बुधवार, 8 जुलाई 2015

घर में आग लगाए जमालो दूर खड़ी

पंद्रह सालों तक मोदी (नरेंद्र चायवाला मोदी )का दानवीकरण करने के बाद भी कांग्रेस अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आरही है। जबकि गुजरातदंगों को  नरसंहार कहकर मामला  गुजरात से हटाकर महाराष्ट्र ले जाया गया।सुप्रीम कोर्ट ने मोदी को पाकसाफ घोषित किया। इस मुद्दे पर कांग्रेसियों को जूते लगने चाहिए थे। नहीं लगे इसीलिए  अब व्यापम मुद्दे पर ये तमाम तरह के अनुशासन तोड़ने वाले लोगों को इकठ्ठा करके दिल्ली में जगह जगह रास्ता रोक रहें  है।और वो जमालो भुस में आग लगाए दूर खड़ी  है।उसका कहीं  आता पता नहीं है।

जबकि शिवराज सिंह जी ने तमाम मांगें मान ली है जांच न सिर्फ सीबीआई से करवाने के लिए वे सहमत हुए हैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के अनुकूल अपितु मध्यप्रदेश से बाहर भी इस जांच को ले जाये जाने से भी वह सहमत हैं। आत्मविश्वास से भर कर उन्होंने कहाँ है :साँच को आंच कहाँ।

अब क्या इंसानी भेष में घूमने वाले देखने में नर पिशाच से दिखने लगने वाले ये कांग्रेसी उनकी विधायकी भी छीनकर आखिर में उनसे जीने का अधिकार भी छीन लेना चाहते हैं।

अगर कल को इस देश की  जनता ये मांग उठादे की अराजकता वादी जमालो को इस देश से निकाल बाहर किया जाए जिसे न सुप्रीम कोर्ट पे यकीन है न किसी और संस्था पर और जिसकी सास एक मर्तबा क्या बारहा तमाम संविधानिक संस्थाओं को तोड़ने का दुस्साहस कर चुकी है  तब ये प्रवक्तानुमा गुलामवंशी चाटुकार क्या करेंगें ?

अब लोग इन्हें नरपिशाच सरीखा कहते हैं तो इसमें उनका क्या दोष।इनके लिए तो चाहें पूरे राष्ट्र में अराजकता फ़ैल जाए तब भी ये व्यापम व्यापम चिलायेंगे पता नहीं  ये  किस जन्म का वैर भारतीय तत्वों के पोषक शिवराज सिंह  चौहान से निकालेंगे। खुदा न करे कि श्रीमती सोनिया को जुकाम लगे (हम इस मुहावरे से प्रभावित नहीं है जिसमें मेंढकी को जुकाम कहा जाता है।) तो क्या कांग्रेसी चाटुकार सोनिया के जुकाम के लिए व्यापम पर दोषारोपण करेंगे। 

घर में आग लगाए जमालो दूर खड़ी 


मंगलवार, 7 जुलाई 2015

कांग्रेस के रोज़मर्रा के प्रलाप से अब ये स्पष्ट हो चुका है कि व्यापम के नाम पर कांग्रेस एक गंभीर षड़यंत्र रच रही

कांग्रेस के रोज़मर्रा के प्रलाप से अब ये स्पष्ट हो चुका है कि व्यापम के नाम पर कांग्रेस एक गंभीर षड़यंत्र  रच रही है। ये देश के साथ गद्दारी तो है ही देश के माननीय  उच्चन्यायालय का भी अपमान है। सीबीआई की जांच होने लगेगी तो कांग्रेस कहेगी ये सरकार की जेबी संस्था है जिसका इस्तेमील विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए परम्परा से होता आया है।

ऐसा लगता है कांग्रेस ने विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले मध्यप्रदेश में जगह जगह अपने एजेंट छोड़ रखें हैं ये पता लगाने के लिए कि कहाँ कौन मरा। किसी की मृत्यु होना घोटाला नहीं है उसे व्यापम से जोड़ना घोटाला है फिर चाहे कोई पेड़ से गिरके मरा हो या तैरने के दौरान डूबजाने से। कहीं आंधी आ जाए तो व्यापम तूफ़ान आजाये तो व्यापम। गनीमत है कांग्रेस ने  अपनी कारगुजारियां अभी मध्यप्रदेश तक ही सीमित राखी हुईं हैं। कहीं सारे देश में ये ऐसा करने लगें तब क्या होगा।

कांग्रेस का रवैया ठीक वैसे ही है जैसे कोई किसी पुलिस वाले को धकिया के रेडियो स्टेशन में घुस आये और कोई पागल दिग्विजय का नाम लेने लगे।कहीं कोई बन्दर बया का घोसला तोड़ दे और कोई दिग्विजय का नाम लेने लगे। 

सोमवार, 6 जुलाई 2015

राहुल -राबर्ट उस स्पेशल बॉक्स में घुसे कैसे कांग्रेस ये बतलाये

राहुल -राबर्ट उस स्पेशल बॉक्स में घुसे कैसे कांग्रेस ये बतलाये

जब से ललित मोदी ने ट्वीट करके राहुल -राबर्ट वाड्रा की अपने साथ ख़ास बॉक्स में बैठे इन महानुभावों की पिक्चर ज़ारी की , कांग्रेस के चाटुकार अजय माकन -भोपाली बाज़ीगर दिक्-पराजय तथा संदीप सुरजेवाला आएं बाएं कर रहे हैं। कोई और बीजेपी के मंत्रियों की पिक्चर ज़ारी करे तो ठीक और अगर प्रियंका -राहुल -सोनिया -राबर्ट की चौकड़ी पकड़ में आये तो गलत।

अब  माकन कह रहे हैं  बाज़ार में मेले ठेले में कोई भी घूम सकता है टिकिट लेकर मैच भी कोई भी देख सकता है। माकन कृपया ये बतलाएं ये दोनों स्पेशल बॉक्स में कैसे पहुंचे। क्या ज़बर्जस्ती दादा -गिरी करके या ललित मोदी ने इन्हें आग्रह पूर्वक खींचकर अपने पास बिठलाया। यदि बाद वाली बात ठीक है तो ये परस्पर मित्र साबित होते हैं और पहली बात ठीक है तो इन घोषित -अघोषित वीवीआईपीज़ से देश को खतरा है जो कहीं  भी जबरिया घुस सकते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

माकन कृपया ये भी बतलाये इन घोषित चाहतुकारों अजय -माकन स्वयं ,संदीप सुरजेवाला और भोपाली बाजीगर दुर्मुख  में से कौन प्रथम चाटुकार है ,देश को कृपया बतलाएं ये प्रथम श्रेणी के चाटुकार इन प्रथमों में प्रथम कौन है ?





NEW DELHI: Former IPL chief Lalit Modi has alleged that Congress vice-president Rahul Gandhi and his brother-in-law Robert Vadra were beneficiaries during his tenure as IPL commissioner.
Congress sources, however, dismissed the allegations and termed them baseless.
Congress leader Ajay Maken said Lalit Modi was trying to help the ruling Bharatiya Janata Party.
Lalit Modi late Friday posted on Twitter a couple of his pictures with Rahul Gandhi and Robert Vadra, the son-in-law of Congress president Sonia Gandhi, in the same frame.
Modi tweeted: "I hope @OfficeOfRG (office of Rahul Gandhi) informed @INCIndia that he was a beneficiary of my hospitality. He sat in my box."
The picture, which appears to be from an IPL match, also has Bollywood actor Shah Rukh Khan, his wife Gauri Khan and actress Deepika Padukone along with others.

शनिवार, 4 जुलाई 2015

फिदायिनी मानसिकता लिए है सोनिया- कांग्रेस, हम नहीं कहते ऐसा लोग अब सरे आम कह रहें हैं

सोनिया कांग्रेस इन दिनों एक ऐसे लाक्षागृह में प्रवेश कर चुकी है जहां वह खुद तो घाव खायेगी ही इस देश का भी नुकसान  करेगी। सोनिया कांग्रेस के चापलूस इन दिनों बाजपेयी सरकार के १९९९ के कांधार विमान अपहरण मामले से जुड़े  निर्णय को गलत बतला रहे  हैं । ये वही सोनिया कांग्रेस है जो उन दिनों रोज़ अपहरण किये गए उन ३०० विमान यात्रियों के   बन्धुबान्धवों माँ -बाप अन्य रिश्तेदारों को बाजपेयी जी के दरवाज़े पे ले जाकर  प्रदर्शन करवाती थी। इसी सोनिया ने सरकार के  मनोबल  को इस कदर तोड़ा था कि बाजपेयी सरकार को तीन आतंकियों को छोड़ देना पड़ा था। 

क्या सोनिया आज कह सकतीं हैं कि उन ३०० विमान यात्रियों को मरवा देना चाहिए था लेकिन बदले में तीन आतंकियों को नहीं छोड़ा जाना चाहिए था। कहकर दिखलाये सोनिया कांग्रेस आज भी ऐसा दो टूक। वरना यही समझा जाएगा जैसा की लोग कह रहे हैं इस देश का सत्यानाश करवाने के लिए सोनिया किसी भी हद तक गिर सकतीं हैं यहां तक कि खुद आत्महत्या  तक कर सकतीं हैं ,फिदायिनी मानसिकता लिए है सोनिया- कांग्रेस। हम नहीं कहते ऐसा लोग अब सरे आम कह रहें हैं। 

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

चौवालीस निकम्मे और भ्रांत नेतृर्त्व

चौवालीस निकम्मे और भ्रांत नेतृत्व

कांग्रेस के कुल चौवालीस सांसद हैं इनमें से कोई १५ -२० तो हाईकमान के चापलूस हैं। शेष उच्चक्के गलियों में काम ढूंढ रहें हैं ,इन्हें कहीं मिट्टी पड़ी नज़र आ जाती है तो ये फ़ौरन कहतें  हैं देखो यहां कित्ती मिट्टी पड़ी हुई है और प्रधानमन्त्री स्वच्छता अभियान की बात करते हैं।

कांग्रेस द्वारा छोड़े गए चापलूस जो अब तक पुराने दस्तावेज़ लहरा रहे थे पिटपिटा कर धौलपुर महल से बाहर निकल आएं हैं। ये लोग जो भी मुद्दा हाथ में लेते हैं वह बूमराँग  करता है सूटबूट की सरकार कहने वाला शख़्श सूटकेस शब्द सुनकर बौखलाया हुआ है। भूल गया सूटबूट की सरकार कहना। उधर ढींगरा साहब ने ज़मीन हड़पु दामाद वाड्रा नेहरू की फ़ाइल खोल दी है।

भ्रांत नेतृत्व कुछ न कुछ करता हुआ दिखना चाहता है। संसद का वर्षाकालीन सत्र अभी दूर है। तब तक ये निकम्मे क्या करें कांग्रेस का संकट ये है।   मुद्दा कांग्रेस के  पास कोई है नहीं काम कोई है नहीं सत्ता से बे -दखल इन लोगों को। इसलिए कभी सुषमा के पीछे पड़ते हैं कभी स्वराज के।

कभी गुजरात का भूत निकाल लेते हैं जो मोदी का तो कुछ नहीं बिगाड़ सका अब कांग्रेस के कंधे पे चढ़ गया है। कई चैनलिये भी इनके साथ हो लिए हैं जो लोगों की राय पूछ रहे हैं -गुजरात का भूत मोदी का पिंड छोड़ेगा या नहीं।

भारत की न्यायपालिका मोदी को बे -दाग घोषित कर चुकी है। दगैल कांग्रेस अपने दामन की चिंता करे। मोदी की मार्फ़त  तो ओबामा भी भारत आकर देश का मान बढ़ा गए।

सोनिया नेहरू को अगर कोई काम नहीं है तो विदेश ही घूम आएं।   क्यों बिला वजह शेष बचे कांग्रेसियों की फजीहत करवा रहीं हैं।  

सङ्गीतसाहित्यकलाविहीना : साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीना :

सङ्गीतसाहित्यकलाविहीना : साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीना : ।

ते मर्त्यलोके भूविभारभूता : मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति। । ।

भावार्थ : वे मनुष्य जो संगीत साहित्य और कला से विहीन हैं साक्षात पशुओं के समान हैं। यद्यपि उनके सींग और पूंछ नहीं हैं फिर भी वे पशु मनुष्य रूप में इस धरती पर विचरण करते हैं और इस भूमि पर केवल बोझ समान हैं। 

बुधवार, 1 जुलाई 2015

जयराम रमेश राम और रमेश जैसा कुछ तो काम करें

 जयराम रमेश राम और रमेश जैसा कुछ तो काम करें आधे अधूरे दस्तावेज़ लेकर पिटी हुई कांग्रेस के पक्ष में खड़े हैं। बेशक सुषमा जी के पति को अपनी एक फर्म का डायरेकटर बनाने की पेशकश ललित  मोदी ने कभी की ज़रूर थी लेकिन स्वराज जी ने इस ऑफर को यह कहकर ठुकरा दिया था उनकी पत्नी विदेश मंत्री हैं इसलिए उनके लिए ऐसा करना  मुनासिब न होगा। इस बात के लिए स्वराज जी की प्रशंशा की जानी चाहिए थी लेकिन जयराम रमेश जैसे लोग इन दिनों वसुंधरा -सुषमा -स्वराज जी के पीछे हाथ धौ के नाहक ही पड़े हैं।

कांग्रेस पोषित चैनलिये इन्हीं जयराम रमेश को घंटे घंटे का समय दे रहे हैं। अब कौन से बिल में जा छिपे हैं ये चैनलिये ज़रा छराबड़ा के बारे में भी अपनी जबान खोलें। ये तमाम छिद्रान्वेषी चींटी की तरह मोदी के पीछे पड़े हुए हैं। 

यदि रमेश को जिन्हें इन दिनों लोग जरायम पेश  कहने लगे हैं न्याय की इतनी ही चिंता है तो वह कृपया यह बतलाएं कि जिस हिमाचल प्रदेश में १९८० के बाद से ही किसी गैर हिमाचली के लिए सपत्ति खरीदना वर्जित किया गया है ताकि वहां से खेती किसानी का रकबा कम न हो ,सीमांत प्रदेश को देखते हुए अनधिकृत लोग वहां न बस सकें ,किस नियम के तहत प्रियंका वाड्रा को दो मर्तबा छराबड़ा में जमीन दी गई।

गौर तलब है  हिमाचल के  सूचना आयोग ने सूचना अधिकार के तहत ज़ारी एक  जनहित याचिका के तहत एसडीएम छराबड़ा से इस बाबत पूछा है। बहरसूरत मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने इस बाबत उन्हें कोई जानकारी होने से इंकार किया है।

जयराम रमेश बतलाएं सोनिया को खुश करने के लिए किस क़ानून के तहत प्रियंका वाड्रा को ज़मीन का एक बड़ा रकबा तत्कालीन कांग्रेस शासन के तहत दे दिया गया।