सोमवार, 17 अगस्त 2015

कुत्ता किसी का भी हो कोई भी कुत्ताए डॉग पूप वही उठाएगा।


Pet Waste Transmit disease 

Leash your dog Keep your area clean when your dog has...........

It is a Law Violaters will be fined $20.00 to $200.00

हैरन्डन (DullesGreen St., Harondon ,Virginia) से  वीरुभाई :

ट्राई -स्टेट्स वर्जिनिअ -मैरीलेंड -वाशिंगटनडीसी  वीक एंड मनाने मैं भी अपनी बेटी के परिवार के साथ  कैन्टन (मिशिगन) से यहां चला आया हूँ। गुज़िश्ता  कई बरसों से यही प्रबंध है प्रभु का जून से नवंबर तक मैं यहां अमरीका में होता हूँ। शाम को अक्सर सैर को निकल जाता हूँ।

वैसे शाखामृग यानी पैट (स्वान ,कुत्ता कहना ज़रा अटपटा लगता है कई और लोगों में ये गुण चला आया है जो अक्सर कुत्ताए रहतें हैं ,इसीलिए हम पैट सम्बोधन ही इस्तेमाल में लेंगे। )हमारे पर्यावरण का यूं हिस्सा नहीं था जैसा अमरीकियों ने उसे बना दिया है। घर के एक सम्माननीय सदस्य का दर्ज़ा प्राप्त है उसे। हर पैट के पीछे यहां एक डॉग ट्रेनर है।

आप सैर को निकलें हैं तो अमरीकी आपसे कनेक्ट करेगा हेलो,हाउ आर यू  टुडे कहके आप से संवाद करेगा चाहे आप कोई भी क्यों न हो। प्रैम में बैठा मुस्काता शिशु भी आपसे मुखातिब होगा हाथ हिलाकर।

बात पैट की चल रही थी। सैर की चल रही थी तो ज़नाब एक मर्तबा आप अमरीकी से उसका हाल पूछे न पूछे उसके लाडले पैट का ज़रूर पूछे ज़वाब मिलेगा -शी इज़ नाट वेळ टुडे ....,ही इज़ नाट मीन ,ही इज़ फ्रेंडली। आप बे झिझक उसे पुचकार सकते हैं।

हर अमरकी जहां जहां पैट डिस्पोज़ल बिन्स नहीं लगें हैं वहां वहां खुद उसके मल को ,एक्सक्रीटा ,पैट वैस्ट को ,डॉग पूप को पूपर स्कूपर से समेटेगा। पॉलिथीन में डाल के चल देगा।

यहां हैरन्डन में वेस्ट बिन्स भी हैं पोलिथिन बैग्स भी उसी के साथ हैं ,चेतावनी भी उसी के साथ चस्पां है:

It is a Law Violaters will be fined $20.00 to $200.00

कैलफोर्निया के सेन्होज़े में भी हमने यही प्रबंध देखा वहां साथ में हैन्सेनिटाइज़र भी उपलब्ध है वेस्टबिन और पोलीथीन के संग संग। 


सोचता हूँ कुछ तो हमारे इंडिया में भी किया ही जा सकता है क्लीन सिटी कहे जाने वाले नगरों से इसकी शुरुआत हो सकती है। आखिर अमीर लोगों का शौक है शगल है स्टेटस सिम्बल है ,सिक्युरिटी है हिन्दुस्तान में कुत्ता पालना। 

एक किस्सा याद आ गया। एक मर्तबा हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र बाबू एक नाव में बैठे थे। नाव में एक किनारे पर एक गौरांग भी बैठा था। वह मज़े से सिगरेट पी रहा था। धुआँ हवा के रूख के साथ बाबूजी की  तरफ आ रहा था। 

बाबूजी ने उससे पूछा महोदय ये सिगरेट आपका  है उसने कहा हाँ !बाबूजी बोले -फिर ये धुआँ भी तो आपका ही हुआ इसे भी अपने पास ही रखो भैया। यु चैन स्मोक एज़  लांग एज़ यू डोंट एग्ज़्हेल। 

गौरांग प्रभु ने सिगरेट तुरंत फैंक दी मुस्काया ,शुक्रिया अदा किया बाबूजी का। 

तो ज़नाब अमीरजादे कुत्ता घुमाते हैं और उसका मलमूत्र वहीँ छोड़ जाते हैं। 

बिना टांग उठाये यही कर्म  करते हुए आपको कई और भी मिल जाएंगे। बात उनकी नहीं हो रही है। ये और किस्सा है। वो और बात है। 

मुंबई में नेवी नगर प्रवास के दौरान हमने और ही नज़ारा देखा। वहां डॉगपूप समेटने के लिए  एक व्यक्ति नियुक्त है। कुत्ता किसी का भी हो  कोई भी कुत्ताए डॉग पूप  वही उठाएगा। डॉग पूपर लिए वह घूमता है सुबह , दोपहर, शाम। 

हमें शरम आती है अपने लाडले पेट का वेस्ट उठाने में। उस अमरीकी को नहीं आती जो हमसे कई गुना ज्यादा  रईस है। यहां अपना काम खुद करना एक मूल्य बोध है। यहां डोमेस्टिक हेल्प रखना न तो मूल्य है न हिन्दुस्तान की तरह बेगार उठाने वाला लाचार ही उतना सस्ता मिलता है । यहां ,हमारे यहां अक्सर ऐसे आदमी को हिकारत की नज़र से देखा जाता है जो अपना काम खुद करता है । और तो और अगर कोई मर्द घर में खुद चाय बना रहा हो और उसका कोई जानकार घर में चला आये तो फट कहेगा क्या बात है भाभीजी घर में नहीं हैं। अब भले आदमी चाय बनाने का बीवी से क्या सम्बन्ध है तू हमें एक सम्बन्ध बता प्रति संबंध हज़ार रुपया ले। बेटे फेरे डालते समय यह तय नहीं हुआ था। बात करता है। 

2 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

काश हम पश्चिम से उनकी अच्छी बातें भी सीख सकते...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

वीरेन्द्र सिंह ने कहा…

यहां तो लोग कुत्ता लेकर निकल पड़ते हैं और जहां कहीं भी घूमने की अच्छी जगह हो वहीं कुत्ते को हल्का करा देते हैं। हद हो गई मक्कारपन की। अमेरिकी कप़ड़े पहन लेंगे लेकिन अमेरिका से थोड़ी तमीज नहीं लेंगे।