शनिवार, 29 सितंबर 2018

चित्रकूट के घाट पर शहजादन की भीड़ , मायावत चंदन घिसें ,ममता लें तस्वीर।












  1. मोदी-अंबानी का देखो खेल HAL से छीन लिया राफेल धन्नासेठों की कैसी भक्ति घटा दिया सेना की शक्ति जिस अफसर ने चोरी से रोका ठगों के सरदार ने उसको ठोका पिट्ठुओं को मिली शाबाशी सेठों ने उड़ती चिड़िया फाँसी जन-जन में फैल रही है सनसनी मिलकर रोकेंगे लुटेरों की कंपनी

चित्रकूट के घाट पर शहजादन की भीड़ ,

मायावत चंदन घिसें ,ममता लें तस्वीर। 

अखिलेश्वा माला जपें ,ये -चरि 'सीता -राम' 

राफेल राफेल बोलिये मिल के सुभो -शाम। 

भली करेंगे राम ,रहिये बिध जिस  राखें ,

मोह ममता  माया मिलकर सब त्यागें। 

और कह ढोला कबिराय किसी का बुरा न कीजे ,

कैसा भी हो काम हिय से सौ फीसद कीजे। 

शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

लो गए आ उजले अच्छे दिन , शिव जपता भारत निसदिन

लो गए आ उजले अच्छे दिन ,

शिव जपता भारत निसदिन।

भगवद्गीता बाँटें ममता ,

दुर्गा पूजा अब हर दिन  .

लो गए आ उजले अच्छे दिन।

परबत ऊपर बहे सरोवर,

 कहलाये कैलाश ,

बतलाते राहुल दिन रात।

लो आ गए उजले अच्छे दिन। 

कबीर बीजक जीव धन को बताता है

कबीर 'बीजक' जीव धन को बताता है 

पांच तत्व के भीतरे गुप्त वस्तु स्थान ,

बिरला मरण  कोई पाइये गुरु के शब्द प्रमाण। 

जीव (पांच तत्व के पुतले )के अंदर जो चैतन्य साक्षी है , वही संस्कारों का धारक है। माया और मन का बोध कराता है बीजक। जो अंदर है उसे हम बाहर खोजते हैं। आत्मा राम  सत्ता है। सारा प्रतीत परिवर्तनशील है। आत्मा राम सत्ता  यथार्थ है। मन मायाकृत  साक्ष्य है ,मिथ्या है।

जीवन की सार्थकता है 'स्व :' और  'पर ' का बोध।  'स्व : ' तत्व सनातन है। सत्य सदैव सत्य रहता है ,'पर' एक प्रतीति है परिवर्तनशील है। 

अंतर् ज्योत गुणवाचक है। 

"अंतर् ज्योत शब्द एक नारी ,ताते हुए हरि ब्रह्मा त्रिपुरारी। "

नारी शब्द का अर्थ यहां कल्पना शक्ति है। 

अन्तर -ज्योत से ही सारे ज्ञान का विकास हुआ है। जीव  के अंदर एक शाश्वत तत्व  है वह अंतर्ज्योति है। 

कबीर सृष्टि का  आरम्भ नहीं मानते हैं। 

कबीर के यहां 'ब्रह्म' पहले अग्नि  को कहा गया। जो बढ़े (अग्नि की तरह )वह ब्रह्म है। 

'रज' से सृष्टि होती है 'सत' से पुष्टि और 'तम' से उसका क्षय होता है। त्रिदेवों की मनुष्य ने कल्पना की है । ये तीनों भी सृष्टि का अंत नहीं जान सके। 

ब्रह्मा कर्म के प्रवर्तक हैं ,विष्णुजी भक्ति और शिव ज्ञान अथवा योग के प्रवर्तक मान लिए गए। भक्ति और ज्ञान का विकास होने पर कर्मकांड अपने आप लुप्त हो गया। कर्म काण्ड से ही ब्राह्मण थे। आरम्भ में जो अग्नि के सामने बैठ साधना करता था वही ब्राह्मण कहलाता था। 

ब्रह्माजी ब्राह्मणों (कर्मकांडियों )का प्रतिनिधितित्व करते थे। विष्णुजी वैष्णव भक्तों का ,शिव ज्ञानमार्गी हैं ,वेदांती  शैव दर्शन,शैवों   का प्रतिनिधित्व करते हैं।    
पेट न काहू वेद पढ़ायो  

सुनत(सुन्नत ) करात तुर्क नहीं आयो 

तुर्क कहतें हैं हम  राहे खुदा हैं बाकी  राहे जुदा हैं ऐसा है तो माँ के पेट से ही मुसलमान बालक सुन्नत करा के क्यों नहीं आया।

ब्राह्मण का बालक यदि जन्म से ही ब्राह्मण है तो उसे वेदों का जन्मना ज्ञान होना चाहिए था। 

ब्राह्मण भी यौनि से ही पैदा हुए हैं किसी और मार्ग से नहीं आये हैं 

(जो )जे तू ब्राह्मणी जायो ,आन  मार्ग ते क्यों नहीं आयो।  

"नारी मोचित गर्भ प्रसूति "

' स्वाँग धरे बहुत ही करतूती '

करतूति यानी कर्म काण्ड 'तुर्क 'और  ब्राह्मणों का पैदा होने के बाद हुआ। 

माता के गर्भ में 'हम' और 'तुम' एक ही लोहू में रहे मलीनता में रहे। कौन पवित्र कौन अपवित्र ?सब बराबर हैं। 

'एक ही जनी  जना संसारा '

ब्राह्मण वह होता है जो जितेंद्रीय हो धर्मपरायण हो ,शास्त्रों का स्वाध्याय करता हो ,अंदर  बाहर पवित्र हो काम क्रोध को जिसने वश में कर लिया हो। 

ब्राह्मण होने का मतलब है आत्मस्थित हो जाना। कबीर ,ईसा ,पैगंबर मुहम्मद ,रविदास ,दयानन्द,सब  ब्राह्मण थे। 

जो निष्कामी हो जाए वह ब्राह्मण है। जो जितना ज्ञान -विज्ञान सदाचार में आगे बढे वही  श्रेष्ठ है।जन्म  से कोई श्रेष्ठ नहीं होता। 

'भव बालक भग द्वारे आया ' 
भग भोगी के पुरुष कहाया। 

ये पंक्तियाँ कबीर के वैराग्य को प्रकट करतीं हैं। 

कबीर के अनुसार वह नकली पुरुष है जो फिर उसी  योनि  में आसक्त हो जाए। 

अवगति की गति काहू न जानी ,

एक जीभ कित  काहू बखानी। 

'राम नाम जाने बिना भव डूबा (डूब डूब ) संसार '

राम या तो कहते हैं परोक्ष है मन वाणी से परे है। वास्तव में वह राम निज तत्व है जो निज तत्व है वह राम है जो दिल में बैठा है वही करीम है राम है। 
वह निज स्वरूप अरेख है अलेख है मन वाणी से परे है ,मन वाणी का प्रकाशक है।उसे समझो तो तुम्हारी सारी  भ्रान्ति मिट जाए। 










गुरुवार, 27 सितंबर 2018

महाभारत का शिशुपाल और राहुल


महाभारत का शिशुपाल और राहुल 

राहुल का लगता है ,कोई सही अर्थों में हितेषी ही नहीं है। सब चाहते हैं इनका (भारतीय राजनीति के राहु) का सर फट जाए। पहले इनके हितेषियों ने इनसे कहलवाया -देश का चौकीदार चोर है अब कहलवा  रहें हैं :कमांडर इन थीफ। 

कृष्ण ने शिशुपाल को सौ बार माफ़ कर दिया था। वह उनके भांजे थे।बहन को दिए वचन के अनुसार  सौ बार तक माफ़ करने के लिए वह प्रतिबद्ध थे। एक सौ -एक -वीं मर्तबा जब शिशुपाल ने राहुल की तरह फिर बद-खेली की ,बदजुबानी की  कृष्ण के साथ तब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उनका सर उड़ा दिया। 

कृष्ण की खामोशी को राहुल तौल नहीं पा रहे हैं। गोयलबल्स भी स्वयं अपने से हार गया था। कमसे कम उनकी माँ को चाहिए वह अपने बेटे को शिशुपाल होने से रोकें ताकि वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ -साथ देश के प्रधानमन्त्री भी बन सकें हम भी यही चाहतें हैं। 
इस देश का इतिहास  साक्षी है जीत हमेशा से सत्य की ही हुई  है। शिशुपाल हर बार मारा गया है। भगवान इनके  कूकरों को भी  सबुद्धि दे जो नेहरुपंथी अवशेषी  कांग्रेस के चारण भाट और चिरकुट कहलाते हैं।  
आखिर प्रधानमन्त्री का पद एक संविधानिक पद है जिन्होनें देश विदेश में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई  है।
हम बात प्रधानमन्त्री नरेंद्र दामोदर मोदी की कर रहें हैं 'मोदी 'की नहीं। 

https://www.youtube.com/watch?v=RXeEa6uvv68

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

'राफेल मुद्दे पार राहुल की बदज़ुबानी '

यह आकस्मिक नहीं है कि नेहरुपंथी कांग्रेस के अवशेषी युवराज को केजरीवाल -२ कहा जाने लगा है। आखिर दोनों में अद्भुत साम्य जो है। दोनों को ही दुर्योधन की तरह भारत में अपने अलावा कोई सद्पुरुष दिखलाई नहीं देता। दोनों ही स्वामी असत्यानन्द के रूप में जाने जाते हैं। औरों को 'तू' खुद को 'आप 'कहकर दोनों ही गौरवान्वित होते रहें हैं। राहुल जमानत पर हैं उनका अब कोई और क्या बिगाड़ लेगा इसीलिए वे -बे -लगाम होकर  अपभाषा का अपमार्जन कर रहें हैं। 


*राफेल*
*_बात शुरू होती है वाजपेयी सरकार से तब अटलजी के विशेष अनुरोध पर भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रम्होस मिसाइल तैयार की थी जिसकी काट आजतक दुनिया का कोई देश तैयार नही कर सका है। विश्व के पास अबतक ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नही जो ब्रम्होस को अपने निशाने पर पहुंचने से पहले रडार पर ले सके। अपने आप मे अद्भुत क्षमताओं को लिये ब्रम्होस ऐसी परमाणु मिसाइल है जो 8000 किलोमीटर के लक्ष्य को मात्र 140 सेकेंड में भेद सकती है। और चीन के लिये यह लक्ष्य भेदन क्षमता ही सिरदर्द बनी हुई है। न चीन आजतक ब्रम्होस की काट बना सका है न ऐसा रडार सिस्टम जो ब्रम्होस को पकड़ सके।_*_अटलजी की सरकार गिरने के बाद सोनिया के कहने पर कांग्रेस सरकार ने ब्रम्होस को तहखाने में रखवाकर आगे का प्रोजेक्ट बन्द करवा दिया जिसमें ब्रम्होस को लेकर उड़ने वाले फाइटर जेट विमान खरीदने फिर देश में तैयार करने की योजना थी जो अधूरा रह गया।
दस वर्षों बाद जब मोदी सरकार आई तब तहखाने में धूल गर्द में पड़ी ब्रम्होस को संभाला गया वह भी तब! जब मोदी खुद भारतीय सेना से सीधा मिले तो सेना ने व्यथा बताई कि हमारे पास हथियारों की बेहद कमी है कोई खरीद हो नहीं रही सिर्फ चर्चा ही करते हैं अंदर क्या खिचड़ी पकाते पता नहीं चलता है VVIP हेलिकोप्टर तुरंत फाईनल होते हैं_!
*_वर्तमान में ब्रम्होस को लेकर उड़ सके ऐसा सिर्फ एक ही विमान हैऔर वह है राफेल! जी हाँ दुनियाभर में सिर्फ राफेल ही वो खूबियां लिये हुए है जो ब्रम्होस को सफलतापूर्वक निशाने के लिये छोड़कर वापिस लेंड करके मात्र 4 मिनट में फिर दूसरे ब्लास्ट को तैयार हो जाये। मोदी ने फ्रांस से डील करके राफेल को भारतीय सेना तक पहुंचाने का काम कर दिया और यहीं से असली मरोड़ चीन और उसके पिट्ठू वामपंथियों को हुई। इसमें देशद्रोही पीछे कैसे रहते! जो विदेशी टुकड़ो पर पलने वाले गद्दार अपने आका चीन के नमक का हक अदा करने मैदान में उतर आये_*।
*खैर ..शायद भारतीय सेना और मोदी दोनों इस तरह की आशंका को भांप गये तो राफेल के भारत पहुंचते ही उसका ब्लेकबॉक्स सहित पूरा सिस्टम निकाला गया राफेल के कोड चेंज करके उसमें भारतीय कम्प्यूटर सिस्टम डाला गया जो राफेल को पूरी तरह बदलने के साथ उसकी गोपनीयता बनाये रखने में सक्षम था लेकिन बात यहीं नही रुकी राफेल को सेना के सुपुर्द करने के बाद सरकार ने सेना को उसे अपने हिसाब से कम्प्यूटर ब्लेकबॉक्स और जो तकनीक सेना की है उसे अपने हिसाब से चेंज करने की छूट दे दी। सेना ने छूट मिलते ही मात्र 48 घण्टो में राफेल को बदलकर रख दिया। और चीन जो राफेल के कोड और सिस्टम को हैक करने की फिराक में था वह हाथ मलते रह गया।*
*_और तब चीन द्वारा अपने पाले वामपंथी कुत्तों को राफेल की जानकारी लीक करके उसतक पहुंचाने का काम सौंपा गया. भारत भर की मीडिया में भरे वामपंथी दलालों ने राफेल सौदे को घोटाले की शक्ल देने की नाकाम कोशिश की ताकि सरकार या सेना विवश होकर सफाई देने के चक्कर में इस डील को सार्वजनिक करे जिससे चीन अपने मतलब की जानकारी जुटा सके पर सरकार और सेना की सजगता के चलते दलाल मीडिया का मुंह काला होकर रह गया तब! अपने राहुलगांधी मैदान में उतरे चीनी दूतावास में गुपचुप राहुलगांधी ने मीटिंग की उसके बाद राहुलगांधी ने चीन की यात्रा की और आते ही राफेल सौदे पर सवाल उठाकर राफेल की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग जोर शोर से उठने लगी।_*
*_पूरा मीडिया सारी कोंग्रेस की दिलचस्पी सिर्फ और सिर्फ राफेल की जानकारी सार्वजनिक कराने में है ताकि चीन ब्रम्होस का तोड़ बना सके पर ये अबतक सम्भव नही हो पाया जिसका श्रेय सिर्फ कर्तव्यनिष्ठ भारतीय सेना और मोदी जी को जाता है। चीन ब्रम्होस की जानकारी जुटाने के चक्कर में सीमा पर तनाव पैदा करके युद्ध के हालात बनाकर देख चुका है पर भारतीय सेना की चीन सीमा पर राफेल सहित ब्रम्होस की तैनाती देखकर अपने पांव वापिस खी खींचने को मजबूर हुआ था।
डोकलाम विवाद चीन ने इसीलिये पैदा किया था ताकि वह ब्रम्होस और राफेल की तैयारी देख सके ...इधर आप इसी राहुलगांधी को प्रधानमंत्री पद के योग्य समझ रहें हैं जो स्वयं और इसकी पार्टी के नेता हमारे दुश्मन देशों से गलबहियाँ करते हैं, और हमेशा हमारे भारत की गोपनीयता और सुरक्षा को शत्रु देश के हाथों उचित कीमत पर बेचने को तैयार बैठे रहतें हैं।

नेहरू ने भी लाखों किलोमीटर जमीन चीन को बेची थी और जनता समझती है हम युद्ध हार गये! आज ये राफेल और ब्रम्होस ही भारत के पास वो अस्त्र हैं जिसके आगे चीन बेबस हैं.
हाल ही में राहुल ने कैलाश मानसरोवर की छद्म यात्रा का भरम पैदा किया और चीन की एक बार फिर सैर कर आया।
दोस्तों ये सावधान रहने का वक्त है, जो राहुल गांधी भोले की आँखों में धूल झौंक सकता उसके लिए भारत और भारत धर्मी समाज क्या चीज़ है।
साभार :भाई जय प्रकाश जी की वाल से।

एक प्रतिक्रिया नीचे दी गई खबर पर :
'राफेल मुद्दे पार राहुल की बदज़ुबानी '

रविवार, 23 सितंबर 2018

दशम ग्रन्थ क्यों ?

दशम ग्रन्थ क्यों ?

दशमग्रंथ प्रतिरक्षा विभाग का स्वरूप था तत्कालीन भारत का। खालसा उसकी फौज थी। यहां रणनीति युद्धनीति शस्त्रनीति ,शास्त्रनीति  सब कुछ बखान की गई है। जोश की वाणी है श्री दशम गुरुग्रंथ साहब। यहां शस्त्र को भगवान् का दर्ज़ा प्राप्त है वही सबका प्रतिरक्षक है। प्रतिपालक है। 

यहां "जाप साहब "पहली वाणी हैं  ,अकाल उसतति दूसरी जिसमें परमात्मा की  स्तुति है उसकी सिफत का गायन है उसके तमाम नामों का  बखान किया गया है पहली वाणी जाप साहब में । 

यह वैसे ही जैसे विष्णुसहस्त्र नाम और इस्लाम के अंतर्गत अल्लाह के ९९ नामों का बखान है। 

वाह! गुरु के ,परमात्मा के इसी गुणगायन यशोगान से पैदा होती है 'भगौती' (देवी भगवती ,आद्या शक्ति चंडी अनेक शक्ति रूपा दुर्गा )परमात्मा की एक शक्ति का ही नाम यहां 'भगौती' है यहां वही  'पंज ककार 'धारण कर खालसा बन जाती है। 

बाबा आदम से बना है 'आदमी' और सब आदमियों का आदमियत का यहां  एक ही धर्म है कोई वर्ण ,भेद रंग, भेद जाति,पंथ भेद नहीं है  ।
 मनु से मनुज और 'मान 'से बना है मानव मनुष्य। यहां किसी का अलग से कोई अहंकार हउमै या अहंता नहीं है। सब बराबर हैं। 

तीसरी वाणी यहां बचित्र नाटक है जिसमें गुरुगोबिंद सिंह स्वयं अपनी आत्म कथा लिखते हैं अपने पूर्व जन्म का ब्योरा भी देते हैं। आप कहते हैं :

मैं हूँ परम पुरुष को दासा पेखन आया जगत तमाशा

ये दुनिया एक तमाशा ही तो है। एक खेल ही तो है उस परमात्मा का यहां कब क्या  होना है वही जानता है।

यहां दो चंडी चरित्र हैं एक का बखान अपेक्षाकृत बड़े छंद रूप 'कवित्त' और 'सवैये' बने हैं दूसरी में छोटे छंद आये हैं मकसद एक ही है हनुमान जैसे  यौद्धा  चरित्रों का बखान करके खालसा में जोश भरना। यहां एक एक खालसा सवा सवा लाख शत्रु सैनकों पर इसी  जोश और आत्मबल की वजह से भारी पड़ता है।
चंडी दी वार का बखान अलग से भी एक वाणी के रूप में आया है। 

इसे पंजाब के शूर वीरों की परम्परा को याद दिलाने के लिए कथाओं के रूप में   जन मन तक पहुंचाने के लिए पंजाब की तत्कालीन प्रचलित पंजाबी भाषा में ही लिखा गया है। 

इससे पूर्व की वाणियां ब्रजमंडल की ब्रज भाषा का पहरावा पहने हुए हैं। यहां मथुरा ,अलीगढ़ ,बुलन्दशहर की भाषा  है। चंडी दी वार जिसे भगौती की वार भी कहा जाता है पंजाबी भाषा में आई है। यहां ५५ पद या पौड़ियां हैं स्टेंज़ाज़ हैं। 

वीर रस की अप्रतिम प्रस्तुति है चंडी दी वार। इसे डमरू और सारंगी के साथ गाया जा सकता है आज भी। 

सातवीं वाणी 'ज्ञान प्रबोध  है जिसमें यज्ञ और युद्ध की कला ,कर्म क्या है समझाया गया है।

आठवीं वाणी  चौबीस अवतारों की कथा लिए आई है।

अवतार भगवान् के ही भेजे गए एम्बेस्डर हैं परमात्मा की ज्योत लिए आये हैं ये अवतार। पूर्ण परमात्मा नहीं हैं। 

जे चौबीस अवतार कहाये ,तिन भी तुम प्रभ तनिक न पाए। 

दशम ग्रन्थ में रामायण भी है। महाभारत भी। 

बीसवां पाठ यहां राम -अवतार तथा इक्कीसवाँ कृष्णावतार है।

यहां धर्म -युद्धों धर्म -यौद्धाओं का बखान है। 

ब्रज भाषा में सम्बोधित हैं ये अवतार कथाएँ।    

शब्दहज़ारे विद्वान लोगों ब्रह्मा जैसे चरित्रों का बखान करती है। इसके आगे खालसा महिमा अलग से लिखी गई है। 

यहां गुरूजी उन ब्राह्मणों की परवाह नहीं करते जो लोहा उड़द दाल ,सरसों तेल आदि का दान लेने से इंकार कर देते हैं। वह लोहे के अस्त्र बनवा देते हैं दाल के बड़े (दही भल्ले )ताकि खालसा ये परसादा जी भरके खा सके। यहां जो कुछ कर रहा है वह खालसा ही तो है तत्कालीन धर्म यौद्धा ही तो है। 

शस्त्र माला में सिमरनि शस्त्रों की बनाई गई है।ये शस्त्र ही यहां परमात्मा हैं।  

यहां शस्त्रों के नाक कूट भाषा में लिखे गए हैं। कोड वार्ड इस्तेमाल किये गए हैं शस्त्रों के लिए। 
यहां एक बन्दूक के लिए सौ सौ पर्यायवाचै कूट नाम आये हैं जैसे काश्ठ-कुन्डनी ,शीशे को चुगलखोर और बकरे को चौ-टंगा ,बकरी को आकाश परी कहा गया  है।   

इसके आगे है 'तिरिया चरित्र '(चरित्र -उपख्यान ). छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से यहां दशम गुरु इस देश के लोगों को शिक्षा देते हैं सीख देते हैं। ज्ञान देते हैं। यहां बहादुर स्त्री पुरुषों की तारीफ़ की गई है माड़े (बुरे )की निंदा। 

निज नारी के संग नित नेह बढ़इयों  
पर नारी के सेज,  भूल  सुपने नहीं जइयो। 
चौपाई साहब का पाठ चरित्र उपाख्यान के अंत में आता है तथा इसी का अंग  है।
चरित्र उपाख्यान एक राजा और उसके  सेनापति के परस्पर संवाद रूप में आया है। यहां ४०५ छोटी छोटी कहानियां हैं जो सेनापति राजा को  सुना रहा है। 

ये गढ़े गए चरित्र  खालसे को क्या करना चाहिए क्या नहीं इसका संकेत देते  हैं।मूल सन्देश है काम - रस ,राम रस की तरफ  तभी ले जाएगा जब धर्म अर्जित अर्थ के बाद 'काम' का उपभोग किया जाएगा धर्म किरत की तरह।वासना वर्जित है यहां। यही इन कथाओं का सन्देश है।खुली वासना 'लिव -इन' रिलेशन आदमी को  भ्रष्ट करते हैं।किसी भी तरह जायज नहीं हैं इनसे खालसे को बचे रहना है। भटका हुआ काम भटकी हुई वासना महा -शत्रु है।यह खालसे के विनाश का कारण बन सकती है। 

'ज़फरनामा' श्री दशम गुरुग्रंथ के आखिर में आता है। यह एक चिठ्ठी है ,एक सन्देश है जो औरंगज़ेब को भेजा गया था।जफ़र का मतलब होता है जीत और नामा का चिठ्ठी।  

दो खालसे -श्री दया सिंह और श्री  धर्म सिंह इस जफ़रनामे को लेकर औरंगाबाद पहुंचे थे लेकिन बादशाह के दरबारियों ने जब उन्हें इंतजारी में रखा तब भाई दया सिंह ध्यान में बैठे ,दशमगुरु को उन्होंने ने सारी कहानी कह सुनाई। आठवें गुरु हर कृष्ण जी ने औरंगज़ेब को एक शब्द दिया था जिसका ध्यान करने से वह काबा पहुंचकर पांच मरतबा नमाज़ पढ़ लेता था। दशम गुरु वहीँ पहुँच गए थे। जब बादशाह नमाज़ से उठा तो सामने उनके लिबास, कलगी ,बादशाही ठाठ आदि की चमक उनके नूर से तेज़ से घबरा कर कांपने लगा। गुरु ने उसे  आदेश दिया अपने दरबारियों को जाकर कहो मेरे दोनों खालसाओं को अंदर आने दें। 

औरंगज़ेब ने एलान किया हुआ था जो अपनी जुबां से खालसा बोलेगा उसकी जुबां तराश ली जायेगी। औरंगज़ेब दया सिंह जी पूछने लगा -खालसा पैदा हो गया। 'आप ही जाने' हुज़ूर ज़वाब मिला औरंगज़ेब ने दूसरी और तीसरी बार भी यही पूछा हर बार यही ज़वाब मिला। 

अब तक वह तीन बार खुद ही अपने दिए आदेश का  उल्लंघन कर चुका  था। काज़ियों ने उसे यह बात याद दिलाई। साथ ही चालाकी से जड़ दिया यदि आप सोने की जुबां बनाकर उसे तराश कर हमें दे दें तब आप अपने इस हुकुम की तामील से बच सकते हैं। इस प्रकार मुल्ले उसे बे -वक़ूफ़ बनाकर वहां से चम्पत हो गए। 

औरंज़ेब ने फतहनामा पढ़ना शुरू किया आखिर तक पहुंचते -पहुँचते वह मरणासन्न होने लगा। मलमूत्र भी उसका निकल गया। ज़ेबु निशाँ ने  कहा अब्बाजान आपकी रूह आज़ाद हो सकती है यदि आप ऊपर से इसे पढ़ना शुरू करें - औरंगज़ेब इसे सिख धर्म का कलाम ,कलमा समझता था उसने इसे पढ़ने से इंकार कर दिया। तब ज़ेबु ने कहा -अब्बा जान न पढ़ो न सही आप इसे लिख ही दें। आपकी तकलीफ काम हो जाएगी। 

बादशाह ने लिख दिया और उसकी रूह बदन से आज़ाद हो गई यह सोचने से पहले के लिखने के लिए भी तो उसे पढ़ना पड़ेगा। 

कथा जो भी हो गुरु मन्त्र एक ओंकार की शक्ति तो अपना काम कर ही चुकी थी। कल भी करती थी आज भी। आइंदा भी करती रहेगी।

आदि सचु जुगादि सचु ,

है भी सचु नानक होसी भी सचु   . (गुरु मंत्र )  


गुरुवार, 20 सितंबर 2018

बच के रहियो मेरे सीआईसी वीराँ

इन दिनों 

सारा भारत धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत प्रतीत होता है लेकिन यह प्रतीति मिथ्या है केवल साक्षी सत्य है साक्ष्य यानी जो दीसता है दिखलाई देता है वह मिथ्या है। साक्ष्य एक प्रतीति है। 

एक शहजादे स्वयंघोषित  शिव भक्त बने रोड शो कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर की छद्म यात्रा कर के लौटें हैं।जब एक इल्क्ट्रॉऑनी पत्रकार ने इनसे अपने चैनल पर ये पूछा -ये 'मानसरोवर' क्या है। बोले युवराज ये एक बहुत बड़ा पहाड़ है।
बताते चले मानसरोवर वाहगुरु का ही एक नाम है धाम है। कैलाशपति का।  

उधर बे -बाक होकर मोहनभागवत जी ने संघ के उद्देश्यों का बखान किया है। यह एक आलमी विमर्श बैठक थी जिसमें कल का भारत कैसा हो इस विषय पर विमर्श था। वहां इस तीन दिनी बैठक में "सीआईसी" (कास्टिस्ट इस्लामिक कम्युनल विपक्ष )न के बराबर ही दिखालाई दिया। 

इन्हें किसी बुजुर्ग ने पुरानी कहावत याद दिलाई लगती है -वहां मत जाना सम्मोहित हो जाओगे राष्ट्रीयस्वयं सेवक के तर्कों से। अपना सब कुछ गंवा दोगे। वहां कैलाश मानसरोवर की तरह घृणा का डेरा नहीं है। तेजस ही तेजस है। 

ये लगभग वैसा ही मिथक साबित हुआ जैसा ब्रह्माकुमारीज़ के बारे में कई मर्तबा फैलाया जाता है :वहां मत जाइये सम्मोहित कर लेती  हैं ये शिवशक्तियाँ। घर तुड़वा देती हैं। पतिपत्नी को एक झटके में भाईबहन बना देतीं हैं। 

बच के रहियो मेरे सीआईसी वीराँ  


RSS प्रमुख मोहन भागवत।

दरअसल, भागवत ने अपने संबोधन में देश में आबादी का संतुलन कायम रखने के लिए एक नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. भागवत ने कहा कि इसके दायरे में समाज के सभी वर्ग होने चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरूआत उन लोगों से की जानी चाहिए जिनके अधिक बच्चे हैं और उनके पालन-पोषण के लिए सीमित साधन हैं.

इन विषयों पर भी बोले भागवत
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तीन दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन बुधवार को उन्होंने विभिन्न विवादास्पद विषयों पर लिखित प्रश्नों के उत्तर दिए. इनमें अंतर जातीय विवाह, शिक्षा नीति, महिलाओं के खिलाफ अपराध, गौरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल थे.

आरक्षण का समर्थन
RSS प्रमुख भागवत ने विभिन्न समुदायों के लिए आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था का पुरजोर समर्थन किया. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

हिन्दुत्व की स्वीकार्यता बढ़ी
भागवत ने दावा किया कि विश्व भर में हिन्दुत्व की स्वीकार्यता बढ़ रही है जो उनके संगठन की आधारभूत विचारधारा है. उन्होंने कहा कि इसके विरूद्ध भारत में उन विभिन्न गलत चलनों के कारण क्रोध है जो पिछले कई वर्षों में इसमें आ गये हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संघ उन्हें समाप्त करने के लिए काम कर रहा है.

आबादी संतुलन महत्वपूर्ण 
भारत के विभिन्न भागों में बदल रहे आबादी के संतुलन और घटती हिन्दू आबादी के बारे में एक प्रश्न पर RSS प्रमुख ने कहा कि विश्व भर में आबादी संतुलन को महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे यहां भी कायम रखा जाना चाहिए.

संसाधनों का रखें ध्यान
भागवत ने कहा, ‘इसे ध्यान में रखते हुए जनसंख्या पर एक नीति तैयार की जानी चाहिए.’ अगले 50 वर्षों में देश की संभावित आबादी और इस संख्या बल के अनुरूप संसाधनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक बार जब नीति पर निर्णय हो जाए तो यह सभी पर लागू होना चाहिए और किसी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. उनकी इस बात का सभागार में आये लोगों ने ताली बजाकर समर्थन किया.

अच्छे नागरिक बनने के लिए जरूरी है ये काम
RSS प्रमुख भागवत ने कहा कि इस प्रकार की नीति को वहां पहले लागू करना चाहिए जहां समस्या है (आबादी की). उन्होंने कहा, ‘जहां अधिक बच्चे हैं किन्तु उनका पालन करने के साधन सीमित हैं...यदि उनका पालन पोषण अच्छा नहीं हुआ तो वे अच्छे नागरिक नहीं बन पाएंगे.’


केवल कानून से नहीं होगा समाधान
भागवत ने कहा कि इस प्रकार की नीति को वहां बाद में लागू किया जा सकता है जहां इस प्रकार की समस्या नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि महज कानून ही किसी मुद्दे का समाधान नहीं है.

हिन्दुओं की जनसंख्या घट रही है
कई भाजपा नेता एवं हिन्दू संगठन इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. उनका कहना है कि मुस्लिम आबादी की तुलना में हिन्दुओं की जनसंख्या घट रही है. 

गौरक्षा के नाम पर कानून के खिलाफ नहीं
धर्मान्तरण के विरूद्ध RSS प्रमुख भागवत ने कहा कि यह सदैव दुर्भावनाओं के साथ करवाया जाता है. इससे आबादी का असंतुलन भी होता है. उन्होंने गायों की रक्षा का समर्थन करने के बावजूद यह नसीहत भी दी कि गौरक्षा के नाम पर कानून के विरूद्ध नहीं जाया जा सकता.

ना हों दोमुंही बातें
RSS प्रमुख ने कहा कि कानून को अपने हाथ में ले लेना एक अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर दंड होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा, ‘हमें दोमुंही बातों को भी नकारना चाहिए क्योंकि गौ तस्करों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर कोई नहीं बोलता.’ उनसे देश में भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या करने तथा गौरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बारे में पूछा गया था.

शीर्ष हस्तियों ने की शिरकत
संघ के इस तीन दिवसीय सम्मेलन में सत्तारूढ़ भाजपा के विभिन्न नेताओं, बालीवुड अभिनेताओं, कलाकारों एवं शिक्षाविदों की उपस्थिति देखी गयी. बहरहाल, ‘भविष्य का भारत..RSS का दृष्टिकोण’ शीर्षक वाले इस सम्मेलन में लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दलों की उपस्थिति नगण्य रही हालांकि संघ ने कहा कि उसने इन दलों को आमंत्रित किया था.


इस मामले में हमेशा साथ है संघ
अंतर जातीय विवाह के बारे में पूछे जाने पर भागवत ने कहा कि संघ इस तरह के विवाह का समर्थन करता है. यदि अंतर जातीय विवाहों के बारे में गणना करायी जाये तो सबसे अधिक संख्या में संघ से जुड़े लोगों को पाया जाएगा.

महिलाओं को मिले सुरक्षा
महिलाओं के विरूद्ध अपराध के बारे में अपनी उद्धिग्नता को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल तैयार किया जाना चाहिए जहां वे सुरक्षित महसूस कर सकें.

शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी भी बताई
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी तरह के भेदभाव से बचाने की जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की है. उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू को अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे भी समाज का अंग हैं.

अंग्रेजी भाषा पर भी बोले भागवत
संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा का विरोधी नहीं है किन्तु उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए. उनका संकेत था कि अंग्रेजी किसी भारतीय भाषा का स्थान नहीं ले सकती. उन्होंने कहा, ‘आपको अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा का विरोध नहीं करना चाहिए और इसे हटाया नहीं जाना चाहिए...हमारी अंग्रेसी से कोई शत्रुता नहीं है. हमें योग्य अंग्रेजी वक्ताओं की आवश्यकता है.’

जम्मू-कश्मीर में न हो 370 और 35A
अन्य मुद्दों पर पूछे गये सवालों के उत्तर में उन्होंने जम्मू कश्मीर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि RSS संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35 ए स्वीकार नहीं करता.

क्या है जम्मू-कश्मीर का प्रावधान
बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 370 राज्य की स्वायत्तता के बारे में है. जबकि अनुच्छेद 35 ए राज्य विधानसभा को यह अनुमति देता है कि वह राज्य के स्थायी निवासियों को परिभाषित करे.

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