रविवार, 4 अप्रैल 2021

अपने देश में जब देश की सबसे पुरानी पार्टी नेहरुवियन अवशेषी कांग्रेस विपक्ष में बैठने लायक भी बहुमत नहीं जुटा पा रही है तब हताशा में राहुल जिन्हें भारतीय राजनीति का राहु समझा जाता है अब ऊल जुलूल बातें विदेशी भूतपूर्व राजनयिकों और प्रोफेसर्स के साथ वेबिनार पर कर रहें हैं

मतिमंद से वेबिनारिअन बने राहुल गांधी शाखा मृग की तरह कूद रहे हैं
मतिमंद से वेबिनारिअन बने राहुल गांधी शाखा मृग की तरह कूद रहे हैं। भयमारा भयभीत ये बिगड़ा शख्स अपनी माँ की शह पर अपने आचरण से उन कांग्रेसियों को शर्मसार कर रहा है जिन्होनें इस पार्टी और देश की पूर्ण निष्ठा के साथ सेवा की है। इसके कान में इसकी महतारी ने ये मंत्र फूंक दिया है तू प्रधानमन्त्री बनेगा इससे कम कुछ नहीं। बेहूदगी से भरा ये इकयावन साला प्रौढ़ जिसकी मानसिक उम्र बामुश्किल आठ दस साल होगी उस अमरीका से भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाज़ी की पेशकश कर रहा है जिसने हाल फिलहाल बाइडन प्रशासन के सौजन्य से ही ३७० के बाद के जम्मू -काश्मीर- लद्दाख- लेह क्षेत्र की भूरी -भूरी प्रशंशा की है वहां लोकतंत्र बहाली की ,लोगों के सामान्य अधिकार बहाली की खुशहाली की।
अपने देश में जब देश की सबसे पुरानी पार्टी नेहरुवियन अवशेषी कांग्रेस विपक्ष में बैठने लायक भी बहुमत नहीं जुटा पा रही है तब हताशा में राहुल जिन्हें भारतीय राजनीति का राहु समझा जाता है अब ऊल जुलूल बातें विदेशी भूतपूर्व राजनयिकों और प्रोफेसर्स के साथ वेबिनार पर कर रहें हैं। भारत में तो कोई चैनल इन्हें समय देकर अपनी टीआरपी बिगाड़ना नहीं चाहता इसीलिए ये अब वेबिनार प्रायोजकों की छवि निखार रहें हैं ,ये कैसे और क्यों सांसद हैं लोकसभा के जिन्हें भारत में लोकतंत्र दिखलाई नहीं देता। पूछा यह भी जा सकता है असम तमिलनाडु केरल में ये कौन से प्रजातंत्र के लिए किसके लिए वोट मांग रहें हैं। जिस डाल बैठा है ये शाखा मृग उसे ही तोड़ रहा है काट रहा है आज़मा रहा है। लानत है उस कोख पर उस संकर बीज पर जिसका यह प्रतिफल है।
आँख में मोतिया -बिन्द है काला (ग्लूकोमा )तो अविलम्ब लेज़र ट्रीटमेंट लेवें। पांच मिनिट में बीनाई ठीक हो जाएगी।अलबत्ता इनके बिगड़े हुए दिमाग का इलाज़ लेज़र से भी नहीं होगा।
न्यूरोलेप्टिक एवं साइकिएट्रिक दवाएं भी बे -असर साबित होंगी।बाइपोलर -इलनेस की मेनिआक फेज़ में पहुँच चुकें हैं राहु। इन्हें लगता है अगले मोदी यही हैं।
कृपया ये लिंक ज़रूर देखें : https://www.youtube.com/watch?v=1XSLLiqtCvY
Virendra Sharma
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    मतिमंद से वेबिनारिअन बने राहुल गांधी शाखा मृग की तरह कूद रहे हैं। भयमारा भयभीत ये बिगड़ा शख्स अपनी माँ की शह पर अपने आचरण से उन कांग्रेसियों को शर्मसार कर रहा है जिन्होनें इस पार्टी और दे… 
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शनिवार, 3 अप्रैल 2021

सुरूरे-शब की नहीं सुबह का खुमार हूँ मैं, ~ निकल चुकी है जो गुलशन से वह बहार हूँ मैं।

एकै साधे सब सधे, सब साधे सब जाय


साम दाम दंड भेद का इस्तेमाल करते हुए बेगम ममता ने बंगाल के सभी वर्गों को अपने तरीके से हांकने का प्रयास किया। नतीजा हम सबके सामने हैं आज ये भ्रांत धारणाओं से ग्रस्त राजनीति की धंधेबाज़ को बूथों पर पहुँच कर मतदाताओं को धमकाना डराना पड़ रहा है। 

अब पछताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत

बेगम वक्त रहते सभी वर्गों आस्था के लोगों का आदर करतीं सही फैसले लेती दुर्गा पूजा पर मुहर्रम पर तरजीह न देती तो ये दिन न देखना पड़ता। 

दुविधा में दोनों गये माया मिली न राम।

तीस फीसद मुस्लिम भाई बहनों के बूते बेगम  ने दस साला खेला खेला आखिर में खेला ही श्रृद्धा - विहीन धर्मच्युत बेगम को मार गया। 

अब मंदिर मंदिर चंडी पाठ करत फिरत हैं ,शांडिल्य गोत्री होने की कसमें खावें हैं पूर्व में एक शहज़ादे का जनेऊ भी खूब प्रदर्शन में आया था -नतीजा क्या हुआ हम सबको मालूम है। बेगम ममता के साथ इससे अलग और हो भी क्या सकता था नंदीग्राम ही नहीं अन्यत्र भी तृण मूल कांग्रेस हार रही है। 

जिसके बीच में रात उसकी क्या बात अब दो मई दूर नहीं।

सुरूरे-शब की नहीं सुबह का खुमार हूँ मैं,
~
निकल चुकी है जो गुलशन से वह बहार हूँ मैं।

1.सुरूरे-शब-; रात का चढ़ता हुआ नशा


बेगम समझ सब गईं हैं नशा -ए -सत्ता टूट रहा है फिर भी ज़िद पे कायम हैं। बाज़ी हाथ से निकल चुकी है। 


बेगम ममता :ना खुदा ही मिला ना विसाले सनम, ना इधर के रहे ना उधर के
आज पश्चिम बंगाल में सिंगुर की तबाह जनता रो रो कर यही कह रही हैं "ना खुदा ही मिला ना विसाले सनम ना इधर के रहे ना उधर के" I ममता बनर्जी ने अपनी राजनीती के चक्कर में यहाँ के सारे लोगो को तबाह और बर्बाद कर दिया और आज लोग खाने के लाले पड़े हैं I बड़े बुजुर्ग बड़ी बड़ी लाइनों में घंटो खड़े रहे हैं 1-2 किलो चावल के लिए अपनी जमील लुटा कर I

अपने १०  साल के कुशाशन में ममता जी ने आज तक एक भी कारखाना नहीं खोल पाया तो रोजगार कहा से देगी I ऐसे में युवा बेकार हो कर दर दर भटक रहे हैं I कोई काम ना होने के कारण चंद रुपयों के लिए आज TMC पार्टी का झंडा ढोने को मजबूर हैं I

ख़ुदा ही मिला विसाल-ए-सनम इधर के हुए उधर के हुए

रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम इधर के हुए उधर के हुए (अज्ञात )