सोमवार, 24 जून 2013

ये मेरा घर नहीं आशियाना है

ये मेरा घर नहीं आशियाना है 

अमरीकी अपने घर और उसके आसपास एक परीलोक की सृष्टि करते हैं .घर के आगे पीछे बगल से बेहतरीन रखरखाव वाले लांस होंगें .घर के बाहर मोडल्स होंगें पशु पक्षियों के .घर के बाहर भी एक छोटा सा घर होगा ,बर्ड हाउस होगा जिसपे लिखा होगा -वेलकम फ्रेंड्स .

अन्दर के रख रखाव की तो बात  ही क्या है .क्या रेस्ट रूम और क्या किचिन एक करीना ,एक सलीका हर तरफ से बोलता है -देखा मैं ऐसा हूँ .देखा है ऐसा रेस्ट रूम इससे पहले .ऐसी सुकून भरी रसोई .माड्रन गेजेट से संपन्न .

कायदे क़ानून भी उतने ही सख्त हैं .मसलन अगर आपकी घर के गिर्द की स्वीकृत परिधि में घास पांचइंच  से ज्यादा ऊंची निकल गई है आपके आशियाने के बाहर एक नोटिस चिपक जाएगा .कुछ कुछ ऐसा -

WARNING NOTICE OF ORDINANCE VIOLATION 

CANTON DEPARTMENT OF PUBLIC SAFETY 

1150 S Canton Centre Road ,Canton ,MI 48 188 

734-394 -5335 

ADDRESS   43309 ,SILVERWOOD Dr 

TIME/DATE  11 :00     6 .19 .13 

VIOLATIONS 

(1)  Grass Height 78 -2 (c) 9: Grass height in all landscaped areas shall not be permitted to grow higher than five inches in height .

Nuisane 34 -33      Failure to bring into compliance by designated date will result in abatement action with all costs incurred to the property .

COMPLIANCE DATE :  6 .22 .13    CASE #  25796-13 

The listed 
violations must be corrected by the compliance date .Non-compliance may result in court action .Upon conviction ,defendant may be subject to penalties of not more than $ 500.00 and /or 90 days in jail.

If you have any questions or concerns please contact the listed Ordinace Inspector at your earliest convenience.

ORDINANCE INSPECTOR :Kay Longton 

Phone Number:  734 -394 -5210

तो यह तो ज़नाब एक बानगी है .झीलों का नगर है डेट्रॉइट और उसके आसपास के छोटे टाउन .दबाके बर्फ भी गिरती है यहाँ लेकिन रास्ता कभी नहीं रुकता है न आपके घर का न शहर के किसी और मार्ग का .

शाम सुबह लोग अपने पेट्स को सैर कराने ले जाते हैं  साथ में उनके होता है -पूपर  स्कूपर (बिष्टा उठाने समेटने की संडासी )एक पोलिथीन .घर लाके उसका निपटान करते हैं .

केलिफोर्निया राज्य के सैन होज़े (सिलिकान वेळी )नगर में मैंने देखा ,सड़क के किनारे ही डिस्पोज़ल बक्से रखे रहते हैं साथ ही खम्बों से लटके रहते हैं सैनिटरी नैपकीनवाले बक्से  .

शराब पीके यहाँ गाडी चलाने का कोई सोच भी नहीं सकता है .

सड़क  किनारे काम करता हुआ कोई वर्कर आपकी गाड़ी  की चपेट में आके मर जाए तो भारी १५ ००  डॉलर जुर्माना खाइए १५  साल जेल की हवा .कोई सुनने वाला नहीं होगा कोई रिश्वत नहीं चलेगी .

यहाँ घर के  बाहर कचरा फैंकने का रिवाज़ नहीं है .न अपने न पडोसी  के घर के बाहर . 

कचरे से बिजली बनाता है मिशिगन राज्य का हरेक नगर .कचरा घर के बाहर पैक करके रखा जाता है .हफ्ते में एक दिन गाड़ी  आती है उठाके ले जाती है .

लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ एक घटना सुनाने का .हम लोग नै दिल्ली के पंडारा रोड पर जोधपुर आफिसर्स मेस में रहते थे .पड़ोस में एक कमांडर साहब थे .उनकी बीवी का स्वयम घोषित रेंक उनसे एक रैंक ऊपर केप्टन का था .हमारा बेटा उन दिनों लेफ्टिनेंट कमांडर था .धड़ल्ले से यह महिला अपने  पपी (पेट् डॉग ) को हमारे प्लाट के किचिन गार्डन में निवृत्त कराके ले जाती थी .मैं तब तक दो मर्तबा अमरीका आके रह चुका था .लेकिन मैं क्या कहता उस फौजिया निजाम में .चुप रहा सोचता हुआ -कितने ज़हीन हैं हम लोग .और हमारा अहंकार .

(ज़ारी )

14 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट पढ़ कर ....,विदेश यात्रा कर जब भी भारत लौटती हूँ हर बार लगता है अपने देश को भी वैसे ही सुसज्जित करूँ ...लेकिन यहाँ व्यापक व्यवस्था के आगे कुछ खास नहीं कर पाती हूँ ....आप इसी प्रकार लिखते रहें ....शायद कुछ जागरूकता हमारे लोगों में बढ़े ...!!वैसे सरकार को जागरूक हो इसी प्रकार फाइन लगाना चाहिए ....शायद पैसे की भाषा जल्दी और ज्यादा समझते हैं लोग ....!!
बहुत अच्छा आलेख .....आभार।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच कहा, सहजीवन के ऐसे ही मानक निश्चित करने हों हमको।

पुरुषोत्तम पाण्डेय ने कहा…

संयुक्त राज्य आमेरिका के बारे में आपका ये आलेख बिलकुल सच और प्रेरणादायक है. काश नागरिक सोच में ये सुचिताएं हमारे देश में भी उपज पाती.
सन दो हजार ग्यारह में मैंने भी अमेरिका प्रवास के अपने इसी तरह के अनुभव 'अटलांटिक के उस पार' शीर्षक से अपने ब्लॉग मे लिखे थे.
लिखते रहिएगा.

arvind mishra ने कहा…

हमें शर्मिन्दगी का अनुभव होता है - एक बार उपरी मंजिल से फेका कूडा मेरे सिर को छूता जमीन पर आ गिरा !

सतीश सक्सेना ने कहा…

इसे फेसबुक पर पोस्ट अवश्य करदें , हम जाहिलों को सभ्यता सीखने की सबसे अधिक जरूरत है..
आभार भाई जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

घर और शहर को सुंदर बनाना है तो कुछ तो हमें भी नियम अपनाने होंगे ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

पर हमारे यहां बिल्कुल उल्टे हालात हैं.:(

रामराम.

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

ये सब की भागीदारी से ही संभव है

कालीपद प्रसाद ने कहा…



हूँ ......
latest postमेरे विचार मेरी अनुभूति: जिज्ञासा ! जिज्ञासा !! जिज्ञासा !!!

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत सुन्दर.सच कहा

डॉ टी एस दराल ने कहा…

कानून हमारे यहाँ भी ऐसे ही हैं। बस उनका पालन न कोई करता है , न कोई देखता है।
नतीजा सामने है , आपने देख ही लिया।

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


हैल्थ इज वैल्थ
पर पधारेँ।

Ashok Saluja ने कहा…

वीरू भाई राम-राम !
मैं भी आजकल कैनेडा -टोरंटो में ही हूँ ,और जो भी आपने लिखा बस वो ही यहाँ भी देख रहा हूँ ....खैर आप को तो पता ही है ! अच्छा लगा लेख पढ़ कर ,अब हम अपनाते कब हैं ......?
शुभकामनायें!

राहुल ने कहा…

आपका ये पोस्ट काफी उम्दा और मौजू है... भारत के किसी भी शहर में आप चले जाइए, हर तबके के लोग अपनी आदतों से लापरवाह मिलेंगे.. अभी काफी वक़्त बहेगा तो आदतों की धार सुधरेगी...दरअसल अमेरिका जैसा देश खुद में एक प्रयोगशाला है.... वो हर नियम-कानून को अपनी जुबान पर रखकर चखता रहता है...