सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

पता नहीं लंगोट का लाल रंग से क्या रिश्ता है




Red is the color of south or fire and fame .Red turns up the energy level on every thing it touches.and it animates the inanimate

पहनने  दीजिए स्टंट मैन  बोले तो अक्षय कुमार को किसी फिल्म में लाल लंगोट फिर देखिए इसका महातम्य .

इसे पहने पहने ही हनुमान संजीवनी पहाड़ उठा लाये थे .



राष्ट्रीय झंडों में यह रंग बराबर अपनी दस्तक बनाए हुए है .तमाम ख्यात ईट्रीज़ में भी .पिज़ा हट अमरीका में गहरे लाल से पुती हुईं हैं .

प्रतीकात्मक रंग है लाल फिर चाहे वह शादी के जोड़े का रंग हो या सिन्दूर का माथे की  बिंदिया का हो या चोली का .इसके नीचे हम जा नहीं सकते .यह हमारी भौतिक सीमा है .नैतिक भी .

और तो और जो महिला सधवा शरीर छोड़ जाती है यानी पति से पहले जिसकी मृत्यु हो जाती है उसे मांग में सिन्दूर भरके माथे लाल बिंदी लगा लाल ही कफन ही औढाया जाता है .

किसी चीज़ के महत्व को उजागर करता है लाल रंग चाहे वह फेंग सुई हो या कुछ और .

हमारी जीवन ऊर्जा खून का रंग भी लाल है .(बा -शर्ते यह पानी न हुआ हो ....)

भूख बढाता है लाल रंग .

इसीलिए डाइनिंगरूम्स  का रंग लाल रखा जाता है .

संकेतार्थों में लाल रंग ऊर्जा का ही प्रतीक और द्योतक है भले यह सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही अर्थ छटाएं लिए हुए है .

जोकी  भी भैंसे को लाल झंडी दिखाके ही उत्तेजित करता है .

और पहले तो भाई साहब यह लाल रंग  सुहागरात पे पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता था .भले एक दम से अ -वैज्ञानिक  बात थी यह क्योंकि हाईमन कितनी ही मर्तबा उछल कूद करते साइकिल चलाते ,तैराकी के दौरान स्वत :ही फट जाती है .

That is why  even in most tranquil rooms a touch of red is all it takes to keep a room from sliding off into a coma.

वैसे  काल शेष नहीं  हुआ है लंगोट .तमाम खिलाड़ी आज भी "supporter "  पहने  रहतें  हैं  .अंडरवीयर के विज्ञापन में इसके नीचे हीरो यही "सपोर्टर "पहने रहता है .लेकिन लंगोट को पुरुष असेट्स के रूप में मान्यता नहीं मिली है ."bust"की तरह स्त्री -वक्ष स्थल की तरह .

चुस्त  दिखने  रहने के लिए "orchitis"अंडकोशों के संक्रमण और सूजन से बचाव के लिए सपोर्टर बोले तो लंगोट पहनिए .लाल रंग का ही पहनिए .

एक प्रतिक्रया :

पहली बार इस  लंगोट पोस्ट को फीड ने लिया ही नहीं -पडी रही है, फिर ट्राई करके देखता हूँ! 

यह   प्रतिक्रया FB पर भी मौजूद है .उसी तारीख में जिसमें पहली मर्तबा पोस्ट की गई थी .

हमारी  भी जिद है तू डाल डाल मैं पात पात .अपने डॉ .अरविन्द मिश्र जी का स्पैम बोक्स डायनासौर बना हुआ इस टिपण्णी को जब दस बार लील चुका तब हार मानके हमने यह एक्सट्रीम कदम उठाया है .

सभी ब्लोगर बंधुओं बह्नाओं से अनुरोध है इस्पैम बोक्स को नियमित खाली करें .ये संक्रमण बहुत तेजीसे फ़ैल रहा है .   

शरीर का जायजा लेती बेहद की प्रौद्योगिकीय दखल (दूसरी किस्त )

Tracking your body with technology 

शरीर का जायजा लेती बेहद की प्रौद्योगिकीय  दखल (दूसरी किस्त )

स्पार्क पीपल (Spark people )  नाम  है ऐसी ही एक युक्ति का जिसका इस्तेमाल Michelle Jackson ,39,मार्च  २०११ से कर रहीं  हैं .तबसे लेकर अब 

तक उनका वजन १०२ पोंड कम हो गया है .आप इस्मार की तरह तो अपनी काया के प्रति उतना अनुरागी और संभाल करने वाली भले न बन सकीं हैं लेकिन दो टूक कहतीं हैं और मानती हैं जब कभी भी किसी अपडेट की वजह से यह युक्ति ठीक से काम नहीं कर पाती है मेरा मूढ़ बुरी तरह खराब हो जाता है .मैं अपने आप को तब बहुत ही निहत्था और अशक्त महसूस करतीं हूँ .यह युक्ति मेरी ज़रूरीयात बन चुकी है .

मैं हफ्ते के सातों  दिन मुझे कब क्या खाना है इसका नियोजन इस युक्ति की मदद से ही करतीं हूँ .यह युक्ति हमें बाकायदा बतलाती है कब कित्ता कार्बोहाईड्रेट  ,चिकनाई ,प्रोटीन इस्तेमाल करें .इनमें से हरेक कितनी केलोरी देगी यह भी .मेरे  द्वारा खर्च की गई हर केलोरी से मुझे बा -खबर रखती है .

मूढ़ स्कोप आपके मिजाज़ का जायजा लेता रहता है .एक आन लाइन कार्ड गेम के ज़रिये यह आपका खुशांक ,आपकी हेपीनेस .आपकी ख़ुशी का दर्ज़ा बतलाता है .आगे पीछे क्या ऊँच नीच होने वाली है आपके साथ मूढ़ कब कैसे रहने वाला है सोशल सेटिंग्स में इससे भी आगाह करती है यह युक्ति .

आपकी मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति का जायजा लेने वाली युक्तियों पे काम ज़ारी है .आइन्दा आप स्ट्रेस और योग तथा ध्यान का भी बेहतर इस्तेमाल बढ़िया मानसिक  स्तर हासिल करने में कर सकेंगे .

उठाऊ ब्रेन स्केन सिस्टम भी आरहा है जो आपके स्मार्ट फोन या टेबलेट से सम्बद्ध होगा .दिमाग में बनने वाली बिजली न्यूरोन फायरिंग का यह पूरा हिसाब रखेगा .

अब एक ऐसे पेशाब घर की कल्पना कीजिए जिसमें एक यूरोफ्लोमीटर समाहित है जो आपके मूत्राशय की सेहत का पूरा जायजा ले सकेगा .बतला सकेगा कहीं आप प्रोस्टेट इनलार्ज्मेंट की चपेट में तो नहीं आ रहे .कोई मूत्र मार्ग का संक्रमण तो नहीं होने वाला है या हो चुका है .

The body as a science experiment 

(ज़ारी   )

Tracking your body with technology


शरीर का जायज़ा लेती बेहद की प्रोद्योगिकीय  दखल 

उसके फ्रिज में स्टूल(मल /टट्टी ) का एक साम्पिल रखा हुआ है जिसे लेब को जांच  के लिए जल्दी से जल्दी भेजा जाना है .ताकि वह जान सके .कि अन्दर हो क्या रहा है उसके शरीर में .

ऐसा वह अपने पारिवारिक डॉ .की सलाह पर नहीं करता रहा है .हर माह का उसका अपना शगल है यह सब करते रहना .

वह ऐसा मानता है कि हर आदमी को अपनी सेहत का मुआयना खुद ही करते रहना चाहिए मानीटरन  भी .डॉक्टर्स के पास वक्त कहाँ  होता है दास्ताने मरीज़ सुनने का .कोर्पोरेट सेक्टर है यह .यहाँ वक्त के पैसे हैं .इतना वक्त एक मरीज़ पे लगाया भी क्यों जाए ?

अपनी सेहत का खुद हिसाब किताब रखने वाला वह अकेला आदमी नहीं है .अब अधिकाधिक लोग टेक्नोलोजी मुखातिब हैं ,प्रोद्योगकी मुखापेक्षी हैं अपनी सेहत को लेकर .

सालाना  व्यापक चिकित्सा परीक्षण करवाना  अपनी जगह है और साल भर का टुकडा टुकडा बहीखाता बनाना सेहत का अपनी जगह है .

यह ६३ वर्षीय  व्यक्ति जिसका नाम इस्मार है केलिफोर्निया के La Jollaa  का रहने वाला है .वह ऐसा मानता है वह अपना होम वर्क ही तो कर रहा है "सेहत- बही" रख कर .यथा संभव सर्वोत्तम स्वास्थ्य  अनुकूलता प्रोद्योगिकी की मदद से  बनाए रख कर वह डॉ ,के हाथ मज़बूत कर रहा है ताकि वह सालाना  परीक्षणों के परिणामों में पर्सनल रीडिंग्स भी जोड़ सके मरीज़ की खुद की .

मौसम का हाल जानने के लिए भले आज उपग्रहों का संजाल है लेकिन वहां भी OBSERVER की व्यक्ति गत रीडिंग्स का अपना महत्व है अधिकतम /न्यूनतम तापमान /कितनी बरसात गिरी है ,नमी कितनी रही हवा की गत चौबीस घंटों में इसका अपना महत्व है .इसके लिए पूरे  हिन्दुस्तान भर में वेधशालाएं हैं .

यही बात हमारी सेहत पे लागू होती है .

यह भी आप जान लीजिए इस्मार कोई मामूली आदमी नहीं है ,दूर -संचार और सूचना प्रोद्योगिकीय संस्थान ,केलिफोर्निया का निदेशक है .विश्वविद्यालय के सैन डिगो तथा इरविन परिसरों का सांझा शोध केंद्र है यह संस्थान . 

अपनी सेहत की टोह लेते रहने की इस प्रोद्योगिकीय पहल को एक नाम दिया गया -"QUANTIFIED SELF "

Devotion to self tracking has a name -"Quantified Self"-which is a website established by Wired co -founder Kevin Kelly and Gary wolf ,Wired contributing editor.Wolf;s own website ,Aether ,says more than 120,000 worldwide are members of Quantified Self Meetsup.

सेहत को ,सेहत से जुडी स्थितियों मेडिकल कंडीशंस को परिमाण या संख्या की शब्दावली में व्यक्त करना ,परिमाणित करना अपने से ही पहल करके कहलाता है "Qunatified Self "

हाल  फिलाल  तक इसके पंजीकृत सदस्यों की संख्या ८७३ थी . यह वह मंच है चर्चा मंच की तरह ब्लोगिंग की तरह जहां सदस्य आके तमाम घरेलू उपयोग के चिकित्सा उपकरणों ,शोध पर विमर्श करतें हैं .

इस वेबसाईट पर सैंकड़ों उपकरणों और युक्तियों ,एप्लाइएन्सिज़ और टूल्स की पूरी एक सूची दी हुई है जिनकी मदद से आप अपनी खुराक ,नींद और यहाँ तक कि अपने मिजाज़ ,मूढ़ को ताड़ सकतें हैं .तौल सकतें हैं .

Quantified Self 2012 एक आन्दोलन की शक्ल ले चुका है .गत सप्ताह इसकी आलमी बैठाक हुई है जिसमें  बीज वक्ता (मुख्य वक्ता /अतिथि )इस्मार ही थे .

इस्मार कहतें हैं कितनी अजीब बात है लोग अपनी कार की मेंटिनेंस को तो पूरी तवज्जो देतें हैं ,उसके सही रखरखाव पे पूरा पैसा खर्च करतें हैं लेकिन वही संभाल अपनी काया की नहीं रखते .जबकि सेहत का खुद जायजा रखने वाले उपकरण दिनानुदिन परिष्कृत होते गए हैं .

इस्मार "FitBit "पहने रहतें हैं .ये युक्ति इन्होनें कितनी केलोरी वाला खाद्य -पेय लिया दिन भर में कितने कदम इन्होनें टहल कदमी की इसका हिसाब रखती है .

सोते वक्त इस्मार zeo पहनते   हैं यह इनकी नींद के विभिन्न चरणों ,प्रावास्थाओं (लाईट ,इंटर मीडिएट ,डीपस्लीप )का पूरा ग्राफ इनके मोबाइल तक भेजती रहती है .

एक  और युक्ति है "Instant Heart Rate "   यह इस्मार के फोन कैमरे की फ्लेश लाईट का इस्तेमाल नाडी की फडकन दर्ज़ करने में इस्तेमाल करती है .आप जानतें ही हैं  पल्स रेट इज हार्ट रेट .Stress Check भी करती है यह युक्ति .इकसार यकसां है आपके दिल की धुकधुक या अनियमित .यानी आप रिलेक्स्ड हैं या दवाब में हैं .सब कुछ बतलाती है आपको यह डिवाइस . 

(ज़ारी )

सीख वाकू दीजिए जाकू सीख सुहाय ,


रविकर 
मम रचना के दोष जब, इंगित करते लोग |
मैं तो मन से मानता, यही सही संयोग ||


सीख वाकू दीजिए जाकू सीख सुहाय ,

सीख न बांदरा दीजिए ,बैया का घर जाय .



कहतें हैं बंदर के हाथ में उस्तरा नहीं देना चाहिए .बंदर के हाथ में, आ गई हल्दी की गांठ ,खोल बैठा पंसारी की दूकान .

हरेक को आईना, मत दिखाओ भाई साहब! मन ने आज ये बात खुद से कही .और इसी के साथ एक पुरानी बात याद आ गई .हुआ यूं हम स्पोट इवेलुएशन में बैठे उत्तर पुस्तिकाएं जांच रहे थे ,महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के प्रांगण में .ब्रेक में नाश्ता मिलता था -पूछा  गया क्या खाओगे ?

हमारे एक साथी  झट से बोले सेंडविच .अरे !हमारे मुंह से अनायास निकल गया भाई साहब -ये लफ्ज़ सैनविच होता है न की सैंड . सैनविज 

भी है इसका उच्चारण .

ज़वाब मिला माइंड योर ऑन लेग्विज मिस्टर शर्मा !

लेकिन साहब क्या करें हम भी अपनी आदत से मजबूर हैं जितनी अपना समझ है उसके मुताबिक़ यदि हमें लगता है कि कोई भाई ब्लोगिंग में अनुस्वार /अनुनासिक की अनदेखी कर रहा है .हम जाके चुपके से उसे ठीक कर देतें हैं अपनी टिपण्णी में इशारे से .शब्दों में उसका उल्लेख नहीं करते हैं .बस ब्रेकिट में शुद्ध रूप लिख देतें हैं .

अब भाई साहब !अगर भगवान  ने अगर आपको एक नाक दी है तो उसका इस्तेमाल सिर्फ एहम साधना के लिए तो नहीं ही होना चाहिए .

जब बच्चा पैदा होता है वह दस हज़ार अलग लग गंधों को पहचान सकता है .उसकी माँ की जर्सी गर्म स्वेटर या कोई और वस्त्र बाकी वस्त्रों में मिलादों वह उसे पहचान लेता है .

कुत्तों में यह घ्राण शक्ति विकसित होती है क्योंकि वह भाषा नहीं जानते .हमें  क्योंकि एक भाषा भी सिखलाई जाती है इसीलिए धीरे धीरे गंधों की हमारी समझ छीजने लगती है .घ्राण शक्ति विकसित नहीं हो पाती .चंद गंधों की शिनाख्त तक सीमित हो जाती है और कुछ में तो यह बस एक आयामीय होकर ही रह जाती है .वरना हम उन गंधों को भी पहचानते हैं जिनसे हमारा वास्ता तब पड़ा था जब हम मात्र ८० दिन के थे लेकिन तब क्यों कि कोई भाषा हम नहीं जानते थे तो अब उस गंध से सामना होने पर उसे पहचानते तो हैं नाम नहीं दे पाते .

उनकी किसी चूक की और संकेत कर दो -करके देख लो बघनखे पहन खड़े हो जातें हैं आपका मुंह नोचने को .लीजिए एक बानगी पेश है .



2012/9/30 Virendra Kumar Sharma <veerubhai1947@gmail.com>
सुप्रिय रचना जी !मैं कोई भाषा विद नहीं हूँ और न ही साहित्य का छात्र रहा हूँ .शुद्ध विज्ञान की दुनिया का शुष्क आदमी हूँ

.मुझसे भी  टंकण  की गलतियां होतीं हैं हुईं हैं .कम्प्यूटर   टंकण और शब्दकोश की भी सीमाएं रहतीं हैं ,फिर भी कोई इधर इशारा कर जाए तो अच्छा लगता है मुझे .आखिर हम एक ही वृहद् परिवार के सदस्य हैं .

आपकी पोस्ट को तो मैंने बढ़िया ही कहा है .

अशुद्धियों का कहाँ ज़िक्र किया है मैंने ? .अकसर मज़ाक ज़रूर कर लेता हूँ -भाई साहब नाक दी है भगवान ने तो उसका इस्तेमाल करो ,अनुनासिक ,अनुस्वार से परहेज़ क्यों रखते हो .बिंदी और चन्द्र बिंदु की अपनी शोभा और ज़रुरत है हमारी हिंदी को ,हिंदी चिठ्ठाकारी को .इति नेहा और स्नेह से 

वीरुभाई ,४३,३०९ ,सिल्वर -वुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशिगन  ,४८.१८८ 

2012/9/30 रचना <indianwomanhasarrived@gmail.com>
टंकण की गलियाँ खोजने से बेहतर विकल्प भी हैं ब्लोगिंग में

2012/9/30 Virendra Kumar Sharma <noreply-comment@blogger.com>
Virendra Kumar Sharma has left a new comment on your post "Proficient Satisfied Lotus Means TUG OF WAR":


वैसे tug ऑफ़ वर(रस्सा कसी ) में वही जीतता हैं जिसका खिलाड़ी तगड़ा होता हैं और रस्सी के छोर पर बंधा होता हैं , सब के हाथ से रस्सी छुट(छूट)......छूट ...... भी जाए तब भी अंगद की तरह उसका पाँव नहीं हिलता .


अपनी अपनी रस्सी तो संभलती नहीं है आज कल के proficient लोगो(लोगों )....लोगों ..... से और दूसरो(दूसरों )....दूसरों .... के घरो(घरों )....घरों .... के बिम्ब और प्रतीक की चिंता खाए जाती हैं . इतनी लापरवाही सही नहीं हैं , जिनके हवाले देश की सीमाए(सीमाएं )...सीमाएं ....... हो वो अपना घर ना संभाल सके तो LOC पर क्या होगा . अब ceasefire नहीं होता हैं आज कल , वो ज़माने ख़तम हुए


बाकी कुछ विध्वंसक मानते मानते दिव्य-रचना कह कर satisfied होते हैं आखिर सच हमेशा सच ही होता हैं ,विध्वंसक रचना ही दिव्य होती हैं क्युकी(क्योंकि )....क्योंकि .... विध्वंस के बाद ही सृजन होता हैं

बढ़िया प्रस्तुति है .

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Posted by Virendra Kumar Sharma to ब्लॉगर "रचना " का ब्लॉग " बिना लाग लपेट के जो कहा जाए वही सच है " at September 30, 2012 6:54 AM

शरीर का जायज़ा लेती बेहद की प्रोद्योगिकीय दखल

शरीर का जायज़ा लेती बेहद की प्रौद्योगिकीय   दखल 

उसके फ्रिज में स्टूल(मल /टट्टी ) का एक साम्पिल रखा हुआ है जिसे लेब को जांच  के लिए जल्दी से जल्दी भेजा जाना है .ताकि वह जान सके .कि अन्दर हो क्या रहा है उसके शरीर में .

ऐसा वह अपने पारिवारिक डॉ .की सलाह पर नहीं करता रहा है .हर माह का उसका अपना शगल है यह सब करते रहना .

वह ऐसा मानता है कि हर आदमी को अपनी सेहत का मुआयना खुद ही करते रहना चाहिए मानीटरन  भी .डॉक्टर्स के पास वक्त कहाँ  होता है दास्ताने मरीज़ सुनने का .कोर्पोरेट सेक्टर है यह .यहाँ वक्त के पैसे हैं .इतना वक्त एक मरीज़ पे लगाया भी क्यों जाए ?

अपनी सेहत का खुद हिसाब किताब रखने वाला वह अकेला आदमी नहीं है .अब अधिकाधिक लोग टेक्नोलोजी मुखातिब हैं ,प्रोद्योगकी मुखापेक्षी हैं अपनी सेहत को लेकर .

सालाना  व्यापक चिकित्सा परीक्षण करवाना  अपनी जगह है और साल भर का टुकडा टुकडा बहीखाता बनाना सेहत का अपनी जगह है .

यह ६३ वर्षीय  व्यक्ति जिसका नाम इस्मार है केलिफोर्निया के La Jollaa  का रहने वाला है .वह ऐसा मानता है वह अपना होम वर्क ही तो कर रहा है "सेहत- बही" रख कर .यथा संभव सर्वोत्तम स्वास्थ्य  अनुकूलता प्रोद्योगिकी की मदद से  बनाए रख कर वह डॉ ,के हाथ मज़बूत कर रहा है ताकि वह सालाना  परीक्षणों के परिणामों में पर्सनल रीडिंग्स भी जोड़ सके मरीज़ की खुद की .

मौसम का हाल जानने के लिए भले आज उपग्रहों का संजाल है लेकिन वहां भी OBSERVER की व्यक्ति गत रीडिंग्स का अपना महत्व है अधिकतम /न्यूनतम तापमान /कितनी बरसात गिरी है ,नमी कितनी रही हवा की गत चौबीस घंटों में इसका अपना महत्व है .इसके लिए पूरे  हिन्दुस्तान भर में वेधशालाएं हैं .

यही बात हमारी सेहत पे लागू होती है .

यह भी आप जान लीजिए इस्मार कोई मामूली आदमी नहीं है ,दूर -संचार और सूचना प्रोद्योगिकीय संस्थान ,केलिफोर्निया का निदेशक है .विश्वविद्यालय के सैन डिगो तथा इरविन परिसरों का सांझा शोध केंद्र है यह संस्थान . 

अपनी सेहत की टोह लेते रहने की इस प्रोद्योगिकीय पहल को एक नाम दिया गया -"QUANTIFIED SELF "

Devotion to self tracking has a name -"Quantified Self"-which is a website established by Wired co -founder Kevin Kelly and Gary wolf ,Wired contributing editor.Wolf;s own website ,Aether ,says more than 120,000 worldwide are members of Quantified Self Meetsup.

सेहत को ,सेहत से जुडी स्थितियों मेडिकल कंडीशंस को परिमाण या संख्या की शब्दावली में व्यक्त करना ,परिमाणित करना अपने से ही पहल करके कहलाता है "Qunatified Self "

हाल  फिलाल  तक इसके पंजीकृत सदस्यों की संख्या ८७३ थी . यह वह मंच है चर्चा मंच की तरह ब्लोगिंग की तरह जहां सदस्य आके तमाम घरेलू उपयोग के चिकित्सा उपकरणों ,शोध पर विमर्श करतें हैं .

इस वेबसाईट पर सैंकड़ों उपकरणों और युक्तियों ,एप्लाइएन्सिज़ और टूल्स की पूरी एक सूची दी हुई है जिनकी मदद से आप अपनी खुराक ,नींद और यहाँ तक कि अपने मिजाज़ ,मूढ़ को ताड़ सकतें हैं .तौल सकतें हैं .

Quantified Self 2012 एक आन्दोलन की शक्ल ले चुका है .गत सप्ताह इसकी आलमी बैठाक हुई है जिसमें  बीज वक्ता (मुख्य वक्ता /अतिथि )इस्मार ही थे .

इस्मार कहतें हैं कितनी अजीब बात है लोग अपनी कार की मेंटिनेंस को तो पूरी तवज्जो देतें हैं ,उसके सही रखरखाव पे पूरा पैसा खर्च करतें हैं लेकिन वही संभाल अपनी काया की नहीं रखते .जबकि सेहत का खुद जायजा रखने वाले उपकरण दिनानुदिन परिष्कृत होते गए हैं .

इस्मार "FitBit "पहने रहतें हैं .ये युक्ति इन्होनें कितनी केलोरी वाला खाद्य -पेय लिया दिन भर में कितने कदम इन्होनें टहल कदमी की इसका हिसाब रखती है .

सोते वक्त इस्मार zeo पहनते   हैं यह इनकी नींद के विभिन्न चरणों ,प्रावास्थाओं (लाईट ,इंटर मीडिएट ,डीपस्लीप )का पूरा ग्राफ इनके मोबाइल तक भेजती रहती है .

एक  और युक्ति है "Instant Heart Rate "   यह इस्मार के फोन कैमरे की फ्लेश लाईट का इस्तेमाल नाडी की फडकन दर्ज़ करने में इस्तेमाल करती है .आप जानतें ही हैं  पल्स रेट इज हार्ट रेट .Stress Check भी करती है यह युक्ति .इकसार यकसां है आपके दिल की धुकधुक या अनियमित .यानी आप रिलेक्स्ड हैं या दवाब में हैं .सब कुछ बतलाती है आपको यह डिवाइस . 

(ज़ारी )

रविवार, 30 सितंबर 2012

डिश :जीवन शैली और घरेलू उपचार

डिश :जीवन  शैली और घरेलू उपचार

आप काज महा काज .बिना मरे स्वर्ग नहीं मिलता ,बुजुर्गों ने ये ऐसे ही नहीं कह दिया होगा .

नियमित ऐसे व्यायाम करें जिनमें  ऑक्सीजन की खपत बढती हो -मसलन सैर करना ,तैराकी के लिए जाना ,कुलमिलाकर शरीर द्वारा ऑक्सीजन का प्रयोग सुधारना है .उम्र के अनुरूप कुछ भी करें .इससे आपकी दर्द ,जकड़न  बर्दाश्त करने का माद्दा भी बढेगा ,सहनशक्ति में भी बढ़ोतरी होगी .

शरीर को फुर्तीला रखने के लिए कुछ भी करें जो संभव हो .

अलबत्ता अपने माहिर से परामर्श ज़रूर करें कुछ भी नया शुरु करने से पहले .वह आपके संपर्क में है आपके बारे में ज्यादा जानता है .

हीटिंग पैड्स का इस्तेमाल करें असरग्रस्त हिस्से पे .

Set  the heating pad at low setting so that it is warm ,not hot, to reduce the risk of burning .

कुछ लोगों को कोल्ड पेक्स ज्यादा माफिक आते हैं वह इनका इस्तेमाल ज्यादा कर सकते हैं .

कुछ लोग बारी बारी से बदल बदल के दोनों को काम में ले सकतें हैं .

सबके लिए कोई एक रणनीति नहीं है .हरेक का  मिजाज़ फर्क होता है . 

(समाप्त )

सन्दर्भ -सामिग्री :

Diffuse idiopathic skeletal hyperostosis (DISH) - MayoClinic.com

www.mayoclinic.com/.../diffuse-idiopathic-skeletal-hyperostos...Share
Diffuse idiopathic skeletal hyperostosis (DISH) — Comprehensive overview covers symptoms, treatment and complications.

शनिवार, 29 सितंबर 2012

"डिश " के रोग निदान की युक्तियाँ (पांचवीं एवं छटी किस्त संयुक्त )





"डिश " के रोग निदान की युक्तियाँ (पांचवीं एवं छटी  किस्त संयुक्त )



ज़ाहिर है काया चिकित्सक (भौतिक चिकित्सक  )यहाँ भी शुरुआत फिजिकल एग्जामिनेशन से ही करता है .चिकित्सक आपकी रीढ़ के थोरासिक (वक्षीय ),स्पाइनल  (ग्रीवा सम्बन्धी भाग ),और लम्बर स्पाइन (निचली कमर से सम्बद्ध रीढ़ का  हिस्सा )को हलके हाथ से दबा के देखेगा ,यहाँ वहां जोड़ों को भी अस्थि  पंजर के कि कहीं  कोई  एब्नोर्मलइति तो नहीं है ,गडबड तो नहीं है .असामान्य बात तो नहीं है .ठीक ठाक है आपकी रीढ़ या नहीं .

दबाने पर यदि आप कराहतें हैं तो यह उसके लिए एक संकेत हो सकता है डिश का (Diffuse idiopathic skeletal hyperscolosis )का . ये वही वही जगह हो सकतीं हैं जहां जहां आपके ऊतक(अस्थि बंध या लिगामेंट्स ) हड्डियों से आ जुड़तें हैं और वह हिस्सा केल्शियम ज़माव की वजह से सख्त पड़ चुका है ,बढ़ चुका है थोड़ा सा .उभार आगया है उस जगह की हड्डी में .

जहां जहां दर्द है वहां वहां मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाली नसों (Tendons) के साथ भी यही हुआ हो सकता है . 

बोन स्पर्स  (हड्डियों का कुब्ब )डॉ .के सधे हुए हाथ ताड़ लेते हैं .

एक्स रे उतरवाने से रोग निदान में और भी सुभीता हो जाता है .एक्स रे बोन स्पर्स को रेखांकित कर सकता हाँ ! बतला सकता है कहाँ कहाँ रीढ़ के किस किस हिस्से की हड्डियों की गुर्रियों पर(कशेरुकाओं पर ) केल्शियम लवण पर्त बनके चढ़ा है .

चिकित्सीय भाषा में इसकी मौजूदगी को कहा जाता है -Cascading or Flowing.

कुछ माहिर  इसे रीढ़ रूपा मोमबत्ती से मोम के जलने के बाद की रिसन कहतें हैं .

Some experts compare the appearance to that of candle wax dripping and oozing down your spine.

Computerized tomography (CT)  and Magnetic resonance imaging(MRI)

ANKYLOSING SPONDYLITIS को रुल आउट करने के लिए ये दोनों परीक्षण करवाए  जातें हैं जिसके लक्षण उल्लेखित लक्षणों से मेल खातें हैं .

CT

Computerized axial tomography or computed tomography is a technique for producing images of cross sections of the body .In it a computer processes data from x -rays penetrating the body from many directions and projects the results on a screen .

ज़ाहिर  है  यह एक प्रकार का  त्रि -आयामी एक्स रे ही है जिसमें एक्स रे कई तरफ से एक साथ डाला जाता है .  बस आपके अंगों में ,अस्थि पंजर में ताक झाँक संभव हो जाती है . 

MRI

It is a imaging technique that uses elctromagnetic radiation to obtain images of the body's soft tissues e.g . brain and spinal cord.

रोग निदान की इस प्राविधि में शरीर की बारीक पड़ताल के लिए चुम्बकों का सहारा लिया जाता है .ये शक्तिशाली चुम्बक (वास्तव में चुम्बकीय क्षेत्र )सुपर-कंडक्टर से पैदा किए जातें हैं.किसी विद्युत् सुचालक को जब बहत अधिक ठंडा किया जाता है तो एक सुनिश्चित तापमान पर वह बिजली अपने अन्दर से बिना प्रति -रोध के बहने देता है .गर्म नहीं होता है .इसका प्रतिरोध शून्य हो जाता है .इसके गिर्द अति -शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र खड़े हो जातें हैं .जब किसी आम  सुचालक में आप बिजली भेजतें हैं वह इलेक्त्रोनों की आपस में टक्कर से गर्म हो जाता है .यहाँ ऐसा बिना प्रति -रोध के होता है .सारे इलेक्त्रोंन एक दम से व्यवस्थित गति करने लगते हैं फ़ुटबाल मैच के क्राउड में मची भगदड़ यहाँ एक दम से तीनों तीन आगे बढेगा वाले अंदाज़ में परेड करने लगती है .ऐसा है अति -चालकों का मायावी संसार .

एक्स रे भी एक  प्रकार का विद्युत् चुम्बकीय विकिरण ही है .दृश्य रौशनी भी बस फर्क वेव की लम्बाई और आवृत्ति (फ्रिक्युवेंसी) का है. यहाँ विद्युत् चुम्बकीय अनुनाद (MAGNETIC RESONANCE IMAGING )में भी यही विद्युत् चुम्बकीय विकिरण है .चुम्बक और बिजली आपस में सगी बहनें हैं .जहां बिजली होती है वहां सहोदर जुडवा सा एक चुम्बकीय क्षेत्र भी रहता है .बस यही आधार है MRI द्वारा शरीर की सूक्ष्म और मृदु ऊतकीय पड़ताल का . 

माहिर डिश के निदान को पुख्ता करने के लिए दोनों का सहारा लेता है .उसके साथ सहयोग कीजिए .पैसे नहीं बना रहा है वह .

(ज़ारी )  

डिश का इलाज़ और दवा दारु (छटी किस्त )

भले इस लाइलाज रोग का कोई इलाज़ न हो फिर भी दर्द से रहत के लिए आप बहुत कुछ कर सकतें हैं .यदि रोग के लक्षण प्रगटित हैं stiffness से भी ,जोड़ों की जकड़न  से भी   आप परेशान हैं :

(१)कई मामलों में माहिर कोई इलाज़ तजवीज़ नहीं करते 

(२)दर्द से राहत और जोड़ों की हरकत ,जोड़ों के संचालन को बनाए रखने के लिए माहिर आपको दर्द और स्टिफनेस का इलाज़ भी बता सकतें हैं यदि लक्षण ज़ारी रहतें हैं तब .

(३)दर्दे दवा 

जोड़ों के अन्य रोगों से जुदा नहीं हैं ये दवाएं .वैसी ही हैं .

आपको तजवीज़ की जा सकती  है -Acetaminophane (Tylenol,others ),

Non-steroidal -anti -inflamatory drugs (NSAIDS),Ibuprofen (Advil ,Motrin,others)तथा दर्द की उग्रता अधिक होने पर corticosteroids injections का भी इस्तेमाल किया जाता है .

स्टिफनेस से राहत के लिए 

फिजियोथिरेपी जकड़न को कम कर सकती है .कसरत जोड़ों की हरकत की रेंज को बढा सकती है .अपने लिए सिर्फ अपने लिए आप ख़ास कसरतों के बारे में अपने माहिर से जानकारी जुटा सकतें हैं .

आपको विशेष तवज्जो और सीखने  के लिए फिजियो के पास भी भेजा जा सकता है रेफर किया जा सकता है .

मैं खुद ऐसे orthopaedist से भी मिल चुका हूँ जो मरीजों को खुद कसरत भी करके दिखलातें हैं .ऐसे ही एक नेक दिल इंसान हैं प्रोफ़ेसर तुली विमहांस अस्पताल नै दिल्ली (Vidyasagar institute of mental health and neurosciences).अमूमन प्रोफ़ेसर रेंक के लोग अपनी जगह से हिलते नहीं हैं .यह ८४ वर्षीय इंसान एक फ़रिश्ता है आपका आत्मविश्वास भी बढाता है .दवाओं का कमसे कम इस्तेमाल बतलाता है वह भी सीमित अवधि के लिए .

शल्य चिकित्सा (surgery)

डिश रोग माने diffuse idiopathic skeletal hyperscolosis में  जटिलताएं पेश आने पर ही शल्य चिकित्सा की सिफारिश की जाती है .आम तौर पर नहीं .  

गले में जब आकार में बड़ा बोन स्पर आ बैठे और खाद्य -पेय सटकना निगलना सुडकना चुस्की लेना तक मुहाल हो जाए तब उसे काट के फैंकना ही शल्य द्वारा एक समाधान बचता है .सर्जरी सर्वाइकल स्पाइन पर से प्रेशर भी हटा सकती है .आवाज़ लौटा सकती है कर्कशा होने से बचा सकती है आपको .सोचो गवैयों का क्या होता होगा इस रोग में . 

(ज़ारी )