सोमवार, 3 सितंबर 2012

मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये


Protecting Your Vision from Diabetes Damage 

मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये 

?आखिर क्या ख़तरा हो सकता है मधुमेह से बीनाई को 

*  एक स्वस्थ व्यक्ति में अग्नाशय ग्रंथि (Pancreas) इतना इंसुलिन स्राव कर देती है जो खून में तैरती फ़ालतू शक्कर को रक्त प्रवाह से निकाल बाहर कर देती है और शरीर  से भी बाहर चली जाती है यह फ़ालतू शक्कर (एक्स्ट्रा ब्लड सुगर ).

मधुमेह की अवस्था में अग्नाशय अपना काम ठीक से नहीं निभा पाता है लिहाजा फ़ालतू ,ज़रुरत से कहीं ज्यादा शक्कर खून में प्रवाहित होती रहती है .फलतया सामान्य खून के बरक्स खून गाढा हो जाता है .

अब जैसे -जैसे   यह गाढा खून छोटी महीनतर रक्त वाहिकाओं तक पहुंचता है ,उन्हें क्षतिग्रस्त करता आगे बढ़ता है .नतीज़न इनसे रिसाव शुरु हो जाता है .

आँख के अस्तर आँख के परदे रेटिना पर इसी प्रकार की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं का पूरा जाल फैला रहता है .यही इस नुकसानी की आसानी से चपेट में आजातीं हैं .
ऐसे में इससे    सटे आसपास के  इलाकों के ऊतकों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुँच पाता है .

इससे मुकम्मिल और स्थाई नुकसानी पहुँचती है इसी के साथ सफ़ेद और काले  मोतिया बिन्द (Cataracts and glaucoma)के खतरे के बढ़ने के अलावा आँख का पर्दा भी वियोजित हो सकता है,रेटिनल डिटएचमेंट मेंट के खतरे का वजन भी बढ़ सकता है .

अकसर इस की परिणिति होती है diabetic retinopathy में ,आँख के परदे का ऐसा रोग जिसकी वजह पुरानी पड़ चुकी मधुमेह की बीमारी बनती है लापरवाही बरतने पर .

?भला है क्या डायबेटिक रेटिनोपैथी 

* इस स्थिति में मधुमेह की वजह से ही आँख का  अस्तर (आँख का  पर्दा ) यानी रेटिना क्षतिग्रस्त हो जाता है .इतना अधिक  रक्त स्राव (रक्त रिसाव )आँख के परदे की महीन रक्त नलिकाओं से हो सकता है जो तात्कालिक तौर पर ही अंधत्व की वजह भी बन सकता है .

ठीक न हो सकने लायक इसी अंधत्व की चपेट में २०-७४ साला कितने ही लोग आजातें हैं .अंधत्व की यह एक बड़ी एहम   वजह बना हुआ है .

इसका जोखिम मधुमेह के अधिक से अधिक पुराना रोग होते जाने के साथ ही उसी अनुपात में बढ़ता जाता है .जितनी ज्यादा साल पुरानी मधुमेह उतना ज्यादा जोखिम .

अध्ययनों के मुताबिक़ जिन लोगों का रोग दस साला या और भी ज्यादा पुराना हो जाता है उनमें  से ५०% में मधुमेह से पैदा   आँख के परदे में रोग  सम्बंधित बदलाव आने लगतें हैं .

६५,००० मधुमेही हर बरस इसकी चपेट में आजातें हैं .लेकिन सही देखभाल और इलाज़ से इनमें से ९० %मामलों में ज्योति चले जाने का जोखिम घटके  कम रह जाता है .

?  कैसे कम किया जा सकता है इस के खतरे के वजन को ,बचा जासकता है डायबेटिक रेटिनो-पैथी  से 

*ओपटीशियन /ओप्टोमीटरिईस्ट से बीनाई की जांच करवाते रहिये 

बीनाई (विजन )की जांच करने वाले माहिर (आम भाषा में ऐनकबनाने वाला )को ही कहा जाता है ओप्टोमीटइरिस्ट .

वक्त रहते आँखों में होने वाले संभावित मधुमेह सम्बन्धी बदलावों का पता अकसर इस जांच से ही लग जाता है .एक ऑप्टोमीटइरिस्ट न सिर्फ आँख के परदे का मूल्यांकन करता है ,रेटिना में आये ना -मालूम से बदलावों को भी ताड़ लेता है .जिससे आपके मधुमेही (मधुमेह के पुराने रोगी )होने की पुष्टि होती है .

कई मर्तबा नेत्र विज्ञान और नेत्र रोगों के माहिरों से भी पहले ऑप्टोमीटीरिस्ट को आँखों का हाल मालूम पड़ जाता है .

अमरीकी मधुमेह संघ इस बात की सिफारिश करता है ,टाईप १ और टाईप २ मधुमेह का पता चलते ही न सिर्फ DILATED EYE EXAM होना चाहिए ,इसके बाद भी हर साल ऐसी जांच होती रहनी चाहिए .

सन्दर्भ -सामिग्री :-

Optometrist Q & A /eye on optical 

Protecting Your Vision from Diabetes Damage/Alicia M.Lombardo ,O.D. /Sam's Club Independent Optometrist /Sam's Club ,# 6460 Altoona ,Penn./Sam's  Club/September/October 2012  p 62,Healthy Living Made Simple   

Protecting Your Vision from Diabetes Damage मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये

Protecting Your Vision from Diabetes Damage 

मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये 

?आखिर क्या ख़तरा हो सकता है मधुमेह से बीनाई को 

*  एक स्वस्थ व्यक्ति में अग्नाशय ग्रंथि (Pancreas) इतना इंसुलिन स्राव कर देती है जो खून में तैरती फ़ालतू शक्कर को रक्त प्रवाह से निकाल बाहर कर देती है और शरीर  से भी बाहर चली जाती है यह फ़ालतू शक्कर (एक्स्ट्रा ब्लड सुगर ).

मधुमेह की अवस्था में अग्नाशय अपना काम ठीक से नहीं निभा पाता है लिहाजा फ़ालतू ,ज़रुरत से कहीं ज्यादा शक्कर खून में प्रवाहित होती रहती है .फलतया सामान्य खून के बरक्स खून गाढा हो जाता है .

अब जैसे -जैसे   यह गाढा खून छोटी महीनतर रक्त वाहिकाओं तक पहुंचता है ,उन्हें क्षतिग्रस्त करता आगे बढ़ता है .नतीज़न इनसे रिसाव शुरु हो जाता है .

आँख के अस्तर आँख के परदे रेटिना पर इसी प्रकार की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं का पूरा जाल फैला रहता है .यही इस नुकसानी की आसानी से चपेट में आजातीं हैं .
ऐसे में इससे    सटे आसपास के  इलाकों के ऊतकों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुँच पाता है .

इससे मुकम्मिल और स्थाई नुकसानी पहुँचती है इसी के साथ सफ़ेद और काले  मोतिया बिन्द (Cataracts and glaucoma)के खतरे के बढ़ने के अलावा आँख का पर्दा भी वियोजित हो सकता है,रेटिनल डिटएचमेंट मेंट के खतरे का वजन भी बढ़ सकता है .

अकसर इस की परिणिति होती है diabetic retinopathy में ,आँख के परदे का ऐसा रोग जिसकी वजह पुरानी पड़ चुकी मधुमेह की बीमारी बनती है लापरवाही बरतने पर .

?भला है क्या डायबेटिक रेटिनोपैथी 

* इस स्थिति में मधुमेह की वजह से ही आँख का  अस्तर (आँख का  पर्दा ) यानी रेटिना क्षतिग्रस्त हो जाता है .इतना अधिक  रक्त स्राव (रक्त रिसाव )आँख के परदे की महीन रक्त नलिकाओं से हो सकता है जो तात्कालिक तौर पर ही अंधत्व की वजह भी बन सकता है .

ठीक न हो सकने लायक इसी अंधत्व की चपेट में २०-७४ साला कितने ही लोग आजातें हैं .अंधत्व की यह एक बड़ी एहम   वजह बना हुआ है .

इसका जोखिम मधुमेह के अधिक से अधिक पुराना रोग होते जाने के साथ ही उसी अनुपात में बढ़ता जाता है .जितनी ज्यादा साल पुरानी मधुमेह उतना ज्यादा जोखिम .

अध्ययनों के मुताबिक़ जिन लोगों का रोग दस साला या और भी ज्यादा पुराना हो जाता है उनमें  से ५०% में मधुमेह से पैदा   आँख के परदे में रोग  सम्बंधित बदलाव आने लगतें हैं .

६५,००० मधुमेही हर बरस इसकी चपेट में आजातें हैं .लेकिन सही देखभाल और इलाज़ से इनमें से ९० %मामलों में ज्योति चले जाने का जोखिम घटके  कम रह जाता है .

?  कैसे कम किया जा सकता है इस के खतरे के वजन को ,बचा जासकता है डायबेटिक रेटिनो-पैथी  से 

*ओपटीशियन /ओप्टोमीटरिईस्ट से बीनाई की जांच करवाते रहिये 

बीनाई (विजन )की जांच करने वाले माहिर (आम भाषा में ऐनकबनाने वाला )को ही कहा जाता है ओप्टोमीटइरिस्ट .

वक्त रहते आँखों में होने वाले संभावित मधुमेह सम्बन्धी बदलावों का पता अकसर इस जांच से ही लग जाता है .एक ऑप्टोमीटइरिस्ट न सिर्फ आँख के परदे का मूल्यांकन करता है ,रेटिना में आये ना -मालूम से बदलावों को भी ताड़ लेता है .जिससे आपके मधुमेही (मधुमेह के पुराने रोगी )होने की पुष्टि होती है .

कई मर्तबा नेत्र विज्ञान और नेत्र रोगों के माहिरों से भी पहले ऑप्टोमीटीरिस्ट को आँखों का हाल मालूम पड़ जाता है .

अमरीकी मधुमेह संघ इस बात की सिफारिश करता है ,टाईप १ और टाईप २ मधुमेह का पता चलते ही न सिर्फ DILATED EYE EXAM होना चाहिए ,इसके बाद भी हर साल ऐसी जांच होती रहनी चाहिए .

सन्दर्भ -सामिग्री :-

Optometrist Q & A /eye on optical 

Protecting Your Vision from Diabetes Damage/Alicia M.Lombardo ,O.D. /Sam's Club Independent Optometrist /Sam's Club ,# 6460 Altoona ,Penn./Sam's  Club/September/October 2012  p 62,Healthy Living Made Simple   

रविवार, 2 सितंबर 2012

सादा भोजन ऊंचा लक्ष्य

सादा भोजन ऊंचा लक्ष्य 

स्टोक एक्सचेंज का सट्टा भूल ,ग्लाईकेमिक इंडेक्स की सुध ले ,सेहत सुधार .

यही करते हो शेयर बाज़ार में आके कम दाम पे शेयर खरीदते हो ,दाम चढने पे उन्हें पुन : बेच देते हो .रुझान पढ़ते हो इस सट्टा बाज़ार के .जरा सेहत का भी सोचो .ग्लाईकेमिक इंडेक्स की जानकारी सेहत का उम्र भर का बीमा है .

भले आप जीवन शैली रोग मधुमेह बोले तो सेकेंडरी (एडल्ट आन सेट डायबीटीज ) के साथ जीवन यापन न कर रहें हों ,प्रीडायबेटिक आप हो न हों ये जानकारी आपके काम बहुत आयेगी .स्वास्थ्यकर थाली आप सजा सकतें हैं रोज़ मर्रा की ग्लाईकेमिक इंडेक्स की जानकारी की मार्फ़त .फिर देर कैसी ?और क्यों देर करनी है ?

हारवर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के शोध कर्ताओं ने पता लगाया है ,लो ग्लाईकेमिक इंडेक्स खाद्य बहुल खुराक आपकी जीवन शैली रोगों यथा मधुमेह और हृदरोगों से हिफाज़त कर सकती है .बचाए रह सकती है आपको तमाम किस्म के जीवन शैली रोगों से जिनकी नींव गलत सलत  खानपान से ही पड़ती है .

बचिए ला -इलाज़ बीमारियों से क्रोनिक डिजीज से ,दीर्घकालिक रोगों और समस्याओं से 

आखिर है क्या ग्लाईकेमिक इंडेक्स ? 

ग्लाईकेमिक सूचकांक (खाद्यों को )कार्बोहाईड्रेट को इस आधार पर वर्गीकृत करता है ,एक पैमाने पर जिसका न्यूनतम पाठ शून्य से शुरु हो सौ तक जाता है, एक मान देता है, सूचकांक देता है कि इसे लेने के बाद आपके खून में शक्कर का स्तर कितनी तेज़ी से ऊपर जाता है .और कितना ऊपर चला जाता है .इसीका सूचक होता है यह सूचकांक .

वाईट ब्रेड खाने के बाद आपकी ब्लड सुगर ज्यादा तेज़ी से बढ़ जायेगी बरक्स तरकारियों और हरी सब्जियों  के ,क्योंकि वाईट ब्रेड का ग्लाईकेमिक सूचकांक (GI)जहां   85 है  वहीँ  सब्जियों  का ३० है .

सब्जियां पचने में अपेक्षाकृत ज्यादा वक्त लेती है धीरे -धीरे ही इनसे रिसके शक्कर हमारे खून में दाखिल होती है .

 क्यों महत्वपूर्ण है जीआई (GI)?

इसे  जानकार  आप  अपनी खुराक का निर्धारण इस प्रकार कर सकतें है कि आपकी ब्लड सुगर स्टेबिल रहे .उस में बहुत  ज्यादा "हाईज"  और" लोज़ ".बहुत अधिक उछाला ढूंढें भी   न मिले .

स्टार्च युक्त तरकारियों का बहुलांश ,फल ,कम चिकनाई वाला दूध और लीन प्रोटिनें इसमें,इस रणनीति ,खुराक निर्धारण में  मदद गार साबित होंगी .इन्हें ज्यादा से ज्यादा अपनी खुराक में शामिल करके आप ब्लड सुगर के स्तर के यकायक बढ़ जाने और फिर आकस्मिक तौर पर गिरने से होने वाली परेशानियों से खुद को बचाए रहेंगे .

आपके माहिर का काम यदि आप डायबेटिक हैं ,ब्लड सुगर को एक स्वीकृत मान्य सीमा में मधुमेह रोधी  खाने वाली दवाओं एवं इंसुलिन सुइयों से (मधुमेह पुरानी हो जाने पर )की  मदद से बनाए रखना है आपकी खुराक इसे मान्य स्तर पर ही बनाए रखने में उतनी ही बड़ी भूमिका में रहती है .

बेतहाशा की भूख और बे -कली  से जो शक्कर का स्तर एक दम नीचे आने से पैदा हो सकती है आप खुद को इस रणनीति के तहत बचाए रख सकतें हैं .

इस उपाय को अपनाकर आप अपने तौल को भी बनाए रख सकतें हैं खाते भी कम हैं और ऊर्जित ज्यादा रहतें हैं .

इंसुलिन रेजिस्टेंस से आप बचे रहतें हैं जो टाइप २ डायबीटीज का ज्ञात रिस्क फेक्टर है .

इंसुलिन रेजिस्टेंस ?

इंसुलिन प्रतिरोध वह शरीर क्रिया वैज्ञानिक अवस्था है जिसमें हमारे शरीर में बनने वाला कुदरती हारमोन इंसुलिन असरदार तरीके से काम नहीं कर पाता खून में शक्कर के स्तर को कम करने का.ऐसे में शक्कर का स्तर मान्य स्तर से ऊपर चला जाता है और अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं .इन समस्याओं की उग्रता आपकी खुराक से तय होती है .

जी भरके ,प्रचुरता में खाइए वे तमाम चीज़ें जिनका GI 55 से नीचे रहता है .हाज़िर है ऐसे खाद्यों की सूची 

फल : चैरी ,चकोतरा (ग्रैपफ्रूट )सेब(एपल ),नाशपाती (पेअर),आलूचा (आलू बुखारा ,प्लम ),स्ट्राबेरीज़,संतरे ,अंगूर ,किवी 

तरकारियाँ :शतावर (शतावरी ,नागदौन ,असपैरगस ,हरी फलियाँ /फलियों वाली हरी सब्जी (ग्रीन बीन्स ),मटर ,पालक ,स्क्वाश (कुम्हड़ा ),हाथीचक ,वज्रांगी (आटिचोक,ARTICHOKE).ब्रोक्क्ली ,बैंगन .

मोटे अनाज (चोकर सहित )  से तैयार ब्रेड (WHOLE GRAIN BREAD ),पास्ता (मेक्सिकन विशेष गेंहू से तैयार ),ब्राउन राईस ,ओटमील (जै  से तैयार आटा ) 

बीजवाली  फलियाँ /शिम्ब :दालें ,मटर ,सोयाबीन ,मूंगफली ,सेम की फलियाँ ,राजमा ,लोबिया ,तमाम किस्म की बाकी हरी या सफ़ेद फलियाँ .

कम कार्ब्स युक्त खाद्य (FOODS LOW IN CARBOHYDRATES):समुद्र  से प्राप्त खाने की मछलियाँ और घोंघे आदि ,शंख मीन बोले तो सीफूड ,अंडे ,लीन मीट्स ,खाद्य तेल ,कम वसा युक्त दूध , चीज़ आदि .

सीमित मात्रा  में ले सकतें हैं ५६ -६९ ग्लाईकेमिक इंडेक्स खाद्य 

इनमें शामिल हैं शकरकंद ,केले ,कंदमूल ,पोपकोर्न ,खूबानी ,भुट्टे ,तकरीबन सभी किस्म के चावल .होल ग्रैन सीरियल्स ,चटनी में पकाई गई  डिब्बाबंद सफ़ेद छोटी बीन (सेम ),अन्यबैक्ड खाद्य .

केवल कभी कभार खाएं ७० या उससे ऊपर GI वाले  खाद्य 

इनमे शामिल हैं ज्यादातर नाश्ते में प्रयुक्त सीरियल्स   (बहु -प्रचारित ब्रेक फास्ट सीरियल्स ),तरबूज ,वाईट ब्रेड ,बैक्ड पोटेतोज़(अंगीठी या तंदूर की सूखी आंच में सेंके हुए ),फ्रेंच फ्राईज ,डोनाट्स(गेंद या छल्ले के आकार का छोटा कैक,भारतीय बालूशाही ),प्रेत्ज़ेल्स(एक सुनहरी रंग का बिस्किट )  ,कोर्न चिप्स .

Pretzel is a crisp knot -shaped or stick shaped biscuit with a golden brown glaze .

शनिवार, 1 सितंबर 2012

Eat Low , Aim High

Forget the stock market .The glycemic index is the one to know for better health.

यह आलेख हिंदी में ज्यादा विस्तार लिए जल्द आ रहा है .सभी पारिभाषिक शब्दों की व्याख्या सहित .

Buy low sell high .To make money in the stock market ,that is the rule to follow .But there is an index that is even more important ,because it could impact your health  for a life time :the glycemic index (GI).Whether you are at risk for Type 2 (ADULT -ONSET DIABETES ) diabetes or already have the disease ,you need to know what the GI is and how to use it as a tool for creating a healthy eating plan .

Research from the Harvard School of Public Health indicates that a diet rich in low glycemic index foods can help prevent diabetes and heart disease.So by limiting your intake of high glycemic index foods ,you may help prevent chronic disease and live a healthier ,longer life .

What is the glycemic index ?

The glycemic index ranks carbohydrates on a scale from 0 to 100 based on how quickly they raise your blood sugar levels after you eat . A food with a glycemic index over 85 ,such as white bread ,raises blood sugar rapidly .Foods with a score below 30 ,such as most vegetables ,take longer to digest and result in a more gradual rise  in  blood sugar.

Why is it important ?

Understanding the GI allows you to build your diet around foods that will keep your blood glucose levels stable , such as most non -starchy vegetables , most fruits ,low -fat dairy and lean proteins .By eating more of these foods ,you prevent blood sugar peaks and valleys -and the inevitable raging hunger that accompanies a drop in glucose .Not only can this help you eat less ,maintain a healthy weight and feel more energetic throughout the day ,it also helps prevent insulin resistance , a major risk factor for Type 2 diabetes .

Eat plenty (these foods score below 55 on the glycemic index ):


*  Fruits :cherries ,grapefruit,apples ,pears ,plums ,peaches ,strawberries ,oranges ,grapes ,kiwi.

*Vegetables:asparagus ,celery ,cucumbers ,green beans ,peas ,spinach ,squash ,broccoli ,eggplant (brinjal ).
* Whole grain breads and pasta ,brown rice ,oatmeal .
*Legumes :lentils ,peas ,beans ,peanuts .
*Foods low in carbohydrates :  seafood ,eggs ,lean meats ,cooking oil ,low -fat milk and cheese.

Enjoy in moderation (56-69 on the GI):

Sweet potatoes ,bananas ,popcorn ,apricots ,corn ,most kinds of rice ,whole -grain cereals ,baked items .

Eat sparingly (70 + on the GI):

Most breakfast cereals ,baked potatoes ,watermelon ,croissants ,white bread ,french fries ,donuts ,petzels ,corn chips.

Reference :SamsClub.com/healthyliving /September/October 2012 /p39.

अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण


अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण 

Home is where My dog  is.

रोज़ शाम को घूमने के लिए निकल जाता हूँ .दिन भर ब्लोगिंग ,बच्चों के स्कूल का अवकाश चल रहा है यहाँ स्कूल सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुन :खुलेंगे  सो बीच -बीच में दो नातियों की देखभाल और शाम को लम्बी सैर .सितम्बर ४ से स्कूल खुल जायेगें .फिर मेरा भी रूटीन बदलेगा .फिल- वक्त तो यही दैनिकी है .

यहाँ सड़कों के साथ -साथ  क्या सभी डिवीजनस  के अंदर भी चाहे सिल्वरवुड हो या आयरनवुड ,प्रोक्टर हो या वुड ब्रिज साफ़ सुथरे पैदल मार्ग हैं .गोरों से भेंट होती है .उनके तमाम स्वानों को मैं पहचानने लगा हूँ .बिलकुल औलाद सा प्यार देतें हैं यह स्वानों को .सम्बोधन भी संतानों सा .पूछो तो जरा नजदीक आने पर -उनके किसी स्वान के बारे में :इज ही मीन ज़वाब मिलेगा नो शी इज फ्रेंडली .ही इज वेरी सोफ्ट .

आपके चारों तरफ क्या है ?जो कुछ भी है वह आपका पर्यावरण है .स्वान इनके परिवेश का एक बहुत अच्छा साथी है .जिस तपोवन की हम कामना करतें हैं अमरीकियों ने उसे अपने आसपास उतारा हुआ है .बेहद की सफाई है यहाँ हरेक डिविज़न में .लांस में घास की नियमित कटाई होती है .कहीं कोई खरपतवार नहीं .इसी तपोवन का हिस्सा है स्वान जो संकट में  इनकी आत्म रक्षा का साधन भी बनता है .अगर इनका बस चले तो यह कुत्ता छोड़ शेर भी पाल लें.साधनों और रखरखाव की  यहाँ कोई कमी नहीं है .और सलीका ?उसमें ये अग्रणी हैं .तहज़ीब के सिरमौर .नजरे मिलने की देर है आपसे गरम जोशी से कहेंगे दूर से भी -हाउ यू डूइंन.आप कनेक्ट होते हैं इनसे .बाहर सैर को निकलें हैं तो आप निस्संग नहीं रहेंगे . 

यहाँ स्वच्छ हवा है ,खिली हुई सीधी तेज़ धूप भी है क्योंकि पर्यावरण  स्वच्छ है .मिटटी में यहाँ गंध है हवा में खुशबू है .हमने अपने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है .स्वच्छ गंध को हम तरसतें हैं .पर्यावरण यहाँ इनके जीवन का जीवंत हिस्सा है .हमारे यहाँ तो महानगर भी गंधाते हैं मूल भूत सुविधाएं नहीं है जो स्वप्न नगरी बोम्बे (स्सारी मुंबई )कभी लुभाती  थी वहीँ रह्ताहूँ .चौपाटी क्या तमाम बाकी बीच भी एक ही तरह से गन्दगी का साम्राज्य उठाए हैं कोई कम कोई ज्यादा .

ये लोग जब अपने स्वानों को संग लिए बाहर लम्बी सैर को निकलतें हैं इनके हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ होतीं हैं कुछ के पास संडासी भी होती है स्वान बिष्टा (डॉग एक्स -क्रीटा) को समेटने के लिए .फुटपाथ गंदा नहीं करते करवाते हैं यह अपनी औलादों से .स्वानों से .बिष्टा समेट के साथ चलते हैं .घर लाके उसे डस्ट/वेस्टबिन के हवाले करतें हैं .सैन होज़े(केलिफोर्निया राज्य का वह स्थान जो सिलिकोन वैली कहाता है ) में हमने देखा फुटपाथ के साथ ही किसी लकड़ी के खम्बे से बक्से लटके रहतें हैं .साथ में हेंड सेनेताइज़र  भी .एक्सक्रीटा आप यहीं ठिकाने लगा सकतें हैं .

यहाँ कोलोनी क्या प्रशांत के लम्बे तटों के साथ भी जगह जगह आपको अस्थाई रेस्ट रूम मिलेंगे .सब  कुछ जनता के पैसे से चलता है .चंदा छोड़ सकतें हैं यहाँ आप स्वेच्छा से एक डॉलर दो डॉलर साफ़ सफाई के लिए इन अस्थाई रेस्ट रूम्स की .

कहीं कोई सिगरेट का रेपर नहीं .खाली सोडा केन्स  नहीं ,खाद्य सामिग्री के हवा में उड़ते रेपर नहीं ,जो तेज़ हवा तूफ़ान  में उड़के आपके घर तक आ जाएँ .

वो गौरैया जो आज हिन्दुस्तान से लापता हैं यहाँ घर घर हैं .उनके लिए पेड़ों से लटकते ख़ास लकड़ी के बने खूब -सूरत घरोंदें हैं ,दाना है साफ़ पानी है .

कोठी के बाहर फूलों की क्यारियाँ हैं .क्यारियों में पशु पक्षियों के बड़े जीवंत मोडिल्स हैं कहीं कच्छप कहीं स्वान .कहीं लोमड़ी और कहीं हिरन .पास जाकर ही पता चलता है यह मिटटी के हैं .क्योंकि एक जीवंत परिवेश का एक खूबसूरत आशियाने का यह हिस्सा बने होते हैं .

अमरीकी जानतें हैं जिस दिन उनका पर्यावरण नष्ट हो गया ,पारितंत्र टूट गए ,ये इन पारितंत्रों के पहरुवे ये भंवरे ,ये तितलियाँ ,ये चिड़िया ,ये गौरैया सब भाग खड़े होंगे .इसलिए वह इसे पूरे मनोयोग से एक तपोवन बनाए रहतें हैं .गन्दगी फैलाने के शौक़ीन नहीं है ये गोरे .

वह जानते हैं एनर्जी भी अब अपने मूल रूप में नहीं है उत्सर्जन का सबब बनी हुई है इसीलिए यहाँ री -साइक्लिंग ज्यादा है .लघभग हर चीज़ की री -साइकिलिंग है .

कुत्ता मूलतया पर्यावरण के मूल कारक तत्वों में फूल ,तितली ,वृक्ष ,वनस्पति  की  तरह कभी  नहीं था ,इन्होनें उसे भी इस तंत्र का  जीता जागता हिस्सा बना लिया .

मिलन सारिता का ज़रिया बन गया कुत्ता .हम कई लोगों को यहाँ उनके कुत्तों की मार्फ़त ही जानतें हैं .उसका पूरा चारित्रिक परिचय करवाया जाता है यहाँ .उसकी उम्र सेक्स स्वभाव ,नस्ल ,प्रेम और संवेदना का पूरा ब्योरा मिलेगा आपको गोरों की मार्फ़त और गोरे मिलेंगे आपको कुत्तों की मार्फ़त .
Home is where my dog is .



अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण Home is where My dog is. रोज़ शाम को घूमने के लिए निकल जाता हूँ .दिन भर ब्लोगिंग ,बच्चों के स्कूल का अवकाश चल रहा है यहाँ स्कूल सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुन :खुलेंगे सो बीच -बीच में दो नातियों की देखभाल और शाम को लम्बी सैर .सितम्बर ४ से स्कूल खुल जायेगें .फिर मेरा भी रूटीन बदलेगा .फिल- वक्त तो यही दैनिकी है . यहाँ सड़कों के साथ -साथ क्या सभी डिवीजनस के अंदर भी चाहे सिल्वरवुड हो या आयरनवुड ,प्रोक्टर हो या वुड ब्रिज साफ़ सुथरे पैदल मार्ग हैं .गोरों से भेंट होती है .उनके तमाम स्वानों को मैं पहचानने लगा हूँ .बिलकुल औलाद सा प्यार देतें हैं यह स्वानों को .सम्बोधन भी संतानों सा .पूछो तो जरा नजदीक आने पर -उनके किसी स्वान के बारे में :इज ही मीन ज़वाब मिलेगा नो शी इज फ्रेंडली .ही इज वेरी सोफ्ट . आपके चारों तरफ क्या है ?जो कुछ भी है वह आपका पर्यावरण है .स्वान इनके परिवेश का एक बहुत अच्छा साथी है .जिस तपोवन की हम कामना करतें हैं अमरीकियों ने उसे अपने आसपास उतारा हुआ है .बेहद की सफाई है यहाँ हरेक डिविज़न में .लांस में घास की नियमित कटाई होती है .कहीं कोई खरपतवार नहीं .इसी तपोवन का हिस्सा है स्वान जो संकट में इनकी आत्म रक्षा का साधन भी बनता है .अगर इनका बस चले तो यह कुत्ता छोड़ शेर भी पाल लें.साधनों और रखरखाव की यहाँ कोई कमी नहीं है .और सलीका ?उसमें ये अग्रणी हैं .तहज़ीब के सिरमौर .नजरे मिलने की देर है आपसे गरम जोशी से कहेंगे दूर से भी -हाउ यू डूइंन.आप कनेक्ट होते हैं इनसे .बाहर सैर को निकलें हैं तो आप निस्संग नहीं रहेंगे . यहाँ स्वच्छ हवा है ,खिली हुई सीधी तेज़ धूप भी है क्योंकि पर्यावरण स्वच्छ है .मिटटी में यहाँ गंध है हवा में खुशबू है .हमने अपने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है .स्वच्छ गंध को हम तरसतें हैं .पर्यावरण यहाँ इनके जीवन का जीवंत हिस्सा है .हमारे यहाँ तो महानगर भी गंधाते हैं मूल भूत सुविधाएं नहीं है जो स्वप्न नगरी बोम्बे (स्सारी मुंबई )कभी लुभाती थी वहीँ रह्ताहूँ .चौपाटी क्या तमाम बाकी बीच भी एक ही तरह से गन्दगी का साम्राज्य उठाए हैं कोई कम कोई ज्यादा . ये लोग जब अपने स्वानों को संग लिए बाहर लम्बी सैर को निकलतें हैं इनके हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ होतीं हैं कुछ के पास संडासी भी होती है स्वान बिष्टा (डॉग एक्स -क्रीटा) को समेटने के लिए .फुटपाथ गंदा नहीं करते करवाते हैं यह अपनी औलादों से .स्वानों से .बिष्टा समेट के साथ चलते हैं .घर लाके उसे डस्ट/वेस्टबिन के हवाले करतें हैं .सैन होज़े(केलिफोर्निया राज्य का वह स्थान जो सिलिकोन वैली कहाता है ) में हमने देखा फुटपाथ के साथ ही किसी लकड़ी के खम्बे से बक्से लटके रहतें हैं .साथ में हेंड सेनेताइज़र भी .एक्सक्रीटा आप यहीं ठिकाने लगा सकतें हैं . यहाँ कोलोनी क्या प्रशांत के लम्बे तटों के साथ भी जगह जगह आपको अस्थाई रेस्ट रूम मिलेंगे .सब कुछ जनता के पैसे से चलता है .चंदा छोड़ सकतें हैं यहाँ आप स्वेच्छा से एक डॉलर दो डॉलर साफ़ सफाई के लिए इन अस्थाई रेस्ट रूम्स की . कहीं कोई सिगरेट का रेपर नहीं .खाली सोडा केन्स नहीं ,खाद्य सामिग्री के हवा में उड़ते रेपर नहीं ,जो तेज़ हवा तूफ़ान में उड़के आपके घर तक आ जाएँ . वो गौरैया जो आज हिन्दुस्तान से लापता हैं यहाँ घर घर हैं .उनके लिए पेड़ों से लटकते ख़ास लकड़ी के बने खूब -सूरत घरोंदें हैं ,दाना है साफ़ पानी है . कोठी के बाहर फूलों की क्यारियाँ हैं .क्यारियों में पशु पक्षियों के बड़े जीवंत मोडिल्स हैं कहीं कच्छप कहीं स्वान .कहीं लोमड़ी और कहीं हिरन .पास जाकर ही पता चलता है यह मिटटी के हैं .क्योंकि एक जीवंत परिवेश का एक खूबसूरत आशियाने का यह हिस्सा बने होते हैं . अमरीकी जानतें हैं जिस दिन उनका पर्यावरण नष्ट हो गया ,पारितंत्र टूट गए ,ये इन पारितंत्रों के पहरुवे ये भंवरे ,ये तितलियाँ ,ये चिड़िया ,ये गौरैया सब भाग खड़े होंगे .इसलिए वह इसे पूरे मनोयोग से एक तपोवन बनाए रहतें हैं .गन्दगी फैलाने के शौक़ीन नहीं है ये गोरे . वह जानते हैं एनर्जी भी अब अपने मूल रूप में नहीं है उत्सर्जन का सबब बनी हुई है इसीलिए यहाँ री -साइक्लिंग ज्यादा है .लघभग हर चीज़ की री -साइकिलिंग है . कुत्ता मूलतया पर्यावरण के मूल कारक तत्वों में फूल ,तितली ,वृक्ष ,वनस्पति की तरह कभी नहीं था ,इन्होनें उसे भी इस तंत्र का जीता जागता हिस्सा बना लिया . मिलन सारिता का ज़रिया बन गया कुत्ता .हम कई लोगों को यहाँ उनके कुत्तों की मार्फ़त ही जानतें हैं .उसका पूरा चारित्रिक परिचय करवाया जाता है यहाँ .उसकी उम्र सेक्स स्वभाव ,नस्ल ,प्रेम और संवेदना का पूरा ब्योरा मिलेगा आपको गोरों की मार्फ़त और गोरे मिलेंगे आपको कुत्तों की मार्फ़त .



अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण 

Home is where My dog  is.

रोज़ शाम को घूमने के लिए निकल जाता हूँ .दिन भर ब्लोगिंग ,बच्चों के स्कूल का अवकाश चल रहा है यहाँ स्कूल सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुन :खुलेंगे  सो बीच -बीच में दो नातियों की देखभाल और शाम को लम्बी सैर .सितम्बर ४ से स्कूल खुल जायेगें .फिर मेरा भी रूटीन बदलेगा .फिल- वक्त तो यही दैनिकी है .

यहाँ सड़कों के साथ -साथ  क्या सभी डिवीजनस  के अंदर भी चाहे सिल्वरवुड हो या आयरनवुड ,प्रोक्टर हो या वुड ब्रिज साफ़ सुथरे पैदल मार्ग हैं .गोरों से भेंट होती है .उनके तमाम स्वानों को मैं पहचानने लगा हूँ .बिलकुल औलाद सा प्यार देतें हैं यह स्वानों को .सम्बोधन भी संतानों सा .पूछो तो जरा नजदीक आने पर -उनके किसी स्वान के बारे में :इज ही मीन ज़वाब मिलेगा नो शी इज फ्रेंडली .ही इज वेरी सोफ्ट .

आपके चारों तरफ क्या है ?जो कुछ भी है वह आपका पर्यावरण है .स्वान इनके परिवेश का एक बहुत अच्छा साथी है .जिस तपोवन की हम कामना करतें हैं अमरीकियों ने उसे अपने आसपास उतारा हुआ है .बेहद की सफाई है यहाँ हरेक डिविज़न में .लांस में घास की नियमित कटाई होती है .कहीं कोई खरपतवार नहीं .इसी तपोवन का हिस्सा है स्वान जो संकट में  इनकी आत्म रक्षा का साधन भी बनता है .अगर इनका बस चले तो यह कुत्ता छोड़ शेर भी पाल लें.साधनों और रखरखाव की  यहाँ कोई कमी नहीं है .और सलीका ?उसमें ये अग्रणी हैं .तहज़ीब के सिरमौर .नजरे मिलने की देर है आपसे गरम जोशी से कहेंगे दूर से भी -हाउ यू डूइंन.आप कनेक्ट होते हैं इनसे .बाहर सैर को निकलें हैं तो आप निस्संग नहीं रहेंगे . 

यहाँ स्वच्छ हवा है ,खिली हुई सीधी तेज़ धूप भी है क्योंकि पर्यावरण  स्वच्छ है .मिटटी में यहाँ गंध है हवा में खुशबू है .हमने अपने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है .स्वच्छ गंध को हम तरसतें हैं .पर्यावरण यहाँ इनके जीवन का जीवंत हिस्सा है .हमारे यहाँ तो महानगर भी गंधाते हैं मूल भूत सुविधाएं नहीं है जो स्वप्न नगरी बोम्बे (स्सारी मुंबई )कभी लुभाती  थी वहीँ रह्ताहूँ .चौपाटी क्या तमाम बाकी बीच भी एक ही तरह से गन्दगी का साम्राज्य उठाए हैं कोई कम कोई ज्यादा .

ये लोग जब अपने स्वानों को संग लिए बाहर लम्बी सैर को निकलतें हैं इनके हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ होतीं हैं कुछ के पास संडासी भी होती है स्वान बिष्टा (डॉग एक्स -क्रीटा) को समेटने के लिए .फुटपाथ गंदा नहीं करते करवाते हैं यह अपनी औलादों से .स्वानों से .बिष्टा समेट के साथ चलते हैं .घर लाके उसे डस्ट/वेस्टबिन के हवाले करतें हैं .सैन होज़े(केलिफोर्निया राज्य का वह स्थान जो सिलिकोन वैली कहाता है ) में हमने देखा फुटपाथ के साथ ही किसी लकड़ी के खम्बे से बक्से लटके रहतें हैं .साथ में हेंड सेनेताइज़र  भी .एक्सक्रीटा आप यहीं ठिकाने लगा सकतें हैं .

यहाँ कोलोनी क्या प्रशांत के लम्बे तटों के साथ भी जगह जगह आपको अस्थाई रेस्ट रूम मिलेंगे .सब  कुछ जनता के पैसे से चलता है .चंदा छोड़ सकतें हैं यहाँ आप स्वेच्छा से एक डॉलर दो डॉलर साफ़ सफाई के लिए इन अस्थाई रेस्ट रूम्स की .

कहीं कोई सिगरेट का रेपर नहीं .खाली सोडा केन्स  नहीं ,खाद्य सामिग्री के हवा में उड़ते रेपर नहीं ,जो तेज़ हवा तूफ़ान  में उड़के आपके घर तक आ जाएँ .

वो गौरैया जो आज हिन्दुस्तान से लापता हैं यहाँ घर घर हैं .उनके लिए पेड़ों से लटकते ख़ास लकड़ी के बने खूब -सूरत घरोंदें हैं ,दाना है साफ़ पानी है .

कोठी के बाहर फूलों की क्यारियाँ हैं .क्यारियों में पशु पक्षियों के बड़े जीवंत मोडिल्स हैं कहीं कच्छप कहीं स्वान .कहीं लोमड़ी और कहीं हिरन .पास जाकर ही पता चलता है यह मिटटी के हैं .क्योंकि एक जीवंत परिवेश का एक खूबसूरत आशियाने का यह हिस्सा बने होते हैं .

अमरीकी जानतें हैं जिस दिन उनका पर्यावरण नष्ट हो गया ,पारितंत्र टूट गए ,ये इन पारितंत्रों के पहरुवे ये भंवरे ,ये तितलियाँ ,ये चिड़िया ,ये गौरैया सब भाग खड़े होंगे .इसलिए वह इसे पूरे मनोयोग से एक तपोवन बनाए रहतें हैं .गन्दगी फैलाने के शौक़ीन नहीं है ये गोरे .

वह जानते हैं एनर्जी भी अब अपने मूल रूप में नहीं है उत्सर्जन का सबब बनी हुई है इसीलिए यहाँ री -साइक्लिंग ज्यादा है .लघभग हर चीज़ की री -साइकिलिंग है .

कुत्ता मूलतया पर्यावरण के मूल कारक तत्वों में फूल ,तितली ,वृक्ष ,वनस्पति  की  तरह कभी  नहीं था ,इन्होनें उसे भी इस तंत्र का  जीता जागता हिस्सा बना लिया .

मिलन सारिता का ज़रिया बन गया कुत्ता .हम कई लोगों को यहाँ उनके कुत्तों की मार्फ़त ही जानतें हैं .उसका पूरा चारित्रिक परिचय करवाया जाता है यहाँ .उसकी उम्र सेक्स स्वभाव ,नस्ल ,प्रेम और संवेदना का पूरा ब्योरा मिलेगा आपको गोरों की मार्फ़त और गोरे मिलेंगे आपको कुत्तों की मार्फ़त .



Home is where My dog  is.

रोज़ शाम को घूमने के लिए निकल जाता हूँ .दिन भर ब्लोगिंग ,बच्चों के स्कूल का अवकाश चल रहा है यहाँ स्कूल सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुन :खुलेंगे  सो बीच -बीच में दो नातियों की देखभाल और शाम को लम्बी सैर .सितम्बर ४ से स्कूल खुल जायेगें .फिर मेरा भी रूटीन बदलेगा .फिल- वक्त तो यही दैनिकी है .

यहाँ सड़कों के साथ -साथ  क्या सभी डिवीजनस  के अंदर भी चाहे सिल्वरवुड हो या आयरनवुड ,प्रोक्टर हो या वुड ब्रिज साफ़ सुथरे पैदल मार्ग हैं .गोरों से भेंट होती है .उनके तमाम स्वानों को मैं पहचानने लगा हूँ .बिलकुल औलाद सा प्यार देतें हैं यह स्वानों को .सम्बोधन भी संतानों सा .पूछो तो जरा नजदीक आने पर -उनके किसी स्वान के बारे में :इज ही मीन ज़वाब मिलेगा नो शी इज फ्रेंडली .ही इज वेरी सोफ्ट .

आपके चारों तरफ क्या है ?जो कुछ भी है वह आपका पर्यावरण है .स्वान इनके परिवेश का एक बहुत अच्छा साथी है .जिस तपोवन की हम कामना करतें हैं अमरीकियों ने उसे अपने आसपास उतारा हुआ है .बेहद की सफाई है यहाँ हरेक डिविज़न में .लांस में घास की नियमित कटाई होती है .कहीं कोई खरपतवार नहीं .इसी तपोवन का हिस्सा है स्वान जो संकट में  इनकी आत्म रक्षा का साधन भी बनता है .अगर इनका बस चले तो यह कुत्ता छोड़ शेर भी पाल लें.साधनों और रखरखाव की  यहाँ कोई कमी नहीं है .और सलीका ?उसमें ये अग्रणी हैं .तहज़ीब के सिरमौर .नजरे मिलने की देर है आपसे गरम जोशी से कहेंगे दूर से भी -हाउ यू डूइंन.आप कनेक्ट होते हैं इनसे .बाहर सैर को निकलें हैं तो आप निस्संग नहीं रहेंगे . 

यहाँ स्वच्छ हवा है ,खिली हुई सीधी तेज़ धूप भी है क्योंकि पर्यावरण  स्वच्छ है .मिटटी में यहाँ गंध है हवा में खुशबू है .हमने अपने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है .स्वच्छ गंध को हम तरसतें हैं .पर्यावरण यहाँ इनके जीवन का जीवंत हिस्सा है .हमारे यहाँ तो महानगर भी गंधाते हैं मूल भूत सुविधाएं नहीं है जो स्वप्न नगरी बोम्बे (स्सारी मुंबई )कभी लुभाती  थी वहीँ रह्ताहूँ .चौपाटी क्या तमाम बाकी बीच भी एक ही तरह से गन्दगी का साम्राज्य उठाए हैं कोई कम कोई ज्यादा .

ये लोग जब अपने स्वानों को संग लिए बाहर लम्बी सैर को निकलतें हैं इनके हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ होतीं हैं कुछ के पास संडासी भी होती है स्वान बिष्टा (डॉग एक्स -क्रीटा) को समेटने के लिए .फुटपाथ गंदा नहीं करते करवाते हैं यह अपनी औलादों से .स्वानों से .बिष्टा समेट के साथ चलते हैं .घर लाके उसे डस्ट/वेस्टबिन के हवाले करतें हैं .सैन होज़े(केलिफोर्निया राज्य का वह स्थान जो सिलिकोन वैली कहाता है ) में हमने देखा फुटपाथ के साथ ही किसी लकड़ी के खम्बे से बक्से लटके रहतें हैं .साथ में हेंड सेनेताइज़र  भी .एक्सक्रीटा आप यहीं ठिकाने लगा सकतें हैं .

यहाँ कोलोनी क्या प्रशांत के लम्बे तटों के साथ भी जगह जगह आपको अस्थाई रेस्ट रूम मिलेंगे .सब  कुछ जनता के पैसे से चलता है .चंदा छोड़ सकतें हैं यहाँ आप स्वेच्छा से एक डॉलर दो डॉलर साफ़ सफाई के लिए इन अस्थाई रेस्ट रूम्स की .

कहीं कोई सिगरेट का रेपर नहीं .खाली सोडा केन्स  नहीं ,खाद्य सामिग्री के हवा में उड़ते रेपर नहीं ,जो तेज़ हवा तूफ़ान  में उड़के आपके घर तक आ जाएँ .

वो गौरैया जो आज हिन्दुस्तान से लापता हैं यहाँ घर घर हैं .उनके लिए पेड़ों से लटकते ख़ास लकड़ी के बने खूब -सूरत घरोंदें हैं ,दाना है साफ़ पानी है .

कोठी के बाहर फूलों की क्यारियाँ हैं .क्यारियों में पशु पक्षियों के बड़े जीवंत मोडिल्स हैं कहीं कच्छप कहीं स्वान .कहीं लोमड़ी और कहीं हिरन .पास जाकर ही पता चलता है यह मिटटी के हैं .क्योंकि एक जीवंत परिवेश का एक खूबसूरत आशियाने का यह हिस्सा बने होते हैं .

अमरीकी जानतें हैं जिस दिन उनका पर्यावरण नष्ट हो गया ,पारितंत्र टूट गए ,ये इन पारितंत्रों के पहरुवे ये भंवरे ,ये तितलियाँ ,ये चिड़िया ,ये गौरैया सब भाग खड़े होंगे .इसलिए वह इसे पूरे मनोयोग से एक तपोवन बनाए रहतें हैं .गन्दगी फैलाने के शौक़ीन नहीं है ये गोरे .

वह जानते हैं एनर्जी भी अब अपने मूल रूप में नहीं है उत्सर्जन का सबब बनी हुई है इसीलिए यहाँ री -साइक्लिंग ज्यादा है .लघभग हर चीज़ की री -साइकिलिंग है .

कुत्ता मूलतया पर्यावरण के मूल कारक तत्वों में फूल ,तितली ,वृक्ष ,वनस्पति  की  तरह कभी  नहीं था ,इन्होनें उसे भी इस तंत्र का  जीता जागता हिस्सा बना लिया .

मिलन सारिता का ज़रिया बन गया कुत्ता .हम कई लोगों को यहाँ उनके कुत्तों की मार्फ़त ही जानतें हैं .उसका पूरा चारित्रिक परिचय करवाया जाता है यहाँ .उसकी उम्र सेक्स स्वभाव ,नस्ल ,प्रेम और संवेदना का पूरा ब्योरा मिलेगा आपको गोरों की मार्फ़त और गोरे मिलेंगे आपको कुत्तों की मार्फ़त .




अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण

अमरीकियों का स्वान प्रेम और पर्यावरण 

Home is where My dog  is.

रोज़ शाम को घूमने के लिए निकल जाता हूँ .दिन भर ब्लोगिंग ,बच्चों के स्कूल का अवकाश चल रहा है यहाँ स्कूल सितम्बर के प्रथम सप्ताह में पुन :खुलेंगे  सो बीच -बीच में दो नातियों की देखभाल और शाम को लम्बी सैर .सितम्बर ४ से स्कूल खुल जायेगें .फिर मेरा भी रूटीन बदलेगा .फिल- वक्त तो यही दैनिकी है .

यहाँ सड़कों के साथ -साथ  क्या सभी डिवीजनस  के अंदर भी चाहे सिल्वरवुड हो या आयरनवुड ,प्रोक्टर हो या वुड ब्रिज साफ़ सुथरे पैदल मार्ग हैं .गोरों से भेंट होती है .उनके तमाम स्वानों को मैं पहचानने लगा हूँ .बिलकुल औलाद सा प्यार देतें हैं यह स्वानों को .सम्बोधन भी संतानों सा .पूछो तो जरा नजदीक आने पर -उनके किसी स्वान के बारे में :इज ही मीन ज़वाब मिलेगा नो शी इज फ्रेंडली .ही इज वेरी सोफ्ट .

आपके चारों तरफ क्या है ?जो कुछ भी है वह आपका पर्यावरण है .स्वान इनके परिवेश का एक बहुत अच्छा साथी है .जिस तपोवन की हम कामना करतें हैं अमरीकियों ने उसे अपने आसपास उतारा हुआ है .बेहद की सफाई है यहाँ हरेक डिविज़न में .लांस में घास की नियमित कटाई होती है .कहीं कोई खरपतवार नहीं .इसी तपोवन का हिस्सा है स्वान जो संकट में  इनकी आत्म रक्षा का साधन भी बनता है .अगर इनका बस चले तो यह कुत्ता छोड़ शेर भी पाल लें.साधनों और रखरखाव की  यहाँ कोई कमी नहीं है .और सलीका ?उसमें ये अग्रणी हैं .तहज़ीब के सिरमौर .नजरे मिलने की देर है आपसे गरम जोशी से कहेंगे दूर से भी -हाउ यू डूइंन.आप कनेक्ट होते हैं इनसे .बाहर सैर को निकलें हैं तो आप निस्संग नहीं रहेंगे . 

यहाँ स्वच्छ हवा है ,खिली हुई सीधी तेज़ धूप भी है क्योंकि पर्यावरण  स्वच्छ है .मिटटी में यहाँ गंध है हवा में खुशबू है .हमने अपने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है .स्वच्छ गंध को हम तरसतें हैं .पर्यावरण यहाँ इनके जीवन का जीवंत हिस्सा है .हमारे यहाँ तो महानगर भी गंधाते हैं मूल भूत सुविधाएं नहीं है जो स्वप्न नगरी बोम्बे (स्सारी मुंबई )कभी लुभाती  थी वहीँ रह्ताहूँ .चौपाटी क्या तमाम बाकी बीच भी एक ही तरह से गन्दगी का साम्राज्य उठाए हैं कोई कम कोई ज्यादा .

ये लोग जब अपने स्वानों को संग लिए बाहर लम्बी सैर को निकलतें हैं इनके हाथ में प्लास्टिक की थैलियाँ होतीं हैं कुछ के पास संडासी भी होती है स्वान बिष्टा (डॉग एक्स -क्रीटा) को समेटने के लिए .फुटपाथ गंदा नहीं करते करवाते हैं यह अपनी औलादों से .स्वानों से .बिष्टा समेट के साथ चलते हैं .घर लाके उसे डस्ट/वेस्टबिन के हवाले करतें हैं .सैन होज़े(केलिफोर्निया राज्य का वह स्थान जो सिलिकोन वैली कहाता है ) में हमने देखा फुटपाथ के साथ ही किसी लकड़ी के खम्बे से बक्से लटके रहतें हैं .साथ में हेंड सेनेताइज़र  भी .एक्सक्रीटा आप यहीं ठिकाने लगा सकतें हैं .

यहाँ कोलोनी क्या प्रशांत के लम्बे तटों के साथ भी जगह जगह आपको अस्थाई रेस्ट रूम मिलेंगे .सब  कुछ जनता के पैसे से चलता है .चंदा छोड़ सकतें हैं यहाँ आप स्वेच्छा से एक डॉलर दो डॉलर साफ़ सफाई के लिए इन अस्थाई रेस्ट रूम्स की .

कहीं कोई सिगरेट का रेपर नहीं .खाली सोडा केन्स  नहीं ,खाद्य सामिग्री के हवा में उड़ते रेपर नहीं ,जो तेज़ हवा तूफ़ान  में उड़के आपके घर तक आ जाएँ .

वो गौरैया जो आज हिन्दुस्तान से लापता हैं यहाँ घर घर हैं .उनके लिए पेड़ों से लटकते ख़ास लकड़ी के बने खूब -सूरत घरोंदें हैं ,दाना है साफ़ पानी है .

कोठी के बाहर फूलों की क्यारियाँ हैं .क्यारियों में पशु पक्षियों के बड़े जीवंत मोडिल्स हैं कहीं कच्छप कहीं स्वान .कहीं लोमड़ी और कहीं हिरन .पास जाकर ही पता चलता है यह मिटटी के हैं .क्योंकि एक जीवंत परिवेश का एक खूबसूरत आशियाने का यह हिस्सा बने होते हैं .

अमरीकी जानतें हैं जिस दिन उनका पर्यावरण नष्ट हो गया ,पारितंत्र टूट गए ,ये इन पारितंत्रों के पहरुवे ये भंवरे ,ये तितलियाँ ,ये चिड़िया ,ये गौरैया सब भाग खड़े होंगे .इसलिए वह इसे पूरे मनोयोग से एक तपोवन बनाए रहतें हैं .गन्दगी फैलाने के शौक़ीन नहीं है ये गोरे .

वह जानते हैं एनर्जी भी अब अपने मूल रूप में नहीं है उत्सर्जन का सबब बनी हुई है इसीलिए यहाँ री -साइक्लिंग ज्यादा है .लघभग हर चीज़ की री -साइकिलिंग है .

कुत्ता मूलतया पर्यावरण के मूल कारक तत्वों में फूल ,तितली ,वृक्ष ,वनस्पति  की  तरह कभी  नहीं था ,इन्होनें उसे भी इस तंत्र का  जीता जागता हिस्सा बना लिया .

मिलन सारिता का ज़रिया बन गया कुत्ता .हम कई लोगों को यहाँ उनके कुत्तों की मार्फ़त ही जानतें हैं .उसका पूरा चारित्रिक परिचय करवाया जाता है यहाँ .उसकी उम्र सेक्स स्वभाव ,नस्ल ,प्रेम और संवेदना का पूरा ब्योरा मिलेगा आपको गोरों की मार्फ़त और गोरे मिलेंगे आपको कुत्तों की मार्फ़त .