सोमवार, 24 अगस्त 2015

जिसकी शक्ल क्या हुलिया देखकर ही हंसी आती हो उसे भला किसी और की मिमिक्री करने का कष्ट क्यों उठाना पड़े

लालू प्रसाद यादव को भगवान ने जब आदमी की शक्ल दी है तो कोई न कोई गुण भी  तो ज़रूर दिया ही  होगा। । भले ही उनका मुंह और मुखौटा एक जैसा ही लगता है लेकिन पता नहीं क्यों इस ओर  किसी का ध्यान  नहीं गया कि उनमें मसखरापन इतना कूट  कूट के भरा है कि बिना किसी विरोध के पूरे गौरव के साथ   उन्हें राष्ट्रीय मसखरा घोषित किया जा सकता है।और इस सिलसिले में वैश्विक स्तर पर मसखरा होने का यदि नोबेल प्राइज़ उन्हें मिल जाए तो कोई आश्चर्य न होगा।  जिसकी शक्ल क्या हुलिया  देखकर ही हंसी आती हो उसे भला किसी और की मिमिक्री करने का कष्ट क्यों उठाना पड़े। वे बार बार प्रधानमन्त्री मोदी के भाषण की नकल उतारने की कोशिश करते हैं। उनके मसखरे पन  के सामने तो कोई भी टिक नहीं सकता। भले ही उनका कोई कट्टर समर्थक ही क्यों न हो। मसखरेपन की मर्यादा तक तो ठीक है पर जब

  वे  इतिहास पढ़ाने लगते हैं तो उनके इतिहास बोध पर तरस आता है। कभी वह कहतें हैं लालकृष्ण आडवाणी  १९२३ में पैदा हुए  पाकिस्तानी हैं(बतलादें आपको लालूजी कि लालकृष्ण आडवाणी जी अखंड भारत के करांची (हैदराबाद ,सिंध प्रांत )में ८ नवंबर १९२७ में पैदा हुए थे   ।

१९४७ से पहले तो पाकिस्तान  दुनिया के नक़्शे में ही नहीं था। बेहूदा तरीके से वे इन दिनों मोदी जी की आवाज की नकल उतार   रहे हैं। वैसे वे न भी बोलें तो भी ऐसा ही करते दीखते हैं।

किसी भी अखबार ने उनके इस अतिरिक्त कौशल पर उनके अप्रतिम मसखरेपन पर आज तक कलम नहीं चलाई  न ही उनके अधकचरे इतिहास बोध पर उन्हें फटकारा है किसी और देश में अपने इतिहासिक अज्ञान से इस प्रकार का भरम फैलाते तो अब तक जेल में पड़े होते। उनकी इतिहासिक अज्ञानता पर तो उनके रिश्तेदार भी शर्मशार हो रहे होंगें। भले ही वह उत्तर प्रदेश के हों या हरियाण के।

हरियाणा में तोजहां  राव गोपाल सिंह और राव तुलाराम   जैसे वीर यादव योद्धाओं के किस्से हरेक की जुबान पर हों वहां लालू जैसे आदमी का स्वयं को समधी बना लेना कितने कौशल की बात है।

यूं बिहार के इतिहास का अपना एक गौरव है। सम्राट चन्द्रगुप्त ,महामति चाणक्य ,वैशाली के गणतंत्र के संस्थापन करता इतिहास पुरुष और आधुनिक भारत में वीर कुंवर सिंह ,डॉ राजेन्द्र बाबू ,जयप्रकाश नारायण कवि श्रेष्ठों  में दिनकर ,गोपाल सिंह नेपाली और विद्वानों में अनेक गणनीय नाम हैं और इधर के एक लालू प्रसाद हैं।

  कमसे कम हम सब लोग उनके उन सम्बन्धियों के साथ मिलके बिना भेद भाव के  एक बार   हाय हाय लालू तो कह सकते हैं।   मुलायम कुनबे तक तो उनकी रिश्तेदारी ठीक है पर वे हरियाणा के यदुवंशियों में भी गौरव प्राप्त कर लेंगे ये किसी नहीं सोचा था।

बिहार के कई लोग उन्हें जरासन्धि परम्परा से जोड़ते हैं।

असल में तो  इनके डीएनए की जांच होनी चाहिए।

लेवल :राष्ट्रीय मसखरा सम्राट 

2 टिप्‍पणियां:

Varun Mishra ने कहा…

Its such a wonderful lines
Ebook Publisher!

Digamber Naswa ने कहा…

सहमत आपकी बात से ... पर अफ़सोस होता है की ऐसे नेता भी फलते फूलते रहते हैं अपने देश में ...