनी स्थिति का बोध रहता है इन्हें नहीं पता रहता ये कब कहाँ हैं आस पास कौन है इनके .ये हैं रोग की बढ़ी हुई अवस्था के चंद लक्षणों की एक झलक .
योरोप में डिमेंशा की देखभाल  के लिए अनेक   सुविधाएं  सामने  आ गई  हैं .प्रोद्योगिकी का इसके प्रबंधन में बड़ा सहारा मिल रहा है .
सबके  पास  मोबाइल्स  हैं .इन्हें  सोफ्ट  वेयर  दे दिया जाता है मरीज़ को याद दिलाते  रहने  के वास्ते  .भारत में भी ऐसा आसानी से हो सकता है .
प्रेशर स्विचिज़ भी इन रोगियों की मदद के लिए हाज़िर हैं जब ये मरीज़ बैठतें हैं ,लाईट खुद बा खुद अपने से ही जल जाती है .   
pill dispensars खाने की मेज़ पर इन मरीजों को खाना खाने के बाद की दवा लेने को कहतें हैं उन्हें यह पूर्व रिकार्ड किया मेसेज दे दिया जाता है :भाई साहब दवाई खालो .
लाईट एमिटिंग डायोड आधारित लाइटें हैं जब आप दरवाज़े पर ताला  जड़तें हैं यही   LED  BASED LIGHTS आपको  याद दिलातीं हैं -भाई साहब चाबी निकाल लो . 
क्या है रोग का आलमी परिदृश्य ?
दुनिया भर में इस वक्त इसके तीन करोड़ छप्पन लाख मरीज़ हैं .२०३० तक इसके दोगुना हो जाने का अनुमान है ,२०५० तक तीन गुना .
हर बरस इसके सतत्तर 
 लाख नए मरीज़ सामने आरहें  हैं . 
एक सेकिंड में चार  नए मामले रोग के सामने आरहें हैं . 
भारत और चीन जैसे देशों के लिए जहां जीवन शैली (डायबिटीज़ और हाइपर -टेंशन ) रोग उफान पर हैं शकुन  अच्छा नहीं है .मधुमेह की तो भारत आलमी राजधानी ही बना हुआ है .
यहाँ सर्क्युलेशन सम्बन्धी रोगों के चलते डिमेंशा के रोगी और भी ज्यादा तेज़ी से बढ़ सकतें हैं .
एल्जाई -मार्स  के प्रबंधन के लिए फौरी तौर पर गाइड लाइंस की मांग माहिर कर रहें हैं करते रहें हैं .
माहिरों के अनुसार सहज सरल रोग नैदानिक उपकरणों की उपलब्धता वक्त की मांग है .रोग निदान जल्दी हो जाए तो प्रबंधन  भी आसान हो जाए .
भारत में गिनती के ही प्रोफेशनल सेंटर्स हैं .जरा मुल्क का साइज़ देखो और उपलब्ध सेंटर्स देखो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा .
रुरल एम्प्लोय्मेंट गारंटी स्कीमों (नरेगा ,मरेगा )के मार्फ़त ग्रामीड़ों को प्रशिक्षण इस बाबत दिया जाना चाहिए . 
अभी कुछ ख़ास नहीं बिगड़ा है बेटी बाप के घर में ही है .टालू रवैया   घातक सिद्ध होगा . 
सन्दर्भ -सामिग्री :-TECH HELP TO DEAL WITH
DEMENTIA        PRESSURE SWITCHES , PILL DISPENSERS TO ASSIST ELDERLY /TIMES NATION /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY1,2012 ,P12