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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

सेरिब्रल पाल्ज़ी में संभावित जटिलताएं क्या हैं ?

कोम्प्लिकेसंस :
सेरिब्रल पाल्ज़ी में - पेशियों की कमजोरी ,जकड़न,स्टिफनेस,तथा पेशीय समन्वयन का अभाव बालपन में अनेक समस्याओं ,जटिलताओं और पेचीले पन की वजह बन सकता है ।
(१)कों -ट्रेक -चर(गत पोस्टों में हम बतला चुकें हैं कों -ट्रेक -चर क्या है ):पेशीय ऊतक /ऊतकों का छोटा रह जाना है कों -ट्रेक -चर जिसकी वजह पेशियों की गंभीर जकड़न ,टाईट -निंग बनती है .यही कों -ट्रेक -चर अश्थी (हड्डी/हड्डियों )की सामान्य बढ़वार के भी आड़े आने लगता है .हड्डियां टेढ़ी मेढ़ी भी हो सकतीं हैं ,जोड़, बे -जोड़ बे -तरह विकृत या डिफोर्म हो सकतें हैं .दिस्लोकेशन या आंशिक खिसकाव ,दिस -ओरियेंटेसन ,विस्थापन भी जोड़ों में देखने को मिल सकता है ।
(२)कुपोषण :क्योंकि सेरिब्रल पाल्ज़ी से ग्रस्त कई नौनिहाल ठीक से सटक निगल भी नहीं पाते इसलिए इनके कुपोषित रह जाने की संभावना बनी ही रहती है .कुपोषण से लोकल इन्फेक्संस का ख़तरा बढ़ जाता है ।
(३)डिप्रेशन :समाज से एक तरफ कटके रह जाना अकसर अवसाद की वजह बन जाती है .अपनी अक्षमताओं के साथ तालमेल बिठा पाने की कूवत भी प्रोत्साहन न मिलने पर चुकने लगती है नतीजा होता है -अवसाद (डिप्रेशन )।
(४)प्री -मेच्युओर एजिंग :सेरिब्रल पाल्ज़ी से ग्रस्त व्यक्ति जवानी और प्रौढावस्था के रोगों और मेडिकल कंडीशंस से दो चार होता है .ऐसे में तन और मन पर दोनों दवाब बना रहता है .जो व्यक्ति को समय से पहले बुढापे की ओर ले जा सकता है .विकार ग्रस्त व्यक्ति के दिल ,फेफड़ों जैसे प्रमुख अंगों का विकास भी समुचित और सामान्य तौर पर नहीं हो पाता है ..प्रमुख अंग अपनी पूरी क्षमता से काम ही नहीं कर पातें हैं .
(५)पोस्ट इं -पे -यर -मेंट सिंड्रोम :दर्द ,कमजोरी बेहद की और निरंतर बनी रहने वाली थकान इसी स्थिति के लक्षण हैं .इसकी वजह वह दवाब बनता है जो सामान्य काम करने में भी ज्यादा ऊर्जा के खर्च होने से पैदा होता है क्योंकि व्यक्ति शारीरिक अक्षमता ही तो झेल रहा है ,हर छोटे से छोटे काम के लिए उसे ज्यादा परिश्रम और प्रयास करना पड़ता है ।
(६)ओस्टियो -आर्थ -राई-टिस :जोड़ों पर हर वक्त ज्यादा दवाब पड़ते रहना ,जोड़ों का एब -नोरमल एलाइन्मेन्त जो पेशियों की जकड़न से उपजता पनपता है अप -विकासी(डि -जेंरेटिव )पीड़ा दायक जोड़ों की बीमारी "ओस्टियो -आर्थ -राई -टिस की वजह बन जाता हैइस विकार में जिसे सेरिब्रल पाल्ज़ी कहा जाता है .
(ज़ारी...).

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