मंगलवार, 2 जून 2009

दिवालिया होने का मतलब .....

जनरल मोटर्स ने अपने को दिवालिया घोषित कर दिया .अब इसके मुलाजिम सरकारी कंपनी जीएम के लिए काम करेंगें .लेकिन इसकी छाया इससे पैदा अवसाद ,उदासी जीएम तक सिमित नहीं रही है .इन दिनों जब की मैं सशरीर देत्रोइत (कैंटन टाऊन )मैं हूँ ,खिन्नता दूर तक महसूस की है अमरीकियों ने .मसलन ओमेक्स कंपनी का ज़िक्र करें ,ये एक क्वालिटी कंट्रोल यूनिट है ,यहाँ मेरी बेटी भी बतौर मेनेजर काम करती है ,उसने बतलाया ,"आज आफिस मैं सन्नाटा था ,मेर्री जो (क्वालिटी कंट्रोल कंसल्टेंट ) से जब मेरी बेटी ने पूछा:आज आफिस मैं सब चुप क्यों है ?ज़वाब मिला आज उतनी ही उदासी है जितनी तब थी जब अमरीकी रास्त्रपति को शूट किया गया था ,गोली मार दी गई थी ,जीएम का दर्द हम सब का है ,ये है अमरीकी ज़ज्बा ,दिवालिया एक होता है उदास सारा अमरीका .

सोमवार, 1 जून 2009

वाईट हाउस .



यहाँ सब कुछ कितना व्यवस्तित है ,जब भी ,जबकि ,गेट के बाहर श्रीलंकाई प्रदर्शन जारी है ,इरान से आया ग्रुप अपनी बारी की प्रतीक्षा में कुछ दुरी पर खडा है .पुलिस के मात्र २-३,आफिसर आराम से हैं .दर्शनीय इस्थल है अम्रीका का वाईट हाउस ,गेट के बाहर पिकनिक का सा माहोल है ?ये कैसी डेमोक्रेसी ,कैसी व्यवस्था है ?इधर आस्ट्रेलिया में vयवस्थित भारतीय प्रदर्शन कारियों पर पुलिस टूट रही है ,बेसाख्ता ,उधर पटना के निकट लालू स्टाप पर गाड़ी क्या नहीं रुकी ,ममता की रेल जलादी गई ,यहाँ पुलिस की रीढ़ (स्पाइन) नेताओं के पास रहती है .किसी को दंड नहीं ,खुला खेल फरुख्खा बादी.अलबत्ता राजधानी दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रधार्शन करते आप पार्लियामेन्ट स्ट्रीट पर रोक दिए जायेंगे .रास्त्रपति भवन के बाहर आप प्रदर्शन नहीं कर सकते .मुग़ल गार्डनमें केमरा क्या पानी की बोतल ,बच्चे का फीडर नहीं ले जा सकते .ये कैसी डेमोक्रेसी है ?है भी या नहीं .?यहाँ अलग अलग जगह पर इसकी अलग अलग किस्में मिलेंगी .सब को एक दुसरे का डर है ,कानून का नहीं हैं ,उससे क्या फर्क पड़ता है ?आम खास से और खास आम से डरता है .विअईपी सुरक्क्षा के और क्या मानी हैं ?सुरक्षा कवच लिए चलता है नेता ,आग लगा देती है जनता रेल को ,पब्लिक प्रोपर्टी को ,और क्या ?ये कैसी आज़ादी है ?लोकतंत्र है ?आप की समझ में आए तो हमें भी समझाएं ,बादी मेहरबानी होगी ,आपका ....आम आदमी .

ओ शहरे अलेक्सेन्ड्रिया .


जैसे जैसे शाम उतरती है ,इस प्राचीन शहर का गौरव ,परम्परागत जीवन मुखरित होने लगता है ,बस आप झील के किनारे ,नदी तीरे आजाइए फ़िर देखिये इस प्राचीन शहर की अंगडाई .शाम को अभी शबाव पर आने को वक्त था ,लेकिन गवैयों की टोली अधीर थी ,शिकारों से (मोटर बोटस) से ऑर्केस्ट्रा मुखरित होंने लगा था .किनारे पर वां इन ग्लास जलतरंग पर वो बुजुर्ग रुक रुक कर स्वर लहरियां बिखेर रहाथा .ओ अधेड़ भी बच्चों को झुनझुने बांटने लगा था ,यही रह चलते बच्चे उसके ऑर्केस्ट्रा का हिस्सा थे .धीरे धीरे उसका स्वर आरोही होने लगा .ड्रम और माउथओरगन की जुगलबंदी वो अकेला ही कर रहा था ,साथ मैं गा भी तो रहा था .उसकी आवाज़ मैं एक आवाहन था ,जो बच्चों को मस्ती के सागर मैं उडेल रहा था ,बच्चे स्वर ताल मैं झुन्जुने बजा रहे थे ,थिरक भी रहे थे ,ऐसा था उसका जादू .गुब्बारे वाले का अपना अलग सम्मोहन था ,वो तरह तरह की आकृतियों मेंगुब्बारे प्रस्तुत कर रहा था .उसकी आवाज़ में एक जादू था जो बच्चों को बाँध रहा था .दानपत्र उसके आगे रखा था :लिखा था ,माई लिविंग ,आपकी मर्जी जो डालें उस दान पात्र में .शहर की परिक्रमा काराने को फ्री -बस थी ,जोय राइड ,ड्राइवर तःजिबे याफ्ता.मेट्रो रेल थी ,टोलियाँ थी ,पॉप गायकों की ,फुटपाथ पर यहाँ वहाँ .और एक ज़िंदा शहर अपनी पुरी शान और बाण के साथ इठला रहा था ,गुन गुना ,गा रहा था ,में भी तो गूम सूम था :प्यार घड़ी भर का ही बहुत है ,सच्चा झूठा मत सोचा कर ,.......

शनिवार, 30 मई 2009

गुब्बारेवाला .


प्राचीन अलेक्सेन्ड्रिया शहर के नदीतट pअर वो गुब्बारे बेच रहा था .उसका अंदाज़ निराला था .जब कोई बच्चा माँ बाप के संग उसके पास आकर निहारता उसके चेहरे की आभा निखरती .वो तरीके से अंग्रेज़ी मैं बोलता ,विच शेप एनीमल यू वांट ?उत्तर सुनने पर वो गुब्बारा फुलाता एक पम्प से ,धागे से बांधता और पलक झपकते ही वो शक्ल हाज़िर .उसके पास एक दानपत्र था ,जिस पर लिखा था ,माई लिविंग ,आप जो भी उसमे डालें ,१-२ डालर ,डाइम क्वाटर उसका एक ही ज़वाब होता थेंक यू .दारिद्र्य,दयनीयता का भाव कहीं नहीं ,एक संतोष ,एक मुस्कराहट उसके चेहरे पर चस्पां थी .बचपन में गुब्बारे वाला हमारी गली में भी आता था ,पिपनी बजाता ,जिसके एक सिरे पर फुला हुआ गुब्बारा होता .कीमत एक आना ,निर्भाव होता उसका चेहरा ,कोई ख़रीदे तो ठीक न ख़रीदे तो ठीक ,कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत नहीं .आज भी उसकी हालत जस की तक है ,देश तब भी आजाद था आज भी है ,अलबत्ता अब उसका चेहरा पहले से ज्यादा उदास ज्यादा निर्भाव है ,कहीं कोई चमक कोई उमीद नहीं ,फ़िर न-उमीदी भी कैसी ?

गुरुवार, 7 मई 2009

आज फ़िर जीने की तमन्ना है .

हर्ष का विषय है अखिल भारतीय प्रशाशनिक सेवा ( आई ऐ एस )मेंमहिलायों का शीर्ष पर आना ,उससे भी ज्यादा खुशी इस बात पर है ,हिन्दी माध्यम ने झंडे गाढे ,दरसल भाषा की गुलामी हमारी चेतना पर बोझ है ,पूर्व प्रधान मंत्री नर्सिघ राव जी ने कहा था :कितनी अजीब बात है ,हिन्दी हमारी राष्ट्र भास्षा है ,फ़िर भी ,हिन्दी दिवस मानना ,मनाना पड़ता है ,घान्धी जी ने १५ अगस्त १९४७ को कहा था "मैं आज अंग्रेज़ी बोलनी भूल गया हूँ ,"मतलब साफ़ था :देश की आज़ादी भाषा की और भाषा की आज़ादी देश की सच्ची आज़ादी है .आज भी हिन्दी फॉण्ट की अल्प उपलब्धता साहित्य और साहित्य कार के बिच ही अवरोध बनी हुई है ,जबकि कंप्यूटर एक ज़रिया है ,आप के साहित्यिक अवधान को सँजोकर रखने का ,कंप्यूटर साक्षरता भी आदे आ रही है ,उमीद की किरण आई आई टी ,कानपूर ने पैदा की है ,नया हिन्दी सॉफ्टवेयर रचकर ,जो विज्ञानं को हिन्दी में उतारेगा.हिन्दी के प्रचार में बोलीवुड का अपना योगदान है .अब हिन्दी रोज़गार भी देगी ?उमीद पे दुनिया कायम है .आज फ़िर जीने की तमन्ना है .

बुधवार, 6 मई 2009

आज का भारत

मनमोहनजी की सरकार ने आज साम्प्रदायिकता को चरम पर पहुंचा दिया है .पहले सच्चर कमीशन बनाया ,फौज मैं मुसलमानों की गिनती करवाई ,राष्ट्रीय संसाधनों पर मुसलामानों का पहला हक़ बतलाया ,आस्ट्रेलिया मैं पकड़े गए एक आतंकी की याद मैं ,तदानुभुती दिखाते भोगते प्रधानमन्त्री तमाम रात सो नहिंपाये .अब और क्या चाहते हैं जब वरुण जैसे नौज़वानों पर रासुका लगने लगा है ,सिर्फ़ ये कहने पर "जो हिन्दुओं पर हाथ उठेगा मैं उसे तोड़ दूंगा "और देश कैसे टूटता है ,आप का हाथ किसके साथ है ?आम आदमी के या मुसलामानों के ,जो हो ,बहरहाल अपना हाथ बचा के रहना :वरुण आ जाएगा .

क्वात्रोकी को भारतरत्न

बकौल प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह भारतसरकार ने इस (क्वात्रोकी )शरीफ जादे को बहुत तंग किया है ,हाईकोर्ट विश्व मत से बड़ा नहीं होता ,माफ़ी मांगनी चाहिए हाई कोर्ट को और क्वात्रोकी को बतौर हर्जाना भारत रत्न मिलना चाहिए ,आख़िर राहुल -प्रियंका के मामा है क्वात्रोकी .मनमोहनजी हम तो आपके कायल हो गए ,भाई नेता हो तो ऐसा हो .