शुक्रवार, 20 मार्च 2009

राजनीतिक विरासत

जैसा हम बोयंगे वैसा ही काटेंगे .वरुण फिरोज़ गाँधी कुछ भी ग़लत नहीं कर रहे हैं .धूमकेतु की तरह राजनीती पे बरपा होना ही आज का चलन है.राज और बाल ठाकरो ने यही सिखाया है .आदमी आग खायेगा तो अंगारे ही हगे गा .हटे स्प्पीचेस हित हो रही हैं इसलिए उन का चलन है.राजनीती मैं आदर्श रोपने होंगे तभी वरुण मीठा बोलें गे .पहले तौलें गे फिर बोलें गे .

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009

नेतिकता का आर्थिक तराजू

सरकारों के टाइम टेबल से राष्ट्रीयता सिरे से नदारद है, यहाँ हर चीज़ अर्थ के तराजू पर तोली जाती है। उस विज्ञापन की तरह जिसमें एक मशहूर filmkaar (आमिर खान ) चंद विदेशी महिलाओं की सिर्फ़ इसलिए हिफासत करता है मवालियों से क्योंकि उनका दर्जा tourist revenue बढ़ाने वाला है इसलिए वह हमारी आदरणीय मेहमान हैं। क्या हमारी आधी से ज्यादा गरीब आबादी बहु प्रचारित आधी दुनिया इसीलिए सारे गावों शहरों की भोजाईं हैं ? मंग्लुरु की पब दुर्घटना के बारे में कल कोई मुख्या मंत्री यह भी कह सकता है के यह हमारे राजस्व का अहम् हिस्सा हैं और सर इसीलिए पब में शराब उडाने वाली युवतीओं की हिफाज़त करनी चाहिए। हमारी बदकिस्मती यहाँ नेतिकता के भी आर्थिक माइने हैं। भारतीय संस्कृति की तो सिर्फ़ आड़ ली जाती है।

गुरुवार, 1 जनवरी 2009

तलबगारों बराक ओबामा बनो :

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। where there is a will, there is a way. करत करत अभ्यास के jadmati होत सुजान। संकल्प में बड़ी शक्ति है, आप चाहें तो सिगरेट/बीड़ी की लत छोड़ सकते हे, भले विज्ञान यह कहता हो के सिगरेट के लतियों के रक्त में निकोटिन का स्तर जब एक न्यूनतम स्तर से नीचे गिरने लगता है tab उसे talab उठती है, यह भी की स्मोकर्स के दिमाग में एक न्यूरल सर्केट बन जाता है, जो एक memory trect की तरह काम करता है लेकिन बराक ओबामा की तरह संकल्प तो कर के देखो व्हाइट हाउस नो स्मोकिंग ज़ोन बन जायेगा, फिर न कैंसर का खतरा रहेगा, न दिल की बीमारी का, ना निकोटीन पैच की ज़रूरत पढेगी, न निकोटीन cheewing gum की।

बुधवार, 24 दिसंबर 2008

नंग बड़े परमेश्वर से

संरक्षणवादी राजनीति (patronage politics) के पक्षधरों से यदि वोट और देश में से किसी एक का चयन करने को कहा जाए तो यह जमूरे वोट को ही चुनेंगे। हिन्दुस्तान की अकेली विश्व नगरी मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए श्री हेमंत करकरे और पूर्व में जामिया नगर के बटला हाउस में शहीदे आज़म श्री मोहन चंद शर्मा पर अब्दुल रहमान अंतुले, दिग्विजय सिंह, अमर सिंह और उनके चेलों ने जिस प्रकार की बेशर्म सवालिया मिसाईलें दागी उस पर यही कहा जा सकता है : नंग बड़े परमेश्वर से। अल्पसंख्यक राजनीति के टुकड़ खोर जो करा दें सो कम फिर अंतुले तो अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री थे।

माननीय प्रधानमंत्रीजी यह आपके एक काबिना मंत्री की मानविय भूल नही थी, अगले लोक सभा चुनाव की अदबदा कर की गई पोसिशनिंग थी। इतनी बात तो कोई पप्पू भी समझ लेगा। एक अखबार ने अपने सम्पादकीय "एक जुटता ज़रूरी' में लिखा अंतुले साहब ने इससे आम जनता की नजर में कुछ खोया ही है। मान्यवर अल्पसंख्यक राजनीति को कौमी नुक्सान का इल्म ही कहाँ होता है / यदि यह मानविय भूल है तो ब्लंडर किसे कहते हैं, अब्सर्ड क्या होता है ? कृपया बतलायें।

दलित देवी की करतूतें

बहन मायावती के कारकुनों ने एक सरकारी engineer की हत्या कर के राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के सैनिकों को भी क्रूरता में पछाड़ दिया है। लगता है विधायक मनोज तिवारी मायावती फोबिया से ग्रस्त थे, बहनजी के जन्मदिन के लिए जबरी चंदा नही वसूलते तो ख़ुद मारे जाते। घड़ा एक दिन राज ठाकरे के पापों का भी भरेगा अभी तो उन्स्की चाची ही पहाड़ के नीचे से निकली है जो ख़ुद को बेदाग़, चैतन्य देव प्रतिमा बतलाती थी। हमारा मानना है राजनीतिक कार्यकर्ता भी अमर नही होता।

जाको राखे साईंयां

जाको राखे साईंयां मार सके ना कोय ... राजस्थान विधान सभा में एक सर्प विधायकों से तब तक छिपता छिपाता रहा जब तक सपेरों ने उसे भयमुक्त नही कर दिया, किसी विधायक को काट लेता तो बेचारा (सर्प) मारा जाता। खुदा का लाख लाख शुकराना। जाको राखे साईंयां ........

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

जूता फेक तमाशा देख


चैनल अल-बग्दारिया के एलेक्ट्रोनी पत्रकार मुन्तज़र अल ज़ैदी साहब बा-तमीज़ इंसान हैं जिनसे हमारे प्रतिनिधि बहुत कुछ सीख सकते हैं, जो सदन में जूता तो फेंकते हैं पर एक ही फेंकते हैं ताकि वह (जूता) किसी के काम ना आ सके। यूँ अल ज़ैदी साहब ने जो कुछ भी किया वह जन आक्रोश की अभ्व्यक्ति ही नही तदानुभूति भी थी। और इसी को पुख्ता करने के लिए ऑनलाइन जूता खेल भी चल पड़ा है जिसमें जो जितनी बार बुश को जूता मारने में सफल रहेगा उसे उतने ही पॉइंट्स मिलेंगे। भले ही अल ज़ैदी की हड्डी पसली तोड़ दी गई है लेकिन बुश का तो प्रतीक ही चल पड़ा है। जूतम पैजार मुहावरे से उठ कर बुश पर हावी है। खुदा खैर करे.......