डिमेंशिया (सिनाइल डिमेंशिया ,बुढापे का एक ऐसा रोग जिसमे बौद्धिक क्षमता ,ठीक ठीक सोच पाने की क्षमता लगातार छीजती चली जाती है ,याददाश्त कम होन लगती है लेकिन दिमाग के और काम यथा मोटर एक्शन (अंग संचालन का काम ,एन्द्रिक कार्य ,सेंसिज़ )निष्प्रभावित रहे आतें हैं .व्यवहार करने की क्षमता भी असर ग्रस्त हो जाती है इस गंभीर किस्म के मानसिक विकार में .मस्तिष्क रोग या आघात स उत्पन्न यह मानसिक समस्या रोजाना अखरोट के सेवन स मुल्तवी रखी जा सकती है ।
ईटिंग वालनट्स एवरी दे कीप्स डिमेंशिया अवे (दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,जुलाई १३ ,२०१० )।
न्यू योर्क स्टेट इन्स्तित्युत की रिसर्चर भारतीय मूल की डॉ .आभा चौहान ने अपने एक अध्धय्यन में बतलाया है -अखरोट का नियमित सेवन बौद्धिक क्षमताओं में इजाफा कर व्यक्ति को कुशाग्र बनाता है ।
यह सारा कमाल अखरोट में मौजूद विटामिन -ई और फ़्लवोनोइद्स का है जो फ्री रेडिकल्स की नुकसानी को कम करता है .डिमेंशिया की एक वजह यही फ्री -रेडिकल्स बनतें हैं ,अखरोट इन्हें ठिकाने लगा सकता है .
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें